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Roadways: Uttarakhand : उत्तराखंड रोडवेज में सफर करने वाले यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। उत्तराखंड परिवहन निगम ने यात्रियों को किफायती यात्रा का लाभ देने के लिए नई रियायती योजना लागू करने का फैसला किया है। परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा ने बताया कि यह योजना 1 अगस्त से पूरे प्रदेश में लागू होगी।
नई व्यवस्था के तहत यदि यात्री एक साथ आने-जाने (रिटर्न) का टिकट बुक कराते हैं तो उन्हें किराए में 10 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी। वहीं, छह या उससे अधिक लोगों के समूह द्वारा एक साथ टिकट बुक कराने पर भी विशेष रियायत का लाभ दिया जाएगा। यह सुविधा ऑनलाइन टिकट बुकिंग के साथ-साथ रोडवेज बस अड्डों के टिकट काउंटरों पर भी उपलब्ध रहेगी।
परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार आम लोगों को बेहतर, सुरक्षित और सस्ती परिवहन सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उनका कहना है कि इस नई योजना से यात्रियों की यात्रा लागत कम होगी, जबकि रोडवेज बसों में यात्रियों की संख्या बढ़ने से परिवहन निगम की आय में भी वृद्धि होने की उम्मीद है। खासतौर पर पर्यटन और त्योहारों के मौसम में यह योजना यात्रियों के लिए अधिक लाभकारी साबित हो सकती है।

CommonwealthGames | RishikantSingh |Weightlifting : राष्ट्रमंडल खेलों की पुरुषों की 60 किलोग्राम भारोत्तोलन स्पर्धा में भारत के ऋषिकांत सिंह चानमबम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। वह स्वर्ण पदक के बेहद करीब पहुंचे…लेकिन क्लीन एंड जर्क के अंतिम दो प्रयासों में सफल नहीं हो सके।
मणिपुर के रहने वाले ऋषिकांत ने कुल 264 किलोग्राम वजन उठाकर दूसरा स्थान हासिल किया। उन्होंने स्नैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए 121 किलोग्राम वजन उठाया और प्रतियोगिता के रिकॉर्ड की बराबरी की। इसके बाद क्लीन एंड जर्क में उन्होंने पहले प्रयास में 143 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया।
क्लीन एंड जर्क में ऋषिकांत ने दूसरे प्रयास में 148 किलोग्राम और तीसरे प्रयास में 151 किलोग्राम वजन उठाने की कोशिश की…लेकिन दोनों प्रयास सफल नहीं रहे। इसी वजह से वह स्वर्ण पदक जीतने से चूक गए।
मलेशिया के मोहम्मद अनीक बिन कसदान ने कुल 273 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने क्लीन एंड जर्क में 152 किलोग्राम वजन उठाकर नया रिकॉर्ड भी बनाया। वहीं, केन्या के जोशुआ अमुंगा एमबोया ने कुल 260 किलोग्राम वजन के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया।
ऋषिकांत का यह पदक मौजूदा राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का पहला पदक है। भारोत्तोलन में भारत का प्रदर्शन पहले भी शानदार रहा है। वर्ष 2018 के गोल्ड कोस्ट और 2022 के बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने कई पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया था।

ExamReforms | NandanNilekani | NTA |PMModi : देश की प्रतियोगी परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा सुधारों के लिए एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की है। इस समिति की अध्यक्षता प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ और इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि करेंगे।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी अपने संदेश में कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। कई आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं, फास्ट-ट्रैक अदालतों में मामलों की सुनवाई हो रही है और परीक्षा संबंधी अपराधों पर सख्त कानून बनाने की दिशा में भी काम जारी है।
उन्होंने कहा कि केवल दोषियों पर कार्रवाई करना ही पर्याप्त नहीं है…बल्कि परीक्षा प्रणाली को भविष्य के लिए अधिक भरोसेमंद और पारदर्शी बनाना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में हाई-लेवल टास्क फोर्स बनाई गई है…जो परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधारों के लिए सुझाव देगी।
विशेषज्ञों की टीम तैयार करेगी सुधारों का रोडमैप
सरकार की ओर से गठित इस बहु-विषयक समिति में कई प्रमुख विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। इनमें इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ, पूर्व आईबी प्रमुख तपन डेका, आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटी, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अमृत लाल मीणा भी शामिल हैं। समिति परीक्षा प्रणाली में तकनीकी और ढांचागत सुधारों पर काम करेगी।
तकनीक से होगी परीक्षा व्यवस्था और मजबूत
सरकार का लक्ष्य परीक्षा प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक का अधिक उपयोग करना है। इसके तहत बायोमेट्रिक सत्यापन, डिजिटल सुरक्षा, कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली और अन्य तकनीकी उपायों को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा…ताकि पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं की संभावना को कम किया जा सके।
कौन हैं नंदन नीलेकणि?
नंदन नीलेकणि देश के प्रमुख उद्योगपतियों और तकनीकी विशेषज्ञों में गिने जाते हैं। वह इंफोसिस के सह-संस्थापक हैं और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के पहले अध्यक्ष रह चुके हैं। आधार परियोजना को लागू करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसके अलावा उन्होंने भारत सरकार की कई तकनीकी सलाहकार समितियों में भी अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं।

KargilVijayDiwas | PushkarSinghDhami | Uttarakhand : कारगिल विजय दिवस (शौर्य दिवस) के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गांधी पार्क स्थित शहीद स्मारक पहुंचकर कारगिल के अमर शहीदों को पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने शहीद परिवारों को सम्मानित किया और सैनिकों के कल्याण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।
परमवीर चक्र विजेताओं के लिए बड़ी घोषणा
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि परमवीर चक्र से सम्मानित वीरों को मिलने वाली अनुग्रह राशि 1.5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों और शहीद परिवारों के सम्मान और कल्याण के लिए लगातार काम कर रही है।
कारगिल के वीरों को किया नमन
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1999 के कारगिल युद्ध में भारतीय सेना ने बेहद कठिन परिस्थितियों में अद्भुत साहस और पराक्रम का परिचय देकर दुश्मन को करारा जवाब दिया। इस युद्ध में देश के 527 सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया…जिनमें उत्तराखंड के 75 वीर सपूत भी शामिल थे।
सैनिकों के लिए सरकार की योजनाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने शहीदों के आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दी है। इसके अलावा शहीद परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, बेटियों के विवाह में सहायता, वीरता पुरस्कार विजेताओं को रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा और पूर्व सैनिकों को संपत्ति खरीदने पर स्टाम्प शुल्क में छूट जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं।
सैन्य धाम और अग्निवीरों पर भी फोकस
उन्होंने कहा कि देहरादून के गुनियाल गांव में बन रहा सैन्य धाम अंतिम चरण में है….जो आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति और बलिदान की प्रेरणा देगा। साथ ही सेवामुक्त अग्निवीरों के लिए देश का पहला ‘अग्निवीर रोजगार सेल’ बनाया जा रहा है। पुलिस, वन विभाग और अन्य सरकारी सेवाओं में उन्हें प्राथमिकता देने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से कारगिल के वीर शहीदों के त्याग और राष्ट्रभक्ति से प्रेरणा लेकर विकसित और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

KargilVijayDiwas | IndianArmy | Almora | Hari Bahadur Ghale : कारगिल युद्ध में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिक हरी बहादुर घले की शहादत आज भी उनके परिवार के लिए गर्व और प्रेरणा का प्रतीक है। पिता के बलिदान के समय उनका बेटा कृष्णा केवल छह साल का था…लेकिन पिता की वीरता की कहानियां सुनते-सुनते उसके मन में भी देश सेवा का जज्बा जागा। आज वही बेटा भारतीय सेना की वर्दी पहनकर देश की सीमाओं की रक्षा कर रहा है।
पिता की शहादत बनी बेटे की प्रेरणा
मूल रूप से नेपाल निवासी और बाद में अल्मोड़ा के दुगालखोला में रहने वाले नायक हरी बहादुर घले ने कारगिल युद्ध के दौरान 6 जुलाई 1999 को देश की रक्षा करते हुए वीरगति प्राप्त की थी। उनके परिवार का कहना है कि हरी बहादुर हमेशा देश को सबसे ऊपर रखते थे। शहादत के बाद परिवार ने कठिन दौर देखा…लेकिन कभी हिम्मत नहीं हारी।
अब बेटा भी निभा रहा देश सेवा का दायित्व
हरी बहादुर घले के पुत्र कृष्णा ने बचपन में ही तय कर लिया था कि वह भी अपने पिता की तरह देश की सेवा करेंगे। वर्ष 2014 में वह कुमाऊं रेजीमेंट में भर्ती हुए और वर्तमान में मेघालय में तैनात होकर देश की रक्षा कर रहे हैं। कृष्णा का कहना है कि सेना की वर्दी उनके लिए केवल नौकरी नहीं….बल्कि पिता के बलिदान और सपनों का सम्मान है।
वीरांगना मां ने संभाली परिवार की जिम्मेदारी
शहीद की पत्नी सरस्वती माया घले ने कहा कि पति की शहादत के समय उनके तीनों बच्चे छोटे थे। बेटा केवल छह साल का था। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने बच्चों का पालन-पोषण किया और उनमें देशभक्ति की भावना जगाई। आज उनका बेटा भारतीय सेना में सेवा देकर पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहा है।
एक और बलिदानी परिवार की अधूरी मांग
कारगिल युद्ध में शहीद हुए अल्मोड़ा के लांस नायक हरीश सिंह देवड़ी के परिवार ने भी अपनी पीड़ा साझा की। उनकी पत्नी सावित्री देवड़ी ने कहा कि शहीद के गांव तक सड़क बनाने का वादा आज तक पूरा नहीं हो सका। करीब तीन किलोमीटर सड़क का निर्माण अभी भी बाकी है।
आज मनाया जाएगा शौर्य दिवस
जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास विभाग के अनुसार कारगिल विजय दिवस के अवसर पर अल्मोड़ा में शौर्य दिवस मनाया जाएगा। छावनी क्षेत्र स्थित शहीद स्मारक पर कारगिल के वीर जवानों को पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी जाएगी। इस कार्यक्रम में पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं और आम नागरिकों को भी शामिल होने का आमंत्रण दिया गया है।

Tehri | Education | TeacherShortage : देश की रक्षा के लिए बड़ी संख्या में सैनिक देने वाला टिहरी जिले का समण गांव इन दिनों शिक्षा व्यवस्था की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। गांव के राजकीय जूनियर हाईस्कूल में 72 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कई वर्षों से अतिरिक्त शिक्षकों की मांग की जा रही है…लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला।
देश को सैनिक देने वाला गांव, स्कूल में शिक्षकों का संकट
भिलंगना विकासखंड का समण गांव सेना में सेवा देने वाले युवाओं के लिए जाना जाता है। गांव के 38 जवान भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना में देश की सेवा कर रहे हैं…जबकि चार सैनिक सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इसी गांव के स्कूल से पढ़कर कई युवा सरकारी सेवाओं में भी पहुंचे हैं।
एक शिक्षक संभाल रहे पूरी स्कूल की जिम्मेदारी
ग्राम प्रधान कृष्णा देवी ने कहा कि गांव की करीब दो हजार आबादी है। प्राथमिक विद्यालय में 92 और जूनियर हाईस्कूल में 72 छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं। इसके अलावा लगभग 300 बच्चे राजकीय इंटर कॉलेज धोपड़धार में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई बार शासन और प्रशासन से अतिरिक्त शिक्षकों की मांग की गई…लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं।
विद्यालय के एकमात्र शिक्षक जोत सिंह चौहान ने कहा कि वह पिछले आठ वर्षों से यहां कार्यरत हैं और पिछले दो वर्षों से अकेले ही सभी कक्षाओं की पढ़ाई करा रहे हैं। जब उन्होंने विद्यालय में कार्यभार संभाला था, तब छात्र संख्या 42 थी…जो अब बढ़कर 72 से अधिक हो चुकी है। पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है…जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित होता है।
ग्रामीणों ने उठाई जल्द नियुक्ति की मांग
स्थानीय निवासी संजय बड़ोनी का कहना है कि समण गांव ने पलायन पर काफी हद तक रोक लगाई है और यहां के युवाओं ने सेना व सरकारी सेवाओं में अपनी अलग पहचान बनाई है। ऐसे गांव में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी चिंता का विषय है।
खंड शिक्षाधिकारी भिलंगना सुमेर सिंह कैंतुरा ने कहा कि विद्यालय में एक अतिरिक्त शिक्षक की तैनाती की गई थी….लेकिन प्रशासनिक कारणों से उन्हें उनके मूल विद्यालय वापस भेजना पड़ा। फिलहाल आसपास के स्कूलों से शिक्षक उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं ग्रामीणों ने सरकार से जल्द पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति कर बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की मांग की है।

KargilWar | IndianArmy | HaldwaniHero | Lance Naik Kailash Chandra Bhatt : कारगिल युद्ध के वीर सैनिकों की बहादुरी आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्हीं वीरों में हल्द्वानी के लांस नायक कैलाश चंद्र भट्ट का नाम भी गर्व से लिया जाता है। वर्ष 1999 में ऑपरेशन विजय के दौरान उन्होंने दुश्मनों का डटकर सामना करते हुए ऐसा साहस दिखाया…जिसे आज भी सम्मान के साथ याद किया जाता है।
मच्छल सेक्टर में दिखाई अदम्य वीरता
6 जून 1999 को मच्छल सेक्टर में भारतीय सेना दुश्मनों के खिलाफ अभियान चला रही थी। दुश्मन ऊंची पहाड़ियों पर छिपे हुए थे, जबकि भारतीय जवान कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ रहे थे। इसी दौरान आतंकियों ने अचानक एके-47 से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।
फायरिंग के बीच लांस नायक कैलाश चंद्र भट्ट के कंधे में लगातार चार गोलियां लगीं। एक गोली आर-पार निकल गई…जबकि तीन गोलियां शरीर में धंस गईं। गंभीर रूप से घायल होने और लगातार खून बहने के बावजूद उन्होंने मोर्चा छोड़ने से इनकार कर दिया। वे अपने साथियों के साथ डटे रहे और दुश्मनों पर जवाबी हमला जारी रखा।
घायल होने के बाद भी नहीं छोड़ा मोर्चा
कैलाश चंद्र भट्ट ने अद्भुत साहस का परिचय देते हुए छह से अधिक दुश्मनों को मार गिराया। जब तक पूरा क्षेत्र सुरक्षित नहीं हो गया…तब तक उन्होंने पीछे हटने के बारे में नहीं सोचा। अभियान पूरा होने के बाद उन्हें एयरलिफ्ट कर अस्पताल पहुंचाया गया…जहां उनका इलाज हुआ।
आज भी देश सेवा का वही जज्बा
कारगिल युद्ध के निशान आज भी उनके शरीर पर मौजूद हैं…लेकिन अपने शहीद साथियों की यादें उन्हें सबसे ज्यादा भावुक करती हैं। वर्तमान में जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास कार्यालय, हल्द्वानी में सेवाएं दे रहे कैलाश चंद्र भट्ट का कहना है कि यदि आज भी मातृभूमि की रक्षा का अवसर मिले तो वह उसी जोश और समर्पण के साथ देश के लिए हर चुनौती का सामना करने को तैयार हैं।

Nainital | BhowaliNainitalRoad |UttarakhandWeather : बारिश के बीच नैनीताल-भवाली मार्ग पर एक बार फिर पहाड़ी से मलबा और बोल्डर गिरने की घटना सामने आई है। शनिवार दोपहर पाइंस क्षेत्र में चट्टान दरकने से सड़क पर भारी मलबा आ गया…जिससे कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हो गया।
जानकारी के अनुसार बारिश के दौरान भवाली-नैनीताल रोड के पाइंस क्षेत्र में अचानक पहाड़ी का हिस्सा टूट गया। इसके बाद बड़े-बड़े पत्थर और मलबा सड़क पर आ गिरे। इस दौरान सड़क से गुजर रहे वाहन इसकी चपेट में आने से बाल-बाल बच गए।
बोल्डर गिरने के कारण सड़क पर वाहनों की आवाजाही रुक गई और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। सूचना मिलने के बाद लोक निर्माण विभाग की टीम मौके पर पहुंची और बुलडोजर की मदद से मलबा व पत्थरों को हटाकर यातायात दोबारा शुरू कराया।
पाइंस क्षेत्र में पहले भी हो चुकी है भूस्खलन की घटना
पाइंस क्षेत्र की पहाड़ी पहले भी खतरे का कारण बन चुकी है। करीब चार साल पहले यहां पहाड़ी का बड़ा हिस्सा दरक गया था…जिसके कारण लंबे समय तक यातायात प्रभावित रहा था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण के बाद भी पहाड़ी का झुका हुआ हिस्सा खतरा बना हुआ है। हल्की बारिश में भी यहां से पत्थर गिरने की घटनाएं सामने आती रहती हैं, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है।
प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने अब इस संवेदनशील क्षेत्र में स्थायी सुरक्षा उपाय करने की चुनौती है…ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे को रोका जा सके।

BhavnaDumka | Bhimtal | SAPLabsIndia : ग्राफिक एरा भीमताल की बीसीए 2026 बैच की छात्रा भावना दुम्का ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भावना का चयन दुनिया की प्रमुख एंटरप्राइज क्लाउड सॉफ्टवेयर कंपनी SAP लैब्स इंडिया में आईटी टेक्नोलॉजी क्लाउड सर्विस एसोसिएट के पद पर हुआ है। उन्हें इस पद के लिए 18 लाख रुपये सालाना पैकेज का ऑफर मिला है।
भावना के चयन से ग्राफिक एरा भीमताल में खुशी का माहौल है। विश्वविद्यालय के अनुसार उनका चयन SAP के टैलेंट एक्विजिशन प्रोग्राम के तहत हुआ। भर्ती प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की गई…जिसमें तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ उम्मीदवारों की समस्या समाधान क्षमता, संचार कौशल और विश्लेषणात्मक सोच को परखा गया।
चयन प्रक्रिया के शुरुआती चरण में भावना ने कोडिलिटी ऑनलाइन असेसमेंट सफलतापूर्वक पास किया। इसके बाद एआई इंटरव्यू में उन्होंने अपने शैक्षणिक अनुभव और प्रोजेक्ट्स को बेहतर तरीके से प्रस्तुत किया।
तकनीकी साक्षात्कार के दौरान भावना से कंप्यूटर साइंस के मूल विषयों, क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा स्ट्रक्चर, एल्गोरिद्म, सिस्टम डिजाइन और उनके प्रोजेक्ट्स से जुड़े सवाल पूछे गए…जिनका उन्होंने आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया।
इसके बाद मैनेजरियल डिस्कशन और कम्युनिकेशन राउंड में भी उन्होंने अपनी विश्लेषणात्मक क्षमता, व्यवहारिक समझ और प्रभावशाली संवाद कौशल का प्रदर्शन किया। अनुभवी उम्मीदवारों के बीच भी भावना ने अपनी प्रतिभा से अलग पहचान बनाई।
अंतिम चरण में हुए एचआर इंटरव्यू के बाद करीब एक सप्ताह के इंतजार के बाद शुक्रवार को भावना दुम्का को SAP लैब्स इंडिया की ओर से आधिकारिक ऑफर लेटर प्राप्त हुआ।
भावना की इस सफलता ने न सिर्फ उनके परिवार और शिक्षकों का मान बढ़ाया है…बल्कि उत्तराखंड के युवाओं के लिए भी प्रेरणा का संदेश दिया है कि मेहनत और सही दिशा में तैयारी से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।

CommonwealthGames2026 | JhanduKumar | ParaPowerlifting : कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने अपने अभियान की शानदार शुरुआत की है। पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने पुरुषों की हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर देश का पदक खाता खोल दिया। यह इस संस्करण में भारत का पहला पदक है।
28 वर्षीय झंडू कुमार ने प्रतियोगिता में 181 किलोग्राम और 190 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। कुल 130.9 अंक हासिल कर उन्होंने तीसरा स्थान प्राप्त किया…हालांकि 196 किलोग्राम वजन उठाने के अपने अंतिम प्रयास में वह सफल नहीं हो सके। भारत के दूसरे खिलाड़ी सुधीर 114.1 अंकों के साथ छठे स्थान पर रहे।
इस मुकाबले में नाइजीरिया के इदरीस रिलुवान ने 132.8 अंकों के साथ स्वर्ण पदक जीता…जबकि मैथ्यू हार्डिंग ने 131 अंकों के साथ रजत पदक अपने नाम किया।
झंडू कुमार की सफलता संघर्ष और मेहनत की मिसाल है। बिहार के नालंदा जिले के हरनौत गांव के रहने वाले झंडू को पांच साल की उम्र में पोलियो हो गया था। आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने बचपन में अपने माता-पिता के साथ सब्जियां बेचकर परिवार का सहारा दिया। बाद में उन्होंने ताकत बढ़ाने के लिए वेट ट्रेनिंग शुरू की और शॉट पुट तथा जेवलिन में भी हाथ आजमाया। आखिरकार उन्होंने पैरा पावरलिफ्टिंग को अपना खेल चुना और इसी में पहचान बनाई।
खेल की तैयारी के दौरान उन्हें कई आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बेहतर पोषण और प्रशिक्षण का खर्च उठाने के लिए वह सब्जियों का छोटा कारोबार करते थे। व्हीलचेयर न होने के बावजूद वह स्थानीय बाजार तक लंबी दूरी तय कर काम करते रहे। बाद में दोस्तों की मदद से ई-रिक्शा खरीदने की योजना बनाई…लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण वह भी प्रभावित हो गई। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते रहे।
कांस्य पदक जीतने के बाद झंडू कुमार ने कहा कि यह उनके जीवन का बेहद भावुक पल है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले वह अपने माता-पिता और अपने शुरुआती साथी गौतम को फोन कर यह खुशी साझा करेंगे। उन्होंने कहा कि भारत के लिए पहला पदक जीतना गर्व की बात है और तिरंगा लहराता देख उन्हें सबसे अधिक खुशी मिलती है।
अन्य भारतीय खिलाड़ियों की बात करें तो पुरुषों की लाइटवेट स्पर्धा में अशोक मलिक 143.8 अंकों के साथ चौथे स्थान पर रहे और पदक से चूक गए। परमजीत कुमार 135.6 अंकों के साथ सातवें स्थान पर रहे। महिलाओं की हेवीवेट स्पर्धा में कस्तूरी राजमणि अपनी तीनों कोशिशों में सफल नहीं हो सकीं। वहीं महिलाओं की लाइटवेट स्पर्धा में जसप्रीत कौर और सुमन देवी भी पदक जीतने में सफल नहीं रहीं।
भारत ने हालांकि झंडू कुमार के कांस्य पदक के साथ राष्ट्रमंडल खेल 2026 में अपने अभियान की सकारात्मक शुरुआत की है। अब देश की नजर आगामी मुकाबलों पर है…जहां भारतीय खिलाड़ियों से और पदकों की उम्मीद की जा रही है।