






MDDA Action | Dehradun Sealing | Illegal Construction : राजधानी देहरादून में अवैध निर्माण और आवासीय भवनों में नियमों के खिलाफ व्यावसायिक गतिविधियां चलाने वालों पर मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) ने कार्रवाई की है। प्राधिकरण की टीम ने शहर के अलग-अलग इलाकों में अभियान चलाकर पांच मामलों में सीलिंग की। इनमें आवासीय कॉलोनियों में दुकानें चलाने, बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण करने और भवनों का इस्तेमाल बदलने से जुड़े मामले शामिल हैं।
MDDA ने यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में की है। प्राधिकरण का कहना है कि शहर में नियोजित विकास बनाए रखने और निर्माण संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए अभियान आगे भी जारी रहेगा।
प्रवर्तन टीम ने इंजीनियर इन्क्लेव फेस-1 में तीन परिसरों को सील किया। यहां कृष्णा डेयरी के नाम से व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। इसी क्षेत्र में रोहित विशाल की दुकान पर भी कार्रवाई की गई।
इसके अलावा एक अन्य आवासीय परिसर में बिना जरूरी स्वीकृति निर्माण में बदलाव और व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने का मामला सामने आया। प्राधिकरण ने इस परिसर को भी सील कर दिया।
MDDA की इस कार्रवाई का उद्देश्य आवासीय क्षेत्रों में तय भू-उपयोग के विपरीत चल रही गतिविधियों पर रोक लगाना है।
प्राधिकरण की टीम ने ईस्ट होप टाउन के लक्ष्मीपुर, प्रेमनगर क्षेत्र में भी कार्रवाई की। यहां मयूर की ओर से बिना स्वीकृत मानचित्र के दो व्यावसायिक दुकानों का निर्माण किया जा रहा था। नियमों के उल्लंघन के चलते संबंधित निर्माण को सील कर दिया गया।
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि भवन निर्माण शुरू करने से पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत नक्शा पास कराना और जरूरी अनुमतियां लेना आवश्यक है।
कार्रवाई के दौरान केहरी गांव स्थित महिमा इन्क्लेव की लेन नंबर-2 में भी एक निर्माण को सील किया गया। यहां कुन्दन सिंह की ओर से स्टिल्ट सहित तीन मंजिलों पर हॉस्टल बनाया जा रहा था।
MDDA के मुताबिक निर्माण स्वीकृत मानचित्र से अलग था और भवन के उपयोग में भी बदलाव किया गया था। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर प्राधिकरण ने कार्रवाई की।
MDDA के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माण और भू-उपयोग से जुड़े नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन सुनिश्चित करना प्राधिकरण की प्राथमिकता है।
उन्होंने भवन स्वामियों और कारोबारियों से अपील की कि निर्माण से पहले जरूरी मंजूरी लें और भवन का इस्तेमाल स्वीकृत मानचित्र व निर्धारित भू-उपयोग के मुताबिक ही करें।
MDDA के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने भी अवैध निर्माण और अनधिकृत व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ अभियान जारी रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। जहां नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
प्राधिकरण की इस कार्रवाई से साफ है कि देहरादून में आवासीय कॉलोनियों के भीतर नियमों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियां चलाने और स्वीकृत नक्शे से अलग निर्माण करने वालों पर निगरानी बढ़ाई जा रही है।

Haldwani News | UGC Rules | Reservation Debate : यूजीसी के नए नियमों, शिक्षा और सरकारी नौकरियों में जाति आधारित आरक्षण तथा एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम को लेकर हल्द्वानी में विरोध और बदलाव की मांग उठाई गई है। इस संबंध में नागरिकों, युवाओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच चर्चा की जाएगी। आयोजकों ने इन नियमों और व्यवस्थाओं को वापस लेने या समाप्त करने की मांग रखी है।
प्रकाश हर्बोला ने कहा कि शिक्षा, रोजगार और न्याय व्यवस्था से जुड़े इन विषयों पर संवैधानिक दायरे में चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं को समान अवसर देने, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से कमजोर लोगों की मदद करने तथा नीति निर्माण में उनकी राय शामिल करने की जरूरत है।
**यूजीसी के नए नियम वापस लेने की मांग**
आयोजकों ने उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू यूजीसी के नए नियमों को वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों की शिकायतों का निष्पक्ष निस्तारण होना चाहिए। संस्थानों की जवाबदेही तय करने और सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर देने पर भी चर्चा की जाएगी।
**जातिगत आरक्षण खत्म करने की मांग**
शिक्षा, सरकारी नौकरियों और पदोन्नति में जाति आधारित आरक्षण समाप्त करने की मांग भी उठाई गई है। इसके विकल्प के रूप में आर्थिक और शैक्षणिक रूप से वंचित लोगों को सहायता, छात्रवृत्ति, बेहतर शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के संसाधन उपलब्ध कराने जैसे सुझाव रखे गए हैं।
**एससी-एसटी एक्ट को समाप्त करने की मांग**
आयोजकों ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम को समाप्त करने की मांग भी की है। इसके साथ ही आपराधिक मामलों में निष्पक्ष जांच, शिकायतकर्ता की सुरक्षा और निर्दोष व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा का विषय उठाया गया है।
लक्ष्मण सिंह लमगड़िया ने कहा कि कानून के तहत वास्तविक पीड़ितों को सुरक्षा और न्याय मिलना चाहिए। साथ ही किसी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। उन्होंने सभी वर्गों की बात सुनने और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने पर जोर दिया।
**पूरन सिंह रावत ने यूजीसी नियमों पर उठाए सवाल**
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष पूरन सिंह रावत ने यूजीसी कानून की धारा 3C पर आपत्ति जताई। उन्होंने इसे संविधान के विरुद्ध बताते हुए नियमों को वापस लेने की मांग की। उनका आरोप है कि राजनीतिक दलों के फैसलों से समाज में जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव बढ़ा है।
आयोजकों ने स्पष्ट किया कि इन मुद्दों पर चर्चा का उद्देश्य किसी जाति या समुदाय के प्रति विरोध पैदा करना नहीं….बल्कि कानूनों और नीतियों पर शांतिपूर्ण तथा संवैधानिक तरीके से विचार-विमर्श करना है।
इस विषय पर होने वाली बैठक में सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, विद्यार्थियों, युवाओं और प्रबुद्ध नागरिकों के विचार आमंत्रित किए गए हैं। बैठक में आगे की रणनीति और आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा पर भी चर्चा की जाएगी।
इस दौरान पूरन सिंह रावत, भगवान चंद्र पंत, सत्येंद्र तोमर, योगेंद्र बिष्ट और भुवन चंद्र भट्ट सहित अन्य लोग शामिल रहे।

Police Smriti Diwas | Uttarakhand Police | CM Dhami : पुलिस स्मृति दिवस पर बुधवार को देहरादून पुलिस लाइन में कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम में पहुंचकर पुलिस और अर्धसैनिक बलों के शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान शहीद पुलिसकर्मियों के परिजनों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पुलिस विभाग को मजबूत बनाने और जवानों की सुविधाएं बढ़ाने के लिए आठ घोषणाएं कीं।
मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि उत्तराखंड पुलिस की अलग-अलग इकाइयों में करीब 1600 खाली पदों पर जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके साथ ही थानों और चौकियों में कर्मचारियों की जरूरत की समीक्षा होगी। विवेचकों को आधुनिक जांच किट दी जाएंगी और थानों के जरूरी कामों के लिए सालाना बजट 4 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 8 करोड़ रुपये किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी पुलिस मॉडर्न स्कूलों को बेहतर बनाने की बात कही। देहरादून में पुलिसकर्मियों के लिए ट्रांजिट हॉस्टल और बहुमंजिला बैरक बनाई जाएंगी। देहरादून स्थित पुलिस अस्पताल का भी उच्चीकरण किया जाएगा। सरकार का कहना है कि पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों को बेहतर सुविधाएं देने पर ध्यान दिया जा रहा है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस की वर्दी साहस, अनुशासन और देशसेवा का प्रतीक है। पुलिसकर्मी त्योहारों के दौरान भी ड्यूटी पर तैनात रहते हैं और जनता की सुरक्षा करते हैं। उत्तराखंड में कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और आपदाओं के बीच पुलिस की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले एक साल में देशभर में 154 पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों ने कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राण न्योछावर किए। इनमें उत्तराखंड पुलिस के उपनिरीक्षक स्वर्गीय विनोद कुमार भी शामिल हैं। उन्होंने शहीद जवानों को देश का गौरव बताया।
मुख्यमंत्री ने नशे और साइबर अपराध को पुलिस के सामने बड़ी चुनौतियां बताया। उन्होंने कहा कि नशे की रोकथाम के लिए तीन स्तरों पर एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स बनाई गई है। नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
साइबर अपराध से निपटने के लिए करीब 32 करोड़ रुपये की लागत से स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर बनाया जा रहा है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी हर थाने में महिला हेल्प डेस्क के तहत क्विक रिस्पॉन्स टीम गठित की गई है।
मुख्यमंत्री ने इस साल करीब 5 करोड़ कांवड़ यात्रियों और चारधाम यात्रा में अब तक 60 लाख से अधिक श्रद्धालुओं की सुरक्षित यात्रा कराने में पुलिस की भूमिका की सराहना की। उन्होंने बताया कि उत्कृष्ट सेवाओं के लिए इस वर्ष 319 पुलिसकर्मियों को पदक और सम्मान चिह्न दिए गए हैं। उत्तराखंड पुलिस का प्रेसिडेंट्स पुलिस कलर्स के लिए नामित होना भी प्रदेश के लिए गौरव की बात है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस आवास संतुष्टि दर 18 प्रतिशत से बढ़कर 22 प्रतिशत हो गई है। सरकार का लक्ष्य इसे 30 प्रतिशत तक पहुंचाना है। इस वर्ष 785 पुलिसकर्मियों को पदोन्नति दी गई। नागरिक पुलिस में 1573 और पीएसी में 370 आरक्षियों की सीधी भर्ती हुई। वहीं उपनिरीक्षक, प्लाटून कमांडर और अग्निशमन द्वितीय अधिकारी के 222 पदों की भर्ती प्रक्रिया पूरी की गई है।
मृतक पुलिसकर्मियों के 24 आश्रितों को नौकरी दी गई है। इस वित्तीय वर्ष में थानों, अग्निशमन केंद्रों, बैरकों, मैस और अन्य कार्यस्थलों के लिए 58 करोड़ रुपये से अधिक जारी किए गए हैं। पुलिसकर्मियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा भी दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने जवानों के तनाव प्रबंधन के लिए नियमित कार्यक्रम आयोजित करने पर जोर दिया।
पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने कहा कि उत्तराखंड राज्य बनने के बाद से अब तक पुलिस के 206 जवान ड्यूटी के दौरान शहीद हुए हैं। इस वर्ष शहीद कोष से आश्रित परिवारों को करीब 50 लाख रुपये की मदद दी गई। पुलिस सैलरी पैकेज के तहत अब तक करीब 31 करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि दी जा चुकी है।
उन्होंने बताया कि एम्स ऋषिकेश में 24 घंटे संचालित पुलिस हेल्प डेस्क स्थापित की जा रही है। जीवन रक्षक निधि से इस वर्ष 25 पुलिसकर्मियों को 1 करोड़ 16 लाख रुपये की सहायता दी गई। इसके अलावा 446 मेधावी बच्चों को 34 लाख रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की गई।

Uttarakhand Golden Card | Pensioners Health Scheme | Subodh Uniyal : उत्तराखंड के करीब 35 हजार पेंशनर्स के लिए राहत की खबर है। राज्य स्वास्थ्य योजना यानी गोल्डन कार्ड से बाहर हो चुके पेंशनर्स को सरकार दोबारा योजना से जुड़ने का मौका देने जा रही है। इसके लिए राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण को जरूरी विकल्प उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
दरअसल गोल्डन कार्ड के जरिए इलाज में आ रही दिक्कतों के चलते बड़ी संख्या में पेंशनर्स ने योजना से बाहर होने का विकल्प चुना था। इसके बाद सरकार ने उनके लिए चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति की व्यवस्था लागू की। हालांकि इस व्यवस्था के तहत इलाज कराने में कई पेंशनर्स को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
इलाज में आ रही मुश्किलों को देखते हुए कई पेंशनर्स ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल और राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अधिकारियों से संपर्क किया था। उन्होंने दोबारा गोल्डन कार्ड योजना में शामिल करने की मांग रखी।
पेंशनर्स की मांग को देखते हुए अब सरकार ने उन्हें फिर से योजना से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इससे उन पेंशनर्स को राहत मिलने की उम्मीद है…जो चिकित्सा प्रतिपूर्ति की व्यवस्था के बजाय गोल्डन कार्ड के जरिए इलाज कराना चाहते हैं।
गोल्डन कार्ड योजना में फिर से शामिल होने के इच्छुक पेंशनर्स को आवेदन करना होगा। आवेदन मिलने के बाद संबंधित पेंशनर्स के मूल विभाग से प्रीमियम की राशि राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण को प्राप्त होगी। इसके बाद उन्हें योजना के दायरे में शामिल किया जाएगा।
स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा है कि योजना से बाहर हो चुके पेंशनर्स की दोबारा जुड़ने की इच्छा को देखते हुए अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए गए हैं। सरकार चाहती है कि राज्य के कर्मचारी और पेंशनर्स स्वास्थ्य योजना का लाभ उठा सकें।
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि दोबारा योजना में शामिल होने के बाद पेंशनर्स को फिर इससे बाहर निकलने का विकल्प नहीं मिलेगा। इसलिए आवेदन करने से पहले योजना की शर्तों और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी लेना जरूरी होगा।
राज्य सरकार प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशलिटी सेवाओं का विस्तार करने की तैयारी भी कर रही है। स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि देहरादून के दून मेडिकल कॉलेज में कुछ सुपर स्पेशलिटी सेवाएं शुरू की जा चुकी हैं।
अब हल्द्वानी श्रीनगर, हरिद्वार और अल्मोड़ा के मेडिकल कॉलेजों में भी इन सुविधाओं को बढ़ाने की योजना है। सरकार का लक्ष्य है कि मरीजों को हृदय रोग, किडनी और दिमाग से जुड़ी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
इसके साथ ही मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशलिटी से जुड़े स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की सीटें बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इससे प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

Uttarakhand Madrasas | Sunday Holiday | Minority Education Authority : उत्तराखंड में मान्यता प्राप्त मदरसों के लिए छुट्टी के नियमों में बदलाव किया गया है। अब शुक्रवार के बजाय रविवार को साप्ताहिक अवकाश रखना होगा। राज्य सरकार का कहना है कि शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त इन संस्थानों को दूसरे स्कूलों की तरह निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।
उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने स्पष्ट किया है कि पंजीकृत मदरसों को अब स्कूल के रूप में मान्यता दी गई है। ऐसे में उन्हें शिक्षा विभाग और प्राधिकरण के नियमों के तहत ही संचालन करना होगा।
डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने कहा कि पंजीकृत मदरसे अब स्कूल बन चुके हैं। इसलिए वहां शुक्रवार के बजाय रविवार को छुट्टी रहेगी। सरकार का जोर अल्पसंख्यक समुदाय के शिक्षण संस्थानों में एक समान शिक्षा व्यवस्था लागू करने पर है।
राज्य में मदरसा बोर्ड की जगह उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण बनाया गया है। इसके दायरे में मुस्लिम समुदाय के साथ सिख, जैन, बौद्ध और पारसी समुदायों के शिक्षण संस्थान भी आते हैं।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उत्तराखंड में पहले मदरसा बोर्ड के तहत 452 मदरसे मान्यता प्राप्त थे। इनमें से दोबारा आवेदन करने वाले 76 मदरसों को प्राधिकरण ने स्कूल के रूप में मान्यता दी है। शिक्षा विभाग के पास 114 मदरसों के आवेदन अभी लंबित हैं।
जिलावार आंकड़ों के मुताबिक देहरादून में 41 में से 6, हरिद्वार में 270 में से 44, नैनीताल में 18 में से 2 और ऊधम सिंह नगर में 119 में से 24 मदरसों को मान्यता मिल चुकी है।
अल्पसंख्यक शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि सरकार पहले चरण में 250 अवैध मदरसों को सील कर चुकी है। उनके मुताबिक ये संस्थान मदरसा बोर्ड में भी पंजीकृत नहीं थे। इनमें दूसरे राज्यों से बच्चों को लाकर पढ़ाए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।
प्राधिकरण का कहना है कि शिक्षा विभाग और संबंधित प्राधिकरण की अनुमति के बिना ऐसे संस्थान संचालित नहीं किए जा सकते। नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि सरकार ऐसी शिक्षा व्यवस्था चाहती है…जिसमें सभी बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो संस्थान निर्धारित नियमों का पालन नहीं करेंगे….उन्हें प्रदेश में संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
शुक्रवार की छुट्टी को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि जब मदरसों को शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त स्कूलों के रूप में संचालित किया जा रहा है….तो उन पर भी दूसरे स्कूलों की तरह समान नियम लागू होंगे।

Uttarakhand Weather | Rain Forecast | Snowfall Alert : उत्तराखंड में अक्टूबर के आखिरी दिनों में मौसम का मिजाज बदलने जा रहा है। 23 अक्टूबर से प्रदेश के कई पर्वतीय जिलों में हल्की बारिश होने की संभावना है। वहीं ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी देखने को मिल सकती है। मौसम में बदलाव का यह दौर 26 अक्टूबर तक जारी रहने का अनुमान है। इससे पहाड़ों में ठंड बढ़ सकती है।
इससे पहले 21 और 22 अक्टूबर को प्रदेश में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। इसके बाद शुक्रवार से पर्वतीय क्षेत्रों में बादलों की आवाजाही और बारिश का दौर शुरू हो सकता है।
23 अक्टूबर को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों में कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है। कुमाऊं मंडल के पिथौरागढ़ जिले में भी बारिश के आसार हैं। इस दौरान 3500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी होने की संभावना है। प्रदेश के अन्य जिलों में मौसम शुष्क रह सकता है।
शनिवार 24 अक्टूबर को मौसम का असर पांच पर्वतीय जिलों में देखने को मिल सकता है। उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में कहीं-कहीं हल्की बारिश होने का अनुमान है। ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हो सकती है। कुछ स्थानों पर बिजली चमकने और बादल गरजने की भी संभावना जताई गई है।
25 अक्टूबर को भी इन पांच जिलों में हल्की बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। वहीं 3500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी होने के आसार हैं। बाकी जिलों में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है।
सोमवार 26 अक्टूबर को भी उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है। ऊंचे इलाकों में बर्फ गिरने की संभावना है, जबकि प्रदेश के बाकी आठ जिलों में मौसम साफ और शुष्क रह सकता है।
अक्टूबर के आखिरी दिनों में उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ठंड बढ़ने लगती है। नवंबर में ठंड का असर और तेज होता है….जबकि दिसंबर से फरवरी के बीच कई इलाकों में कड़ाके की सर्दी पड़ती है।
आने वाले दिनों में पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा करने वाले लोगों को मौसम के ताजा अपडेट पर नजर रखनी चाहिए। खासकर ऊंचाई वाले इलाकों में जाने से पहले स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों से रास्तों की स्थिति की जानकारी लेना जरूरी है।

Uttar Pradesh: Ranji Trophy: Aryan Juyal: Rinku Singh: Goa: रणजी ट्रॉफी के रोमांचक मुकाबले में उत्तर प्रदेश ने गोवा को 68 रनों से मात दी। मुकाबला की बात करें तो पहले बल्लेबाजी करते हुए उत्तर प्रदेश ने 202 रन बनाए। यूपी के लिए पहली पारी में रिंकू सिंह ने नाबाद 118 रनों की पारी खेली। इसके अलावा माधव कौशिक ने 45 रनों का योगदान दिया। गोवा के लिए ऑफ ब्रेक गेंदबाज यश कासवंकर ने 5 विकेट झटके।
जवाब में गोवा की टीम पहली बारी में 164 रनों पर ऑल आउट हो गई। उत्तर प्रदेश के लिए जीशान अंसारी ने 5 विकेट झटके। गोवा के लिए शिवेंद्र ने सर्वाधिक 44 रनों की पारी खेली। इस मुकाबले में गेंदबाजों का ही बोलबाला रहा, हालांकि उत्तर प्रदेश की टीम पहली पारी में मामूली बढ़त हासिल करने में कामयाब रही।
दूसरी पारी में उत्तर प्रदेश की शुरुआत बेहद खराब रही और दोनों ही सलामी बल्लेबाज बिना खाता खोले पेवेलियन लौट गए। इसके बाद कप्तान आर्यन जुयाल और करण शर्मा के बीच 88 रनों की साझेदारी हुई। आर्यन ने 74 रनों की पारी के लिए जिसमें 6 चौके शामिल रहे। इसके बाद रिंकू सिंह ने 24 तो वहीं यश दयाल ने 36 रनों का योगदान दिया। जिसकी बदौलत उत्तर प्रदेश गोवा के सामने एक सम्मानजनक लक्ष्य रखने में कामयाब रही।
लक्ष्य का पीछा करने उतरी गोवा की टीम निर्धारित अंतराल में विकेट होते गई और 167 रनों पर ऑल आउट हो गई। गोवा के लिए सुयश प्रभु देसाई ने 72 रनों की पारी खेली इसके अलावा दर्शन ने 28 रन बनाए। उत्तर प्रदेश के लिए कार्तिक यादव ने पांच और जीशान अंसारी ने दो जबकि वंश ने तीन विकेट झटके।
रणजी ट्रॉफी 2026—27 सीजन में उत्तर प्रदेश की ये पहली जीत है। इस मुकाबले में टीम के गेंदबाजों और बल्लेबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया और इसी तरीके की उम्मीद टीम मैनेजमेंट को आगे के मुकाबले के लिए भी होगी।

Dussehra | Suresh Bhatt | Kaladhungi : राज्य स्तरीय राष्ट्रीय ग्रामीण एवं स्वास्थ्य अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष सुरेश भट्ट ने दशहरे के अवसर पर उत्तराखंड के लोगों और कालाढूंगी विधानसभा क्षेत्र की जनता को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सभी के सुखी, स्वस्थ और खुशहाल जीवन की कामना की।
सुरेश भट्ट ने कहा कि दशहरा बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है। भगवान श्रीराम का जीवन हमें सत्य, मर्यादा और कर्तव्य के रास्ते पर चलने की सीख देता है। यह पर्व अपने भीतर की बुराइयों को छोड़कर अच्छे विचारों और सदाचार को अपनाने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि दशहरा भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण त्योहार है। यह पर्व लोगों के बीच प्रेम, भाईचारे और आपसी सद्भाव को बढ़ाने का संदेश देता है।
सुरेश भट्ट ने कामना की कि विजयादशमी सभी के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लेकर आए। साथ ही उत्तराखंड लगातार विकास के रास्ते पर आगे बढ़े और प्रदेशवासियों के जीवन में खुशहाली आए।

Uttarakhand: Ranji Trophy: Tamil Nadu: Mayank Mishra: देश के विभिन्न हिस्सों में रणजी ट्रॉफी 2026-27 का दूसरा मुकाबला खेला जा रहा है। चेन्नई में उत्तराखंड और तमिलनाडु के बीच मुकाबला चल रहा है और दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक दूसरी पारी में उत्तराखंड में 9 रन पर एक विकेट खो दिया है। तमिलनाडु के पास अभी भी 170 रनों की बढ़त है।
मुकाबला की बात करें तो पहले बल्लेबाजी करते हुए उत्तराखंड की टीम 134 रनों पर ऑल आउट हो गई थी। उत्तराखंड के लिए अवनीश सुधा ने सर्वाधिक चौहानों की पारी खेली। इसके अलावा मयंक मिश्रा ने 33 रनों का योगदान दिया। तमिलनाडु की ओर से गुरजापनीत सिंह और साईं किशोर ने 3 -3 विकेट अपने नाम किए।
तमिलनाडु के बल्लेबाजों ने पहली पारी में 303 रन बनाए। प्रदोष पॉल ने सर्वाधिक 136 रनों की शानदार पारी के लिए तो वही बाबा इंद्रजीत ने 77 रनों का योगदान दिया। उत्तराखंड के लिए मयंक मिश्रा ने 37 ओवर फेक और 5 विकेट अपने नाम की है तो वहीं सुधा को चार विकेट मिले। तमिलनाडु को 179 रनों की बढ़त मिल गई है। अगर उत्तराखंड को इस मुकाबले में वापसी करनी है और अपनी हार को टालना है तो अविश्वसनीय प्रदर्शन करना होगा, हालांकि दूसरी पारी में सलामी बल्लेबाज आरव महाजन शून्य पर पेवेलियन लौट गए हैं।
इस मुकाबले का तीसरा दिन बेहद रोमांचक होने वाला है अगर उत्तराखंड की टीम वापसी कर दी है तो कहीं ना कहीं चौथा दिन क्रिकेट फैंस की धड़कनों को जरूर बढ़ाएगा।

Dhal Singh Bisen | Uttarakhand Governor : उत्तराखंड के नए राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने सोमवार को पद की शपथ ले ली। लोकभवन में हुए समारोह में हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी ने उन्हें शपथ दिलाई। इसके साथ ही डॉ. बिसेन ने उत्तराखंड के नौवें राज्यपाल के रूप में अपनी जिम्मेदारी संभाल ली।
शपथ समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, मंत्रिमंडल के सदस्य, सांसद और विधायक शामिल हुए। कार्यक्रम के बाद पुलिस ने नए राज्यपाल को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। उन्होंने पुलिस परेड का निरीक्षण भी किया।
पद संभालने के बाद डॉ. बिसेन ने उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश चारधाम के साथ आदि कैलाश और जागेश्वर धाम जैसे पवित्र स्थलों के लिए जाना जाता है। यहां की संस्कृति, सैनिकों का योगदान, किसानों की मेहनत और युवाओं की ऊर्जा राज्य की बड़ी ताकत है।
राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड को विकास के अगले पड़ाव तक ले जाने के लिए मिलकर काम करना होगा। उन्होंने संवैधानिक मूल्यों की रक्षा और राज्यपाल पद की गरिमा बनाए रखने को अपनी अहम जिम्मेदारियों में शामिल बताया।
डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पर्यटन, रोजगार और जनकल्याण से जुड़े कामों को आगे बढ़ाने की बात कही। उन्होंने प्रदेश में शांति, सुरक्षा और समृद्धि बनाए रखने पर भी जोर दिया।
उनका कहना था कि उत्तराखंड में विकास की गति को बनाए रखते हुए राज्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने डॉ. बिसेन को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि राज्यपाल को राजनीति और सामाजिक क्षेत्र का अनुभव है….जो प्रदेश के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
सीएम धामी ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार और लोकभवन के बीच बेहतर तालमेल रहेगा। उन्होंने पूर्व राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह के कार्यकाल और उनके योगदान की भी सराहना की।
डॉ. ढाल सिंह बिसेन मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे हैं। उनका जन्म सिवनी जिले के पिपरिया गांव में हुआ था। वह आयुर्वेद एवं होम्योपैथी के डॉक्टर होने के साथ किसान भी हैं।
बिसेन मध्य प्रदेश की बरघाट विधानसभा सीट से चार बार विधायक चुने गए। वर्ष 2003 से 2005 के बीच उन्होंने राज्य की भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में काम किया। इसके बाद 2011 से 2013 तक मध्य प्रदेश राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष रहे।
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बालाघाट सीट से जीत दर्ज की थी। वह 2024 तक 17वीं लोकसभा के सदस्य रहे।
अब उत्तराखंड के राज्यपाल के रूप में उनकी नई जिम्मेदारी शुरू हो गई है। प्रदेश के संवैधानिक प्रमुख के तौर पर उनका कार्यकाल और राज्य सरकार के साथ उनका समन्वय आगे महत्वपूर्ण रहेगा।