उत्तराखंड: घर में घुसकर भाजपा नेता की हत्या, फिर भड़का जनाक्रोश; आगजनी के बाद आरोपियों के घरों पर चला बुलडोजर

BJP Leader Murder | Bulldozer Action | Uttarakhand News : सहसपुर क्षेत्र के बैरागीवाला गांव में भाजपा ओबीसी मोर्चा के जिला सोशल मीडिया सहसंयोजक और निजी स्कूल शिक्षक विनोद कश्यप (44) की हत्या के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है। घटना के विरोध में रविवार को बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता गांव में जुटे और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

जानकारी के अनुसार खेतों की सिंचाई के लिए पानी लेने को लेकर दो पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। शनिवार शाम यह विवाद हिंसक संघर्ष में बदल गया। आरोप है कि 8 से 10 लोग बेलचा, हथौड़ा और अन्य हथियार लेकर विनोद कश्यप के घर में घुस गए और हमला कर दिया। हमले में विनोद कश्यप की मौत हो गई…जबकि परिवार के तीन अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों का अस्पताल में उपचार चल रहा है।

घटना के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया। रविवार सुबह लोगों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान कुछ स्थानों पर पथराव और तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आईं। हालात को देखते हुए कई थानों की पुलिस और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया।

12 लोगों पर मुकदमा, कई गिरफ्तार

पुलिस ने मामले में 12 लोगों के खिलाफ हत्या समेत विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। कई नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है…जबकि अन्य की तलाश जारी है। पुलिस वीडियो फुटेज, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।

आरोपियों के घरों पर बुलडोजर कार्रवाई

हत्या के बाद बढ़ते तनाव के बीच प्रशासन ने आरोपियों के घरों पर कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस और प्रशासन की टीम बुलडोजर लेकर गांव पहुंची और चिन्हित निर्माणों पर कार्रवाई की। अधिकारियों के अनुसार नियमानुसार अवैध निर्माणों को हटाने की प्रक्रिया अपनाई गई।

इंटरनेट बंद, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए प्रशासन ने क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी हैं। गांव में भारी पुलिस बल तैनात है और अधिकारियों द्वारा लगातार निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की अफवाह या तनावपूर्ण स्थिति को रोका जा सके।

मुख्यमंत्री ने दिया सख्त संदेश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि उत्तराखंड की शांति और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को दोषियों के खिलाफ सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

फिलहाल बैरागीवाला गांव में स्थिति पर प्रशासन की कड़ी नजर है और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

पिता नहीं रहे, मां नर्स हैं…बेटी ने हार नहीं मानी और बन गई सेना की अधिकारी

IMA Passing Out Parade | Women Officers | Urmi sahu : भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) की पासिंग आउट परेड इस बार कई ऐतिहासिक और प्रेरणादायक कहानियों की गवाह बनी। पहली बार आईएमए से नौ महिला कैडेट्स ने प्रशिक्षण पूरा कर भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में कदम रखा। वहीं उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए लेफ्टिनेंट विशाल कुमार को प्रतिष्ठित स्वॉर्ड ऑफ ऑनर और स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।

छत्तीसगढ़ की उर्मी साहू भी उन नौ महिला कैडेट्स में शामिल रहीं…जिन्होंने प्रशिक्षण पूरा कर सेना में अधिकारी बनने का सपना साकार किया। उर्मी के परिवार में इससे पहले कोई सेना में नहीं रहा…लेकिन उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य को हासिल किया। उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं और उनकी मां नर्स के रूप में कार्यरत हैं। उर्मी बचपन से ही देश सेवा का सपना देखती थीं और अब वह सेना की अधिकारी बनकर कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं।

परेड में महाराष्ट्र के दो सगे भाई प्रकाश भास्कर गायकवाड़ और प्रसाद भास्कर गायकवाड़ भी एक साथ पास आउट हुए। दोनों भाइयों ने साथ में प्रशिक्षण लिया और अब एक साथ सेना के अधिकारी बन गए हैं। इस खास पल को देखकर उनके परिवार की खुशी भी देखने लायक थी।

इस अवसर पर लेफ्टिनेंट विशाल कुमार ने अपनी शानदार उपलब्धि से सभी का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए स्वॉर्ड ऑफ ऑनर और स्वर्ण पदक दोनों हासिल किए। विशाल ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और वर्षों की मेहनत को दिया। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि जीवन में एक स्पष्ट लक्ष्य होना जरूरी है, क्योंकि लक्ष्य ही सफलता की राह दिखाता है।

पासिंग आउट परेड में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रपति Droupadi Murmu मौजूद रहीं। उन्होंने युवा अधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि महिला कैडेट्स का सेना में अधिकारी बनना केवल एक उपलब्धि नहीं…बल्कि भारत में महिला नेतृत्व और सशक्तिकरण का प्रतीक है।

आईएमए की इस पासिंग आउट परेड में कुल 515 कैडेट्स प्रशिक्षण पूरा कर सेना का हिस्सा बने। इनमें विभिन्न पाठ्यक्रमों के कैडेट्स के साथ 34 मित्र देशों के कैडेट्स भी शामिल रहे।

राष्ट्रपति ने कहा कि देश को अपने इन युवा अधिकारियों पर गर्व है और उनका साहस, समर्पण तथा नेतृत्व क्षमता भविष्य में भारतीय सेना को और मजबूत बनाएगी।

उत्तराखंड: पिथौरागढ़ के भूपेंद्र सेना में बने लेफ्टिनेंट, दादा का सपना किया पूरा

IMADehradun | BhupendraSinghSon | Uttarakhand : भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में पासिंग आउट परेड (POP) सफलतापूर्वक संपन्न हो गई है। इस परेड के बाद देश को 481 नए सैन्य अधिकारी मिले हैं। इनमें उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के भूपेंद्र सिंह सोन भी शामिल हैं…जिन्होंने सेना में अफसर बनकर अपने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

पासिंग आउट परेड के बाद लेफ्टिनेंट भूपेंद्र सिंह सोन ने कहा कि यह उनके जीवन का सबसे गर्व का पल है। उन्होंने कहा कि इस दिन के लिए उन्होंने लंबे समय तक मेहनत और तैयारी की है। आज उनकी मेहनत सफल हुई है और उनका सपना पूरा हुआ है।

उन्होंने कहा कि आईएमए सिर्फ एक प्रशिक्षण संस्थान नहीं…बल्कि अनुशासन और देश सेवा की भावना को मजबूत करने वाली जगह है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे मेहनत से कभी पीछे न हटें और अपने लक्ष्य पर लगातार आगे बढ़ते रहें।

भूपेंद्र सिंह सोन के पिता मनोज सिंह सोन ने बेटे की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि आज उनका सपना पूरा हो गया है। उन्होंने बताया कि भूपेंद्र बचपन से ही पढ़ाई में मेहनती रहे हैं और हमेशा लक्ष्य को लेकर गंभीर रहते थे।

भूपेंद्र की शुरुआती पढ़ाई पिथौरागढ़ में हुई…इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीएससी मैथ्स की पढ़ाई पूरी की। उनकी माता मंजू भी इस मौके पर भावुक नजर आईं और उन्होंने बेटे की सफलता पर गर्व जताया।

परिवार के अनुसार उनके दादा भी सेना से रिटायर्ड हैं…जिससे परिवार की सैन्य परंपरा को भूपेंद्र ने आगे बढ़ाया है। पूरे गांव और क्षेत्र में उनकी इस उपलब्धि को लेकर खुशी का माहौल है।

गर्व का पल: प्रियांशु रावत बने सेना अधिकारी, परिवार की आंखें नम लेकिन दिल खुश

PriyanshuRawat | IMADehradun |UttarakhandOfficer : भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) की पासिंग आउट परेड में टिहरी गढ़वाल के प्रियांशु रावत ने सैन्य अधिकारी बनकर अपने परिवार और पूरे उत्तराखंड का नाम रोशन किया है। जैसे ही उन्होंने अंतिम पग पार किया…पूरे क्षेत्र में गर्व और खुशी की लहर दौड़ गई।

प्रियांशु रावत ने इस अवसर पर कहा कि आईएमए में प्रशिक्षण लेना उनके जीवन का सबसे बड़ा सपना था…जो आज पूरा हो गया है। उन्होंने बताया कि आईएमए केवल एक प्रशिक्षण संस्थान नहीं…बल्कि यह अनुशासन, नेतृत्व और देश सेवा की भावना को मजबूत करने वाली जगह है।

उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और मार्गदर्शकों को दिया…जिन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया।

प्रियांशु के पिता दिलबर सिंह रावत ने बेटे की इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि हर पिता का सपना होता है कि उसका बेटा देश की सेवा करे…और आज उनका सपना पूरा हो गया है।

प्रियांशु शुरू से ही मेहनती और अनुशासित रहे हैं। पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी रुचि रही है। उन्होंने एनसीसी में भी शानदार प्रदर्शन किया था और 2020 में गणतंत्र दिवस परेड का नेतृत्व किया था।

उनकी शुरुआती शिक्षा रेनबो स्कूल चौरास से और आगे की पढ़ाई सैनिक स्कूल घोड़ाखाल से हुई। इसके बाद उन्होंने एनडीए परीक्षा में सफलता हासिल कर सेना में जाने का रास्ता तय किया।

प्रियांशु की इस उपलब्धि से उनके गांव थाती बड़मा और चौरास क्षेत्र में खुशी का माहौल है। लोग मिठाइयां बांटकर जश्न मना रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रियांशु की सफलता क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा है।

बारिश का दौर शुरू होने वाला है! उत्तराखंड में मौसम विभाग का अलर्ट, जानिए कब आएगा मानसून

UttarakhandWeather | Monsoon2026 | RainAlert : उत्तराखंड में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों से लेकर मैदानी इलाकों तक बादलों की आवाजाही बढ़ गई है। मौसम विज्ञान केंद्र ने शनिवार के लिए राज्य के कई जिलों में बारिश और बिजली चमकने की संभावना जताते हुए येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार कुछ स्थानों पर तेज बारिश के दौर भी देखने को मिल सकते हैं।

मौसम विभाग का कहना है कि पर्वतीय जिलों के साथ-साथ मैदानी क्षेत्रों में भी हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। इससे पिछले कुछ दिनों से पड़ रही गर्मी और उमस से लोगों को राहत मिल सकती है। राज्य में 18 जून तक मौसम का मिजाज बदला रहने के आसार हैं और बीच-बीच में बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तराखंड में मानसून के आगमन की परिस्थितियां तेजी से बन रही हैं। अनुमान है कि 22 जून के आसपास मानसून प्रदेश में दस्तक दे सकता है। बंगाल की खाड़ी से उठने वाली मानसूनी हवाएं लगातार आगे बढ़ रही हैं और यदि मौसमीय परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो तय समय के आसपास मानसून उत्तराखंड पहुंच जाएगा।

मानसून आने से पहले प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां भी तेज हो सकती हैं। कई क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश, तेज हवाएं और बिजली गिरने की घटनाएं देखने को मिल सकती हैं। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के आगमन के बाद पहाड़ी और मैदानी दोनों क्षेत्रों में अच्छी बारिश होने की संभावना है। इससे तापमान में गिरावट आएगी और लंबे समय से पड़ रही गर्मी से राहत मिलेगी। हालांकि शुरुआती दिनों में कुछ इलाकों में तेज बारिश और आंधी-तूफान जैसी परिस्थितियां भी बन सकती हैं।

मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और बिजली चमकने के समय खुले स्थानों में जाने से बचें। पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों को भी मौसम संबंधी अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

बादल फटने, भूस्खलन और बिजली गिरने से पहले मिलेगा अलर्ट, तुरंत डाउनलोड करें ये 6 ऐप

Uttarakhand | Monsoon Alert | Disaster Management : उत्तराखंड में मानसून की दस्तक से पहले राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि आपदा से बचाव केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं…बल्कि हर नागरिक की भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है। समय पर मिली चेतावनी और सही जानकारी कई लोगों की जान बचा सकती है।

इसी उद्देश्य से देहरादून स्थित उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एनआईडीएम) और यूएसडीएमए के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया। कार्यक्रम में आपदा प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों, अधिकारियों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण प्राकृतिक आपदाओं की संख्या और उनका प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में लोगों को पहले से तैयार रहने और आपदा के समय सही निर्णय लेने की जानकारी होना बेहद जरूरी है।

राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल रघुवीर सिंह भंडारी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि किसी भी आपदा के दौरान सबसे पहले आम नागरिक ही मौके पर मौजूद होता है। इसलिए लोगों को प्रशिक्षित और जागरूक बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पहाड़ों में रहने वाले लोगों के पारंपरिक अनुभव और स्थानीय ज्ञान को भी आपदा प्रबंधन की रणनीति का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने ग्राम स्तर पर आपदा जोखिम कम करने के लिए ग्राम प्रधानों, महिला मंगल दलों, युवक मंगल दलों, स्वयं सहायता समूहों और सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक रहते हैं…जिनका अनुभव आपदा के समय काफी उपयोगी साबित हो सकता है।

इस दौरान आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आजकल लोग नदी-नालों, झरनों, गहरी खाइयों और अन्य खतरनाक स्थानों पर रील और सेल्फी बनाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। कई बार ऐसी लापरवाही गंभीर हादसों का कारण बन जाती है।

उन्होंने कहा कि जिलों को ऐसे संवेदनशील स्थानों की पहचान कर उन्हें “नो सेल्फी जोन” घोषित करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं सुरक्षित स्थानों को “सेल्फी सेफ जोन” के रूप में विकसित करने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में अर्ली वार्निंग सिस्टम यानी पूर्व चेतावनी तंत्र की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि समय पर जारी की गई चेतावनियां जनहानि और आर्थिक नुकसान को काफी हद तक कम कर सकती हैं। आधुनिक तकनीक, सैटेलाइट आधारित निगरानी और रियल टाइम डेटा सिस्टम आपदा प्रबंधन को और प्रभावी बना रहे हैं।

आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अपने मोबाइल फोन में आपदा संबंधी जरूरी ऐप डाउनलोड करें और मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों पर लगातार नजर रखें। विभाग के अनुसार ‘सचेत ऐप’ बाढ़, भूस्खलन और भारी बारिश जैसी घटनाओं की जानकारी देता है…जबकि ‘दामिनी ऐप’ बिजली गिरने की संभावित घटनाओं के बारे में पहले से अलर्ट जारी करता है।

अधिकारियों ने लोगों से कहा है कि मानसून के दौरान किसी भी अफवाह या सोशल मीडिया पर वायरल अपुष्ट संदेशों पर भरोसा न करें। केवल सरकारी और आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी को ही सही मानें। यदि मौसम विभाग या प्रशासन किसी क्षेत्र के लिए चेतावनी जारी करता है तो उसे गंभीरता से लेते हुए सुरक्षा नियमों का पालन करें।

विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक, जागरूकता और जनभागीदारी का बेहतर समन्वय ही प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम कर सकता है। मानसून के दौरान सतर्कता और सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।

  1. Sachet App (सचेत ऐप)
    बाढ़, भूस्खलन, भारी बारिश, बादल फटने जैसी आपदाओं की चेतावनी देने वाला राष्ट्रीय बहु-आपदा अलर्ट ऐप।
  2. Damini App (दामिनी ऐप)
    बिजली गिरने की संभावित घटनाओं की पहले से जानकारी देता है और लोगों को सुरक्षित रहने की चेतावनी जारी करता है।
  3. IMD Mausam App
    भारतीय मौसम विभाग का आधिकारिक ऐप, जिसमें मौसम का पूर्वानुमान, बारिश, तापमान और चेतावनियां मिलती हैं।
  4. IMD Geospatial Services
    रियल टाइम मौसम संबंधी डेटा, वर्षा, बादल और अन्य मौसमीय गतिविधियों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराता है।
  5. VEDAS Platform
    इसरो समर्थित जियोस्पेशियल प्लेटफॉर्म, जो सैटेलाइट आधारित आपदा और मौसम संबंधी जानकारी उपलब्ध कराता है।
  6. Indian Tsunami Early Warning System (ITEWS)
    समुद्री क्षेत्रों में सुनामी और तटीय आपदाओं की पूर्व चेतावनी देने वाला राष्ट्रीय सिस्टम।

उत्तराखंड का लाल नहीं रहा… शूटर जसपाल राणा के निधन से पूरे देश में शोक की लहर

Jaspal Rana : Shooting: Uttarakhand News : भारतीय निशानेबाजी को विश्व मंच पर नई पहचान दिलाने वाले देश के महान शूटर और कोच जसपाल राणा अब हमारे बीच नहीं रहे। शुक्रवार को 49 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। खेल जगत, राजनीति और समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

दिल्ली के अस्पताल में अंतिम सांस लेने के बाद जसपाल राणा का पार्थिव शरीर देर शाम उनके देहरादून स्थित आवास लाया गया…जहां अंतिम दर्शन के लिए लोगों का तांता लग गया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण समेत कई जनप्रतिनिधियों और खेल हस्तियों ने उनके घर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

अपने गुरु को अंतिम विदाई देते समय रो पड़ीं मनु भाकर

जसपाल राणा की सबसे चर्चित शिष्यों में शामिल ओलंपिक पदक विजेता निशानेबाज मनु भाकर भी अपने गुरु को अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुंचीं। पार्थिव शरीर के सामने पुष्प अर्पित करते समय मनु खुद को संभाल नहीं सकीं और उनकी आंखें नम हो गईं। उन्होंने कहा कि जसपाल राणा सिर्फ एक कोच नहीं…बल्कि भारतीय निशानेबाजी के एक पूरे युग थे। उनका मार्गदर्शन और अनुभव आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।

मुख्यमंत्री धामी बोले- देश ने खोया एक महान खिलाड़ी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जसपाल राणा का जाना सिर्फ उत्तराखंड ही नही…बल्कि पूरे देश के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि राणा ने अपने खेल कौशल से भारत का नाम दुनिया भर में रोशन किया और बाद में कोच बनकर नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने देश को कई मेडल दिलाने के साथ-साथ ऐसे खिलाड़ियों को तैयार किया जिन्होंने भारत का गौरव बढ़ाया।

जर्मनी से लौटने के बाद बिगड़ी थी तबीयत

जानकारी के अनुसार जसपाल राणा हाल ही में जर्मनी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय शूटिंग प्रतियोगिता से भारतीय टीम के साथ लौट रहे थे। यात्रा के दौरान उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई। दिल्ली पहुंचने के बाद उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया।

डॉक्टरों के अनुसार उन्हें गंभीर हार्ट अटैक आया था। उपचार के दौरान उनकी हालत में सुधार भी देखा गया था और उन्हें जल्द अस्पताल से छुट्टी मिलने की उम्मीद थी। लेकिन अचानक हृदय संबंधी जटिलता बढ़ने के कारण शुक्रवार सुबह उनका निधन हो गया।

टिहरी के बेटे ने दुनिया में चमकाया भारत का नाम

28 जून 1976 को उत्तराखंड के टिहरी जिले में जन्मे जसपाल राणा बचपन से ही निशानेबाजी के प्रति आकर्षित थे। उनके पिता नारायण सिंह राणा ने उन्हें शुरुआती प्रशिक्षण दिया। बेहद कम उम्र में ही उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाना शुरू कर दिया था।

सिर्फ 12 साल की उम्र में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में पदक जीतकर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का झंडा बुलंद करते रहे।

कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स के चमकते सितारे

जसपाल राणा भारतीय निशानेबाजी के सबसे सफल खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। उन्होंने कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में कुल 23 पदक जीतकर इतिहास रचा। इनमें 13 स्वर्ण पदक भी शामिल हैं।

कॉमनवेल्थ खेलों में उन्होंने 9 स्वर्ण, 4 रजत और 2 कांस्य पदक जीते…जबकि एशियाई खेलों में 4 स्वर्ण, 2 रजत और 2 कांस्य पदक अपने नाम किए। उनकी उपलब्धियों ने भारतीय निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

खिलाड़ी से कोच बने और तैयार की नई पीढ़ी

प्रतियोगी खेलों से दूरी बनाने के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने भारतीय शूटिंग टीम के साथ काम करते हुए कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को तैयार किया।

मनु भाकर, सौरभ चौधरी, अनीश भानवाला और चिंकी यादव जैसे कई अंतरराष्ट्रीय निशानेबाजों की सफलता के पीछे उनका महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। उनकी कोचिंग और मार्गदर्शन ने भारतीय शूटिंग को नई दिशा दी।

सम्मान और उपलब्धियों से भरा रहा जीवन

जसपाल राणा को खेल जगत में उत्कृष्ट योगदान के लिए कई बड़े सम्मान मिले। उन्हें अर्जुन पुरस्कार, पद्मश्री और द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उत्तराखंड सरकार ने भी उन्हें प्रदेश के सर्वोच्च सम्मानों से नवाजा था।

‘बंदूक्या’ के नाम से थे मशहूर

उत्तराखंड में लोग उन्हें प्यार से “बंदूक्या जसपाल राणा” कहकर पुकारते थे। उनकी लोकप्रियता इतनी थी कि लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी ने उनके नाम पर प्रसिद्ध गीत भी रचा था…जिसने उन्हें गांव-गांव तक पहचान दिलाई।

शनिवार को होगा अंतिम संस्कार

परिवार के अनुसार शनिवार को उनके पार्थिव शरीर को वाराणसी ले जाया जाएगा…जहां पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।

जसपाल राणा के निधन के साथ भारतीय खेल जगत ने एक ऐसे खिलाड़ी, कोच और प्रेरणास्रोत को खो दिया है…जिसने अपने जुनून, मेहनत और समर्पण से लाखों युवाओं को सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा दी। उनकी उपलब्धियां और योगदान हमेशा देशवासियों के दिलों में जीवित रहेंगे।

उत्तराखंड में स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को मिलेंगे FoSTaC प्रमाण पत्र

Dehradun News : उत्तराखण्ड पर्यटन विकास बोर्ड की ओर से स्ट्रीट फूड विक्रेताओं और खाद्य व्यवसाय संचालकों को खाद्य सुरक्षा एवं स्वच्छता के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से आयोजित आरपीएल (Recognition of Prior Learning) कार्यक्रम का समापन समारोह 13 जुलाई को नगर निगम सभागार देहरादून में आयोजित किया जाएगा।

कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षण प्राप्त प्रतिभागियों को खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FoSTaC) के प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे। इसके साथ ही सफल प्रतिभागियों को उत्तराखण्ड पर्यटन विकास बोर्ड की ओर से सम्मानित भी किया जाएगा।

पर्यटन विभाग का मानना है कि सुरक्षित और स्वच्छ भोजन पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी उद्देश्य से स्ट्रीट फूड विक्रेताओं और खाद्य कारोबार से जुड़े लोगों को खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता और गुणवत्तापूर्ण सेवाओं का प्रशिक्षण दिया गया।

समापन समारोह में प्रदेश के पर्यटन, लोक निर्माण, सिंचाई एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम में उत्तराखण्ड पर्यटन विभाग के सचिव एवं उत्तराखण्ड पर्यटन विकास बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल, देहरादून के महापौर सौरभ थपलियाल, नगर आयुक्त आलोक कुमार पाण्डेय और पर्यटन विकास बोर्ड की अपर निदेशक पूनम चन्द भी मौजूद रहेंगी।

पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह पहल प्रदेश में स्वच्छ, सुरक्षित और बेहतर पर्यटन सेवाओं को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे स्थानीय खाद्य व्यवसायियों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और पर्यटकों को बेहतर गुणवत्ता की सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रशिक्षित स्ट्रीट फूड विक्रेता, खाद्य व्यवसाय संचालक और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोग शामिल होंगे।

हल्द्वानी के स्पा सेंटर में छापा, महिलाओं को नौकरी का झांसा देकर देह व्यापार में धकेला !

हल्द्वानी: तिकोनिया क्षेत्र स्थित एक स्पा सेंटर में चल रहे कथित देह व्यापार का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई के दौरान छह युवतियों को रेस्क्यू किया गया, जबकि एक महिला समेत चार आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। मौके से 16 इस्तेमाल किए गए आपत्तिजनक वस्तु , छह युवतियां, चार आरोपित, निरोध के कई पैकेट, दो रजिस्टर और 4320 रुपये नकद बरामद किए गए हैं। मुख्य संचालक मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश की जा रही है।

अनैतिक मानव व्यापार निरोधक इकाई (एएचटीयू) प्रभारी उपनिरीक्षक सुनीता कुंवर को लंबे समय से तिकोनिया स्थित एमजे द लक्जरी स्पा में अनैतिक गतिविधियों की शिकायत मिल रही थी। मुखबिर की सूचना पर गुरुवार शाम पुलिस टीम ने स्पा सेंटर पर छापा मारा।
पुलिस के अनुसार स्पा के भीतर बने दो कमरों में एक-एक युवक और युवती आपत्तिजनक अवस्था में मिले। वहीं अन्य कमरों में चार युवतियां मौजूद थीं। पूछताछ में युवतियों ने आरोप लगाया कि स्पा संचालक और उसके सहयोगी उन्हें नौकरी का झांसा देकर देह व्यापार के लिए मजबूर करते थे।

इसके अलावा पुलिस को ग्राहकों की एंट्री संबंधी दो रजिस्टर बरामद किए गए। पुलिस ने सभी सामान को सील कर कब्जे में ले लिया।
पुलिस ने बताया कि आरोपितों के खिलाफ अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम की धारा 3, 4, 5 और 6 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। रेस्क्यू की गई छह महिलाओं को काउंसलिंग के बाद वन स्टॉप सेंटर भेज दिया गया है। फरार संचालक की तलाश में पुलिस दबिश दे रही है। पुलिस द्वारा उसे नामजद किया गया है।

उत्तराखंड: 13 जून को बनेगा इतिहास, IMA की पासिंग आउट परेड में पहली बार दिखेंगी 9 महिला कैडेट्स

DehradunNews | UttarakhandNews | IndianArmy | IMAPassingOutParade2026 : भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में 13 जून को होने वाली 158वीं पासिंग आउट परेड की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। गुरुवार को आयोजित कमांडेंट परेड में कैडेट्स ने शानदार प्रदर्शन कर यह साबित कर दिया कि वे देश सेवा की जिम्मेदारी संभालने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

कमांडेंट परेड के दौरान मौसम ने अचानक करवट ली और बारिश शुरू हो गई…लेकिन इसका कैडेट्स के उत्साह और अनुशासन पर कोई असर नहीं पड़ा। तेज बारिश के बीच भी अधिकारी कैडेट एक समान चाल, सटीक तालमेल और आत्मविश्वास के साथ ड्रिल स्क्वायर पर मार्च करते रहे। उनका प्रदर्शन सैन्य प्रशिक्षण की मजबूती और अनुशासन का बेहतरीन उदाहरण बना।

परेड की सलामी आईएमए के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल नागेंद्र सिंह ने ली। इस अवसर पर उन्होंने भावी सैन्य अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय सेना की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अब इन युवा अधिकारियों के कंधों पर होगी। उन्होंने कहा कि एक अधिकारी की पहचान केवल वर्दी से नहीं…बल्कि उसके चरित्र, नेतृत्व क्षमता, कर्तव्यनिष्ठा और जवानों के प्रति जिम्मेदारी से होती है।

कमांडेंट ने कैडेट्स को याद दिलाया कि सेना में लिए गए उनके फैसले न केवल उनके लिए…बल्कि उनके अधीन कार्य करने वाले जवानों और उनके परिवारों के जीवन को भी प्रभावित करेंगे। इसलिए नेतृत्व के साथ संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना भी बेहद जरूरी है।

कमांडेंट परेड में भारतीय कैडेट्स के साथ मित्र देशों से आए अधिकारी कैडेट्स ने भी हिस्सा लिया। सेना के प्रसिद्ध मार्चिंग गीत ‘कदम-कदम बढ़ाए जा’ की धुन पर जब कैडेट्स ने मार्च किया तो पूरा परिसर देशभक्ति और सैन्य गौरव से गूंज उठा।

इस बार की पासिंग आउट परेड कई मायनों में खास रहने वाली है। पहली बार आईएमए से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली 9 महिला कैडेट्स भी परेड का हिस्सा बनेंगी। एक वर्ष के कठोर सैन्य प्रशिक्षण के बाद महिला कैडेट्स ने भी पुरुष कैडेट्स के साथ अंतिम रिहर्सल में भाग लिया। इसे भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।

कमांडेंट परेड को पासिंग आउट परेड से पहले की सबसे अहम रिहर्सल माना जाता है। इसके जरिए परेड की सभी व्यवस्थाओं, ड्रिल और समन्वय का अंतिम परीक्षण किया जाता है। गुरुवार को हुई रिहर्सल ने साफ कर दिया कि आईएमए 13 जून को होने वाली भव्य पासिंग आउट परेड के लिए पूरी तरह तैयार है।

इस वर्ष राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में पासिंग आउट परेड में शामिल होंगी। उनकी मौजूदगी में कुल 515 अधिकारी कैडेट पास आउट होंगे। इनमें 481 भारतीय कैडेट और 16 मित्र देशों के 34 विदेशी कैडेट शामिल हैं। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ये सभी अधिकारी भारतीय सेना और अपने-अपने देशों की सेनाओं में नई जिम्मेदारियां संभालेंगे।

आईएमए की ऐतिहासिक परंपराओं और सैन्य गौरव का प्रतीक मानी जाने वाली यह परेड हर साल देशभर का ध्यान आकर्षित करती है। बारिश के बीच हुई कमांडेंट परेड ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि एक सैनिक के लिए मौसम नहीं…बल्कि कर्तव्य सबसे ऊपर होता है।