पहाड़ से मैदान तक बरसेंगे बादल, मौसम विभाग ने जारी किया बड़ा अपडेट

WeatherUpdate | UttarakhandRain | RainAlert : उत्तराखंड में आने वाले दिनों में मौसम का मिजाज बदलने वाला है। मौसम विभाग ने 29 जून से प्रदेश के कई जिलों में बारिश तेज होने की संभावना जताई है। कुछ इलाकों में भारी बारिश को लेकर येलो अलर्ट भी जारी किया गया है। विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और मौसम को देखते हुए यात्रा करने की सलाह दी है।

मौसम विभाग ने कहा कि 27 और 28 जून को पर्वतीय क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इस दौरान गरज-चमक, आकाशीय बिजली और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। मैदानी इलाकों में भी कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है।

29 जून से 1 जुलाई के बीच पिथौरागढ़, बागेश्वर, नैनीताल और चंपावत जिलों में कई स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा गढ़वाल और कुमाऊं के अन्य जिलों में भी हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रह सकता है।

मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचें। बिजली चमकने और तेज हवाओं के समय सुरक्षित स्थान पर रहें। पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोग मौसम की जानकारी लेने के बाद ही सफर करें।

भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और नदी-नालों के आसपास रहने वाले लोगों को भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक मौसम लगातार बदलता रहेगा…इसलिए सभी लोग मौसम संबंधी अपडेट पर नजर बनाए रखें।

उत्तराखंड के किसानों को बड़ी सौगात! 369.66 करोड़ की विकास योजनाओं के साथ शुरू हुआ ‘खेत बचाओ अभियान’

KhetBachaoAbhiyan | UttarakhandNews | AgricultureNews : उत्तराखंड के रुद्रपुर स्थित गांधी मैदान में शुक्रवार को कृषि विभाग की ओर से ‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत की गई। कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, कृषि मंत्री गणेश जोशी समेत कई जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। इस दौरान किसानों के हित में कई अहम घोषणाएं की गईं और करोड़ों रुपये की विकास योजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया गया।

कार्यक्रम में कुल 369.66 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया। इनमें 46.32 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 9 परियोजनाओं का लोकार्पण और 323.34 करोड़ रुपये की 32 नई परियोजनाओं का शिलान्यास शामिल है।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि खेत और मिट्टी का संरक्षण भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने किसानों से मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का उपयोग करने, प्राकृतिक खेती अपनाने और जल, जंगल तथा जमीन के संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि मजबूत कृषि व्यवस्था ही देश की खाद्य सुरक्षा और किसानों की समृद्धि का आधार है।

उन्होंने उत्तराखंड के लिए कई नई योजनाओं की घोषणा भी की। मुक्तेश्वर में 100 करोड़ रुपये की लागत से क्लीन प्लांट सेंटर बनाया जाएगा..जहां से सेब, अखरोट और बादाम जैसे उच्च गुणवत्ता वाले पौधे तैयार किए जाएंगे। बड़ी नर्सरी स्थापित करने वालों को 4 करोड़ रुपये और छोटी नर्सरी लगाने वालों को 2 करोड़ रुपये तक की सहायता मिलेगी।

इसके अलावा अल्मोड़ा के चौबटिया में 15 करोड़ रुपये की लागत से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया जाएगा। न्यूजीलैंड के सहयोग से प्रदेश में कीवी उत्पादन बढ़ाने के लिए 15 करोड़ रुपये की विशेष योजना भी तैयार की जा रही है।

किसानों की फसलों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए घेरबाड़ (फेंसिंग) कार्य हेतु 65 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे। वहीं किसानों को समय पर मौसम की सटीक जानकारी देने के लिए प्रदेश में ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन स्थापित करने के लिए 104 करोड़ रुपये की मंजूरी भी दी गई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि “खेत बचाओ अभियान” केवल एक सरकारी योजना नहीं…बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए उपजाऊ भूमि और बेहतर कृषि व्यवस्था को सुरक्षित रखने का अभियान है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों को 3 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त कृषि ऋण, नहरों से निःशुल्क सिंचाई, कृषि यंत्रों पर 80 प्रतिशत तक अनुदान और वर्षा आधारित खेती को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार फल, सब्जी और बागवानी उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ पॉलीहाउस, कोल्ड स्टोरेज, कोल्ड चेन और मेगा फूड पार्क जैसी आधुनिक सुविधाओं का भी विस्तार कर रही है…ताकि किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिल सके।

कार्यक्रम में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने भी किसानों के हित में कई सुझाव रखे। उन्होंने जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सहायता, जैविक खेती को बढ़ावा देने और मंडुवा व झंगोरा जैसी पारंपरिक फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय करने की मांग की।

इस अवसर पर कई जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीक, प्राकृतिक खेती और मृदा संरक्षण के प्रति जागरूक करना तथा कृषि क्षेत्र को और मजबूत बनाना रहा।

उत्तराखंड की मछली को मिला विदेशों का बाजार, अब यूरोप और मध्य-पूर्व तक पहुंचेगी रेनबो ट्राउट

RainbowTrout | FishExport | UttarakhandNews : उत्तराखंड ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्य बनने के बाद पहली बार यहां तैयार की गई रेनबो ट्राउट मछली अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच गई है। पिथौरागढ़ जिले की तीन मत्स्य सहकारी समितियों ने राज्य सरकार के सहयोग से नेपाल को पांच मीट्रिक टन रेनबो ट्राउट मछली की पहली खेप भेजी है। इसके साथ ही आने वाले समय में करीब 30 मीट्रिक टन मछली के और निर्यात की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।

शुक्रवार को देहरादून स्थित सचिवालय मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस वार्ता में मत्स्य विकास मंत्री सौरभ बहुगुणा ने इस उपलब्धि की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि धारचूला और मुनस्यारी क्षेत्र की तीन मत्स्य सहकारी समितियों ने इन मछलियों का उत्पादन किया था। मछलियों को कोल्ड चेन व्यवस्था के जरिए पहले गुजरात के वेरावल भेजा गया…जहां उनका प्रसंस्करण किया गया। इसके बाद 23 जून 2026 को नेपाल के अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनका सफल निर्यात किया गया।

इस निर्यात से पिथौरागढ़ के 33 मत्स्य पालकों को लगभग 23.50 लाख रुपये की आय हुई है। सरकार ने इस पहले निर्यात को सफल बनाने के लिए हार्वेस्टिंग, पैकेजिंग और परिवहन पर 5.40 लाख रुपये की वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई।

मत्स्य मंत्री ने कहा कि दुबई में आयोजित गल्फ फूड एक्सपो के दौरान अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से बने संपर्कों का सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहा है। विभाग अब यूरोप, मध्य-पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में भी उत्तराखंड की रेनबो ट्राउट मछली के निर्यात की संभावनाओं पर काम कर रहा है। इसी दिशा में अगले चरण में करीब 30 मीट्रिक टन मछल विदेश भेजने की तैयारी चल रही है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की योजनाओं का असर अब मत्स्य पालन क्षेत्र में साफ दिखाई दे रहा है। वर्ष 2024 में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के साथ हुए समझौते के तहत अब तक 45.10 मीट्रिक टन ट्राउट मछली की आपूर्ति की जा चुकी है…जिसकी कुल कीमत 2.10 करोड़ रुपये से अधिक है।

मत्स्य विभाग के अनुसार, वर्ष 2022 तक राज्य में करीब 10 हजार मत्स्य पालक थे…जिनकी संख्या अब बढ़कर 15,657 हो गई है। इनमें 3,584 महिला मत्स्य पालक भी शामिल हैं। वहीं पिछले कुछ वर्षों में मत्स्य उत्पादन की वृद्धि दर भी लगातार बढ़ी है और वर्ष 2026-27 में प्रदेश में 11,805 मीट्रिक टन मत्स्य उत्पादन दर्ज किया गया…जिसकी अनुमानित कीमत करीब 165 करोड़ रुपये है।

विभाग का बजट भी पिछले वर्षों में काफी बढ़ा है। वर्ष 2021-22 में जहां विभाग का बजट 55.76 करोड़ रुपये था…वहीं वर्ष 2026-27 में यह बढ़कर 261.41 करोड़ रुपये हो गया है। पिछले चार वर्षों में 5,646 लोगों को मत्स्य पालन के माध्यम से स्वरोजगार मिला है और विभाग में नियमित नियुक्तियां भी की गई हैं।

मत्स्य मंत्री ने कहा कि ट्राउट प्रोत्साहन योजना और मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना जैसी योजनाओं से मत्स्य पालन को नई गति मिली है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ रहा है और किसानों की आय में भी सुधार हो रहा है। आने वाले समय में उत्तराखंड की रेनबो ट्राउट मछली को दुनिया के अन्य बड़े बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में भी लगातार प्रयास किए जाएंगे।

उत्तराखंड की पहचान है चारधाम और हेमकुंड साहिब का भाईचारा, इसे बनाए रखना सबकी जिम्मेदारी

CharDhamYatra | HemkundSahib | UttarakhandNews : उत्तराखंड को केवल उसकी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं…बल्कि उसकी धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक एकता के लिए भी जाना जाता है। चारधाम और हेमकुंड साहिब की यात्राएं इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। वर्षों से दोनों यात्राएं एक साथ संचालित होती रही हैं और देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं के बीच आपसी भाईचारे, सहयोग और सौहार्द का संदेश देती रही हैं।

चारधाम और हेमकुंड साहिब यात्रा का प्रमुख प्रवेश द्वार ऋषिकेश है। बदरीनाथ, केदारनाथ और हेमकुंड साहिब जाने वाले श्रद्धालु यात्रा के बड़े हिस्से में एक ही मार्ग का उपयोग करते हैं। यात्रा के दौरान स्थानीय लोग, धार्मिक संस्थाएं और स्वयंसेवी संगठन मिलकर सभी यात्रियों की सेवा करते हैं। यही परंपरा उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक समरसता को मजबूत बनाती है।

इतिहास भी इस साझी विरासत की गवाही देता है। चमोली जिले के भ्यूंडार गांव निवासी स्वर्गीय नंदा सिंह करीब 25 वर्षों तक हेमकुंड साहिब गुरुद्वारे के मुख्य ग्रंथी रहे। उनका जीवन इस बात का प्रतीक माना जाता है कि उत्तराखंड की संस्कृति हमेशा सभी धर्मों और आस्थाओं के सम्मान तथा भाईचारे की भावना पर आधारित रही है।

इन धार्मिक यात्राओं का राज्य की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान है। चारधाम और हेमकुंड साहिब यात्रा से जुड़े परिवहन, होटल, व्यापार, घोड़ा-खच्चर, स्थानीय दुकानदार और अन्य हजारों परिवारों की आजीविका इन यात्राओं पर निर्भर रहती है।

हाल के दिनों में कुछ घटनाओं के बाद सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। ऐसे समय में प्रदेश की वर्षों पुरानी सौहार्दपूर्ण परंपराओं को याद रखना और शांति बनाए रखना जरूरी माना जा रहा है। कई लोगों का मानना है कि किसी भी प्रकार का तनाव या विवाद राज्य की सामाजिक एकता के साथ-साथ पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तराखंड जैसे पर्यटन और तीर्थाटन आधारित राज्य में शांति, आपसी विश्वास और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना सभी की साझा जिम्मेदारी है…ताकि प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक परंपराएं पहले की तरह मजबूत बनी रहें।

उत्तराखंड: फर्जी डिग्री से हासिल की सरकारी नौकरी? SIT जांच में इतिहास की प्रवक्ता की खुली पोल

HaridwarNews | FakeDegree | UttarakhandNews : उत्तराखंड के हरिद्वार जिले से शिक्षा विभाग से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। धनौरी स्थित नेशनल इंटर कॉलेज में कार्यरत इतिहास विषय की प्रवक्ता की एमए डिग्री जांच के दौरान फर्जी पाई गई है। एसआईटी की रिपोर्ट के बाद अब शिक्षा विभाग ने उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार धनौरी के नेशनल इंटर कॉलेज में इतिहास की प्रवक्ता के पद पर कार्यरत रेनू कुमारी पर फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी हासिल करने का आरोप है। इस मामले की जांच अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने की थी।

जांच के दौरान शिक्षिका के हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, स्नातक (बीए) और परास्नातक (एमए) सहित सभी शैक्षणिक दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया। जांच में सामने आया कि उनकी एमए (इतिहास) की डिग्री…जिसे हिमाचल प्रदेश के मानव भारती विश्वविद्यालय से जारी बताया गया था…सत्यापन के दौरान फर्जी पाई गई।

एसआईटी ने जांच पूरी करने के बाद संबंधित शिक्षिका के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की सिफारिश करते हुए अपनी रिपोर्ट विद्यालयी शिक्षा विभाग को भेज दी। इसके बाद महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा ने मामले को गंभीर मानते हुए निदेशक माध्यमिक शिक्षा को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। वहीं निदेशक माध्यमिक शिक्षा ने पूरे प्रकरण को मुख्य शिक्षा अधिकारी हरिद्वार के पास भेजते हुए नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा है।

मुख्य शिक्षा अधिकारी नरेश कुमार हल्दियानी ने कहा कि मामले की पूरी जानकारी और दस्तावेजों की जांच के लिए नेशनल इंटर कॉलेज धनौरी के प्रबंधक को सभी संबंधित अभिलेखों के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही संबंधित शिक्षिका को भी स्पष्टीकरण के लिए तलब किया गया है।

बताया जा रहा है कि वर्ष 2017 में उत्तराखंड में शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था। इसी अभियान के दौरान यह मामला सामने आया। विभागीय सूत्रों के अनुसार यदि आरोप पूरी तरह सही पाए जाते हैं तो संबंधित शिक्षिका की सेवा समाप्त करने, अब तक मिले वेतन की वसूली करने और आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने जैसी कार्रवाई की जा सकती है।

फिलहाल शिक्षा विभाग मामले में नियमानुसार आगे की कार्रवाई कर रहा है और सभी की नजरें विभाग के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं।

उत्तराखंड के चमोली में भारी बारिश का कहर: उफनते नाले से बाजार में घुसा मलबा, कई घर और वाहन दबे, जान बचाकर भागे लोग

ChamoliNews | UttarakhandRain | Landslide : उत्तराखंड में मानसून की आधिकारिक शुरुआत से पहले ही बारिश ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। चमोली जिले के नारायणबगड़ बाजार में देर रात हुई भारी बारिश के बाद अचानक नाले में तेज बहाव आ गया। देखते ही देखते पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा, पत्थर और बोल्डर बाजार में घुस गए…जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

मलबे का बहाव इतना तेज था कि सड़क किनारे खड़े कई वाहन उसकी चपेट में आकर दब गए। वहीं कई घरों और दुकानों में भी मलबा घुसने से लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। अचानक आई इस आपदा से लोग घबरा गए और जान बचाने के लिए रात के अंधेरे में अपने घरों से बाहर भागने को मजबूर हो गए।

रात के समय नारायणबगड़ के ऊपरी पहाड़ी क्षेत्रों में तेज बारिश हुई। इसके बाद सूखे नाले में अचानक पानी और मलबे का तेज बहाव आ गया…जिसने थरालीबगड़ बाजार समेत आसपास के क्षेत्रों को अपनी चपेट में ले लिया। घटना के दौरान लोगों को पूरी रात जागकर बितानी पड़ी।

स्थानीय निवासी दलीप नेगी ने कहा कि मलबा और पानी इतनी तेजी से बाजार में पहुंचा कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। किसी तरह घरों से बाहर निकलकर लोगों ने अपनी जान बचाई। इस आपदा में कई दुकानों, सरस्वती शिशु मंदिर परिसर और अस्पताल के आवासीय क्षेत्र को भी नुकसान पहुंचा है।

मलबा आने के कारण ग्वालदम हाईवे भी कुछ समय के लिए बाधित हो गया…जिससे वाहनों की आवाजाही रुक गई। सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया।

आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी ने कहा कि प्रभावित क्षेत्र में राहत टीम को तुरंत भेज दिया गया था। जेसीबी मशीनों की मदद से हाईवे से मलबा हटाकर यातायात बहाल कर दिया गया है। साथ ही नुकसान का आकलन किया जा रहा है…और प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि नारायणबगड़ क्षेत्र में पहले भी कई बार मलबा आने की घटनाएं हो चुकी हैं। उन्होंने प्रशासन से भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी सुरक्षा उपाय करने की मांग की है।

हल्द्वानी के कोचिंग संस्थानों में छापेमारी, लापरवाही के चलते कइयों को सील किया गया

Haldwani News: Coaching: Inspection: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल के निर्देशों के बाद जिला प्रशासन ने हल्द्वानी शहर के प्रमुख कोचिंग संस्थानों में औचक निरीक्षण अभियान चलाया। अभियान के दौरान कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा व्यवस्थाओं, भवन मानकों और अग्निशमन सुविधाओं का व्यापक ऑडिट किया गया।

निरीक्षण में कई संस्थानों के पास अग्निशमन विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र (फायर एनओसी) उपलब्ध नहीं पाई गई, जबकि कई स्थानों पर सुरक्षा मानकों में गंभीर खामियां सामने आईं। विद्यार्थियों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सात कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया। सील किए गए संस्थानों में संकल्प कोचिंग सेंटर, प्रदीप एकेडमी-1, प्रदीप एकेडमी-2, जयश्री कॉलेज हल्द्वानी, तुषार पंत पीएमटी क्लासेस, जीत आईएएस कोचिंग सेंटर (दुर्गा सिटी) तथा दुर्गा सिटी की तीसरी मंजिल पर संचालित फिजिक्स कोचिंग सेंटर शामिल हैं।

वहीं कल्पवृक्ष इंस्टिट्यूट में फायर एनओसी उपलब्ध होने के कारण प्रशासन ने संस्थान को कमियों के निराकरण के लिए तीन दिन का नोटिस जारी किया है। कार्रवाई के दौरान सिटी मजिस्ट्रेट एपी वाजपेयी, एसडीएम मोनिका आर्या, जिला विकास प्राधिकरण के सचिव मनीष कुमार, फायर ब्रिगेड अधिकारी मिंदर पाल सहित संबंधित विभागों की संयुक्त टीम मौजूद रही।

सिटी मजिस्ट्रेट एपी वाजपेयी और प्राधिकरण सचिव मनीष कुमार ने कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सुरक्षा मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन संस्थानों में निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाएगा, उनके खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

गौरतलब है कि हल्द्वानी में मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले बड़ी संख्या में कोचिंग संस्थान संचालित हैं, जहां हजारों छात्र अध्ययन करते हैं। ऐसे में छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रशासन द्वारा यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है।


प्रदीप एकेडमी-1 – सील
प्रदीप एकेडमी-2 – सील
जयश्री कॉलेज, हल्द्वानी – सील
तुषार पन्त पी.एम.टी. क्लासेस – सील
जीत IAS कोचिंग सेंटर, दुर्गा सिटी – सील
फिजिक्स कोचिंग सेंटर (तृतीय तल, दुर्गा सिटी) – सील

संकल्प कोचिंग सेंटर- सील

कल्पवृक्ष इंस्टिट्यूट फायर NOC होने के कारण कमियों के निराकरण के लिए 03 दिन का नोटिस दिया गया।

उत्तराखंड: कॉर्बेट घूमने आए पर्यटक फंसे विवाद में, रिसॉर्ट से सीधे पहुंच गए जेल

RamnagarNews | CorbettResort | NainitalNews : नैनीताल जिले के रामनगर क्षेत्र में स्थित एक रिसॉर्ट में पर्यटकों, जिप्सी चालक और रिसॉर्ट संचालक के बीच हुए विवाद का मामला पुलिस तक पहुंच गया। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जांच जारी है।

पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार 24 जून को दो पर्यटक ऑनलाइन बुकिंग के माध्यम से एक रिसॉर्ट में ठहरे थे। दिन में वे जंगल सफारी के लिए गए और शाम को वापस लौटे। इसके बाद जिप्सी चालक भी उनके कमरे में पहुंच गया।

रिसॉर्ट संचालक का आरोप है कि कमरे में जिप्सी चालक की मौजूदगी को लेकर पूछताछ करने पर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। विवाद बढ़ने पर गाली-गलौज और मारपीट की स्थिति बन गई। संचालक ने आरोप लगाया कि उन्हें धमकी भी दी गई।

घटना की सूचना पुलिस को दी गई…जिसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस के अनुसार मौके पर मौजूद अधिकारियों के साथ भी कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया गया। इस संबंध में पुलिस ने अलग-अलग शिकायतों के आधार पर मुकदमे दर्ज किए हैं।

पुलिस ने मामले में शामिल तीन लोगों को हिरासत में लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। वही एक महिला पुलिस अधिकारी की शिकायत पर सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने और अभद्रता से जुड़े आरोपों में अलग मामला भी दर्ज किया गया है।

रामनगर पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। जांच के दौरान जो भी तथ्य और साक्ष्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल दोनों मामलों में जांच जारी है।

उत्तराखंड के हजारों परिवारों का सपना होगा पूरा! सिर्फ 3 लाख रुपये में मिलेगा अपना घर

PMAYUrban | Dehradun | UttarakhandNews : उत्तराखंड सरकार जल्द ही आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को अपना घर देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत उधम सिंह नगर जिले के रुद्रपुर स्थित बागवाला क्षेत्र में बनाए गए 1872 आवासों का आवंटन जल्द शुरू किया जाएगा।

सरकारी जानकारी के अनुसार परियोजना के तहत 832 फ्लैट पूरी तरह तैयार हो चुके हैं…जबकि 500 से अधिक फ्लैटों का निर्माण अंतिम चरण में है। इन आवासों का निर्माण आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए किया गया है।

बताया गया है कि एक फ्लैट के निर्माण पर करीब 6 लाख रुपये की लागत आई है…लेकिन पात्र लाभार्थियों को यह आवास केवल 3 लाख रुपये में उपलब्ध कराया जाएगा। शेष राशि केंद्र और राज्य सरकार की ओर से सब्सिडी के रूप में वहन की जाएगी।

करीब 39 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में विकसित इस आवासीय परियोजना में 23 बहुमंजिला भवन बनाए गए हैं। प्रत्येक फ्लैट में एक बेडरूम, ड्राइंग रूम, रसोईघर, शौचालय, स्नानघर और बरामदा की सुविधा दी गई है। सभी भवनों का निर्माण भूकंपरोधी तकनीक से किया गया है।

परियोजना में आधुनिक सुविधाओं का भी ध्यान रखा गया है। परिसर में वर्षा जल संचयन प्रणाली, सीवरेज नेटवर्क, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तथा बच्चों और बुजुर्गों के लिए पार्क की व्यवस्था की गई है।

आवास पाने के इच्छुक लोगों को आवेदन के लिए 5 हजार रुपये जमा करने होंगे। बाकी राशि के लिए बैंक ऋण की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। लाभार्थियों का चयन कंप्यूटर आधारित लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा।

योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का प्रधानमंत्री आवास योजना के पोर्टल पर पंजीकरण होना जरूरी है। साथ ही आवेदक उत्तराखंड का निवासी होना चाहिए और उसकी वार्षिक आय 3 लाख रुपये या उससे कम होनी चाहिए। इसके अलावा आवेदक या उसके परिवार के किसी सदस्य के नाम पर देश में कहीं भी पक्का मकान नहीं होना चाहिए।

सरकार का कहना है कि इस योजना से हजारों जरूरतमंद परिवारों का अपने घर का सपना पूरा होगा और उन्हें बेहतर जीवन की सुविधा मिल सकेगी।

ब्रिटेन में हिरासत के बीच कैप्टन अजय पंत को लेकर क्या बोला भारतीय हाई कमीशन? जानिए पूरी बात

AjayPant | UttarakhandNews | UKIndianCaptain : उत्तराखंड के रामनगर निवासी कैप्टन अजय पंत इस समय ब्रिटेन में न्यायिक हिरासत में हैं। उन्हें कानूनी सहायता और अन्य जरूरी मदद उपलब्ध कराने के लिए भारत सरकार, भारतीय उच्चायोग और उत्तराखंड सरकार लगातार प्रयास कर रही हैं।

जानकारी के अनुसार लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने हाल ही में कैप्टन अजय पंत से संपर्क किया। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि उनकी तबीयत ठीक है और उन्हें जेल में आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने परिवार, विशेष रूप से पत्नी के संपर्क में हैं।

भारतीय उच्चायोग ने उत्तराखंड सरकार को मामले की जानकारी देते हुए कहा कि कैप्टन पंत को सभी आवश्यक कांसुलर सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही ब्रिटेन के संबंधित अधिकारियों के समक्ष भी यह मामला उठाया गया है…ताकि उनके कानूनी अधिकारों और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जा सके।

बताया गया है कि कैप्टन अजय पंत के परिवार, उनके नियोक्ता और कानूनी प्रतिनिधियों के साथ भी नियमित संपर्क बनाए रखा जा रहा है। संबंधित कंपनी ने उन्हें कानूनी सहायता देने और परिवार को हर संभव सहयोग उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है।

मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है। भारतीय उच्चायोग ने आश्वासन दिया है कि कैप्टन पंत और उनके परिवार को हर आवश्यक सहायता मिलती रहेगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार अपने नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इस मामले में विदेश मंत्रालय, भारत सरकार और भारतीय उच्चायोग के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है।

गौरतलब है कि कैप्टन अजय पंत एक अंतरराष्ट्रीय तेल टैंकर के कप्तान हैं। ब्रिटेन की जांच एजेंसी ने उन पर प्रतिबंधित रूसी तेल परिवहन से जुड़े नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। फिलहाल मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया जारी है, जबकि भारतीय पक्ष उनकी कानूनी सहायता और अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में जुटा हुआ है।