नैनीताल में पुलिस पर हमला! ड्यूटी के दौरान कांस्टेबल की वर्दी फाड़ी, 13 लोगों पर दर्ज हुआ मुकदमा

Nainital | PoliceAssault | Bhujiyaghat : नैनीताल जिले के भुजियाघाट क्षेत्र में ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप है कि सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस टीम पर कुछ युवकों ने हमला कर दिया। इस दौरान एक कांस्टेबल के साथ मारपीट की गई…उसकी वर्दी फाड़ दी गई और जान से मारने की धमकी भी दी गई। पुलिस ने इस मामले में पांच नामजद और आठ अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार ज्योलीकोट चौकी में तैनात पुलिसकर्मी और पीआरडी जवान क्षेत्र में यातायात व्यवस्था संभाल रहे थे। इसी दौरान उन्हें सूचना मिली कि एक वाहन में सवार कुछ लोग होटल में खाना खाने के बाद बिना भुगतान किए वहां से निकल गए हैं।

सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम संबंधित वाहन का इंतजार कर रही थी। इसी बीच बताया गया कि वाहन सवार युवकों ने सूचना देने वाले व्यक्ति के साथ मारपीट कर सड़क पर हंगामा शुरू कर दिया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची तो आरोप है कि वहां मौजूद 10 से 15 युवक पुलिसकर्मियों से भी उलझ गए।

शिकायत के मुताबिक आरोपियों ने ड्यूटी पर तैनात कांस्टेबल के साथ धक्का-मुक्की की, उसकी वर्दी फाड़ दी और जान से मारने की धमकी दी। पुलिस जब सूचना देने वाले व्यक्ति को सुरक्षित चौकी ले जाने लगी तो आरोपियों ने सड़क पर रुकावट डालने की भी कोशिश की।

हंगामे की सूचना मिलने पर स्थानीय लोग भी मौके पर पहुंच गए। इसके बाद आरोपी वाहन लेकर वहां से फरार हो गए।

पुलिस ने शिकायत के आधार पर पांच नामजद और आठ अज्ञात लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामले की जांच जारी है और आरोपियों की तलाश की जा रही है।

उत्तराखंड: पति ने इलाज के बहाने पत्नी को दिया जहर, अब हुआ गिरफ्तार

Haridwar | CrimeNews | Uttarakhand : हरिद्वार जिले की बहादराबाद पुलिस ने करीब पांच महीने पहले हुई एक महिला की संदिग्ध मौत के मामले का खुलासा करते हुए उसके पति को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर आरोपी पर पत्नी की हत्या का आरोप लगाया गया है।

पुलिस के अनुसार मामला 4 फरवरी 2026 का है। महिला के भाई ने बहादराबाद थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी बहन को उसके पति ने इलाज के बहाने पानी में जहरीला पदार्थ मिलाकर पिला दिया था। इसके बाद महिला की तबीयत बिगड़ गई और उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए गए और पोस्टमार्टम के बाद विसरा जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) भेजा गया। जांच रिपोर्ट में महिला की मौत जहरीले पदार्थ के सेवन से होने की पुष्टि हुई।

इसके बाद पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और अन्य तथ्यों के आधार पर मामले की गहराई से जांच की। जांच में आरोपी पति की भूमिका सामने आने पर उसकी तलाश शुरू की गई। पुलिस के अनुसार आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार फरार चल रहा था।

शनिवार को सूचना मिली कि आरोपी क्षेत्र छोड़कर भागने की कोशिश में बढ़ेड़ी राजपूताना हाईवे पुल के पास मौजूद है। सूचना मिलते ही पुलिस ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ के दौरान आरोपी ने कहा कि वह अपनी पत्नी की बीमारी से परेशान था। पुलिस का आरोप है कि इसी कारण उसने जहरीला पदार्थ देकर उसकी हत्या की साजिश रची।

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में कार्रवाई करते हुए उसे न्यायालय में पेश कर दिया। मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।

उत्तराखंड: खिलौनों की उम्र में बल्ला और ग्लव्स थामे 5 साल की वेदिका, मैदान पर दिखा रही गजब का टैलेंट; लक्ष्य टीम इंडिया

Dehradun | Uttarakhand | vedikaa Varma : जिस उम्र में अधिकांश बच्चे खिलौनों और खेलकूद में व्यस्त रहते हैं उसी उम्र में देहरादून की पांच वर्षीय वेदिका वर्मा क्रिकेट के मैदान पर अपने हुनर से सभी का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। महज आठ महीने पहले क्रिकेट खेलना शुरू करने वाली वेदिका आज अपनी शानदार विकेटकीपिंग, फुर्तीली फील्डिंग और आत्मविश्वास से भरी बल्लेबाजी के दम पर अलग पहचान बना रही हैं।

वेदिका लिटिल मास्टर क्रिकेट क्लब में नियमित अभ्यास करती हैं। छोटी उम्र के बावजूद वह अपने से बड़े खिलाड़ियों के साथ पूरे आत्मविश्वास से मैदान में उतरती हैं। विकेट के पीछे उनकी तेजी और गेंद पकड़ने की क्षमता देखकर कोच भी प्रभावित हैं। वह तेज रफ्तार से आने वाली गेंदों को आसानी से ग्लव्स में समेट लेती हैं और फील्डिंग के दौरान भी अपनी चुस्ती से सभी को हैरान कर देती हैं।

बल्लेबाजी में भी वेदिका लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। उनके शॉट और तकनीक उम्र से कहीं अधिक परिपक्व दिखाई देते हैं। पिछले आठ महीनों से वह क्रिकेट कोच किरण शाह और नरेंद्र शाह के मार्गदर्शन में खेल की बारीकियां सीख रही हैं।

वेदिका का अनुशासन भी अन्य बच्चों के लिए प्रेरणा बन रहा है। वह हर दिन अभ्यास शुरू करने से पहले मैदान के पांच चक्कर लगाकर दौड़ती हैं और फिर कई घंटों तक नेट्स में मेहनत करती हैं। यही लगन और मेहनत उन्हें लगातार आगे बढ़ा रही है।

वेदिका वर्तमान में कक्षा एक की छात्रा हैं और नेहरूग्राम स्थित अकेशिया पब्लिक स्कूल में पढ़ाई कर रही हैं। उनके पिता विमल वर्मा प्लंबर का कार्य करते हैं…जबकि माता सोमती वर्मा गृहिणी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार बेटी के सपनों को पूरा करने में हर संभव सहयोग कर रहा है। उनके बड़े भाई शौर्य वर्मा भी उन्हें लगातार प्रोत्साहित करते हैं।

वेदिका भारतीय क्रिकेट के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर को अपना आदर्श मानती हैं। उनका सपना भविष्य में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की जर्सी पहनकर देश का प्रतिनिधित्व करना है।

क्रिकेट कोच नरेंद्र शाह का कहना है कि इतनी कम उम्र में वेदिका का खेल के प्रति समर्पण, अनुशासन और सीखने की ललक बेहद प्रेरणादायक है। उनका मानना है कि यदि वेदिका इसी तरह मेहनत करती रहीं तो आने वाले समय में वह उत्तराखंड ही नहीं…बल्कि पूरे देश का नाम रोशन कर सकती हैं।

वेदिका की मेहनत और जुनून यह साबित करता है कि अगर हौसले बुलंद हों और परिवार का साथ मिले…तो छोटी उम्र भी बड़े सपनों की राह में बाधा नहीं बनती।

हल्द्वानी में स्मार्ट मीटर लगते ही दोगुना आया बिजली बिल! भड़के लोगों ने ऊर्जा निगम कार्यालय घेरा

Haldwani | SmartMeter | ElectricityBill : स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर हल्द्वानी में एक बार फिर लोगों का विरोध सामने आया है। शनिवार को राजपुरा क्षेत्र के कई लोगों ने ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता (ईई) कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। लोगों का आरोप है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली के बिल पहले की तुलना में काफी ज्यादा आने लगे हैं।

युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष हेमंत साहू के नेतृत्व में बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी ऊर्जा निगम कार्यालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय परिसर में धरना दिया…और नारेबाजी करते हुए बढ़े हुए बिजली बिलों को वापस लेने की मांग की।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पहले जहां उनके घरों का बिजली बिल करीब 1000 से 1500 रुपये तक आता था…वहीं स्मार्ट मीटर लगने के बाद कई उपभोक्ताओं का बिल दोगुना तक पहुंच गया है। उनका आरोप है कि बिना सहमति के स्मार्ट मीटर लगाए गए…जिससे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों ने मांग की कि जिन उपभोक्ताओं के बिल अधिक आए हैं…उनमें सुधार किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

वहीं ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता प्रदीप कुमार ने कहा कि कई उपभोक्ताओं के पुराने मीटर की कुछ यूनिट पहले से लंबित थीं। स्मार्ट मीटर लगने के बाद जारी पहले बिल में वही बकाया यूनिट भी शामिल हो गईं…जिससे बिल अधिक दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि यदि किसी उपभोक्ता को बिल में किसी प्रकार की गड़बड़ी लगती है तो वह लिखित शिकायत दे सकता है…जिसकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

उत्तराखंड: स्मार्ट मीटर नहीं लगाया तो काट दी बिजली! ऊर्जा निगम की कार्रवाई से भड़के व्यापारी

Pithoragarh | SmartMeter | UttarakhandNews : उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। शनिवार को पुराना बाजार क्षेत्र में स्मार्ट मीटर लगवाने से इनकार करने वाले करीब एक दर्जन व्यापारियों के बिजली कनेक्शन काट दिए गए। इससे व्यापारियों में नाराजगी फैल गई और उन्होंने इसका विरोध शुरू कर दिया।

जानकारी के अनुसार नगर में पिछले एक वर्ष से स्मार्ट मीटर लगाने का अभियान चल रहा है। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली के बिल पहले से अधिक आ रहे हैं। इसी वजह से कई व्यापारी नए मीटर लगाने के पक्ष में नहीं हैं।

बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले ऊर्जा निगम की टीम ने पुराना बाजार पहुंचकर व्यापारियों से स्मार्ट मीटर लगाने को कहा था…लेकिन व्यापारियों ने मना कर दिया। इसके बाद उन्हें नोटिस जारी किए गए।

शनिवार सुबह निगम के कर्मचारी फिर बाजार पहुंचे और व्यापारियों से स्मार्ट मीटर लगाने को कहा। जब उन्होंने दोबारा इनकार किया तो करीब एक दर्जन दुकानों के बिजली कनेक्शन काट दिए गए।

बिजली आपूर्ति बंद होने से कई व्यापारियों को नुकसान भी उठाना पड़ा। व्यापारियों का कहना है कि बिजली नहीं होने से आइसक्रीम और अन्य खराब होने वाले सामान पिघलकर खराब हो गए…जिससे आर्थिक नुकसान हुआ।

घटना की जानकारी मिलने पर स्थानीय पार्षद के नेतृत्व में व्यापारी एकत्र हो गए और विरोध की तैयारी शुरू कर दी। विरोध की सूचना मिलते ही ऊर्जा निगम के कर्मचारी कुछ घंटे बाद दोबारा मौके पर पहुंचे और कुछ दुकानों के बिजली कनेक्शन फिर से जोड़ दिए। हालांकि देर शाम तक कई व्यापारियों की बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी।

व्यापारियों ने मांग की है कि स्मार्ट मीटर को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतों का समाधान किया जाए और बिना सहमति बिजली कनेक्शन काटने जैसी कार्रवाई न की जाए।

नैनीताल जिले में स्कूलों को एक्ट्रा फीस वापस करने के निर्देश, एक रुपए में देनी होगी TC

Nainital: Schools: Transfer Certificate: नैनीताल जनपद में निजी विद्यालयों द्वारा मनमाने ढंग से फीस वसूले जाने के मामलों पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देशों और अनुमोदन के बाद मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविन्द राम जायसवाल ने सभी निजी विद्यालयों के लिए शुल्क निर्धारण एवं वसूली संबंधी विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई से हजारों अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है।

मुख्य शिक्षा अधिकारी ने बताया कि कई निजी विद्यालय शिक्षण शुल्क के अतिरिक्त प्रवेश शुल्क, विकास शुल्क, परीक्षा शुल्क तथा अन्य विभिन्न मदों में अनाधिकृत एवं मनमाना शुल्क वसूल रहे थे। अब जारी आदेश के अनुसार प्रवेश शुल्क केवल वास्तविक एवं औचित्यपूर्ण व्यय के आधार पर ही लिया जा सकेगा। शिक्षण शुल्क और परीक्षा शुल्क के अलावा लिए जाने वाले अन्य शुल्कों को समायोजित कर केवल विकास शुल्क के रूप में निर्धारित किया जाएगा, जिसे न्यूनतम रखा जाएगा तथा इसके लिए अभिभावक-शिक्षक संघ (PTA) की स्वीकृति अनिवार्य होगी। किसी अन्य नाम से अतिरिक्त शुल्क वसूलने की अनुमति नहीं होगी।

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि राज्य सरकार द्वारा बोर्ड संबद्धता के लिए जारी एनओसी की शर्तों के अनुसार निजी विद्यालय तीन वर्षों की अवधि में अधिकतम 10 प्रतिशत तक ही शुल्क वृद्धि कर सकेंगे और इसके लिए भी PTA की मंजूरी आवश्यक होगी। मनमानी फीस वृद्धि को नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।

विद्यालयों को पूरे शैक्षिक सत्र में केवल चार मासिक परीक्षाएं, एक अर्द्धवार्षिक तथा एक वार्षिक परीक्षा आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। बोर्ड कक्षाओं में अधिकतम एक या दो प्री-बोर्ड परीक्षाएं ही आयोजित की जा सकेंगी। परीक्षा शुल्क वास्तविक लागत के आधार पर निर्धारित होगा तथा किसी भी स्थिति में उच्चतम कक्षा के लिए यह 600 रुपये से अधिक नहीं होगा। वहीं स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टीसी) शुल्क केवल एक रुपये निर्धारित किया गया है।

अभिभावकों की सुविधा के लिए विद्यालयों को मासिक, त्रैमासिक, छमाही अथवा वार्षिक शुल्क भुगतान का विकल्प उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी अभिभावक को एकमुश्त शुल्क जमा करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा तथा प्रत्येक भुगतान की रसीद देना अनिवार्य होगा।

आदेश का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि शैक्षिक सत्र 2026-27 में विभिन्न मदों में वसूले गए अतिरिक्त शुल्क का समायोजन 1 जुलाई 2026 के शिक्षण शुल्क में किया जाएगा। यदि अतिरिक्त वसूली गई राशि जुलाई माह के शुल्क से अधिक होगी तो शेष धनराशि आगामी महीनों की फीस में समायोजित करनी होगी। सभी विद्यालयों को सात दिनों के भीतर समायोजन का प्रमाणित विवरण शिक्षा विभाग को उपलब्ध कराना होगा।

जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने कहा कि शिक्षा के नाम पर अभिभावकों का आर्थिक शोषण किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविन्द राम जायसवाल ने चेतावनी दी है कि आदेशों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों के खिलाफ शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act), सीबीएसई बायलॉज एवं अन्य प्रचलित नियमों के तहत एक लाख रुपये से लेकर पांच लाख रुपये तक का आर्थिक दंड, मान्यता समाप्त करने, एनओसी निरस्त करने सहित कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

जिला प्रशासन की इस पहल को निजी विद्यालयों की शुल्क व्यवस्था में पारदर्शिता लाने तथा अभिभावकों के हितों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

हल्द्वानी के अजय महरा की बड़ी उपलब्धि, परमाणु ऊर्जा विभाग में वैज्ञानिक बनकर किया उत्तराखंड का नाम रोशन

AjayMehra | Haldwani | Scientist | UttarakhandNews : उत्तराखंड के हल्द्वानी के युवा अजय महरा ने अपनी मेहनत और लगन से बड़ी सफलता हासिल करते हुए देश के परमाणु ऊर्जा विभाग (Department of Atomic Energy) में वैज्ञानिक पद पर चयन प्राप्त किया है। उनकी इस उपलब्धि से पूरे नैनीताल जिले और उत्तराखंड में खुशी का माहौल है।

मूल रूप से नैनीताल जिले के ओखलकांडा ब्लॉक के भद्रकोट गांव निवासी अजय महरा बचपन से ही पढ़ाई में बेहद मेधावी रहे हैं। उन्होंने हल्द्वानी के सेंट लॉरेंस पब्लिक स्कूल से हाईस्कूल में 96 प्रतिशत अंक और इंटरमीडिएट उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ पास किया। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के दयाल सिंह कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई पूरी की….जहां उन्हें मेधावी छात्र के रूप में छात्रवृत्ति भी मिली।

उच्च शिक्षा के लिए अजय ने एमबीजीपीजी कॉलेज हल्द्वानी से एमएससी (भौतिक विज्ञान) की पढ़ाई की। उन्होंने जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF-NET) परीक्षा भी उत्तीर्ण की। वर्ष 2026 में आयोजित GATE परीक्षा में उन्होंने पूरे देश में 22वीं रैंक हासिल की। इसके बाद परमाणु ऊर्जा विभाग में फिजिक्स विषय के कुल 29 वैज्ञानिक पदों के लिए हुए चयन में उन्होंने सफलता प्राप्त की।

अजय महरा की सफलता की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने पूरी पढ़ाई के दौरान किसी भी कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया। उन्होंने केवल सेल्फ स्टडी के दम पर यह मुकाम हासिल किया…जो आज के युवाओं के लिए प्रेरणा का बड़ा उदाहरण है।

अजय के पिता धरम सिंह महरा असम राइफल्स में कार्यरत हैं। उनकी माता दीपा महरा का तीन वर्ष पहले कैंसर के कारण निधन हो गया था। कठिन पारिवारिक परिस्थितियों के बावजूद अजय ने पढ़ाई जारी रखी और अपनी मां की बीमारी के दौरान उनकी देखभाल भी करते रहे। उनकी छोटी बहन काजल महरा भी प्रतिभाशाली छात्रा हैं और उन्होंने आईआईटी जैम परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 325 हासिल की है।

अपनी सफलता पर अजय महरा ने इसका श्रेय अपने माता-पिता, परिवार और लगातार की गई मेहनत को दिया। उनकी उपलब्धि पर शिक्षा, सामाजिक और व्यापारिक क्षेत्र से जुड़े कई लोगों ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि अजय ने उत्तराखंड के युवाओं के लिए नई प्रेरणा पेश की है।

अजय महरा की यह उपलब्धि साबित करती है कि कठिन परिस्थितियों में भी यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए…तो सफलता जरूर मिलती है। उनकी इस उपलब्धि से पूरे उत्तराखंड को गर्व महसूस हो रहा है।

राइजिंग सिटी प्रोग्राम मे बोले सीएम धामी, ऊधम सिंह नगर है अर्थव्यवस्था का प्रमुख ग्रोथ इंजन

PushkarSinghDhami : Rudrapur : RisingCity : Uttarakhan : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को रुद्रपुर में आयोजित ‘राइजिंग सिटी’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड के विकास, उद्योग, रोजगार, स्वास्थ्य, सड़क संपर्क, कानून व्यवस्था और सुशासन से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड को विकास के नए शिखर तक पहुंचाना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊधम सिंह नगर उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का सबसे मजबूत आधार है और रुद्रपुर आज प्रदेश की औद्योगिक राजधानी के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुका है। उन्होंने कहा कि इस जिले ने उद्योग, निवेश और रोजगार के क्षेत्र में लगातार प्रगति की है…जिससे पूरे राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड में सड़क संपर्क व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव आया है। ऑल वेदर रोड, एक्सप्रेस-वे और अन्य सड़क परियोजनाओं के पूरा होने से यात्रा पहले की तुलना में अधिक आसान, सुरक्षित और तेज हुई है। इसका सीधा लाभ उद्योग, व्यापार, पर्यटन और आम लोगों को मिल रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किच्छा में दूसरे एम्स का निर्माण तेजी से चल रहा है। इसके शुरू होने के बाद ऊधम सिंह नगर के साथ पूरे कुमाऊं मंडल और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस परियोजना को जल्द पूरा कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज का निर्माण भी अंतिम चरण में है और इसे जल्द जनता को समर्पित किया जाएगा। वहीं पंतनगर एयरपोर्ट का विस्तार भी तेजी से किया जा रहा है। एयरपोर्ट के विकसित होने के बाद यहां से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संभावना बढ़ेगी, जिससे पर्यटन, उद्योग, व्यापार और निवेश को नई गति मिलेगी और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मेलाघाट, सिसैया और नारायण नगर जैसे सीमांत गांवों के विकास पर सरकार विशेष ध्यान दे रही है। प्रधानमंत्री की “प्रथम गांव” की सोच के अनुरूप इन क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है…ताकि सीमांत क्षेत्रों के लोगों को भी विकास का पूरा लाभ मिल सके।

उन्होंने कहा कि ऊधम सिंह नगर को “मिनी इंडिया” कहा जाता है….क्योंकि यहां देश के अलग-अलग राज्यों के लोग वर्षों से आपसी भाईचारे और सौहार्द के साथ रह रहे हैं। यही विविधता इस जिले की सबसे बड़ी ताकत है।

मुख्यमंत्री ने सरकार की कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि भू-माफियाओं के खिलाफ अभियान चलाकर अब तक 12 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया गया है। उन्होंने साफ कहा कि सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा और इस भूमि का उपयोग केवल जनहित के कार्यों के लिए किया जाएगा।

उन्होंने युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बताते हुए कहा कि उत्तराखंड में देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। इस कानून के बाद 100 से अधिक नकल माफियाओं को जेल भेजा गया…जिससे भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ी है और युवाओं का विश्वास मजबूत हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए दंगा विरोधी कानून भी लागू किया गया है। अब यदि कोई व्यक्ति सरकारी या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाएगा तो उसकी भरपाई उसी से कराई जाएगी। इससे प्रदेश में कानून का डर बढ़ा है और अराजक गतिविधियों पर रोक लगी है।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा जब देश का हर राज्य और हर जिला समान रूप से विकसित होगा। उत्तराखंड सरकार इसी सोच के साथ काम कर रही है। राज्य सरकार का उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित, आत्मनिर्भर, समृद्ध और विकसित उत्तराखंड देना है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और राज्य सरकार के निरंतर प्रयासों से ऊधम सिंह नगर सहित पूरा उत्तराखंड विकास के नए आयाम स्थापित करेगा और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस अवसर पर परिवहन एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री प्रदीप बत्रा, सांसद अजय भट्ट, विधायक शिव अरोरा, त्रिलोक सिंह चीमा, जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्य, मेयर विकास शर्मा, दीपक बाली, दर्जा मंत्री अनिल कपूर डब्बू, हुकम सिंह कुंवर, उत्तम दत्ता, जिलाध्यक्ष कमल जिंदल, मनोज पाल, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, अपर जिलाधिकारी कौस्तुभ मिश्रा, पंकज उपाध्याय सहित कई जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

उत्तराखंड के इस वीर की कहानी हर युवा को जाननी चाहिए, पढ़िए 112 साल बाद सामने आई शौर्यगाथा

Rudraprayag Soldier Story | First World War Hero | Rifleman Bahadur Singh Rawat : उत्तराखंड की धरती को यूं ही वीरों की भूमि नहीं कहा जाता। यहां के कई सैनिकों ने देश और मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है। ऐसी ही एक गौरवपूर्ण कहानी लगभग 112 साल बाद फिर से सामने आई है…जिसने पूरे उत्तराखंड को गर्व से भर दिया है।

यह कहानी रुद्रप्रयाग जिले के राइफलमैन बहादुर सिंह रावत की है…जिन्होंने प्रथम विश्व युद्ध में देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था। लंबे समय तक उनका नाम इतिहास के पन्नों में दबा रहा…लेकिन अब सेना के अभिलेखों और ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर उनकी शौर्यगाथा फिर से प्रकाश में आई है।

बहादुर सिंह रावत का जन्म वर्ष 1880 में रुद्रप्रयाग के अगस्त्यमुनि क्षेत्र के ग्राम फलई तल्ला कालीफाट में हुआ था। मात्र 21 वर्ष की उम्र में उन्होंने 1901 में रॉयल गढ़वाल राइफल्स में भर्ती होकर देश सेवा का संकल्प लिया। वर्ष 1914 में जब प्रथम विश्व युद्ध शुरू हुआ तो उनकी बटालियन को फ्रांस भेजा गया।

इसी युद्ध में 7 नवंबर 1914 को फ्रांस के यप्रेस क्षेत्र में हुए भीषण संघर्ष के दौरान राइफलमैन बहादुर सिंह रावत ने अदम्य साहस दिखाते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी। उनके इस सर्वोच्च बलिदान के सम्मान में ब्रिटिश सरकार ने उनके परिवार को ‘वीर स्मृति पदक’ भी प्रदान किया था।

इस पदक पर अंकित संदेश में लिखा है कि उन्होंने स्वतंत्रता और सम्मान के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए। उस समय सीमित रिकॉर्डिंग व्यवस्था के कारण उनकी वीरता की कहानी सामने नहीं आ सकी…लेकिन अब ऐतिहासिक शोध और दस्तावेजों से उनकी शहादत की पुष्टि हुई है।

सेना के रिकॉर्ड से यह भी स्पष्ट हुआ है कि उनका नाम लैंसडाउन युद्ध स्मारक, नई दिल्ली स्थित इंडिया गेट और फ्रांस के न्यू चैपल युद्ध स्मारक पर सम्मानपूर्वक अंकित है।

इस ऐतिहासिक तथ्य के सामने आने के बाद रुद्रप्रयाग और पूरे उत्तराखंड में खुशी और गर्व का माहौल है। लैंसडाउन छावनी के स्टेशन कमांडर ब्रिगेडियर विनोद सिंह नेगी ने शहीद के परिजनों को सम्मानित कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

सामाजिक कार्यकर्ता अजय भट्ट ने कहा कि लगभग 112 वर्षों बाद यह प्रमाण सामने आना पूरे राज्य और देश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि ऐसे वीरों की कहानियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना बेहद जरूरी है।

शहीद के परिवार की तीसरी पीढ़ी के सदस्य प्रमोद रावत, मोहित रावत और प्रदीप रावत को जब पुराने दस्तावेज और मेडल मिला तो उन्होंने लैंसडाउन जाकर सेना से संपर्क किया। जांच के बाद सभी रिकॉर्ड सामने आए और बहादुर सिंह रावत के बलिदान की पुष्टि हुई।

परिजनों ने मांग की है कि उनके पूर्वज की स्मृति में गांव या क्षेत्र में स्मारक बनाया जाए…ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके बलिदान से प्रेरणा ले सकें।

उत्तराखंड: सीमा पर हुए हंगामे के बाद पुलिस का एक्शन, निहंगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज

Vikasnagar Clash | Nihang Protest | Paonta Border | Uttarakhand : पांवटा-कुल्हाल सीमा क्षेत्र में कानून व्यवस्था बिगाड़ने के मामले में पुलिस ने अज्ञात निहंगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। आरोप है कि गुरुवार रात निहंगों ने हथियारों के साथ जमकर हंगामा किया और पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ दी।

पुलिस के अनुसार निहंगों ने तलवार, फरसा, भाला और कुल्हाड़ी जैसे हथियार लहराते हुए पुलिस बल को डराने की कोशिश की। इस दौरान बैरिकेडिंग के पास खड़े कुछ वाहनों को भी नुकसान पहुंचा और हालात तनावपूर्ण हो गए।

मामला उस समय और बढ़ गया जब निहंगों ने बैरिकेडिंग तोड़ते हुए तेज रफ्तार में वाहन आगे बढ़ा दिए। आरोप है कि इस दौरान उन्होंने पुलिसकर्मियों की ओर वाहन मोड़ने का प्रयास किया…जिससे मौके पर तैनात जवानों की जान खतरे में पड़ गई।

घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और आम लोगों में दहशत का माहौल बन गया। पुलिस ने तुरंत स्थिति को नियंत्रित किया और अतिरिक्त बल तैनात किया।

कुल्हाल चौकी प्रभारी की तहरीर पर दर्ज मामले में कहा गया है कि निहंगों ने पहले भी कर्णप्रयाग घटना के बाद इंटरनेट मीडिया पर जुटने की अपील की थी। इसके बाद प्रशासन ने सीमा पर भारी पुलिस बल, पीएसी और आईटीबीपी तैनात की थी।

पुलिस ने कहा कि कई दौर की बातचीत में निहंगों को बिना हथियार यात्रा करने और छोटे समूहों में आगे बढ़ने का प्रस्ताव दिया गया था….लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया।

विकासनगर कोतवाल ने कहा कि सभी घटनाओं के वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है और जल्द गिरफ्तारी की जाएगी।