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Uttarakhand Weather | Heavy Rain Alert | IMD Forecast : उत्तराखंड में बारिश का दौर लगातार जारी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के लिए 3 से 8 सितंबर तक मौसम का पूर्वानुमान जारी किया है। इस दौरान कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। वहीं 2 सितंबर को राज्य के कुछ इलाकों में बहुत भारी बारिश का भी अनुमान है।
मौसम विभाग के अनुसार गुरुवार 3 सितंबर से मंगलवार 8 सितंबर के बीच उत्तराखंड के कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। इसके चलते पहाड़ी क्षेत्रों में पहले से बनी समस्याएं और बढ़ सकती हैं।
उत्तराखंड मौसम विभाग देहरादून की ओर से भी 8 सितंबर तक का पूर्वानुमान जारी किया गया है। इसके मुताबिक 2 से 8 सितंबर के बीच राज्य के सभी जिलों में अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।
इस दौरान कई जगह बादल गरजने के साथ आकाशीय बिजली गिरने की आशंका भी जताई गई है। लोगों को मौसम की स्थिति को देखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में पिछले कई दिनों से बारिश हो रही है। लगातार बारिश के कारण गढ़वाल और कुमाऊं दोनों मंडलों में कई जगह सड़कें बाधित हुई हैं।
संबंधित विभाग बंद सड़कों को खोलने में लगातार जुटे हुए हैं। हालांकि कई स्थानों पर सड़क खोलने के बाद दोबारा भूस्खलन होने से परेशानी बनी हुई है। इसके बावजूद टीमें प्रभावित मार्गों को खोलने का काम कर रही हैं।
लगातार बारिश और प्राकृतिक आपदाओं के कारण जान-माल का नुकसान भी हुआ है। कुमाऊं मंडल में प्राकृतिक आपदाओं से अब तक छह लोगों की मौत की जानकारी कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत ने दी है।
देहरादून जिले में भी बारिश के दौरान अलग-अलग घटनाओं में जान गई है। सोमवार रात एक कार के बह जाने से एक युवक और एक युवती की मौत हुई थी। इसके अलावा देहरादून में उफनते नाले में बहने से एक वैज्ञानिक के 12 वर्षीय बेटे की मौत हो गई। एक श्रमिक के बेटे की भी नहर में गिरने से जान चली गई।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए आने वाले दिनों में लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।

Uttarakhand Madrasa Action | Bajpur News | Madrasa Verification : उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के बाजपुर क्षेत्र में बिना जरूरी मान्यता और दस्तावेजों के संचालित बताए जा रहे चार मदरसों के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई की है। प्रशासन की टीम ने चार मदरसों को सील कर दिया है। वहीं क्षेत्र के अन्य मदरसों की भी जांच की जा रही है।
प्रशासन की यह कार्रवाई मदरसों की मान्यता और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े नियमों के तहत की जा रही जांच का हिस्सा बताई गई है।
एसडीएम ऋचा सिंह और कोतवाली निरीक्षक नरेश चौहान के नेतृत्व में पुलिस बल के साथ प्रशासन की टीम ने सीलिंग की कार्रवाई की। अधिकारियों के अनुसार आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने पर इन चार मदरसों को सील किया गया है।
सील किए गए मदरसों में:
मदरसा जामिया हनफिया रजाउत उलूम, बाजपुर
मदरसा गुलशने इस्लाम, कनोरा
मदरसा जामिया फातिमा, बाजपुर
मदरसा मोइनुल उलूम, मोहल्ला गांधीनगर, केलाखेड़ा
शामिल हैं।
जिला प्रशासन के अनुसार बाजपुर क्षेत्र के अन्य मदरसों की भी जांच-पड़ताल की जा रही है। जिलाधिकारी नितिन भदौरिया ने कहा कि सरकार के निर्देशों के अनुसार मदरसों का निरीक्षण अभियान जारी है। जिन संस्थानों के पास संबंधित प्राधिकरण और शिक्षा बोर्ड की आवश्यक मान्यता नहीं होगी….उनके खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
मदरसों की मान्यता से जुड़े नियमों को लेकर संचालकों की ओर से नैनीताल हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में कहा गया कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण और शिक्षा बोर्ड की मान्यता की अनिवार्यता से कई मदरसों के सामने संचालन का संकट खड़ा हो सकता है।
मामले में हाई कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 15 सितंबर को होनी है।
अल्पसंख्यक विभाग के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने कहा कि नई व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों को उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें आधुनिक शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है। सरकार का कहना है कि सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराना प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि मदरसों को भी निर्धारित शिक्षा व्यवस्था और नियमों के अनुरूप अपनी व्यवस्था में सुधार करना होगा। सरकार की ओर से हाई कोर्ट में भी अपना पक्ष रखा जाएगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि राज्य में बच्चों को बेहतर और राष्ट्रीय स्तर के पाठ्यक्रम के अनुरूप शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को समाप्त करने के बाद मदरसों को निर्धारित नियमों के तहत ही संचालित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने मदरसों में बाहरी राज्यों से बच्चों को लाए जाने और फंडिंग से जुड़े मामलों पर भी सवाल उठाए हैं। सरकार का कहना है कि मदरसों के संचालन और वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता जरूरी है।
फिलहाल बाजपुर में चार मदरसों को सील किए जाने के बाद प्रशासन का निरीक्षण अभियान जारी है। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर अन्य संस्थानों पर भी कार्रवाई हो सकती है।

Haldwani LPG | Gas Cylinder eKYC | LPG Connection : गैस सिलिंडर उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। अपने गैस कनेक्शन की e-KYC कराने के लिए अब एक सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया गया है। उपभोक्ता 7 सितंबर तक अपनी e-KYC पूरी करा सकेंगे।
हल्द्वानी में इंडेन, भारत पेट्रोलियम और एचपी गैस के उपभोक्ताओं के लिए e-KYC जरूरी बताई गई है। इससे पहले भी इसकी समय सीमा बढ़ाई जा चुकी है।
गैस एजेंसियों की ओर से e-KYC पूरी करने के बाद ही उपभोक्ताओं को सिलिंडर की डिलीवरी की जा रही है। सरस मार्केट स्थित इंडेन गैस एजेंसी के प्रबंधक भरत सिंह खाती के अनुसार पहले उपभोक्ता की e-KYC प्रक्रिया पूरी कराई जा रही है और इसके बाद सिलिंडर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि हल्द्वानी की इंडेन गैस एजेंसी में करीब 3,200 उपभोक्ताओं की e-KYC बाकी है। वहीं काठगोदाम और चोरगलिया गैस एजेंसी में करीब 2-2 हजार उपभोक्ताओं की e-KYC की जानी है।
कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) के तहत संचालित इंडेन की 49 गैस एजेंसियों में करीब 91 प्रतिशत तक उपभोक्ताओं की e-KYC पूरी होने की जानकारी दी गई है।
गैस प्रबंधक रवि मेहरा के मुताबिक e-KYC कराने की अंतिम तारीख अब 7 सितंबर निर्धारित की गई है।
जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक अपने गैस कनेक्शन की e-KYC नहीं कराई है….उन्हें तय समय सीमा के भीतर यह प्रक्रिया पूरी कराने की सलाह दी गई है। इससे गैस कनेक्शन से जुड़ी जानकारी अपडेट रखने में मदद मिलेगी और सिलिंडर की डिलीवरी में परेशानी से बचा जा सकेगा।

Uttarakhand Rain | Kumaon Landslide |Road Blockage : उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में लगातार तीसरे दिन हो रही बारिश लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। भारी बारिश के कारण पहाड़ों से मलबा और बोल्डर सड़कों पर आने से कई मार्ग बंद हो गए हैं। अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत और नैनीताल जिलों में 100 से ज्यादा सड़कें यातायात के लिए बंद बताई गई हैं।
बारिश और भूस्खलन के कारण कई ग्रामीण इलाकों का संपर्क प्रभावित हुआ है। सड़कों के बंद होने से लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अल्मोड़ा जिले में पिछले तीन दिनों से रुक-रुककर बारिश हो रही है। कई स्थानों पर पहाड़ी से मलबा और पत्थर गिरने के कारण सड़कें बंद हो गई हैं। जिले में एक राष्ट्रीय राजमार्ग, एक स्टेट हाईवे और दो जिला मार्गों समेत कुल 23 सड़कें बंद बताई गई हैं।
लोक निर्माण विभाग और आपदा प्रबंधन की टीमें बंद सड़कों को खोलने के लिए जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाने में जुटी हैं। लगातार बारिश के कारण काम में भी परेशानी आ रही है।
अल्मोड़ा-हल्द्वानी राष्ट्रीय राजमार्ग को मलबा हटाने के बाद कुछ समय के लिए यातायात के लिए खोला गया था। लेकिन पहाड़ी से दोबारा मलबा आने के कारण मार्ग फिर प्रभावित हो गया। इससे यात्रियों और स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सड़क संपर्क बाधित होने का असर ग्रामीण क्षेत्रों पर ज्यादा पड़ रहा है। मरीजों, गर्भवती महिलाओं और जरूरी सामान के लिए आने-जाने वाले लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन और संबंधित विभाग बंद मार्गों को जल्द से जल्द खोलने का प्रयास कर रहे हैं।
लगातार खराब मौसम का असर अल्मोड़ा के बाजारों पर भी दिखाई दे रहा है। मुख्य बाजारों और आसपास के कस्बों में सामान्य दिनों के मुकाबले कम भीड़ नजर आ रही है। लोग खराब मौसम और सड़क बंद होने की स्थिति को देखते हुए घरों से कम निकल रहे हैं।
बारिश और भूस्खलन के कारण विभिन्न जिलों में सड़कें प्रभावित हुई हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार:
अल्मोड़ा: 23 सड़कें बंद
बागेश्वर: 13 सड़कें बंद
पिथौरागढ़: 24 सड़कें बंद
नैनीताल: 47 सड़कें बंद
चंपावत: 4 सड़कें बंद
इस तरह इन पांच जिलों में 100 से ज्यादा सड़कें प्रभावित बताई गई हैं।
बारिश और मौसम की स्थिति को देखते हुए अल्मोड़ा जिले में 2 सितंबर को सभी विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद रखने के आदेश जारी किए गए हैं।
प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों के आसपास जाने और संवेदनशील पहाड़ी मार्गों पर अनावश्यक यात्रा करने से बचने की अपील की है। बारिश के दौरान भूस्खलन का खतरा देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

Uttarakhand UCC | Nikahnama | Interfaith Marriage : उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने के बाद अब निकाह के पंजीकरण से जुड़ी व्यवस्था को और व्यवस्थित करने की तैयारी चल रही है। राज्य सरकार निकाहनामा का एक तय प्रारूप तैयार करने पर काम कर रही है। इसके लिए समिति गठित की गई है…जो कानूनी, प्रशासनिक और धार्मिक पक्षों से राय लेकर मसौदा तैयार कर रही है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत निकाहनामा में दूल्हा-दुल्हन की पहचान, धर्म, विवाह की तारीख, गवाहों की जानकारी और निकाह पढ़ाने वाले मौलवी का पंजीकरण नंबर जैसी जानकारियां दर्ज की जा सकती हैं। इन रिकॉर्ड को विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया से जोड़ने की तैयारी भी बताई जा रही है।
सरकार की योजना में पंजीकृत या लाइसेंस प्राप्त मौलवियों की व्यवस्था को शामिल करने की बात सामने आई है। इसके तहत निकाह कराने वाले मौलवी की पहचान और पंजीकरण संबंधी जानकारी रिकॉर्ड में दर्ज होगी। हालांकि अंतिम नियम और इसकी कानूनी स्थिति प्रारूप तैयार होने तथा सरकार की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगी।
प्रस्तावित व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य विवाह से जुड़े दस्तावेजों और रिकॉर्ड को व्यवस्थित करना बताया जा रहा है। इसमें वर-वधू की पहचान और अन्य जरूरी विवरण दर्ज किए जाएंगे…ताकि भविष्य में विवाह, संपत्ति या पारिवारिक विवादों से जुड़े मामलों में दस्तावेजी रिकॉर्ड उपलब्ध रहे।
इस व्यवस्था को लेकर अंतर-धार्मिक विवाहों पर भी चर्चा हो रही है। हालांकि केवल निकाहनामा व्यवस्था के आधार पर यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि अंतर-धार्मिक विवाह पर पूरी तरह रोक लग जाएगी। अंतिम नियम सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अलग-अलग धर्मों के लोगों के विवाह के पंजीकरण पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास के अनुसार निकाहनामे का प्रारूप तैयार करने के लिए समिति बनाई गई है। उन्होंने बताया कि समिति विभिन्न पक्षों से राय लेकर मसौदा तैयार कर रही है। संभावित रूप से अगले दो से तीन महीनों में इसका प्रारूप तैयार हो सकता है। अंतिम निर्णय सहमति और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद लिया जाएगा।
फिलहाल निकाहनामा व्यवस्था को लेकर प्रक्रिया जारी है और सरकार की ओर से अंतिम नियम लागू किए जाने के बाद ही इसकी पूरी तस्वीर साफ होगी।

RTO Office | Haldwani News | Firing Incident : मुखानी थाना क्षेत्र स्थित आरटीओ कार्यालय में मंगलवार को कर्मचारियों के बीच विवाद के दौरान कथित तौर पर गोली चलने से हड़कंप मच गया। गोली कार्यालय परिसर में रखी एक अलमारी में जा लगी। घटना के बाद कुछ समय के लिए कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
जानकारी के अनुसार आरटीओ कार्यालय में किसी बात को लेकर कर्मचारियों के बीच विवाद हुआ था। इसी दौरान कार्यालय के एक कर्मचारी पर कथित रूप से गोली चलाने का आरोप है। फायरिंग के बाद संबंधित कर्मचारी मौके से चला गया।
घटना की सूचना मिलने पर मुखानी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों से घटना के संबंध में जानकारी जुटाई और फायरिंग की परिस्थितियों का पता लगाने का प्रयास किया।
वहीं आरटीओ अधिकारी गुरदेव सिंह भी मौके पर पहुंचे और घटनाक्रम की जानकारी ली। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि विवाद किस बात को लेकर हुआ और गोली किस परिस्थिति में चली।
फिलहाल गोली लगने से किसी व्यक्ति के घायल होने की सूचना सामने नहीं आई है। पुलिस आरोपी कर्मचारी की तलाश कर रही है। मामले में जांच पूरी होने के बाद फायरिंग की वास्तविक वजह और घटना से जुड़े अन्य तथ्य स्पष्ट हो सकेंगे।

Nainital Weather | Orange Alert | School Holiday : मौसम विभाग की ओर से जारी पूर्वानुमान को देखते हुए नैनीताल जिले में 2 सितंबर 2026 को ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने जिले के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ आकाशीय बिजली चमकने और तेज बारिश होने की संभावना जताई है।
भारी बारिश के कारण नदियों, नालों और गधेरों में जलस्तर बढ़ने के साथ तेज बहाव की स्थिति बन सकती है। संवेदनशील क्षेत्रों में भूस्खलन और मलबा आने का खतरा भी बना हुआ है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक दिन का अवकाश घोषित किया है।
जिला प्रशासन के आदेश के अनुसार बुधवार 2 सितंबर को नैनीताल जिले के सभी सरकारी, अर्द्धसरकारी और निजी विद्यालयों में कक्षा 1 से 12 तक की पढ़ाई बंद रहेगी। जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्र भी इस दिन बंद रहेंगे।
विद्यालयों में कार्यरत प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, शिक्षक-शिक्षिकाओं और कार्यालय स्टाफ के लिए भी अवकाश रहेगा।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नैनीताल शहर क्षेत्र में संचालित आवासीय शिक्षण संस्थानों और ऐसे विद्यालयों पर यह आदेश लागू नहीं होगा….जहां छात्र-छात्राएं परिसर में ही रहकर पढ़ाई करते हैं।
मुख्य शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी और जिला कार्यक्रम अधिकारी को सभी संबंधित शिक्षण संस्थानों और आंगनबाड़ी केंद्रों में आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन होने पर संबंधित के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
जिले में लगातार बारिश और संभावित भूस्खलन को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। खासतौर पर नदी, नाले और गधेरों के आसपास जाने से बचने की सलाह दी गई है।

Rudrapur News | Madrasa Action | Uttarakhand : उत्तराखंड में मदरसों की मान्यता और संचालन को लेकर चल रही जांच के बीच उधम सिंह नगर जिला प्रशासन ने दो मदरसों के खिलाफ कार्रवाई की है। प्रशासन ने रुद्रपुर में मदरसा फैजुल मुस्तफा और मदरसा जामियातुल हसनात को सील कर दिया है।
प्रशासन के अनुसार दोनों मदरसों के पास संचालन के लिए जरूरी मान्यता संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। इसी आधार पर नियमों के तहत यह कार्रवाई की गई।
प्रशासन के मुताबिक मदरसा फैजुल मुस्तफा आवश्यक मान्यता के बिना संचालित हो रहा था। जांच के दौरान सामने आया कि यह मदरसा अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त नहीं था। इसके बाद प्रशासन ने मदरसे को सील कर दिया।
इस मदरसे के प्राचार्य मौलाना मुफ्ती मुजीब हाल ही में रुद्रपुर के त्रिशूल चौक पर आयोजित एक कार्यक्रम में मदरसों को लेकर सरकार की नीति पर कथित बयान देने के बाद चर्चा में आए थे। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मदरसे को सील करने की कार्रवाई मान्यता और जरूरी दस्तावेजों से जुड़ी है।
प्रशासन ने मदरसा जामियातुल हसनात के खिलाफ भी कार्रवाई की है। जिलाधिकारी के अनुसार इस मदरसे के पास मान्यता के लिए आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। इसके बाद इसे भी सील कर दिया गया।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी विपिन सिंह कंडारी ने बताया कि मदरसे पर नोटिस चस्पा करने के साथ गेट पर ताला लगाया गया है। फिलहाल वहां किसी भी तरह का पाठ्यक्रम संचालित नहीं किया जाएगा और आगे की कार्रवाई नियमानुसार होगी।
उत्तराखंड सरकार ने मदरसा बोर्ड को समाप्त कर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की व्यवस्था लागू की है। अब मदरसों को प्राधिकरण के साथ-साथ उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से भी जरूरी मान्यता लेने की व्यवस्था की गई है।
सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य मदरसों में संचालित शिक्षा व्यवस्था को निर्धारित नियमों के दायरे में लाना है।
प्रशासन के अनुसार उधम सिंह नगर जिले में कुल 118 मदरसे बताए गए हैं। इनमें से पांच पहले ही बंद हो चुके हैं….जबकि करीब 60 मदरसों ने अभी तक मान्यता के लिए आवेदन नहीं किया है। अन्य मदरसों की ओर से मान्यता के लिए ऑनलाइन आवेदन किए गए हैं।
अल्पसंख्यक विभाग के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने कहा कि पूर्व में मदरसा बोर्ड में पंजीकृत करीब 452 मदरसों को अब अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता लेनी होगी। करीब 200 मदरसों के आवेदन प्राप्त हो चुके हैं और इनका मौके पर सत्यापन कराया जा रहा है।
वहीं पार्षद प्रतिनिधि इरशाद अहमद ने कहा कि मदरसा फैजुल मुस्तफा वर्ष 1995 से संचालित हो रहा था। उनके अनुसार सरकार की गाइडलाइन के तहत मदरसा कमेटी की ओर से मान्यता के लिए आवेदन किया गया था और 1 जुलाई से मदरसा बंद रखा गया है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई और नोटिस का जवाब मदरसा कमेटी की ओर से दिया जाएगा।

Mussoorie Landslide | Dehradun-Mussoorie Road | Uttarakhand Rain : लगातार हो रही बारिश के बीच मसूरी-देहरादून मार्ग पर लोगों की परेशानी बढ़ गई है। मंगलवार सुबह करीब 5 बजे पानी वाले बैंड के पास भारी भूस्खलन हुआ। इस दौरान सड़क का एक बड़ा हिस्सा बह गया….जिसके चलते मसूरी-देहरादून मुख्य मार्ग पूरी तरह बंद हो गया।
सड़क बंद होने से मसूरी आने-जाने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मार्ग पर यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
इससे पहले सोमवार देर रात गलोगीधार के पास भी भारी भूस्खलन हुआ था। पहाड़ से मलबा और बड़े-बड़े बोल्डर सड़क पर आ गए थे। लोक निर्माण विभाग की टीम ने करीब आठ घंटे की मेहनत के बाद रात लगभग 2 बजे मलबा हटाकर मार्ग को यातायात के लिए खोला था।
लोगों ने राहत की सांस ली ही थी कि कुछ घंटे बाद पानी वाले बैंड के पास फिर भूस्खलन हो गया और सड़क का हिस्सा बहने से मार्ग दोबारा बंद हो गया।
पानी वाले बैंड के पास सड़क का हिस्सा बह जाने के कारण वाहनों के गुजरने के लिए पर्याप्त जगह नहीं बची है। मार्ग बंद होने से दोनों तरफ वाहनों की कतार लगने की स्थिति बन गई है। लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण यात्रियों में भी चिंता बनी हुई है।
मार्ग को जल्द खोलने के लिए लोक निर्माण विभाग की टीम मौके पर काम कर रही है। जेसीबी और अन्य मशीनों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है। सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से के पास पहाड़ को काटकर वैकल्पिक रास्ता तैयार करने का भी प्रयास किया जा रहा है।
हालांकि लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण सड़क खोलने का काम चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
मसूरी-देहरादून मुख्य मार्ग बंद होने के बाद लोग वैकल्पिक रास्ते के तौर पर मसूरी-किमाड़ी रोड का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह मार्ग कई जगहों पर काफी संकरा है। ऐसे में प्रशासन की ओर से लोगों से सावधानी के साथ इस मार्ग का इस्तेमाल करने की अपील की गई है।
बारिश और भूस्खलन को देखते हुए यात्रियों से अपील की गई है कि वे यात्रा से पहले मार्ग की स्थिति की जानकारी जरूर लें और अनावश्यक जोखिम न उठाएं।

Almora Landslide | Uttarakhand Rain | Rescue Operation : पहाड़ों में लगातार हो रही बारिश के बीच अल्मोड़ा जिले से दर्दनाक हादसा सामने आया है। हवालबाग विकासखंड के ओडयूड़ा गांव में भारी मलबा एक मकान में घुस गया। हादसे में मलबे के नीचे दबने से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई।
घटना की सूचना मंगलवार सुबह करीब चार बजे जिला आपदा कंट्रोल रूम को 112 के माध्यम से मिली। बताया गया कि एक मकान में मलबा घुसने के कारण कुछ लोग अंदर दब गए हैं। सूचना मिलते ही प्रशासन, एसडीआरएफ, पुलिस और फायर सर्विस की टीमें मौके के लिए रवाना हुईं।
बताया गया कि मकान के पीछे की ओर से भारी मलबा आया और दीवार को तोड़ते हुए घर के अंदर घुस गया। मकान के एक हिस्से में परिवार के बुजुर्ग मौजूद थे…जो सुरक्षित बच गए। वहीं दूसरे कमरे में परिवार की बहू, उनका बेटा और बेटी सो रहे थे। तीनों मलबे में दब गए।
राहत और बचाव टीमों ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। काफी प्रयास के बाद तीनों को मलबे से बाहर निकाला गया…लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
हादसे की जानकारी मिलते ही एसडीआरएफ, पुलिस, फायर सर्विस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। सीओ रानीखेत, एसडीएम और तहसीलदार समेत कई अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य की निगरानी की।
रास्ते में मलबा आने के बावजूद बचाव टीमों को समय पर घटनास्थल तक पहुंचाया गया। मौके पर दो एंबुलेंस भी भेजी गई थीं।
रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद अब तीन जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का काम किया जा रहा है। प्रशासन के अनुसार सड़क को खोल दिया गया है…और बाकी मलबा भी साफ किया जा रहा है।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी विनीत पाल ने बताया कि मृतकों के परिजनों को नियमानुसार मुआवजा देने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। प्रशासन की ओर से जल्द मुआवजा प्रक्रिया पूरी करने का प्रयास किया जा रहा है।
फिलहाल प्रशासन ने स्थिति सामान्य बताई है। हालांकि पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है।