बागेश्वर निवासी भारतीय क्रिकेटर मनीष पांडे देवी-देवताओं की पूजा करने पहुंचे अपने पैतृक गांव !

बागेश्वर: भारतीय क्रिकेट टीम के ऑलराउंडर मनीष पांडे इन दिनों अपने पैतृक गांव भीड़ी पहुंचे हुए हैं। गांव पहुंचते ही उन्होंने देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण और क्रिकेट प्रेमी युवा उनसे मिलने पहुंचे। लोग उनके साथ तस्वीरें खिंचवाते रहे और युवा खिलाड़ी खेल से जुड़ी जानकारी भी जुटाते नजर आए।

मनीष पांडे ने सबसे पहले कोटागड़ी स्थित कोकिला मां के दरबार में दर्शन किए। इसके बाद वह अपने गांव भीड़ी पहुंचे और सोमवार सुबह हरू मंदिर दफौट में पूजा-अर्चना की। चैत्र नवरात्र में उनका गांव आने का कार्यक्रम था…लेकिन उस समय वे नहीं आ सके थे। इस बार उन्होंने कोटगाड़ी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में भी भागीदारी की।

पांडे के साथ उनके पिता कृष्णा नंद पांडे, मां तारा पांडे बहन अनीता और दामाद नीतेश भी मौजूद रहे। मंदिर समिति के अध्यक्ष गोविंद बल्लभ पाठक, सचिव गोविंद कृष्ण पाठक और पुजारी जीवन पाठक ने उनका भव्य स्वागत किया। कोकिला मां के मंदिर में उन्होंने वेदज्ञ पंडितों से दुर्गा सप्तशती का पाठ भी कराया।

पूजा-अर्चना के बाद पांडे परिवार चौकोड़ी लौट गया…जहां वे कुमाऊं मंडल पर्यटन आवास गृह में ठहरे हैं। परिवार के खीमानंद पांडे ने बताया कि क्रिकेटर के पिता तीन दिन पहले ही गांव पहुंच गए थे। वहीं हरू मंदिर समिति के दान सिंह दफौटी ने बताया कि इन दिनों मंदिर में नवरात्र का विशेष आयोजन चल रहा है।

युवाओं के बीच धरने पर पहुंचे धामी,सीएम के साथ-साथ अभिभावक और दोस्त की भूमिका में आए नजर

Uttarakhand: CBI: Pushkar Singh Dhami: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार दोपहर एक बार फिर अपने अलग अंदाज से युवाओं का दिल जीत लिया। परेड ग्राउंड में चल रहे धरने पर जब वे अचानक पहुंचे, तो वहां मौजूद युवा हैरान रह गए। इस दौरान उन्होंने न केवल युवाओं की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी शंकाओं को दूर किया, बल्कि खुद को एक मुख्यमंत्री के साथ-साथ अभिभावक और दोस्त की भूमिका में भी पेश किया।

धामी ने कहा कि चाहें तो यह वार्ता मुख्यमंत्री कार्यालय में भी हो सकती थी, लेकिन उन्होंने युवाओं से धरना स्थल पर ही संवाद करना सही समझा। उन्होंने माना कि गर्मी और त्योहारी सीजन के बीच युवाओं का आंदोलन करना उन्हें भी खटक रहा था, और वे लगातार इस स्थिति को लेकर चिंतित थे।

मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि सरकार भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के युवाओं की जिंदगी में सरकारी नौकरी का महत्व बेहद गहरा है, क्योंकि यहां युवा सिर्फ पढ़ाई ही नहीं करते, बल्कि नौकरी पाने के लक्ष्य के साथ मेहनत करते हैं। यही कारण है कि सरकार युवाओं के सपनों को किसी भी कीमत पर टूटने नहीं देगी।

उन्होंने याद दिलाया कि बीते चार साल में राज्य में रिकॉर्ड 25 हजार सरकारी नौकरियां दी गई हैं और नकल विरोधी सख्त कानून भी लागू किया गया है। धामी ने यह भी घोषणा की कि भर्ती से जुड़ी किसी भी शिकायत की सीबीआई जांच कराने को वे पूरी तरह तैयार हैं।

धरने पर पहुंचे सीएम ने युवाओं को एक और बड़ी राहत देते हुए आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए मुकदमों को वापस लेने की भी घोषणा की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार उनके सुरक्षित भविष्य के लिए पूरी तरह से संकल्पित है।

उत्तराखंड: गंगोत्री धाम के कपाट इस तारीख को होंगे बंद

उत्तरकाशी: चारधाम में प्रमुख गंगोत्री धाम के कपाट 22 अक्टूबर को अन्नकूट पर्व पर पूरे विधि-विधान के साथ बंद कर दिए जाएंगे। इस अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए मां गंगा के दर्शन और पूजन उनके शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा में किए जाएंगे।

श्री पांच गंगोत्री मंदिर समिति ने नवरात्र के पावन पर्व पर कपाटबंदी की तिथि और समय घोषित किया है। समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने बताया कि गंगोत्री धाम के कपाट 22 अक्टूबर, यानी कार्तिक के छठे दिन, 11 बजकर 36 मिनट पर अभिजीत मुहूर्त में श्रद्धालुओं के लिए बंद किए जाएंगे।

इसके बाद मां गंगा की भोग मूर्ति को डोली में बैठाकर शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा के लिए रवाना किया जाएगा। उस दिन मां गंगा की उत्सव डोली देवी मंदिर में रात्रि प्रवास करेगी।

अगले दिन 23 अक्टूबर को मां गंगा की मूर्ति मुखबा स्थित मंदिर में विराजमान की जाएगी, जहां अगले छह महीनों तक विधिवत पूजा-अर्चना की जाएगी। इस प्रकार श्रद्धालु इस समय मां गंगा का आशीर्वाद मुखबा में प्राप्त कर सकेंगे।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री का छात्रों के आंदोलन पर भावपूर्ण संदेश, जानिए क्या कहा छात्रों से

देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने आज एक भावनात्मक और स्पष्ट संदेश जारी करते हुए आंदोलनरत युवाओं से सीधा संवाद किया। उन्होंने कहा कि जिस उत्तराखंड के लिए हमारे शहीदों और आंदोलनकारियों ने अपने प्राण न्यौछावर किए, वह केवल एक भौगोलिक सीमा नहीं…बल्कि एक सपना था एक ऐसा राज्य जहाँ हर बेटे-बेटी को न्याय, सम्मान और बेहतर जीवन मिले।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जब हमारे कुछ बच्चे सड़कों पर हैं…तो मैं उन्हें यही कहना चाहता हूँ कि वे भी हमारे अपने हैं, हमारे परिवार का हिस्सा हैं।

उन्होंने स्वयं को प्रदेश का ‘मुख्य सेवक’ बताते हुए कहा कि हर आवाज़ को सुनना हर पीड़ा को समझना और हर दिल तक पहुँचना उनका कर्तव्य है। उन्होंने युवाओं को आश्वस्त किया कि सरकार उनकी भावनाओं और भविष्य को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है।

नकल माफियाओं को चेतावनी, छात्रों से संवेदनशीलता

मुख्यमंत्री ने 2023 में लाए गए देश के पहले सख्त नकल विरोधी कानून का ज़िक्र करते हुए स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य केवल नकल माफियाओं और भ्रष्ट तंत्र पर कार्रवाई करना है, न कि मेहनती छात्रों को डराना।

कुछ लोग हमेशा कानून का उल्लंघन करते हैं…ऐसे हाकमो और उनके हाकिमों को हम ऐसा सबक सिखाएंगे कि वे कभी भूल नहीं पाएंगे साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि छात्रों के साथ कोई भेदभाव या मनभेद सरकार की नीति नहीं रही है और न कभी होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सब एक परिवार हैं और परिवार का उद्देश्य सभी सदस्यों का कल्याण होता है। मैं सभी से आग्रह करता हूँ कि संवाद और विश्वास की राह पर आगे बढ़ें।

उन्होंने यह भी दोहराया कि उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने का जो “विकल्प रहित संकल्प” लिया गया है…उसे सरकार जनता के साथ मिलकर ही पूर्ण करेगी।

उत्तराखंड: स्कूल जाते बच्चों में तेजी से फैल रही है ये वायरल बीमारी, जानिए लक्षण और बचाव

देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में इन दिनों बच्चों में हैंड, फुट और माउथ डिजीज (HFMD) यानी हाथ, पैर और मुंह की बीमारी के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इस संक्रमण से 5 से 15 वर्ष की आयु के स्कूली बच्चे प्रभावित हो रहे हैं। दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल की पीडियाट्रिक ओपीडी में हर दिन तीन से चार बच्चे इस बीमारी के लक्षणों के साथ पहुंच रहे हैं।

दून मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण वायरल संक्रमण तेजी से फैल रहा है। इस समय हाथ, पैर और मुंह की बीमारी से बच्चे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह संक्रमण तभी माना जाता है जब हथेलियों, पैरों के तलवों और मुंह में एक साथ दर्दनाक छाले नजर आएं। केवल मुंह में छाले होने से HFMD की पुष्टि नहीं होती।

डॉ. अशोक के अनुसार ओपीडी में आ रहे अधिकतर बच्चे स्कूलों में पढ़ने वाले हैं। यह संक्रमण एक बच्चे से दूसरे में बहुत तेजी से फैलता है…इसलिए जिन बच्चों में लक्षण दिखें उन्हें 5 से 7 दिन तक स्कूल ना भेजें। इससे बाकी बच्चों को संक्रमित होने से रोका जा सकता है।

इस बीमारी में बच्चों को तेज बुखार मुंह में दर्दनाक छाले, थकान, और खाने में अरुचि जैसी समस्याएं होती हैं। इस दौरान बच्चों को खूब पानी, तरल आहार और आराम देना जरूरी है। बीमारी से घबराने की जरूरत नहीं है….लेकिन सही समय पर डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।

यदि आपके बच्चे में ये लक्षण नजर आएं…..

मुंह में छाले या गले में खराश

हाथ-पैर की त्वचा पर लाल चकत्ते या फफोले

तेज बुखार या थकावट

खाने-पीने से परहेज

तो उसे स्कूल न भेजें और तत्काल किसी बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।

डॉक्टरों की सलाह है कि अभिभावक सतर्क रहें और बच्चों को दूसरों से दूर रखें जब तक पूरी तरह स्वस्थ न हो जाएं। साथ ही बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा न दें।

मुख्यमंत्री धामी ने निभाया वादा, छात्रों के लिए CBI जांच की कर दी संस्तुति

Uttarakhand News: CM Dhami: CBI: UKSSSC: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि वे सिर्फ पद पर बैठने वाले नेता नहीं बल्कि जनता के बीच जाकर उनकी आवाज़ सुनने वाले सच्चे जननायक हैं। सोमवार को जब युवा अपनी मांगों को लेकर धरनास्थल पर डटे हुए थे, तब मुख्यमंत्री स्वयं वहां पहुंचे और सभी मांगों को मौके पर ही स्वीकार कर लिया। यही नहीं, उन्होंने भर्ती घोटाले की सीबीआई जांच की संस्तुति भी की, जिससे युवाओं के मन में लंबे समय से उठ रहे संदेह दूर हो गए।

मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट कहा कि युवाओं की आकांक्षाओं और सुझावों को प्राथमिकता दी जाएगी तथा भर्ती प्रक्रियाओं को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाया जाएगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस चर्चा को वे चाहें तो दफ्तर में भी कर सकते थे, लेकिन युवाओं के बीच आकर उनकी भावनाएं समझना उनका कर्तव्य है। इस सादगी और संवेदनशीलता ने युवाओं के मन को गहराई से छू लिया।

धरने पर बैठे युवाओं में मुख्यमंत्री के इस कदम से नई ऊर्जा और विश्वास की लहर दौड़ गई। सभी ने एक स्वर में कहा कि धामी जी ने एक बार फिर यह दिखाया है कि वे केवल सत्ता चलाने वाले मुख्यमंत्री नहीं बल्कि जनता के बीच खड़े होकर उनके सपनों को पूरा करने वाले सच्चे मार्गदर्शक हैं।

राजनीति में अक्सर नेताओं पर दूर रहने के आरोप लगते हैं, लेकिन धामी बार-बार अपने व्यवहार और निर्णयों से इस छवि को तोड़ते आए हैं। उनका यह कदम युवाओं के लिए न केवल राहतभरा है बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक सकारात्मक संदेश भी है कि सरकार हर युवा की आवाज़ सुनने और उस पर अमल करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उत्तराखंड: पति की शहादत के बाद सेना में बनीं अफसर, जानिए मेजर प्रिया सेमवाल कौन हैं ?

देहरादून: जब ज़िंदगी ने सबसे गहरा घाव दिया, तब उन्होंने आँसू नहीं बहाए बल्कि हिम्मत का लोहा बनकर दुनिया को दिखा दिया कि बेटियाँ किसी से कम नहीं होतीं। हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड की उस बेटी की…जिसने पति की शहादत के बाद वर्दी पहनकर न केवल अपने परिवार का बल्कि पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया…मेजर प्रिया सेमवाल।

शहादत से सेना तक का सफर

धोरण खास निवासी प्रिया सेमवाल का जीवन साधारण नहीं बल्कि अद्वितीय प्रेरणा से भरा हुआ है। साल 2006 में उन्होंने नायक अमित शर्मा से विवाह किया। दोनों की एक बेटी ख्वाहिश भी है। लेकिन साल 2012 में अरुणाचल प्रदेश में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान अमित शहीद हो गए। ये हादसा किसी को भी तोड़ सकता था लेकिन प्रिया ने अपने आंसुओं को ताकत में बदला और फैसला किया कि अब वो खुद सेना की वर्दी पहनेंगी उसी वर्दी की खातिर जिसके लिए उनके पति ने बलिदान दिया था।

2014 में बनीं भारतीय सेना की अफसर

कठिन प्रशिक्षण के बाद साल 2014 में प्रिया ने चेन्नई की ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA) से पास होकर भारतीय सेना की इलेक्ट्रिकल एंड मैकेनिकल इंजीनियरिंग (EME) कोर में कमीशन प्राप्त किया। वह देश की पहली महिला बनीं, जो किसी शहीद नॉन-कमिशन्ड ऑफिसर की पत्नी होते हुए सेना में अफसर बनीं। उनका यह कदम भारतीय सेना के इतिहास में एक नया अध्याय बन गया।

समंदर पर भी दिखाई बहादुरी

मेजर प्रिया की वीरता केवल ज़मीन तक सीमित नहीं रही। वर्ष 2022 में वे भारतीय सेना की पहली ऑल-वुमेन सेलबोट एक्सपीडिशन टीम का हिस्सा बनीं। इस टीम ने INSV बुलबुल नौका से गोवा, कारवार, मुंबई और कोच्चि के बीच करीब 900 नॉटिकल मील (1667 किमी) की समुद्री यात्रा की। इस मिशन में उन्होंने टीम लीडरशिप सुरक्षा और प्रबंधन का जिम्मा संभाला।

अंतरराष्ट्रीय मिशन में निभाई अहम भूमिका

उनका साहस अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी चमका। वे संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के तहत लेबनान में तैनात रहीं, जहां इजराइल-लेबनान सीमा पर उन्होंने शांति स्थापना में योगदान दिया। यह दिखाता है कि भारतीय महिला अधिकारी कितनी सक्षम और विश्वसनीय हैं।

पहली महिला अधिकारी जिन्हें मिला स्थायी कमीशन

जहां पहले महिला अफसरों को केवल शॉर्ट सर्विस कमीशन तक सीमित रखा जाता था, वहीं मेजर प्रिया को स्थायी कमीशन प्राप्त हुआ। वे उत्तराखंड की पहली महिला सैन्य अधिकारी हैं जिन्हें यह गौरव प्राप्त हुआ।

बेटियों के लिए बनीं मिसाल

मेजर प्रिया सेमवाल का जीवन हर उस बेटी के लिए प्रेरणा है जो मुश्किलों से घबराए बिना अपने सपनों को जीना चाहती है। एक मां एक पत्नी और एक फौजी के रूप में उन्होंने हर भूमिका को निभाया और साबित किया कि साहस, समर्पण और संकल्प से कोई भी मंज़िल पाई जा सकती है। उनकी इस वीरता और योगदान के लिए उन्हें उत्तराखंड सरकार की ओर से ‘तीलू रौतेली सम्मान’ से भी नवाजा गया है।

उत्तराखंड के इन बच्चों को अब कोचिंग में मिलेगी 50% से अधिक छूट!

देहरादून: प्रदेश में पूर्व सैनिकों के बच्चों को NDA और CDS की कोचिंग में 50% या उससे ज्यादा छूट मिलने वाली है। सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने उपनल के प्रबंध निदेशक को इस संबंध में जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। मंत्री ने कहा कि कई बच्चे सेना में अफसर बनना चाहते हैं…लेकिन कोचिंग फीस ज्यादा होने की वजह से वे तैयारी नहीं करपाते है।

बैठक में फैसला लिया गया कि कोचिंग का 50% शुल्क उपनल उठाएगा। इसके अलावा 25% फीस कोचिंग संस्थानों से बातचीत करके कम करवाई जाएगी। बाकी 25% फीस छात्रों को खुद देनी होगी। कई कोचिंग संस्थान इस योजना में मदद करने को तैयार हैं। जल्द ही इसका प्रस्ताव बनाकर लागू किया जाएगा।

मंत्री ने पूर्व सैन्य अधिकारियों से कहा है कि वे निर्माणाधीन सैन्यधाम का निरीक्षण करें और सुझाव दें। पूर्व सैन्य अधिकारियों ने बताया कि वे मंगलवार को सैन्यधाम का निरीक्षण करेंगे।

उत्तराखंड: टनकपुर-पिथौरागढ़ हाईवे पर रात में ट्रैफिक पर प्रतिबंध

चंपावत: यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग-9 पर रात के समय वाहनों के आवागमन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह निर्णय लोहाघाट के लोनिवि (लॉन्ग टर्म इंफ्रास्ट्रक्चर वर्क्स) के अधिशासी अभियंता के अनुरोध पर लिया गया है।

जिलाधिकारी मनीष कुमार ने निर्देश दिए हैं कि रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक हाईवे पर सभी प्रकार के वाहनों का आवागमन पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। यह प्रतिबंध दो दिन तक…यानि 30 सितंबर तक प्रभावी रहेगा।

एनएच खंड के अधिशासी अभियंता ने बताया कि स्वाला क्षेत्र में भू-स्खलन के कारण सड़क के सुदृढ़ीकरण और चौड़ीकरण का कार्य किया जा रहा है। इस सुधारात्मक कार्य को सुरक्षित रूप से पूरा करने के लिए रात्रि काल में यातायात को बंद करना आवश्यक है।

प्रतिबंधित समय के दौरान केवल चिकित्सीय आपातकालीन वाहनों को ही आवागमन की अनुमति दी जाएगी। प्रशासन ने लोगों से आग्रह किया है कि वे इस अवधि में निर्धारित नियमों का कड़ाई से पालन करें।

एशिया कप फाइनल में भारत ने पाकिस्तान रौंदा, वायरल हुआ ऑपरेशन ‘तिलक’

Asia Cup: India vs Pakistan: Tilak Verma: दुबई में खेले गए रोमांचक एशिया कप फाइनल में टीम इंडिया ने पाकिस्तान को 5 विकेट से हराकर खिताब अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ भारत ने 9वीं बार एशिया कप ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। मुकाबले का असली हीरो रहे तिलक वर्मा, जिन्होंने दबाव में शानदार बल्लेबाजी करते हुए नाबाद अर्धशतक जड़ा।

पाकिस्तान की मजबूत शुरुआत पर स्पिनर्स का कहर

टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए पाकिस्तान ने साहिबजादा फरहान (57 रन) और फखर जमां (46 रन) की पारियों की बदौलत 146 रन बनाए। लेकिन भारतीय स्पिन गेंदबाजों ने पाकिस्तानी पारी को संभलने नहीं दिया। कुलदीप यादव ने 4 विकेट झटके, जबकि वरुण चक्रवर्ती और अक्षर पटेल ने 2-2 विकेट लेकर पाकिस्तान को बड़े स्कोर से दूर रखा।

भारत की शुरुआत खराब, लेकिन वर्मा बने संकटमोचक

147 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत की शुरुआत उम्मीदों के मुताबिक नहीं रही। इनफॉर्म अभिषेक शर्मा महज 5 रन बनाकर आउट हो गए। पाकिस्तान ने जिस खिलाड़ी को सबसे बड़ा खतरा माना था, उसे उन्होंने तुरंत पवेलियन भेज दिया। लेकिन यही उनकी सबसे बड़ी गलती साबित हुई क्योंकि इसके बाद तिलक वर्मा ने खेल की दिशा पलट दी।

वर्मा का अर्धशतक और साझेदारियां

तिलक ने 41 गेंदों पर अर्धशतक पूरा किया और अंत तक डटे रहे। उन्होंने पहले संजू सैमसन के साथ 57 रनों की साझेदारी की, फिर शिवम दुबे के साथ मिलकर 60 रन जोड़ते हुए मैच भारत के पक्ष में कर दिया। दुबे ने 22 गेंदों पर तेज़तर्रार 33 रन बनाए।

रिंकू सिंह का विजयी शॉट

जब आखिरी ओवर में कुछ रन चाहिए थे, तब डेब्यू कर रहे रिंकू सिंह ने हारिस रउफ की गेंद पर चौका लगाकर टीम इंडिया को जीत दिला दी।

इस तरह तिलक वर्मा (69* रन, 53 गेंद) की ऐतिहासिक पारी और भारतीय स्पिनर्स के दम पर भारत ने पाकिस्तान को मात देकर एशिया कप 2025 का ताज जीत लिया।