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Karwa Chauth 2025: करवाचौथ के व्रत को लेकर महिलाओं को हर साल इंतजार रहता है। करवाचौथ पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। इसके लिए महिलाएं कई समय पहले से ही खरीदारी भी शुरू कर देती हैं। लेकिन इस व्रत को सुहागिन महिलाएं अपनी पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए करती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस व्रत की शुरू कब हुई थी और किसने सबसे पहला Karva Chauth fast रखा था ?
Karwa Chauth 2025 : कैसे हुई करवाचौथ के व्रत की शुरूआत
करवाचौथ का व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं। सुहागिन महिलाएं अपना व्रत चांद को देखने के बाद ही खोल सकती हैं। इसलिए इस दिन महिलाओं को चांद का बेसब्री से इंतजार रहता है। बात करें इस व्रत के इतिहास की तो यूं तो इस व्रत को मनाने को लेकर कई मान्यताएं हैं लेकिन कहा जाता है कि सबसे पहले करवाचौथ का व्रत माता गौरी ने भगवान भोलेनाथ के लिए रखा था।
मां गौरा ने भोलेनाथ के लिए रखा था Karva Chauth fast
धार्मिक मान्यता के मुताबिक सबसे पहले करवा चौथ (karwa chauth) का व्रत माता गौरी ने शिव जी के लिए रखा था। मां गौरा ने इस दिन पूरे दिन निर्जला उपवास रखकर चांद को अर्घ्य दिया था। तब से ही करवा चौथ मनाने की परंपरा चली आ रही है। इसके साथ ही एक मान्यता और भी है।
मान्यता के मुताबिक देव-दानव युद्ध के बाद जब सभी देवियां ब्रह्मदेव के पास पहुंची तो उन्होंने अपने पतियों की रक्षा के लिए सुझाव मांगा था। तब ब्रह्मदेव ने सभी देवियों को करवा चौथ के व्रत रखने की सलाह दी थी। इसके बाद से ही करवा चौथ की परंपरा चली जा रही है।
नई दिल्ली: बैंक में नौकरी का इंतज़ार कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। केनरा बैंक ने देशभर में ग्रेजुएट अप्रेंटिस के 3500 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया हुआ है। यह भर्ती Apprenticeship Act 1961 के तहत की जा रही है और इसमें दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड समेत कई राज्यों के लिए आवेदन मांगे गए हैं। आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार 12 अक्तूबर 2025 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
पात्रता और शैक्षणिक योग्यता
भर्ती के लिए उम्मीदवार के पास किसी भी विषय में स्नातक (Graduation) की डिग्री होनी चाहिए। इसके साथ ही जिस राज्य के लिए आवेदन कर रहे हैं…वहां की स्थानीय भाषा का ज्ञान अनिवार्य है।
आयु सीमा
उम्मीदवार की आयु 1 सितंबर 2025 को 20 से 28 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
यानी जन्म 01 सितंबर 1997 से पहले और 01 सितंबर 2005 के बाद का नहीं होना चाहिए।
आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को आयु में छूट दी जाएगी:
SC/ST: 5 वर्ष
OBC: 3 वर्ष
दिव्यांग (PwD): 10 वर्ष
स्टाइपेंड
चयनित उम्मीदवारों को ट्रेनिंग के दौरान 15,000 प्रति माह का स्टाइपेंड दिया जाएगा।
आवेदन शुल्क
सामान्य और ओबीसी वर्ग के लिए: 500
SC/ST और दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए: कोई शुल्क नहीं
शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा।
चयन प्रक्रिया
चयन प्रक्रिया में शैक्षणिक योग्यता, स्थानीय भाषा परीक्षा, और दस्तावेज़ सत्यापन शामिल होंगे। जिन उम्मीदवारों ने 10वीं या 12वीं कक्षा में स्थानीय भाषा का अध्ययन किया है…उन्हें भाषा परीक्षा से छूट दी जाएगी।
आवेदन कैसे करें?
सबसे पहले उम्मीदवार NATS पोर्टल पर जाएं:
https://nats.education.gov.in
यहां Student Registration कराएं।
फिर केनरा बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं:
https://canarabank.bank.in
वेबसाइट के होमपेज पर जाएं:
Career – Recruitment – Know More पर क्लिक करें।
Engagement of Graduate Apprentice…शीर्षक वाले विज्ञापन को ध्यान से पढ़ें।
अंत में Click here to Apply Online पर क्लिक कर आवेदन प्रक्रिया पूरी करें।
महत्वपूर्ण तिथि
आवेदन की अंतिम तिथि: 12 अक्तूबर 2025
पिथौरागढ़: आप सोचें कि आपकी इलेक्ट्रिक स्कूटी या कार जल्दी चार्ज हो जाए…और कुछ ही पलों में वो सच में चार्ज होने लगे। ये किसी फिल्मी सीन जैसा लगता है लेकिन अब ये हकीकत बन चुका है। उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ के सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज में देश के जाने-माने वैज्ञानिक प्रो. अखिलेश सिंह ने एक अनोखा और देश का पहला “न्यूरो स्लाइडिंग मोड कंट्रोलर चार्जर” (Neuro Sliding Mode Controller Charger) तैयार किया है…जो आपकी सौंच के मुताबिक इलेक्ट्रिक वाहन की बैटरी को चार्ज करेगा।
इस चार्जर की सबसे खास बात है माइंड कमांड से बैटरी चार्जिंग। प्रो. अखिलेश बताते हैं कि इस तकनीक की प्रेरणा उन्हें एक मोबाइल रील से मिली। जैसे AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आपकी रुचि पहचान कर वही कंटेंट दिखाता है, वैसे ही यह चार्जर भी आपके दिमाग की न्यूरल एक्टिविटी को पढ़कर बैटरी चार्जिंग को कंट्रोल करता है।
इस डिवाइस को बनाने में उन्हें लगातार तीन साल लगे। इस दौरान भारत सरकार ने उनके प्रोजेक्ट को आर्थिक मदद भी दी। अब यह तकनीक अमेरिका से पेटेंट होने जा रही है और प्रो. अखिलेश इसे देश को समर्पित करने वाले हैं। किसी भी वाहन के लिए स्कूटी से बस तक, चार्जर का वजन लगभग 20 किलो है। यह स्कूटी, कार, बस, ई-रिक्शा समेत हर तरह के EV (Electric Vehicle) की बैटरी को तेजी से चार्ज कर सकता है। खास बात ये है कि ढलान या अधिक लोड पड़ने पर भी बैटरी की पावर में गिरावट नहीं आती। यह डिवाइस लीथियम आयन (Lithium-ion) और लेड-एसिड (Lead-acid) दोनों प्रकार की बैटरियों के साथ काम करता है। सीमांत जैसे दूरस्थ इलाके से निकलकर प्रो. अखिलेश ने यह साबित कर दिया है कि इनोवेशन केवल बड़े शहरों की बपौती नहीं है। उनकी उपलब्धि ना सिर्फ उत्तराखंड बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।
प्रो. अखिलेश सिंह कहते है कि AI आधारित न्यूरॉन रीडिंग तकनीक पर आधारित यह चार्जर अब रियलिटी बन चुका है। जल्द ही यह स्कूटी से लेकर बस तक हर EV में इस्तेमाल होगा।
नैनीताल: उत्तराखंड में Assistant Teacher (LT) बनने की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए राहत की खबर है। हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक अहम फैसला देते हुए 1544 पदों पर हो रही recruitment process पर लगी stay (रोक) को हटा दिया है। अब UKSSSC इन पदों का final result जारी कर सकता है। यह भर्ती 14 मार्च 2024 को निकाली गई थी, जिसमें 786 पद गढ़वाल मंडल और 758 पद कुमाऊं मंडल के लिए निर्धारित थे। Written Exam 18 अगस्त 2024 को हुई थी।
हालांकि reservation policy में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कुछ candidates ने कोर्ट में याचिकाएं दायर कर दी थीं। इसके चलते High Court ने result पर रोक लगा दी थी। अब कोर्ट ने उन याचिकाओं का निपटारा कर दिया है और recruitment process को आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है…हालांकि कुछ पद फिलहाल vacant (रिक्त) रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
मंगलवार को हाईकोर्ट ने Revenue Department से जुड़े एक और महत्वपूर्ण मामले में फैसला दिया। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि Patwari की seniority उनके training marks से नहीं बल्कि actual appointment date (वास्तविक नियुक्ति तिथि) से तय होगी।
Petitioners जैसे कि अल्मोड़ा के मनीष कुमार ने दावा किया कि उन्होंने Patwari Training Course में ज्यादा अंक पाए हैं…इसलिए उनकी seniority list में ऊपर जगह होनी चाहिए।
लेकिन कोर्ट ने कहा कि सिर्फ training में pass हो जाना ही पर्याप्त नहीं होता। Appointment तभी मानी जाती है जब वह vacancy पर औपचारिक रूप से दी जाए। केवल उसी स्थिति में training marks मायने रखते हैं जब दो या अधिक candidates एक ही दिन नियुक्त हुए हों। कोर्ट ने ये भी साफ किया कि Revenue Inspector / Supervisor Kanoongo की promotion मंडल स्तर पर होती है…और उसके लिए seniority ही प्राथमिक मापदंड है। 1983 Rules के अनुसार पूरे मंडल के पटवारियों की seniority उनकी initial appointment date के आधार पर तय की जाती है न कि उनके training marks के आधार पर।
इसलिए जिन अधिकारियों की नियुक्ति याचिकाकर्ताओं से पहले हुई….अगर उनके marks कम थे they will still be considered senior. कोर्ट ने District Magistrate Almora को निर्देश दिया है कि वह तीन महीने के अंदर provisional seniority list पर आई आपत्तियों का निस्तारण कर final list जारी करें।
पौड़ी: उत्तराखंड के श्रीनगर स्थित वीर चंद्र सिंह गढ़वाली राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीकोट में मंगलवार को एमबीबीएस छात्रों के वार्षिक उत्सव ‘ज़ील-2025’ का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई…जिसका उद्घाटन राज्य के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने किया। कार्यक्रम के दौरान कॉलेज परिसर में छात्रों में काफी उत्साह देखा गया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में छात्रों ने रंगारंग प्रस्तुतियाँ देकर माहौल को जीवंत बना दिया।
इस मौके पर मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मेडिकल शिक्षा को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने घोषणा की कि प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों की लाइब्रेरी अब 24 घंटे खुली रहेंगी…जिससे छात्र अपनी सुविधा के अनुसार अध्ययन कर सकेंगे। इसके साथ ही हर हॉस्टल में सुविधायुक्त रीडिंग रूम भी बनाए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि जल्द ही मेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों में ई-ग्रंथालय की स्थापना की जाएगी जिससे छात्रों को डिजिटल अध्ययन सामग्री आसानी से उपलब्ध हो सकेगी। छात्रों के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक कॉलेज को 15 प्रकार की खेल सामग्री भी वितरित की जाएगी और इंटर-कॉलेज स्पोर्ट्स प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी…जिनका फिनाले एम्स ऋषिकेश में होगा।
कार्यक्रम से पहले मंत्री ने कॉलेज परिसर में दो छात्रावासों के मरम्मत कार्यों का शिलान्यास किया और बेस अस्पताल श्रीनगर में इमरजेंसी ओटी और ऑब्स एंड गायनी ओटी का लोकार्पण भी किया। उन्होंने कहा कि ये सुविधाएं छात्राओं और मरीजो दोनों के लिए बड़ी राहत लेकर आएंगी।
मंत्री ने छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारियों में भागीदारी का संदेश भी दिया और कहा कि राज्य सरकार चाहती है कि मेडिकल कॉलेज सिर्फ शिक्षण संस्थान न रहकर चिकित्सा के क्षेत्र में नवाचार और उत्कृष्टता के केंद्र बनें।
BRIC NABI Recruitment 2025: राष्ट्रीय कृषि-खाद्य एवं जैव-विनिर्माण संस्थान (BRIC-NABI) ने वैज्ञानिक और प्रशासनिक पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की है। यह भर्ती देशभर के उन उम्मीदवारों के लिए सुनहरा मौका है जो बायोटेक्नोलॉजी, एग्रीकल्चर साइंस या प्रशासनिक क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 6 नवंबर 2025 तक ऑफलाइन माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
कुल पद और पदों का विवरण:
इस भर्ती प्रक्रिया के तहत कुल 6 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी:
वैज्ञानिक-एफ (Scientist-F) – 01 पद
एसोसिएट प्लांट मैनेजर / वैज्ञानिक-ई (Scientist-E) – 01 पद
वैज्ञानिक-सी (Scientist-C) – 02 पद
प्रबंधन सहायक (Management Assistant) – 02 पद
योग्यता क्या होनी चाहिए?
1. वैज्ञानिक-एफ:
डॉक्टरेट (PhD) कृषि/जैविक/रासायनिक विज्ञान में
10 वर्षों का R&D अनुभव अनिवार्य
2. वैज्ञानिक-ई (Associate Plant Manager):
M.Tech/M.E + PhD
संबंधित क्षेत्र में कम से कम 6 वर्षों का अनुभव
3. वैज्ञानिक-सी:
PhD + 3 वर्ष का अनुभव या
M.Tech + 6 वर्ष या
B.Tech + 8 वर्ष का अनुभव
4. प्रबंधन सहायक:
किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से स्नातक डिग्री
प्रशासनिक क्षेत्र में कम से कम 5 वर्षों का अनुभव
आवेदन शुल्क (Application Fee)
वैज्ञानिक पदों के लिए…
अनारक्षित (UR): 1180
SC/ST/OBC/Divyang/Women: 590
प्रशासनिक पदों के लिए:
अनारक्षित (UR): 590
SC/ST/OBC/Divyang/Ex-Servicemen/Women: 354
शुल्क का भुगतान ऑनलाइन बैंकिंग या UPI के जरिए किया जा सकता है।
आवेदन कैसे करें?
BRIC-NABI की वेबसाइट पर जाएं: www.ciab.res.in
Recruitment सेक्शन में जाकर आवेदन फॉर्म और Summary Sheet डाउनलोड करें
फॉर्म को पूरा भरें और आवश्यक दस्तावेजों की स्व-सत्यापित प्रतियां संलग्न करें
आवेदन शुल्क का भुगतान करके रसीद संलग्न करें
भरे हुए फॉर्म भेजें:
डाक या व्यक्तिगत रूप से भेजें:
प्रशासनिक अधिकारी,
BRIC-NABI, नॉलेज सिटी, सेक्टर-81,
मोहाली – 140306
या ईमेल करें:
वैज्ञानिक पद के लिए: recruit.sci2025@gmail.com
प्रशासनिक पद के लिए: recruit.as2025@gmail.com
आवेदन की अंतिम तिथि:
06 नवंबर 2025
देहरादून: उत्तराखंड में नशे का जाल तेजी से चारों ओर फैल रहा है और युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रहा है। लेकिन पुलिस भी नशे पर लगातार प्रहार कर रही है और नशे के सौदागरों को जेल की सलाखों के पीछे भेज रही है। बीते तीन सालों में प्रदेश में चार हजार से ज्यादा नशे के सौदागरों को पुलिस ने पकड़ा है।
उत्तराखंड में नशे पर प्रहार जारी
उत्तराखंड में ‘नशा मुक्त उत्तराखंड अभियान’ के तहत लगातार कार्रवाई की जा रही है। पिछले 3 साल में एनडीपीएस एक्ट के तहत 3,431 मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में कार्रवाई करते हुए 4,440 आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है।
अब तक 208 करोड़ की सामग्री बरामद
नशे के विरूद्ध कार्रवाई के दौरान तस्करों से 208 करोड़ रुपए का नशे की सामग्री भी बरामद की गई है। पुलिस का कहना है कि नशा तस्करी के नए ट्रेंड के तौर पर एमडीएमए और सिंथेटिक दवा का चलन बढ़ने से इनकी जब्ती की मात्रा भी बढ़ोतरी हुई है।
अब तक 681.09 किलोग्राम चरस, 58.98 किलोग्राम हीरोइन, 4954.34 किलोग्राम गांजा और 7,20,278 गोलियां, 38,919 इंजेक्शन, 649.79 किलोग्राम डोडा, 61.22 किलोग्राम अफीम, 0.39 ग्राम कोकीन, और 7,18,201 कैप्सूल बरामद किए गए हैं। बता दें कि बरामद की गई इस सामग्री की अनुमानित कीमत 2,080,431,296 रुपए है।
देहरादून: दीपावली से पहले उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) ने प्रदेश में वायु और ध्वनि प्रदूषण को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। बोर्ड ने राज्य के आठ प्रमुख शहरों में वायु गुणवत्ता और शोर स्तर की निगरानी करने का निर्णय लिया है। यह अभियान 13 अक्टूबर से शुरू होगा और पूरे 15 दिनों तक चलेगा।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हर साल दिवाली के आसपास वायु और ध्वनि प्रदूषण की मॉनिटरिंग करता है, ताकि त्योहार के दौरान बढ़ने वाले प्रदूषण पर नजर रखी जा सके और आवश्यक कदम उठाए जा सकें। इस बार भी बोर्ड ने सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
इन शहरों में होगी मॉनिटरिंग
उत्तराखंड के जिन आठ शहरों में मॉनिटरिंग की जाएगी…उनमें देहरादून, ऋषिकेश, टिहरी, हरिद्वार, काशीपुर, रुद्रपुर, हल्द्वानी और नैनीताल शामिल हैं।
स्थानों का विवरण इस प्रकार है:
देहरादून – घंटाघर व नेहरू कॉलोनी
ऋषिकेश – नगर निगम परिसर
टिहरी – डीएम कार्यालय व नगर पालिका परिषद
हरिद्वार – ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज
काशीपुर – एलडी भट्ट उप जिला अस्पताल
रुद्रपुर – नगर निगम परिसर
हल्द्वानी – जल संस्थान कार्यालय
नैनीताल – नगर पालिका परिषद परिसर
इन सभी स्थानों पर प्रदूषण मापने के लिए पहले से मॉनिटरिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं…जिनके जरिए हवा की गुणवत्ता और ध्वनि स्तर की जांच की जाएगी।
स्वच्छ हवा के प्रति जागरूक है उत्तराखंड
उत्तराखंड को देश के उन राज्यों में गिना जाता है जहां की वायु गुणवत्ता अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर मानी जाती है। इसी स्थिति को बनाए रखने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लगातार काम कर रहा है। बोर्ड के अधिकारी सुनिश्चित करते हैं कि राज्य में कार्यरत उद्योग, निर्माण कार्य और ट्रैफिक जैसे कारकों से होने वाले प्रदूषण पर समय-समय पर नियंत्रण लगाया जाए।
जनता से भी की जाएगी अपील
बोर्ड दिवाली के आसपास जागरूकता अभियान भी चलाता है…जिसमें आमजन से अपील की जाती है कि वे कम से कम पटाखों का प्रयोग करें, ध्वनि सीमा का पालन करें और पर्यावरण को स्वच्छ रखने में योगदान दें।
देहरादून: उत्तराखंड के करीब 9,000 सरकारी राशन विक्रेताओं (Fair Price Shop Dealers) को दीपावली (Diwali) से पहले बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। खाद्य आपूर्ति विभाग (Food and Civil Supplies Department) की ओर से राशन डीलरों के Commission (लाभांश) में बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है…जो जल्द ही शासन स्तर पर मंजूरी पा सकता है।
विभागीय मंत्री रेखा आर्या ने इस संबंध में राज्य खाद्य योजना (State Food Scheme – SFY) और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (National Food Security Act – NFSA) के तहत मिलने वाले लाभांश (Commission per quintal) को समान रूप से देने के निर्देश दिए हैं।
क्या है डीलरों की मांग?
फेयर प्राइस शॉप डीलर्स लंबे समय से यह मांग कर रहे थे कि SFY में राज्य सरकार की ओर से दिया जाने वाला Commission, NFSA के तहत केंद्र सरकार द्वारा दिए जा रहे Commission के बराबर किया जाए।
वर्तमान में:
NFSA के तहत: 180 प्रति क्विंटल
SFY के तहत: 50 प्रति क्विंटल
Food Commissioner चंद्रेश कुमार ने बताया कि लाभांश बराबर करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। यदि इसे मंजूरी मिलती है…तो राज्य खाद्य योजना में भी डीलरों को 180 प्रति क्विंटल Commission मिलने लगेगा।
दीपावली से पहले मिल सकता है फायदा
यदि शासन स्तर से इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिलती है..तो यह बढ़ोतरी दिवाली से पहले लागू की जा सकती है। इससे पूरे प्रदेश के राशन विक्रेताओं को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा…जिससे वे खुद को सशक्त और आत्मनिर्भर महसूस करेंगे।
देहरादून: उत्तराखंड में अब मदरसा बोर्ड का अस्तित्व खत्म होने जा रहा है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने ‘उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक, 2025’ को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही अब राज्य में मदरसों को उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता और उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद (उत्तराखंड बोर्ड) से संबद्धता लेनी होगी।
दरअसल गैरसैंण में आयोजित विधानसभा के मानसून सत्र में यह विधेयक पारित हुआ था। अब राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह विधेयक कानून बन गया है। इससे उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है….जहां मदरसा बोर्ड को समाप्त कर सभी अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थानों को मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली से जोड़ा जाएगा।
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने विधेयक पर हस्ताक्षर करने से पहले सिख, मुस्लिम, जैन, ईसाई और बौद्ध समुदायों के प्रतिनिधियों से चर्चा की थी। राज्यपाल ने कहा कि यह कदम शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करेगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस फैसले को राज्य के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था को समान और आधुनिक बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। जुलाई 2026 सत्र से सभी अल्पसंख्यक विद्यालयों में राष्ट्रीय पाठ्यक्रम (NCF) और नई शिक्षा नीति (NEP-2020) लागू होगी। हमारा उद्देश्य है कि प्रदेश का हर बच्चा चाहे किसी भी वर्ग या समुदाय का हो समान शिक्षा और समान अवसरों के साथ आगे बढ़े।