पंत भाइयों ने सरकारी नौकरी छोड़ी और कालाढूंगी से पहाड़ी उत्पादों को विदेशों तक पहुंचा दिया

Uttarakhand: Pant Brothers: Kaladungi: Pahadi Product: उत्तराखंड पिछले कुछ वर्षों में स्वरोजगार की राह पर चल पड़ा है। इसका एक कारण यह भी है कि लोगों को प्रेरित करने के लिए कोई ना कोई ऐसी कहानी सामने जरूर आती है जो अपने आप एक उदाहरण बन जाती है। इस आर्टिकल में हम आज कालाढूंगी निवासी विमल पंत और विजय पंत के बारे में बात करेंगे, जिन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर पहाड़ी उत्पादों को पहचान दी। दोनों भाइयों ने पहाड़ी उत्पादों को सप्लाई करने के लिए कंपनी बनाई और आज उसका टर्नओवर 50 लाख से ज्यादा हो गया।

स्वरोजगार बनाम सरकारी नौकरी !

कहना गलत नहीं होगा कि कोरोना काल ने पहाड़ के हजारों लोगों को स्वरोजगार के रास्ते में चलने के लिए प्रेरित किया। विजय और विमल ने भी 2022 में अपने नए सफर की शुरुआत की। बताते चले कि विमल ब्रिडकुल में सहायक लेखाकार के पद पर कार्य थे तो वही विजय स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत थे।

पहाड़ के उत्पादों को पहचान देने के लिए दोनों ने कालाढूंगी के कमौला में मॉम्स ट्री नाम से कंपनी शुरू की। उन्होंने सबसे पहले पहाड़ी नमक तैयार किया। धीरे-धीरे इसके कई वेरिएंट भी बाजार में उतारे। इसमें भांग, लहसुन, पुदीना, मिर्च, धनिया अजवाइन आदि शामिल है।

मॉम्स ट्री का उत्पादन

इसके बाद दोनों ने चाय मसाला, छाछ मसाला, हल्दी, मिर्च, धनिया, गरम मसाला तैयार किया और फिर धीरे-धीरे विजय और विमल ने उत्तराखंड के अलावा विदेशों में भी पहाड़ के उत्पादों को पहुंचना शुरू किया। अब कालाढूंगी निवासी इन भाइयों की कहानी युवाओं के बीच भी पहुंच गई और कई युवा पहाड़ में स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने की सोच रहे हैं।

मॉम्स ट्री में बच्चों की कैंडी, हींगदाना, अनारदाना सहित कई अन्य उत्पादन भी तैयार किए जाते हैं। कंपनी द्वारा तैयार किए गए उत्पाद मौजूद वक्त में नॉर्वे, दुबई, सिंगापुर, यूके सहित देश के कई शहरों में पहुंच रहे हैं। खास बात ये है कि दोनों भाइयों ने अपने इस काम में स्थानीय लोगों को रोजगार भी दिया ।

अब तक 500 लोग मॉम्स ट्री के साथ अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। इस बारे में मॉम्स ट्री के संस्थापकों ने बताया कि बचपन से पहाड़ में काम करने का मन था और इसीलिए स्वरोजगार की राह पर चलने का फैसला भी किया। उन्होंने बताया कि मॉम्स ट्री द्वारा जो भी उत्पादन तैयार किया जाता है, उसका कच्चा माल पहाड़ से लाया जाता है, जिससे पहाड़ के लोगों को भी रोजगार मिलता है। दोनों भाइयों की कोशिश है कि अपनी कंपनी के माध्यम से न सिर्फ शुद्ध, गुणवत्तापूर्ण उत्पाद बाजार में ला रहे हैं, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिले।

भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा में दीपेंद्र कोश्यारी की एंट्री, अब सियासी हलचल होना तय !

Uttarakhand News: BJP: Dipendra Koshiyari: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष और दो महामंत्रियों की नियुक्ति कर दी है। राज्यसभा सांसद और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने यह नियुक्तियां की हैं।

ऋषिकेश के विपुल मैंदोली को भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

इसके साथ ही, नैनीताल के दीपेंद्र कोश्यारी और टिहरी के मुलायम सिंह रावत को प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दीपेंद्र कोश्यारी पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी के भतीजे हैं। वह लंबे समय से मोर्चा अध्यक्ष पद की दौड़ में थे, लेकिन उन्हें अध्यक्ष पद के बजाय महामंत्री का पद मनोनीत किया गया है। इसके अलावा वो पिछले कुछ वक्त से लालकुआं विधानसभा क्षेत्र में काफी एक्टिव नजर आ रहे हैं और भविष्य में होने वाले चुनावों के लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। वहीं उनकी नियुक्ति से सियासी हलचल तय मानी जा रही है।

उत्तराखंड: कुत्ते के काटने से हुई गाय की मौत, 17 लोगों की हालत नाजुक

उत्तरकाशी: आराकोट बंगाण क्षेत्र में पागल कुत्ते द्वारा काटे गए गाय के दूषित दूध से 17 ग्रामीणों सहित महिलाएं और बच्चे बीमार हो गए। जब ग्रामीणों को इसका पता चला कि जिस गाय का दूध वे पी रहे थे…वह पागल कुत्ते के काटने के कारण मृत हो चुकी है…तो वे घबराए और इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे।

लेकिन अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आराकोट में डॉक्टर और एंटी रेबीज इंजेक्शन की कमी के कारण उन्हें देहरादून के त्यूणी जाना पड़ा। वहां पहली और दूसरी डोज लगवाई गई। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सामाजिक कार्यकर्ता मनमोहन सिंह चौहान ने मोरी के स्वास्थ्य अधिकारी से संपर्क कर इंजेक्शन आराकोट केंद्र में उपलब्ध कराने की मांग की।

अब 8 अक्टूबर को तीसरी डोज आराकोट में लगाई जा चुकी है, जिससे ग्रामीणों को राहत मिली है। अगली डोज 28 अक्टूबर को लगनी है। ग्रामीण अस्पताल में डॉक्टर और स्टाफ की कमी को लेकर शासन प्रशासन से व्यवस्था सुधार की भी मांग कर रहे हैं।

डॉक्टर नीतेश ने कहा कि ग्रामीणों की तबीयत खराब होने की सूचना मिलने पर तत्काल इंजेक्शन उपलब्ध कराई गई है और आगे भी सुविधा दी जाएगी।

कुत्ते के काटने पर क्या करें?

कटे हुए घाव को कम से कम 15 मिनट साबुन और साफ पानी से धोएं।

तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और एंटीसेप्टिक क्रीम लगाएं।

काटे जाने के 72 घंटे के भीतर एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाएं।

अपने पालतू जानवरों को वैक्सीन लगवाना न भूलें।

उत्तराखंड: 7 साल में सोना, सेंसेक्स और जमीन के दामों में जबरदस्त उछाल, जानिए कितना हुआ ?

हल्द्वानी (नैनीताल): धनतेरस और दीपावली के अवसर सिर्फ खरीदारी का मौसम ही नहीं…बल्कि निवेशकों के लिए भी बड़े फायदे का समय साबित हो रहा है। पिछले सात वर्षों में सोने की कीमतों ने नए रिकॉर्ड बनाए हैं…जमीन के सर्किल रेट में भारी बढ़ोतरी हुई है और सेंसेक्स ने लगातार तेजी से ऊंचाइयां छुई हैं। इन तीन निवेश विकल्पों ने निवेशकों की किस्मत बदली है। आइए जानते हैं सोना, जमीन और शेयर बाजार की इस शानदार कहानी को…

सोने की कीमतें 37,500 से बढ़कर 1.23 लाख प्रति 10 ग्राम:
अक्टूबर 2018 में सोने की कीमत लगभग 37,500 रुपये प्रति 10 ग्राम थी….जो अब बढ़कर 1,23,300 रुपये तक पहुंच गई है। इस दौरान सोने की कीमतों में 311 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। साल 2020 में जबरदस्त उछाल के बाद कीमतें कई बार बढ़ी-घटीं…लेकिन साल दर साल इसका दाम बढ़ता रहा।

नैनीताल रोड की जमीन के सर्किल रेट में भारी बढ़ोतरी:
2018 में नैनीताल रोड पर जमीन का सर्किल रेट 22 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर था…जो अब बढ़कर 75 से 1 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर तक पहुंच चुका है। जमीन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के पीछे मांग में इजाफा और आर्थिक स्थिति का सुधार प्रमुख कारण हैं।

सेंसेक्स ने सात साल में दोगुना बढ़ा:
2018 में सेंसेक्स लगभग 38,989 अंक पर था…जो अब बढ़कर 81,790 अंकों को पार कर चुका है। इस दौरान शेयर बाजार में निवेश करने वालों को भी भारी लाभ हुआ है।

विशेषज्ञों की राय:
सराफा कारोबारी राजेश अग्रवाल के अनुसार सोना भावनात्मक जुड़ाव के कारण भी पसंद किया जाता है। भले ही डिमांड 35-40 प्रतिशत घटी हो…लेकिन निवेश में इसकी मांग बनी हुई है। जमीन की खरीद-बिक्री भी अच्छी बनी हुई है शेयर बाजार विशेषज्ञ पंकज गुप्ता कहते हैं कि जमीन और सोना उपभोग की वस्तुएं हैं….इसलिए मध्यम वर्ग के लिए ये निवेश महंगे पड़ सकते हैं। सेंसेक्स देश की आर्थिक स्थिति और खुशहाली का आईना है। जब देश तरक्की करता है तो सेंसेक्स भी तेजी से बढ़ता है।

उत्तराखंड: प्राथमिक स्कूलों में जल्द भरे जाएंगे 2100 शिक्षक पद

देहरादून: उत्तराखंड के युवाओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। राज्य सरकार जल्द ही प्राथमिक विद्यालयों में 2100 सहायक अध्यापकों की भर्ती करने जा रही है। शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत की अध्यक्षता में बुधवार को हुई विभागीय समीक्षा बैठक में इस संबंध में अहम निर्णय लिया गया है। शिक्षा विभाग को भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू करने के निर्देश भी दे दिए गए हैं।

बैठक के दौरान मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यह भर्ती जिला स्तर पर की जाएगी…क्योंकि प्राथमिक शिक्षकों का संवर्ग जिला स्तर पर ही होता है। सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे जल्द ही विज्ञप्ति जारी करें और चयन प्रक्रिया को गति दें।

एनआईओएस डीएलएड प्रशिक्षुओं के लिए भी खुला रास्ता

धन सिंह रावत ने बताया कि राज्य सरकार प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के साथ-साथ बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने के लिए लगातार प्रयासरत है। पिछले दो वर्षों में तीन हजार से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति की जा चुकी है।

हालांकि एनआईओएस डीएलएड प्रशिक्षुओं को शामिल किए जाने को लेकर पूर्व में अदालत में कुछ याचिकाएं दाखिल की गई थीं…जिससे प्रक्रिया प्रभावित हुई थी। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश और राज्य कैबिनेट द्वारा बेसिक शिक्षक सेवा नियमावली में संशोधन के बाद वर्ष 2017 से 2019 के बीच प्रशिक्षित एनआईओएस डीएलएड अभ्यर्थियों को भी भर्ती में शामिल होने का रास्ता मिल गया है।

आपदा से क्षतिग्रस्त स्कूलों की होगी मरम्मत

बैठक में केवल भर्ती ही नहीं…बल्कि प्रदेश के कई आपदा प्रभावित स्कूलों की मरम्मत और पुनर्निर्माण को लेकर भी चर्चा हुई। शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे विद्यालयों की स्थिति का आंकलन कर बजट का प्रस्ताव तैयार करें, ताकि बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सके।

स्थानांतरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने पर बल

शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की स्थानांतरण प्रणाली को पारदर्शी और त्वरित बनाया जाएगा। इसके लिए त्रिस्तरीय ढांचे को तैयार करने पर भी काम शुरू हो चुका है।

नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए सुनहरा अवसर

उत्तराखंड में सरकारी शिक्षक बनने की राह देख रहे युवाओं के लिए यह एक बड़ा अवसर है। शिक्षा विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के बाद भर्ती प्रक्रिया जल्द ही जमीन पर उतरने वाली है। ऐसे में इच्छुक अभ्यर्थियों को सलाह है कि वे अपनी तैयारी को अंतिम रूप देना शुरू कर दें।

पूर्णागिरी की यात्रा होगी मधुर, ठुलीगाड़ से भैरव मंदिर तक रोड बनेगी डबल लेन

Uttarakhand: Double Lane: Purnagiri: चंपावत जिले में पूर्णागिरि मां के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं को आने वाले दिनों में बेहतर अनुभव मिलने के आसार हैं। ठुलीगाड़ से भैरव मंदिर तक रोड को डबल लेन बनाने की कवायत शुरू हो गई है। वन विभाग ने सड़क चौड़ीकरण के लिए एनओसी देने के साथ ही 670 पेड़ों का छपान कर दिया है, जल्दी पेड़ों का पातन शुरू होगा।

बता दें कि पूर्णागिरि धाम श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। चैत्र नवरात्रि के साथ शुरू होने वाले तीन माह के मेले पर पूरे उत्तराखंड की नजर रहती है, जहां पर सुरक्षा व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए उत्तराखंड पुलिस भी तैनात रहती है।

टनकपुर से पूर्णागिरी धाम की दूरी 23 किलोमीटर है। श्रद्धालुओं का पहला पड़ाव ठुलीगाड़ होता है, जहां से उन्हें 6 किलोमीटर की दूरी वाहनों से तय कर भैरव मंदिर तक पहुंचना होता है। इसके अलावा कई यात्री ठुलीगाड़ से ही पैदल पूर्णागिरी मंदिर तक भी पहुंचते हैं।

ठुलीगाड़ से भैरव मंदिर तक की रोड बेहद संकरी हैं। इसके चलते यहां जाम की समस्या भी रहती है। कई बार बारिश के वक्त मानसून के चलते मलवा भी मुख्य मार्ग पर आ जाता है। वैसे 1990 में ठुलीगाड़ से भैरव मंदिर तक रोड को डबल लाइन बनाने की कवायत शुरू कर दी गई थी। इसके लिए भारत सरकार की सैद्धांतिक संस्तुति मिल चुकी थी लेकिन कभी बजट न होना है तो कभी वन भूमि हस्तांतरण की समस्या के चलते यह मामला आगे नहीं बढ़ पाया। अब मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व पर लोक निर्माण विभाग और वन विभाग ने तत्वरित कार्रवाई करते हुए सभी बाधाओं को दूर कर लिया गया है।

सड़क के चौड़े होने से जाम की समस्या भी हल होगी तो उसके अलावा देश-विदेश से पूर्णागिरि धाम आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव भी मिलेगा। बता दें कि साल 2022 में पूर्णागिरि पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 35 लाख 60 हजार थी तो वहीं 2023 में आंकड़ा 24 लाख 94 हजार तो 2024 में यह संख्या 20 लाख 90 हजार रही तो वही 2025 तक अब तक 20 लाख 94 हजार श्रद्धालु पूर्णागिरि धाम पहुंच चुके हैं।

उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में ऑनलाइन प्रवेश पाने के लिए तुरंत करें आवेदन

हल्द्वानी: उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (UOU) में शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में पहुँच गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ऑनलाइन माध्यम से प्रवेश लेने की अंतिम तिथि 10 अक्टूबर 2025 निर्धारित की गई है।

कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने बताया कि इच्छुक विद्यार्थी अपनी रुचि और योग्यता के अनुरूप विश्वविद्यालय द्वारा संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों में 10 अक्टूबर तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह तिथि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी-डेब) के निर्देशों के अनुसार तय की गई है, और फिलहाल यही प्रवेश की अंतिम तिथि है।

प्रो. लोहनी ने बताया कि प्रदेश के अधिकांश विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया पहले ही पूर्ण हो चुकी है। ऐसे में जो विद्यार्थी किसी कारणवश अन्य संस्थानों में प्रवेश नहीं ले पाए हैं, उनके लिए उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय एक सुनहरा अवसर प्रदान कर रहा है।

कुलपति ने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे समय व्यर्थ न करें और इसी सत्र में विश्वविद्यालय में प्रवेश लेकर अपने भविष्य को सशक्त बनाएं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के सभी पाठ्यक्रमों में उत्तम अध्ययन व्यवस्था, गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री, और डिजिटल शिक्षा के आधुनिक संसाधन उपलब्ध हैं, जिनकी सहायता से विद्यार्थी घर बैठे ही उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं।

अधिक जानकारी के लिए इच्छुक विद्यार्थी विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट www.uou.ac.in पर जाकर विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

उत्तराखंड: भीड़-भाड़ वाले क्षेत्र में पटाखे की बिक्री पर पाबंदी, लाइसेंस की अवधि भी तय

देहरादून: जिलाधिकारी सविन बसंल के निर्देशानुसार अपर जिलाधिकारी प्रशासन जयभारत सिंह की अध्यक्षता में आज ऋषिपर्णा सभागार में दीपावली के अवसर पर आतिशबाजी के अस्थायी लाइसेंस से जुड़ी अहम बैठक आयोजित हुई। जिले के विभिन्न व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारियों और विभागीय अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि अगले वर्ष से पटाखा की बिक्री केवल चिन्हित खुले मैदानों में लाईसेंस के आधार पर ही की जाएगी। यह कदम सार्वजनिक सुरक्षा और शहर में शांति बनाए रखने के लिए उठाया गया है। उपस्थित सभी व्यापारिक संगठनों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया।

अपर जिलाधिकारी जयभारत सिंह ने व्यापार मंडल से प्रशासन के साथ सहयोग करने की अपेक्षा जताई और पुलिस, फायर ब्रिगेड समेत सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि वे निर्धारित नियमों के अनुसार लाइसेंस जारी करें।

पटाखा बिक्री पर प्रतिबंधित क्षेत्रों में पल्टन बाजार से लेकर कोतवाली क्षेत्र, घंटाघर, धामावाला बाजार, मोतीबाजार, हनुमान चैक, रामलीला बाजार, बैण्ड बाजार, आनंद चैक, लक्ष्मण चैक, डिस्पेंसरी रोड और करनपुर मुख्य बाजार शामिल हैं। इसके अलावा, ऐसे स्थान जहां फायर सेवा के वाहन नहीं पहुंच सकते, वहां भी पटाखा दुकानें प्रतिबंधित रहेंगी। फुटपाथ या सड़कों पर पटाखा विक्रय करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

लाइसेंस के लिए आवेदन शुल्क 850 निर्धारित किया गया है और आवेदन 13 अक्टूबर 2025 तक ही स्वीकार किए जाएंगे। आवेदन के साथ आधार कार्ड, दुकान का फोटो, पुलिस और फायर विभाग की एनओसी, बिजली बिल, रजिस्ट्री या नगर निगम टैक्स रसीद लगाना अनिवार्य होगा। पटाखा गोदाम से फुटकर बिक्री की अनुमति नहीं दी जाएगी। दीपावली के लिए पटाखा बिक्री 17 से 21 अक्टूबर तक सीमित रहेगी।

उत्तराखंड की बेटी शेफाली रावत बनीं भारतीय फुटबॉल टीम की कप्तान !

पौड़ी(गढ़वाल): उत्तराखंड की होनहार बेटी शेफाली रावत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जुनून और मेहनत के दम पर कोई भी मंज़िल दूर नहीं। Blind Football Women’s World Championship 2025 में शेफाली न सिर्फ भारतीय टीम का हिस्सा हैं, बल्कि इस बार कप्तान की भूमिका निभा रही हैं….जो कि Uttarakhand के लिए गर्व की बात है।

केरल के कोच्चि (Kochi, Kerala) में चल रही इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में India Blind Football Team पहली बार किसी उत्तराखंड की महिला खिलाड़ी की कप्तानी में मैदान में उतरी है।

पौड़ी की बेटी, देश की कप्तान

मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल की रहने वाली शेफाली वर्तमान में देहरादून के NIEPVD (National Institute for Empowerment of Persons with Visual Disabilities) की छात्रा हैं। उन्होंने पहले भी कई बार Zonal और National Blind Football Tournaments में उत्तराखंड टीम की कप्तानी की है।

शेफाली का खेल के प्रति समर्पण उन्हें इस मुकाम तक लाया है…जहां अब वह Indian Blind Women’s Football Team की अगुवाई कर रही हैं।

8 देशों की टीमें, दूसरा वर्ल्ड कप संस्करण

यह Women’s Blind Football World Cup का दूसरा संस्करण है। इससे पहले पहला टूर्नामेंट 2022 में इंग्लैंड (Birmingham, UK) में हुआ था…जिसमें शेफाली ने बतौर खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन किया था।

इस बार भारत के साथ-साथ Argentina, Brazil, England, Poland, Japan, Canada और Turkey की टीमें हिस्सा ले रही हैं। यह टूर्नामेंट 11 अक्टूबर 2025 तक चलेगा।

भारत के सामने बड़ा लक्ष्य

भारतीय टीम को अपने ग्रुप में Brazil, England और Poland से मुकाबला करना है। कोच नरेश सिंह नयाल के अनुसार, टीम का लक्ष्य है कि ग्रुप स्टेज में कम से कम दूसरे स्थान पर पहुंचकर Semi-Final में प्रवेश किया जाए…और फिर Final तक पहुंच कर चैंपियनशिप जीतने का सपना पूरा किया जाए।

कोच का भरोसा, प्रदेश को गर्व

कोच नरेश सिंह ने कहा कि शेफाली की कप्तानी और मेहनत का नतीजा है कि आज भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से खड़ा है। उनकी सफलता से और भी कई visually impaired players को प्रेरणा मिलेगी।

न सिर्फ राज्य, पूरे देश को है इस बेटी पर गर्व

शेफाली की उपलब्धि एक उदाहरण है कि दृष्टिबाधा कोई बाधा नहीं होती, अगर इरादे मजबूत हों। उत्तराखंड की यह बेटी अब दुनिया के सबसे बड़े मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रही है…और लाखों बेटियों के लिए role model बन गई है।

उत्तराखंड के छात्रों को जल्द मिलेगी सौगात, प्रदेश में जल्द खोले जाएंगे दो नए विश्वविद्यालय

देहरादून: प्रदेश के छात्र और छात्राओं के लिए अच्छी खबर हैं। जल्द ही प्रदेश में दो नए विश्वविद्यालय खोले जाने की तैयारी है। इसके लिए जल्द ही कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा।

उत्तराखंड में खोले जाएंगे दो नए विश्वविद्यालय

प्रदेश में जल्द ही दो अलग-अलग विश्वविद्यालय खोलने की तैयारी है। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.धन सिंह रावत के अनुसार कौशल आधारित विवि और नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालयों के बच्चों के लिए आवासीय विश्वविद्यालय खोला जाना है। इसके लिए जल्द ही कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा।

25 व्यवसायिक कोर्स भी किए जाएंगे शुरू

आपको बता दें कि प्रदेश में वर्तमान में पांच राज्य विश्वविद्यालय और इनसे संबद्ध 118 महाविद्यालय हैं। बात करें निजि  निजी विश्वविद्यालयों की तो इनकी संख्या 26 है और 244 निजी महाविद्यालय हैं। इसके साथ ही प्रदेश में 21 अशासकीय महाविद्यालय और तीन तकनीकी संस्थान और एक आयुर्वेद चिकित्सा संस्थान है। जबकि अब दो अन्य विश्वविद्यालय खुलने प्रस्तावित हैं। दोनों नए खुलने जा रहे विश्वविद्यालयों में 25 व्यावसायिक कोर्स शुरु किए जाएंगे।

युवाओं को मिलेंगे रोजगार के अवसर
प्रदेश में दो नए विश्वविद्यालय खुलने से युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। इसके साथ ही आवासीय विश्वविद्यालय माध्यमिक शिक्षा विभाग के नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालयों के बच्चों और अन्य बेसहारा बच्चों के लिए होगा। इस से बेसहारा बच्चे उच्च शिक्षा भी प्राप्त कर सकेंगे।