फुटबॉल जितना बड़ा था ट्यूमर, श्री महंत इंद्रेश अस्पताल के नाम नया कीर्तिमान

देहरादून: श्री महंत इंद्रेश अस्पताल (SMIH) ने एक बार फिर चिकित्सा जगत में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यहां डॉक्टरों ने एक युवा मरीज के सीने से लगभग 1.5 किलो वजन वाला विशाल ट्यूमर निकालने में सफलता हासिल की है। यह ट्यूमर आकार में फुटबॉल जितना बड़ा था…लेकिन अस्पताल की विशेषज्ञ टीम ने इसे एंडोस्कोपिक यानी की-होल तकनीक के जरिए बिना बड़े चीरे के हटाया।

इस जटिल ऑपरेशन को डॉ. कनिका कपूर ने वीडियो-असिस्टेड थोरेकोस्कोपिक सर्जरी (VATS) विधि से अंजाम दिया। इस तकनीक की खासियत यह है कि इसमें शरीर पर छोटे-छोटे छिद्रों के माध्यम से ऑपरेशन होता है…जिससे मरीज को कम दर्द होता है रक्तस्राव कम होता है और रिकवरी भी तेज होती है। डॉ. कनिका ने बताया कि इस आधुनिक प्रक्रिया से मरीज जल्दी स्वस्थ होकर घर लौट पाते हैं…जो पारंपरिक सर्जरी की तुलना में कहीं बेहतर और सुरक्षित है।

कैंसर विभाग के प्रमुख डॉ. पंकज गर्ग ने कहा कि अब SMIH में कैंसर की सभी तरह की सर्जरी उपलब्ध हैं…जिनमें मिनिमली इनवेसिव तकनीकें भी शामिल हैं। उनका मानना है कि इस स्तर की चिकित्सा सेवाएं उत्तराखंड के लिए गर्व की बात हैं और इससे प्रदेश में विश्वसनीय कैंसर उपचार को बढ़ावा मिलेगा।

मरीज सफल ऑपरेशन के बाद पूरी तरह स्वस्थ होकर अस्पताल से छुट्टी पा चुका है। अस्पताल प्रशासन ने महाराज जी के आशीर्वाद और मार्गदर्शन का आभार व्यक्त किया…जिनके सहयोग से SMIH निरंतर चिकित्सा क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

यह सफलता न सिर्फ एक मरीज के जीवन में नया अध्याय लिखेगी, बल्कि पूरे क्षेत्र में चिकित्सा के प्रति विश्वास और उम्मीदों को भी मजबूत करेगी।

उत्तराखंड: परिवार से पहले ड्यूटी, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी की हो रही चर्चा

हरिद्वार: करवा चौथ की रौशन रात में जहां पूरे शहर में श्रद्धा और उल्लास था, वहीं सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी नेहा झा ने अपनी जिम्मेदारी की मिसाल पेश की। बहादराबाद पुलिस के साथ मिलकर उन्होंने देर रात तक सड़क पर कड़ी निगरानी रखी और यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराया।

त्योहार की चांदनी रात में महिलाएं चांद के दर्शन की प्रतीक्षा कर रही थीं…लेकिन नेहा झा ने इस बीच सुनिश्चित किया कि सड़कें सुरक्षित रहें और कोई भी नियमों की अनदेखी न करे। अभियान के दौरान 17 चालान काटे गए और 3 वाहनों को सीज किया गया। उप निरीक्षक मनोज कुमार और उनकी टीम ने भी इस काम में अहम भूमिका निभाई।

इस कड़ी कार्रवाई से यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों में खलबली मच गई। नेहा झा ने यह साबित कर दिया कि त्योहारों के बीच भी कर्तव्य की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उनकी इस मेहनत से साफ हो गया कि एक महिला अधिकारी न सिर्फ कानून की पालक है…बल्कि समाज की सच्ची प्रहरी भी है।

दिव्यांग सुरेंद्र की कहानी बनी प्रेरणा, उत्तराखंड की लोक संस्कृति के लिए किए बड़े-बड़े काम !

कर्णप्रयाग (चमोली): अगर दिल में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो कोई भी कमजोरी रास्ता नहीं रोक सकती। चमोली जिले के सिमली राड़खी गांव के रहने वाले सुरेंद्र लाल ने इसे सच कर दिखाया है। पोलियो से ग्रसित होने के बावजूद उन्होंने अपनी दिव्यांगता को कभी भी अपने सपनों के आगे आने नहीं दिया।

पैरों में प्लास्टिक के डिब्बे बांधकर जब सुरेंद्र मंच पर लोक गीतों की प्रस्तुति देते हैं…तो दर्शक केवल उनकी कला में नहीं उनके हौसले में खो जाते हैं।

बचपन में ही सहा दुख, लेकिन नहीं हारा मन

सुरेंद्र की जिंदगी की राह आसान नहीं रही। जब वह केवल पांच साल के थे उनकी मां का निधन हो गया। जन्म से ही पैरों से दिव्यांग होने की वजह से उनका बचपन और भी चुनौतीपूर्ण रहा। पिता ने गरीबी में जैसे-तैसे सुरेंद्र और उनकी दो बहनों का पालन-पोषण किया।

लेकिन सुरेंद्र के भीतर कुछ अलग करने का जुनून था। 1996 में ‘लोक जागृति विकास संस्था’ से जुड़कर उन्होंने लोक कला की दुनिया में कदम रखा। उसी साल उन्होंने पहली बार गौचर मेले में प्रस्तुति दी…जिसमें लोक गायक विनोद सकलानी के प्रसिद्ध गीत “चली कमांडर धका धक गढ़वाल मा…” पर जब उन्होंने प्रस्तुति दी, तो दर्शकों ने उन्हें “कमांडर” नाम दे दिया…जो आज भी उनके नाम के साथ जुड़ा हुआ है।

सम्मान और सफर

सुरेंद्र ‘कमांडर’ अब तक दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड सहित कई राज्यों में मंचों पर प्रस्तुति दे चुके हैं। वर्ष 2008 में ‘उत्तराखंड वॉयस’ पुरस्कार से उन्हें सम्मानित किया गया…जो प्रसिद्ध लोक गायिका कल्पना चौहान द्वारा दिया गया।

वे केवल लोक नर्तक और गायक ही नहीं बल्कि एक बेहतरीन ढोल वादक भी हैं। लोक जागृति विकास संस्था से जुड़े जीतेन्द्र कुमार ने कहा कि सुरेंद्र कमांडर प्रतिभा के धनी हैं उनकी कला में जुनून और आत्मा दोनों नजर आता है।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

सुरेंद्र कमांडर की कहानी हमें यह सिखाती है कि शारीरिक सीमाएं केवल शरीर तक सीमित होती हैं…अगर मन ठान ले तो रास्ते खुद बनते जाते हैं। एक छोटे से गांव का लड़का…जो पैरों में डब्बे लगाकर चलता है आज हजारों लोगों के दिलों पर राज करता है…यह किसी चमत्कार से कम नहीं।

उत्तराखंड में समय से पहले सर्दी ने दी दस्तक, इस महीने फिर बदलेगा मौसम

चंपावत: इस साल उत्तराखंड में सर्दी ने सामान्य समय से तीन सप्ताह पहले दस्तक दे दी है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हुए हिमपात और वर्षा के चलते 10 अक्टूबर से पहले ही तापमान सामान्य से दो से चार डिग्री सेल्सियस तक नीचे पहुंच गया है।

गुरुवार को मुक्तेश्वर का न्यूनतम तापमान 8 डिग्री दर्ज किया गया जबकि शुक्रवार को पंतनगर में पहली बार इस मौसम में पारा 17 डिग्री तक पहुंचा। पर्वतीय क्षेत्रों में लोग अब गरम कपड़े निकालने लगे हैं।

आमतौर पर अक्टूबर अंत या नवंबर शुरुआत में ही पश्चिमी हिमालय की पहाड़ियों पर पहला हिमपात होता है। लेकिन इस बार अक्टूबर के पहले सप्ताह में ही पिथौरागढ़ जिले के आदि कैलास, ओम पर्वत, कुटी गांव, चमोली और उत्तरकाशी के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हिमपात हुआ।

केदारनाथ के कपाट इस शीतकाल के लिए 23 अक्टूबर को बंद होंगे। अक्टूबर के पहले सप्ताह में प्रदेश में रुक-रुककर हुई वर्षा और हिमपात के लिए दो मौसमी प्रणाली जिम्मेदार रही…उत्तर पाकिस्तान व आसपास सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और हरियाणा के ऊपर बने चक्रवाती परिसंचरण साथ ही अरब सागर व बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाएं।

मौसम का अंदाज़

दिवाली और उसके आसपास मौसम शुष्क रहने की संभावना है।

दिन में धूप अच्छी रहेगी..लेकिन शाम को ठंडक बढ़ेगी।

अक्टूबर तीसरे सप्ताह में पश्चिमी विक्षोभ फिर हिमालयी क्षेत्रों की ओर बढ़ेंगे…जिससे दिवाली के बाद वर्षा और हिमपात की गतिविधियां तेज हो जाएंगी।

स्थानीय तापमान:

पंतनगर का अधिकतम तापमान 29.8 डिग्री (सामान्य से 2 डिग्री कम)

मुक्तेश्वर का अधिकतम/न्यूनतम क्रमशः 17.1 / 8.0 डिग्री

देहरादून का अधिकतम तापमान 25.5 डिग्री (सामान्य से 4 डिग्री कम)

बागेश्वर में 11 डिग्री, पिथौरागढ़ व चंपावत में 12 डिग्री

डा. चंद्र सिंह तोमर, निदेशक मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने कहा कि इस बार पश्चिमी विक्षोभ समय से पहले सक्रिय होने से हिमपात देखने को मिला। दिवाली तक मौसम शुष्क रहेगा….पर्वतीय क्षेत्रों में दिन में गुनगुनी धूप और शाम को गुलाबी ठंड का आनंद लिया जा सकता है।

जरूरी सूचना… टनकपुर-देहरादून ट्रेन अब हफ्ते में तीन दिन चलेगी

देहरादून: पिछले दिनों मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से भेंट कर उत्तराखंड में रेल सेवाओं के विस्तार और सुधार से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। बैठक के दौरान रेल मंत्री ने मुख्यमंत्री की मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।

मुख्यमंत्री धामी के आग्रह पर रेल मंत्री वैष्णव ने देहरादून और हरिद्वार रेलवे स्टेशनों को ‘आदर्श रेलवे स्टेशन’ के रूप में विकसित करने की सहमति दी। इसके साथ ही यह भी निर्णय लिया गया कि ऋषिकेश के पुराने रेलवे स्टेशन को पूरी तरह बंद किया जाएगा और भविष्य में सभी ट्रेनों का संचालन केवल योग नगरी रेलवे स्टेशन से ही किया जाएगा।

इसके अलावा, मुख्यमंत्री के अनुरोध पर देहरादून-टनकपुर साप्ताहिक ट्रेन की आवृत्ति बढ़ाते हुए इसे सप्ताह में तीन दिन चलाने पर भी रेल मंत्री ने सहमति जताई।

बैठक में मुख्यमंत्री धामी ने हरिद्वार-देहरादून रेल लाइन के दोहरीकरण कार्य का पूरा व्ययभार केंद्र सरकार द्वारा वहन किए जाने का भी अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए रेल कनेक्टिविटी का विस्तार राज्य के आर्थिक और पर्यटन विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

रेल मंत्री ने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि उत्तराखंड में रेल सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए केंद्र सरकार हर संभव सहयोग करेगी।

उत्तराखंड: अब एक क्लिक पर मिलेंगी नगर निकाय की 18 सेवाएं, घर बैठे निपटेंगे सारे काम

देहरादून: उत्तराखंड के नगर निकायों में नागरिकों को अब लंबी कतारों और फाइलों के चक्कर से राहत मिलने जा रही है। जल्द ही प्रदेश के सभी नगर निकायों में 18 नागरिक सेवाएं पूरी तरह डिजिटल हो जाएंगी। घर बैठे ही आप पानी का टैंकर मंगा सकेंगे…पालतू कुत्तों का पंजीकरण करा सकेंगे और फायर एनओसी जैसी अहम सेवाएं भी महज एक क्लिक पर उपलब्ध होंगी। इसके लिए शहरी विकास विभाग द्वारा तैयार म्युनिसिपल शेयर्ड सर्विस सेंटर (MSSC) प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार से हरी झंडी मिल गई है।

इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत उत्तराखंड को 22.8 करोड़ रुपये की धनराशि भी मंजूर हुई है। यह योजना राष्ट्रीय शहरी डिजिटल मिशन (NUDM) के तहत चलाई जा रही है और गौर करने वाली बात यह है कि देशभर के केवल 10 राज्यों को इस प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है…जिनमें उत्तराखंड भी एक है।

क्या है MSSC प्रोजेक्ट?

आईटीडीए (सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी) के सहयोग से तैयार इस प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश के सभी नगर निकायों के लिए एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया जाएगा। इसके ज़रिए आम नागरिकों को कई सेवाएं मोबाइल या कंप्यूटर से घर बैठे उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही नगर निकायों में IT इन्फ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड किया जाएगा और कर्मचारियों को तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इस योजना के तहत देहरादून, ऋषिकेश, हल्द्वानी और रुद्रपुर में पासपोर्ट सेवा केंद्र की तर्ज पर आधुनिक नगर सेवा केंद्र स्थापित किए जाएंगे। यहां एक ही छत के नीचे सभी डिजिटल सेवाएं आम लोगों को उपलब्ध कराई जाएंगी।

ये 18 सेवाएं होंगी डिजिटल…

प्रॉपर्टी टैक्स का आकलन और भुगतान

विविध शुल्क संग्रहण

पानी व सीवरेज कनेक्शन प्रबंधन

ट्रेड लाइसेंस और उसका भुगतान

जन शिकायत निवारण प्रणाली

फायर एनओसी जारी करना

वित्त और लेखा प्रबंधन मॉड्यूल

सेप्टिक टैंक और स्लज प्रबंधन

पालतू कुत्तों का रजिस्ट्रेशन

ई-वेस्ट मैनेजमेंट

कम्युनिटी हॉल बुकिंग

नगर परिसंपत्तियों का प्रबंधन

रेहड़ी-ठेली वालों का रिकॉर्ड और प्रबंधन

विज्ञापन और होर्डिंग परमिशन

निर्माण और ध्वस्तीकरण कचरा प्रबंधन

पेयजल टैंकर/मोबाइल टॉयलेट जैसी नागरिक सेवाएं

नगर सेवा केंद्र सेवाएं

जीआईएस आधारित सेवाएं

पहले से संचालित जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र और ऑनलाइन बिल्डिंग प्लान अप्रूवल को भी इस सिस्टम में जोड़ा जाएगा।

शहरी विकास एवं आईटी सचिव नितेश झा ने कहा कि यह एक बेहद महत्वपूर्ण पहल है। MSSC प्रोजेक्ट से ना सिर्फ नगर निकायों की कार्यक्षमता बढ़ेगी…बल्कि नागरिकों को पारदर्शी, तेज और सरल सेवाएं मिलेंगी। ITDA की मदद से एकीकृत मंच तैयार किया जा रहा है…जिससे सभी सेवाएं एक क्लिक पर उपलब्ध होंगी।

उत्तराखंड: 20 दिन से नहाए बिना बनाए जा रहे बताशे, अगला सच जानकर होगी हैरानी !

हल्द्वानी: दीपावली के मौके पर पूजा में इस्तेमाल होने वाले बताशे, मिठाई और खिलौने बनाने वाली फैक्ट्रियों में गंदगी और अनियमितताएं सामने आई हैं। प्रशासन नगर निगम और खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीम ने गुरुवार शाम बनभूलपुरा और गांधीनगर में चार फैक्ट्रियों पर छापेमारी की। जांच में पाया गया कि इन जगहों पर सफाई का अभाव था…फूड लाइसेंस नहीं था और अनजाने केमिकल का इस्तेमाल हो रहा था।

टीम ने फैक्ट्रियों से खाने के सामान और निर्माण में प्रयोग किए जाने वाले केमिकल के सैंपल भी लिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि केमिकल बिना लेबल के मिले और इसका इस्तेमाल बताशे और खिलौनों को चमकदार बनाने के लिए किया जा रहा था, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। एक फैक्ट्री में कारीगर ने बताया कि पिछले 20 दिन से नहाया तक नहीं…जिससे उत्पाद की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं।

बताशे की चिपकने की समस्या को दूर करने के लिए खड़िया पाउडर डाला जा रहा था, जो शरीर के लिए हानिकारक है। बनभूलपुरा की एक फैक्ट्री से खुला खड़िया पाउडर भी बरामद हुआ। इसके अलावा गंदे पानी का इस्तेमाल भी किया जा रहा था।

चारों फैक्ट्रियों को प्रशासन ने सील कर दिया है और काम करने वाले कारीगरों का सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं। वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी अभय सिंह ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद असली स्थिति सामने आएगी।

उत्तराखंड: जेल की दीवार फांदकर भागा था 50 हजार का इनामी शातिर चोर, 17 साल बाद गिरफ्त में आया

देहरादून: उत्तराखंड एसटीएफ को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। 17 साल से फरार चल रहे एक शातिर ईनामी अपराधी को एसटीएफ ने नोएडा टीम की मदद से आखिरकार गिरफ्तार कर लिया। यह अपराधी वर्ष 2008 में रुड़की जेल से दीवार कूदकर फरार हुआ था…और उस पर 50 हजार का इनाम घोषित था।

एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत भुल्लर ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी की पहचान हरिसिंह उर्फ हरीश पुत्र रघुवीर निवासी अग्रवाल मंडी टटीरी, जनपद बागपत (उत्तर प्रदेश) के रूप में हुई है। फरारी के बाद वह लगातार अपना नाम और पहचान बदलकर पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों में छिपता रहा।

जानकारी के मुताबिक, हरिसिंह को वर्ष 2007 में रुड़की में मोबाइल की दुकानों से चोरी के चार मामलों में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। लेकिन 2008 में उसने जेल की दीवार कूदकर फरार होने की साजिश रची और सफलतापूर्वक भाग निकला।

लंबे समय तक फरार रहने के दौरान वह फर्जी नामों का इस्तेमाल कर अलग-अलग जगहों पर रहता रहा। उत्तराखंड एसटीएफ और नोएडा एसटीएफ की टीमें लगातार उसके पीछे लगी हुई थीं। आखिरकार खुफिया सूचना के आधार पर 9 अक्टूबर 2025 को रुड़की क्षेत्र से उसे दबोच लिया गया।

फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और उसके नेटवर्क की भी जांच की जा रही है। एसटीएफ की इस कार्रवाई को बड़ी सफलता माना जा रहा है।

ग्रेजुएट्स के पास है शानदार मौका, इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक में निकलीं भर्तियां

नई दिल्ली: इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) ने ग्रामीण डाक सेवक (GDS) से Executive पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी की है। यह भर्ती अभियान देशभर में फैले विभिन्न राज्यों में 348 उम्मीदवारों की नियुक्ति की जाएगी। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार IPPB की आधिकारिक वेबसाइट www.ippbonline.com पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

राज्यवार पदों का विवरण

राज्यपद
उत्तर प्रदेश40
महाराष्ट्र31
मध्य प्रदेश29
गुजरात29
कर्नाटक19
बिहार17
तमिलनाडु17
पंजाब15
पश्चिम बंगाल12
झारखंड12
असम12
उत्तराखंड11
हरियाणा11
ओडिशा11
राजस्थान10
छत्तीसगढ़9
तेलंगाना9
अरुणाचल प्रदेश9
हिमाचल प्रदेश4
मणिपुर4
मेघालय4
जम्मू और कश्मीर3
त्रिपुरा3
मिजोरम2
नागालैंड8
अल्पसंख्यक केंद्र शासित राज्य (जैसे दादरा नगर हवेली, गोवा, सिक्किम)3

कुल पद: 348

पात्रता और आयु सीमा

उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में स्नातक की डिग्री (Graduation) होनी चाहिए।

आयु सीमा: न्यूनतम 20 वर्ष और अधिकतम 35 वर्ष। (आयु की गणना 1 अगस्त 2025 को आधार मानकर की जाएगी)

आरक्षित वर्ग (SC/ST/OBC/EWS/PWD) के उम्मीदवारों को नियमानुसार आयु में छूट मिलेगी।

आवेदन शुल्क

सामान्य वर्ग: 750/-

भुगतान का माध्यम: नेट बैंकिंग, क्रेडिट/डेबिट कार्ड या UPI

वेतन और सुविधाएं

चयनित उम्मीदवारों को 30,000 प्रति माह का वेतन मिलेगा।

इसमें सभी आवश्यक कानूनी कटौतियां (जैसे PF, TDS आदि) शामिल होंगी।

काम और प्रदर्शन के आधार पर वार्षिक वेतनवृद्धि और प्रोत्साहन (Incentives) भी मिल सकते हैं।

अन्य कोई अतिरिक्त भत्ता, बोनस या सुविधा इस पद पर नहीं दी जाएगी।

कैसे करें आवेदन

आधिकारिक वेबसाइट www.ippbonline.com पर जाएं।

“Careers” या “Recruitment” सेक्शन में जाकर संबंधित भर्ती लिंक पर क्लिक करें।

ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरें और मांगी गई व्यक्तिगत व शैक्षणिक जानकारी दर्ज करें।

आवश्यक दस्तावेजों की स्कैन की गई कॉपी अपलोड करें।

आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करें।

सभी जानकारी सावधानीपूर्वक चेक करने के बाद फॉर्म सबमिट करें।

उत्तराखंड: सरकारी स्कूलों में वर्चुअल और स्मार्ट क्लासेस का होगा संचालन, इस दिन सीएम करेंगे उद्घाटन

देहरादून: प्रदेश के 840 सरकारी स्कूल अब डिजिटल वर्चुअल क्लास नेटवर्क से जुड़ेंगे। राज्य सरकार ने शिक्षा के स्तर को और बेहतर बनाने के लिए यह बड़ी पहल की है। इस योजना का शुभारंभ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 11 अक्टूबर को देहरादून में करेंगे।

इस नई व्यवस्था के तहत स्कूलों में हाइब्रिड मोड में वर्चुअल और स्मार्ट क्लासेस का संचालन होगा…जिससे छात्रों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी। शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने बताया कि सरकार शिक्षकों की कमी दूर करने और शिक्षा के डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही है।

इस योजना में शामिल स्कूलों में पढ़ाई का लाइव प्रसारण होगा…जो दो केंद्रीय स्टूडियो से होगा। इससे छात्र और शिक्षक के बीच दो-तरफा संवाद भी संभव होगा। इससे दूर-दराज के इलाकों के छात्र भी आधुनिक शिक्षण सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे।

राज्य के विभिन्न जिलों से कुल 840 स्कूल इस नेटवर्क से जुड़ेंगे। इनमें टिहरी के 120, पौड़ी के 103, पिथौरागढ़ के 80, चमोली के 68 और अल्मोड़ा के 71 स्कूल शामिल हैं। अन्य जिलों के स्कूल भी इस योजना का हिस्सा होंगे।

शुभारंभ के मौके पर सांसद, विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष, मेयर सहित सभी स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी।