क्या आप जानते हैं कि दुनिया के 10 देशों में भी दीपावली मनाई जाती है?

Diwali festival: बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दिवाली अब केवल भारत में ही हर्षोंलास से नहीं मनाई जाती। बल्कि ये त्यौहार वर्तमान में एक वैश्विक उत्सव बन गया है। दिवाली अमेरिका से लेकर लंदन तक आज के समय में दिवाली का त्यौहार मनाया जा रहा है। अब बात करते हैं उन देशों की जहां पर दिवाली का पर्व भारत की ही तरह धूमधाम ले मनाया जाता है। तो नेपाल, श्रीलंका, सिंगापुर, कनाडा, मॉरीशस, त्रिनिदाद और टोबैगो में दिवाली मनाई जाती है।

भारत के पड़ोसी देश नेपाल में भी भारत की ही तरह दिवाली का त्यौहार धूमधाम से मनाया जाता है। नेपाल में इसे तिहार और स्वान्ति कहा जाता है। भारत की ही तरह नेपाल में भी ये पर्व पूरे पांच दिन का मनाया जाता है।श्रीलंका में भी दिवाली मनाई जाती है। जब भगवान श्री राम ने ने रावण का वध किया तो इसके बाद रावण के भाई विभीषण को लंका का राजा बनाया गया। विभीषण ने बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में दीपोत्सव का आदेश दिया था। तब से ही श्रीलंका में अमावस्या के दीन दीप जलाकर इस त्यौहार को मनाया जाता है।

दिवाली के मौके पर सिंगापुर में सरकारी छुट्टी रहकी है और विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। इसके साथ ही कनाडा में भी दिवाली धूमधाम से मनाई जाती है।मलेशिया की दिवाली भी दुनिया में काफी मशहूर है। मलेशिया में हिंदू सूर्य कैलेंडर के सातवें महीने में दिवाली का त्योहार मनाया जाता है।

हालांकि यहां पर तमिल हिंदू ज्यादा रहते हैं तो थोड़ा अलग तरीके से दिवाली मनाई जाती है।कैरिवियाई देश त्रिनिनाद और टोबैगो में बड़ी संख्या में हिंदू रहते हैं। इसलिए यहां पर भी दिवाली धूमधाम से मनाई जाती है। यहां पर दिवाली राष्ट्रीय अवकाश है और सभी धर्मों के लोग मिलकर इसे मनाते हैं।मारीशस में भी दिवाली मनाई जाती है। कहा जाता है कि मारीशस की लगभग आधी आबादी हिंदू है इसलिए यहां पर दिवाली का त्यौहार धूमधाम से मनाया जाता है। दिवाली पर यहां सार्वजनिक अवकाश होता है।

सोना चांदी के अलावा धनतेरस पर क्या खरीदना है शुभ ?, इन चीजों को खरीदकर होगी धनवर्षा

उत्तराखंड: धनतेरस का पर्व हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देवता की पूजा की जाती है। धनतेरस के दिन खरीदारी करने का भी विशेष महत्व होता है। इस दिन सोना-चांदी खरीदा जाता है। लेकिन इसके अवाला भी कुछ चीजें हैं जिन्हें खरीदने से आपकी किस्मत खुल जाएगी और सालभर मां लक्ष्मी की कृपा आप पर बनी रहेगी।

कब है धनतेरस ? (when is dhanteras)

धनतेरस का पर्व 18 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। इसी के साथ पांचदिवसीय दिवाली के त्यौहार की शुरूआत हो जाएगी। बात करें धनतेरस पर सोना-चांदी और अन्य सामान खरीदने के सबसे उत्तम महूर्त की तो इस बार तीन अच्छे मुहूर्त हैं।

18 अक्टूबर को पहला शुभ मुहूर्त सुबह 8 बजकर 50 मिनट से लेकर 10 बजकर 33 मिनट, दूसरा शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 43 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 28 मिनट तक जबकि तीसरा शुभ मुहूर्त शाम 7 बजकर 16 मिनट से रात 8 बजकर 20 मिनट तक है।
Dhanteras 2025 : धनतेरस पर क्या खरीदना है शुभ ?

धनतेरस पर सोना चांदी खरीदना सबसे शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सोना और चांदी मां लक्ष्मी और कुबेर को प्रिय हैं। सोना वैभव और स्थायित्व का प्रतीक है जबकि चांदी शुद्धता और सौभाग्य का संदेश देती है। इसीलिए सोना और चांदी धनतेरस के दिन खरीदना शुभा माना जाता है।

तांबा, पीतल, चांदी और स्टील के बर्तन खरीदना है शुभ

सोने और चांदी के गहने और सिक्के के अलावा इस दिन तांबा, पीतल, चांदी और स्टील के बर्तन खरीदना भी शुभ होता है। धनतेरस पर बर्तन खरीदने की परंपरा भी है इसीलविए धनतेरस को धन्वंतरि त्रयोदशी भी कहा जाता है। इसे धन्वंतरि त्रयोदशी इस लिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। माना जाता है कि ये बर्तन स्वास्थ्य, दीर्घायु और पारिवारिक सुख के सूचक माने जाते हैं। इस दिन रसोई के लिए नई चीजें लाना संपन्नता का प्रतीक माना जाता है।
मिट्टी के दिये नाकारात्मक शक्तियां करते हैं दूर 

धनतेरस से ही दिवाली की शुरूआत हो जाती है इसलिए इस दिन दिये खरीदना बेहद ही शुभ माना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि धनतेरस के दिए दीप जलाने से अंधकार और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं। इसके साथ ही यमराज से रक्षा होती है। इस दिन मिट्टी के दिए खरीदकर घर के मंदिर और प्रवेश द्वार पर जरूर जलाने चाहिए।
झाड़ू खरीदने से आप पर बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा

मान्यताओं के मुताबिक झाड़ू में मां लक्ष्मी का वास होता है। इसलिए धनतेरस को झाड़ू खरीदना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि धनतेरस पर नया झाड़ू खरीदने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। इसके साथ ही घर में लक्ष्मी का आगमन सुगम बनता है।

धनिए के बीज खरीदना है शुभफलदायी

धनतेरस के दिन धनिया का विशेष महत्व होता है। दरअसल धनिया को धन का बीज भी कहा जाता है। इसलिए धनतेरस पर सूखा धनिया यानी कि धनिए के बीज खरीदना बेहद ही शुभफलदायी माना जाता है।

नैनीताल में बच्चे खेलेंगे और आगे बढ़ेंगे, डीएम रयाल की पहली प्रेस वार्ता

हल्द्वानी: जिले के नवनियुक्त जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने गुरुवार को कार्यभार ग्रहण करने के बाद अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में जनता और खिलाड़ियों के हित में कई अहम बात बोली। उन्होंने कहा कि हल्द्वानी की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए अब हर रविवार कोच सार्वजनिक मैदानों में युवाओं को प्रशिक्षण देंगे। उनका उद्देश्य है कि जिले के खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकें।

डीएम रयाल ने कहा कि विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ाना और आमजन की समस्याओं का त्वरित समाधान उनकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने बताया कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों को गति देने के लिए विशेष टीम गठित की जाएगी। वहीं, शहर की प्रमुख समस्या गड्ढायुक्त सड़कों को लेकर उन्होंने कहा कि हल्द्वानी को ‘गड्ढा-मुक्त शहर’ बनाने के लिए विभागों को समयबद्ध योजना तैयार करने के निर्देश दिए जाएंगे।

प्रशासनिक पारदर्शिता पर जोर देते हुए डीएम रयाल ने कहा कि वे संवादहीनता खत्म कर जनता से सीधा संवाद स्थापित करेंगे। इसके तहत वे हर सप्ताह तीन दिन — गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार को जनसुनवाई करेंगे। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य “जनता का विश्वास जीतते हुए एक पारदर्शी, उत्तरदायी और संवेदनशील प्रशासन” स्थापित करना है। शहरवासियों ने नए जिलाधिकारी के इन फैसलों का स्वागत करते हुए भरोसा जताया कि उनके कार्यकाल में हल्द्वानी में विकास की नई दिशा देखने को मिलेगी।

उत्तराखंड: इस म्यूचुअल में 93 लाख की धोखाधड़ी से मचा हड़कंप, कही आप भी तो नही

रुद्रपुर: निप्पोन इंडिया म्यूचुअल फंड की हल्द्वानी शाखा में 93 लाख रुपये की धोखाधड़ी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि ब्रांच ऑपरेशन्स एग्जिक्यूटिव, ब्रांच मैनेजर समेत सात कर्मचारियों ने सिस्टम एक्सेस और डिजिटल हस्ताक्षरों का गलत इस्तेमाल कर जाली दस्तावेज बनाए और निवेशकों के रिकॉर्ड में हेरफेर की।

कंपनी के अधिकृत अधिकारी सचित मेहरा ने साइबर क्राइम थाना पंतनगर में तहरीर दी। जांच में पता चला कि आरोपी गौरव कुमार गर्ग ने अपने साथियों के साथ मिलकर inactive निवेशक खातों की पैन, ई-मेल, मोबाइल और बैंक जानकारी फर्जी दस्तावेजों से बदल दी। इसके बाद तीन निवेशकों के फोलियो से लगभग 93 लाख 85 हजार रुपये की नकदी निकाली गई।

गौरव गर्ग ने धोखाधड़ी की रकम में से 80 लाख रुपये अपने नियंत्रण वाले खाते में ट्रांसफर कर कई ज्वेलरी स्टोर्स में भेजे। एटीएम कार्ड और ओटीपी का भी दुरुपयोग कर उन्होंने कई नकद निकासी की और रकम अपने सहयोगियों में बांटी।

जुलाई 2024 से अगस्त 2025 तक चली आंतरिक जांच में पता चला कि आरोपितों ने कई जाली हलफनामे और बैंक घोषणाएं तैयार कीं। साथ ही फर्जी निवेशक प्रोफाइल भी बनाई गई। साइबर क्राइम थाना पंतनगर प्रभारी अरुण कुमार ने बताया कि मामले में मंगलवार रात आरोपितों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

उत्तराखंड: रुद्रनाथ धाम के कपाट बंद होने की तैयारी पूरी, इस दिन समाधि लेंगे भगवान शिव

गोपेश्वर: चतुर्थ केदार श्री रुद्रनाथ धाम में इस वर्ष यात्रा सीजन का अंतिम चरण आ गया है। शुक्रवार सुबह ठीक 5 बजे विशेष पूजा-अर्चना और विधि-विधान के साथ भगवान रुद्रनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। इससे पहले भगवान शिव को मंदार पुष्पों (बुग्याली फूलों) की शैय्या में समाधि दी जाएगी। मान्यता है कि शीतकाल में भगवान रुद्रनाथ मंदार पुष्पों में ही निवास करते हैं और कपाट खुलने पर यही पुष्प सबसे बड़ा प्रसाद बनकर भक्तों को वितरित किए जाते हैं। इस धार्मिक अनुष्ठान में हकहकूकधारी, पुजारी, स्थानीय ग्रामीण और तीर्थयात्री बड़ी संख्या में रुद्रनाथ धाम पहुंच चुके हैं।

पौराणिक मान्यता है कि यहीं पांडवों को भगवान शिव ने मुखारबिंद के दर्शन दिए थे। गुफा में विराजमान भगवान के मुख को ही मंदिर का रूप दिया गया है। भारत में यह एकमात्र स्थान है जहां भगवान शिव के मुख के दर्शन होते हैं रुद्रनाथ की यात्रा बेहद दुर्गम मानी जाती है। गोपेश्वर से सगर होते हुए लगभग 19 किमी पैदल दूरी तय कर रुद्रनाथ पहुंचा जाता है। इस बार की यात्रा ऐतिहासिक रही….एक लाख से अधिक तीर्थयात्री रुद्रनाथ पहुंचे, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। कपाट बंदी की पूर्व संध्या पर मंदिर को रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया। विशेष रूप से मंदार के फूल जंगल से लाकर शिवलिंग को समाधि दी जाएगी।

शुक्रवार को कार्यक्रम इस प्रकार रहेगा……

तड़के 4 बजे मंदिर कपाट खुलेंगे

पूजा-अर्चना, श्रृंगार पूजा, भोग व आरती होगी

5 बजे शिव को समाधि दी जाएगी

इसके बाद रुद्रनाथ की उत्सव डोली मंदिर से बाहर लाई जाएगी और कपाट बंद होंगे उत्सव डोली मौलीखर्क, सगर गांव होते हुए सूर्यास्त से पहले गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर पहुंचेगी, जहां शीतकालीन पूजा संपन्न होगी।

पुजारी सुनील तिवारी ने जानकारी दी कि सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस वर्ष दर्शनार्थियों की संख्या में ऐतिहासिक बढ़ोत्तरी हुई है।

बचपन में माता-पिता को खोया, दादी ने सब्जी बेचकर पढ़ाया…अब बने IPS अफसर

Uday Krishna Reddy IPS Success Story: कुछ कहानियाँ सिर्फ प्रेरणा नहीं देतीं वो जीवन की दिशा ही बदल देती हैं। ऐसी ही एक कहानी है आईपीएस उदय कृष्ण रेड्डी की…जिन्होंने जिंदगी की सबसे बड़ी तंग गलियों से होते हुए भारत की सबसे प्रतिष्ठित सेवा में अपना नाम दर्ज कराया।

आंध्र प्रदेश के उल्लापलेम गांव में जन्मे उदय की जिंदगी बचपन से ही संघर्षों से भरी रही। सिर्फ 5 साल की उम्र में माँ को खो दिया और कुछ ही समय बाद पिता का भी साया सिर से उठ गया। ट्रक ड्राइवर पिता की मौत के बाद पूरा परिवार टूट चुका था। ऐसे में एकमात्र सहारा बनीं उनकी दादी रमणम्मा…जिन्होंने सब्ज़ी बेचकर पोतों की परवरिश की।

बस 10वीं तक पढ़ लो…लेकिन उदय ने सपने नहीं छोड़े

दादी का मानना था कि 10वीं तक की पढ़ाई काफी है…लेकिन उदय के पढ़ने की इच्छा के आगे वो कभी नहीं झुकीं। आर्थिक तंगी में भी उन्होंने सरकारी स्कूल से 12वीं और फिर MLT (मेडिकल लैब टेक्नीशियन) का कोर्स पूरा किया। सपना था डॉक्टर बनने का…लेकिन हालात ने उन्हें और दिशा में ले लिया।

कांस्टेबल बना, लेकिन अफसर बनने की चिंगारी अंदर ही थी

साल 2013 में उदय ने परिवार की जिम्मेदारी उठाने के लिए आंध्र प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल की नौकरी जॉइन कर ली। 5 साल तक वर्दी पहनी…लेकिन एक दिन ऐसा आया जिसने पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी। उनके सीनियर अधिकारी ने सार्वजनिक रूप से अपमानित किया…करीब 60 पुलिसकर्मियों के सामने। उदय ने उस पल बदले की भावना नहीं…बल्कि खुद को साबित करने का संकल्प लिया। उन्होंने उसी दिन नौकरी छोड़ दी और ठान लिया कि अब वह अफसर बनकर ही लौटेंगे।

अखबार बेचते थे, दोस्त-मामा ने दिया सहारा

यूपीएससी की तैयारी आसान नहीं थी। आर्थिक तंगी के बीच अखबार बेचकर पढ़ाई का खर्च निकाला। तेलुगु मीडियम से अंग्रेज़ी मीडियम में स्विच किया। एनसीईआरटी की किताबों से शुरुआत की और राजनीति विज्ञान और अंतर्राष्ट्रीय संबंध को वैकल्पिक विषय चुना। इस दौरान उनके मामा कोटि रेड्डी और दोस्तों योगी व शिवकुमार ने आर्थिक और भावनात्मक रूप से पूरा सहयोग दिया।

2 बार पास की UPSC, अफसर बनकर लौटे

UPSC 2023 में उन्होंने 780वीं रैंक हासिल की। IRS बनने का मौका था…लेकिन उदय का लक्ष्य IPS था। उन्होंने हार नहीं मानी। फिर UPSC 2024 में शानदार प्रदर्शन कर 350वीं रैंक लाई…और IPS अधिकारी बन गए। आज वह त्रिपुरा कैडर के अफसर हैं।

अब भाई को बना रहे हैं अफसर

आज उदय ना सिर्फ एक अधिकारी हैं…बल्कि प्रेरणा का स्रोत बन चुके हैं। वो अब अपने छोटे भाई प्रणय कृष्ण रेड्डी को भी सिविल सेवा की तैयारी में मदद कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि IG अवुला रमेश रेड्डी और ADGP महेश भागवत जैसे सीनियर अधिकारियों से उन्हें गाइडेंस मिला।

एक अपमान, जिसने बना दिया देश का सेवक

उदय की कहानी बताती है कि हालात चाहे जितने मुश्किल हों अगर संकल्प सच्चा हो तो मंज़िल दूर नहीं। एक कांस्टेबल का सपना, एक दादी की कुर्बानी, और एक युवा का जुनून, आज लाखों युवाओं के लिए मिसाल बन चुका है।

उत्तराखंड: दिवाली पर यहाँ की हवा होगी साफ, पॉल्यूशन कंट्रोल के लिए ड्रोन से होगा ये खास इंतजाम!

देहरादून: देशभर में दीपावली की रौनक दिखने लगी है, लोग बाजारों में खरीदारी में जुटे हैं। लेकिन इस पर्व के साथ सबसे बड़ी चिंता वायु प्रदूषण की रहती है…क्योंकि आतिशबाजी से हवा में जहरीली गैसें फैलती हैं। इसे रोकने के लिए उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) ने कड़े कदम उठाए हैं।

पिछले साल देहरादून में दीपावली के दौरान एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 288 तक पहुंच गया था…जिससे हवा खराब हो गई थी। हालांकि इस साल उम्मीद जताई जा रही है कि प्रदूषण की स्थिति बेहतर होगी। पीसीबी ने कहा है कि दीपावली के बाद संवेदनशील इलाकों में ड्रोन से पानी की बौछार कर एयर क्वालिटी सुधारने का काम किया जाएगा।

एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) क्या है?
AQI 0 से 50 तक ‘बेहतर’ माना जाता है, 51 से 100 ‘संतोषजनक’, 101 से 200 ‘मध्यम’, 201 से 300 ‘खराब’, 301 से 400 ‘बेहद खराब’ और 401 से 500 ‘सेहत के लिए गंभीर’ होता है। देहरादून में फिलहाल AQI स्तर संतोषजनक यानी 51 से 100 के बीच है, लेकिन दीपावली पर यह बढ़ने की आशंका रहती है।

पीएम 2.5 और पीएम 10 क्या हैं?
वायु में मौजूद सूक्ष्म कण जिन्हें पीएम 2.5 और पीएम 10 कहा जाता है, सेहत के लिए बेहद खतरनाक होते हैं। खासतौर पर पीएम 2.5 के कण इतने छोटे होते हैं कि फेफड़ों तक आसानी से पहुंच जाते हैं और गंभीर बीमारी का कारण बन सकते हैं। गैसोलीन, डीजल, लकड़ी जलाने से ये प्रदूषक ज्यादा निकलते हैं।

देहरादून में वायु प्रदूषण की स्थिति
देहरादून में बढ़ती वाहन संख्या के कारण भी प्रदूषण में इजाफा हो रहा है। फिलहाल शहर का AQI स्तर संतोषजनक है, लेकिन दीपावली के समय यह स्तर बढ़ सकता है।

पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की तैयारी
उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि इस बार पीसीबी ने नगर निगम, जिला प्रशासन और पुलिस के साथ मिलकर प्रदूषण कम करने की रणनीति बनाई है। संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन से पानी छिड़काव किया जाएगा और मॉनिटरिंग स्टेशन लगाए गए हैं। साथ ही स्कूलों और अस्पतालों के आस-पास पटाखे न फोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।

उत्तराखंड ने नेशनल लेवल पर एयर क्वालिटी सुधार में अच्छा प्रदर्शन किया है। इस दीपावली पीसीबी का प्रयास है कि पर्व स्वच्छ और सुरक्षित हो…और हवा भी बेहतर रहे।

मां के गहने बिके, पिता ने खेत जोते…तब जाकर बेटा बना IAS!

Pawan Kumar IAS Success Story:  कभी तिरपाल से ढके छप्पर के नीचे बैठकर मिट्टी के दीयों की रोशनी में पढ़ाई करने वाला लड़का अब देश का अफसर बन चुका है। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के छोटे से गांव रघुनाथपुर से निकलकर पवन कुमार ने वो कर दिखाया…जो करोड़ों युवा सिर्फ सपनों में सोचते हैं।

पवन कुमार का जन्म एक बेहद साधारण किसान परिवार में हुआ। पिता मुकेश कुमार कभी खेतों में मेहनत करते थे…तो कभी मनरेगा के तहत मजदूरी। परिवार के पास आमदनी का कोई ठिकाना नहीं था। दो वक्त की रोटी भी कभी भरोसे की नहीं होती थी। लेकिन इस लड़के ने हालात से हार मानने के बजाय उन्हें चुनौती देने का फैसला किया।

पढ़ाई के लिए मां ने बेचे गहने, बहनों ने की मजदूरी

पवन के संघर्ष में उनका पूरा परिवार साथ खड़ा रहा। मां ने गहने बेचे, बहनों ने खेतों में मजदूरी की, पिता ने पुराना मोबाइल खरीदकर दिया…ताकि बेटा दिल्ली में रहकर यूपीएससी की तैयारी कर सके। 3200 के सेकंड हैंड फोन में ऑनलाइन पढ़ाई कर पवन ने खुद को तैयार किया।

छप्पर टपकता था, फिर भी जलता रहा हौसले का दीया

बारिश के मौसम में जब छत टपकती थी तो पूरा परिवार रातभर जागकर किताबों और सामान को पानी से बचाता था। न बिजली थी, न रोशनी…लेकिन पवन ने कभी हार नहीं मानी। मिट्टी के दीये और आत्मविश्वास की लौ ही उसके सबसे बड़े हथियार बन गए।

तीन बार असफलता, लेकिन नहीं टूटा हौसला

यूपीएससी की राह आसान नहीं थी। दो बार परीक्षा में फेल हुए…और 2022 में महज 1 अंक से चयन चूक गया। लेकिन पवन रुके नहीं। उन्होंने हार को सबक बनाया और खुद को पहले से बेहतर तैयार किया।

239वीं रैंक, फिर गांव में बजा जीत का नगाड़ा

साल 2023 में आखिरकार मेहनत रंग लाई। 239वीं रैंक के साथ पवन कुमार का आईएएस बनने का सपना पूरा हुआ। जिस मिट्टी के घर में कभी तेल के दीये जलते थे…वहां अब जश्न की रौशनी थी। गांववालों ने फूलों से उसका स्वागत किया…और उसकी सफलता पूरे जिले के लिए प्रेरणा बन गई।

पवन की कहानी ये साबित करती है कि संसाधन नहीं इरादा मायने रखता है। गरीबी कोई बाधा नहीं होती…अगर साथ हो परिवार।

उत्तराखंड में 10 हजार छात्रों को मिलेगी निःशुल्क कोचिंग, जो सपना देखा वो पूरा भी होगा !

Uttarakhand News: Free Coaching: आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ी पहल की है। अब प्रदेश के 10 हजार प्रतियोगियों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क कोचिंग का लाभ मिलेगा। इसके तहत विद्यार्थियों को सामान्य और एडवांस दोनों स्तरों की तैयारी का अवसर प्रदान किया जाएगा।

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में इस योजना की प्रगति और गुणवत्ता पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्य सचिव ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिए कि कोचिंग की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए और विद्यार्थियों का चयन स्क्रीनिंग प्रक्रिया के माध्यम से किया जाए। साथ ही प्रतियोगियों की सुविधा के अनुसार तैयारी का समय निर्धारित करने के निर्देश भी दिए गए।

मुख्य सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि निःशुल्क कोचिंग योजना में किसी भी प्रकार की खानापूर्ति नहीं होनी चाहिए और इसका परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए। उन्होंने सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को शीघ्रता से पूरा करने के निर्देश दिए।

इस दौरान निदेशक शिक्षा डॉ. मुकुल कुमार सती ने जानकारी दी कि इस वर्ष 10 हजार छात्रों को निःशुल्क कोचिंग दी जाएगी। कक्षा 11 में अध्ययनरत विद्यार्थियों को 2 वर्ष की कोचिंग मिलेगी, जबकि 12वीं पास करने वाले विद्यार्थियों को 1 वर्ष की कोचिंग दी जाएगी। कोचिंग आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स तीनों स्ट्रीम के अनुरूप होगी तथा इसमें लगभग सभी प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाएगी।

इसके साथ ही, मेधावी विद्यार्थियों को 6 वर्ष की एडवांस कोचिंग देने की भी योजना है, ताकि वे उच्च स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

बैठक में सचिव दिलीप जावलकर, अपर सचिव मनुज गोयल सहित शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।

दिवाली से पहले बड़ी खुशखबरी! इन 9030 लोगों के खातों में आने वाले हैं पैसे

देहरादून: दिवाली से पहले उत्तराखंड के हजारों राशन विक्रेताओं के लिए राहत भरी खबर आई है। लंबे समय से लाभांश और भाड़े के भुगतान का इंतजार कर रहे 9030 राशन विक्रेताओं को अब उनका बकाया जल्द ही मिल सकता है। केंद्र सरकार ने इसके लिए ₹27.13 करोड़ की धनराशि जारी कर दी है।

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रेखा आर्या ने जानकारी दी कि यह राशि राज्य को प्राप्त हो चुकी है। विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि इस केंद्रीय धनराशि में राज्य सरकार का हिस्सा जोड़कर राशन विक्रेताओं को शीघ्र भुगतान किया जाए।

मंत्री ने बताया कि कुछ दिन पहले विधानसभा स्थित सभागार में राशन विक्रेताओं के संगठन से बातचीत हुई थी…जिसमें दिवाली से पहले भुगतान शुरू करने का भरोसा दिया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि शेष बकाया और भाड़े की राशि को लेकर केंद्र सरकार से लगातार संपर्क बना हुआ है।

जानकारी के अनुसार प्रदेश के छह जिलों के विक्रेताओं का भुगतान अक्टूबर 2024 से और सात जिलों का जनवरी 2025 से बकाया चल रहा है। इस बीच राशन विक्रेता संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष रेवाधर बृजवासी ने मांग की है कि विक्रेताओं को जल्द से जल्द पूरा भुगतान किया जाए…जिससे वे भी त्योहार में राहत महसूस कर सकें।