हल्द्वानी बस डिपो की आय में भारी गिरावट, निजी बसों की तरफ यात्रियों का रुझान !

Uttarakhand: Roadways: Haldwani: Loss: Income: Buses: दिवाली के करीब आते ही लोगों का अपने घरों की ओर लौटने का सिलसिला शुरू हो गया है। आमतौर पर यह समय रोडवेज के लिए अच्छी आमदनी का होता है, लेकिन इस बार स्थिति उलट नजर आ रही है। निजी वाहन संचालकों की बढ़ती मनमानी और सख्त कार्रवाई के अभाव के कारण रोडवेज की सवारियों में भारी कमी दर्ज की गई है, जिससे निगम को रोजाना लाखों रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है।

पिछले आंकड़ों पर नजर डालें तो हल्द्वानी डिपो की दैनिक आय पहले 25 से 35 लाख रुपये तक रहती थी, जो अब घटकर मात्र 11 से 12 लाख रुपये रह गई है। वहीं काठगोदाम डिपो की रोजाना की आय भी घटकर 8 से 9 लाख रुपये तक सीमित हो गई है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में निगम को और भी अधिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

रोडवेज के लिए दिल्ली रूट हमेशा से सबसे लाभदायक माना जाता रहा है, लेकिन अब इस रूट पर भी निजी बसों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इससे हल्द्वानी डिपो की आय पर सीधा असर पड़ा है।

हल्द्वानी डिपो की वरिष्ठ स्टेशन इंचार्ज इंदिरा भट्ट ने बताया कि सवारियों की कमी के चलते कई बार बसें लगभग खाली जा रही हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली रूट पर इस सीजन में सबसे ज्यादा दबाव रहता है, लेकिन निजी वाहनों के बढ़ने से रोडवेज को खासा नुकसान झेलना पड़ रहा है।

कर्मचारियों का कहना है कि निगम को स्थिति सुधारने के लिए सख्त कार्रवाई और ठोस रणनीति अपनानी होगी, तभी रोडवेज की घटती आय को दोबारा पटरी पर लाया जा सकेगा।

उत्तराखंड के लाल को अंटार्कटिका मिशन में मिली जिम्मेदारी

अल्मोड़ा: उत्तराखंड की शांत और पहाड़ी वादियों से निकलकर अल्मोड़ा जिले के छोटे से गांव दुगड़ाकोट के बेटे महेंद्र कुमार आर्य ने वो कर दिखाया है, जिसकी कल्पना अक्सर बड़े शहरों में रहने वाले ही करते हैं। अब वे अंटार्कटिका जैसे बर्फीले और अत्यंत चुनौतीपूर्ण महाद्वीप में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।

महेंद्र वर्तमान में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) रक्षा मंत्रालय में वैज्ञानिक पद पर कार्यरत हैं। इसके साथ ही उन्हें भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे अंटार्कटिका वैज्ञानिक अभियान में भी शामिल किया गया है। यह वही अभियान है…जिसके अंतर्गत भारत 1981 से दुनिया के सबसे ठंडे महाद्वीप में शोध कार्य कर रहा है।

महेंद्र का जीवन संघर्षों और प्रेरणाओं से भरा रहा है। एक साधारण ग्रामीण परिवार में जन्मे महेंद्र के पिता दौलत राम ने खेतों में मेहनत कर अपने छह बच्चों को पढ़ाया-लिखाया। परिवार की सीमित आय और संसाधनों के बीच भी शिक्षा का दीप जलता रहा। इस सफर में उनके कनाडा में बसे बड़े भाई ने भी अहम भूमिका निभाई। इन्हीं मजबूत नींवों और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर महेंद्र आज उस मुकाम पर पहुंचे हैं…जहां से वे भारत के लिए विज्ञान की नई इबारत लिखने जा रहे हैं।

महेंद्र कुमार आर्य ने बताया कि वह 23 अक्टूबर को अंटार्कटिका के लिए रवाना होंगे और वहां मैत्री और भारती नामक भारतीय स्थायी अनुसंधान केंद्रों पर हिम विज्ञान और जलवायु परिवर्तन से जुड़े शोध कार्यों में भाग लेंगे। यह अभियान 28 फरवरी 2026 तक चलेगा। उन्होंने कहा कि यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि मुझे इस अभियान में शामिल होने का अवसर मिला है। मैं पूरे समर्पण से अपने शोध कार्यों को पूरा करूंगा।

महेंद्र की यह यात्रा न सिर्फ उनके लिए गर्व का विषय है…बल्कि उनके गांव, जिले और पूरे उत्तराखंड के लिए भी एक प्रेरणा है

सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी ने SSP को शिकायती पत्र सौंपा

देहरादून:एसएसपी देहरादून को सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी ने एक शिकायती पत्र सौंपा है, जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया पर उनकी छवि को धूमिल करने की बात कही हैं।

शिकायत पत्र में डीजी सूचना ने लिखा है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर कतिपय लोगों द्वारा उनकी छवि को धूमिल किया जा रहा है।  महानिदेशक बंशीधर तिवारी ने संबंधित प्राधिकरणों से मामले की जांच कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई करने की मांग की है।

बंशीधर तिवारी ने अपनी शिकायत में उल्लेख किया है कि कुछ व्यक्तियों द्वारा फेसबुक पर उनके खिलाफ बिना किसी तथ्य या साक्ष्य के भ्रामक और अनर्गल आरोप लगाए जा रहे हैं।  उन्होंने कहा कि यह कृत्य उनकी व्यक्तिगत छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास है।

तिवारी ने संबंधित एसएसपी से मामले की निष्पक्ष जांच कर उन व्यक्तियों की पहचान की जाए, जिन्होंने यह आपत्तिजनक पोस्ट साझा की हैं, और उनके खिलाफ आईटी अधिनियम एवं मानहानि से संबंधित धाराओं के अंतर्गत कानूनी कार्रवाई की जाए।

उत्तराखंड में यहाँ से बनारस जा रही एंबुलेंस पलटी, चार लोगों की मौत !

देहरादून: शुक्रवार सुबह अटरिया कस्बे में हिंद अस्पताल के पास एक भीषण सड़क हादसा हो गया…जब एक निजी एंबुलेंस अनियंत्रित होकर पलट गई…जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और दो गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया और मौके पर भारी संख्या में लोग जमा हो गए।

थानाध्यक्ष उमाकांत शुक्ला ने जानकारी दी कि एंबुलेंस देहरादून से मरीज को लेकर बनारस जा रही थी। लेकिन हिंद अस्पताल के सामने नेशनल हाईवे पर अचानक वाहन का संतुलन बिगड़ गया और वह पलट गया।

मृतकों में शामिल हैं:

विशाल पांडेय (40 वर्ष), मरीज, निवासी देहरादून

एक अज्ञात महिला (लगभग 40 वर्ष), जो सड़क किनारे खड़ी थी

एक अज्ञात पुरुष (लगभग 45 वर्ष), एंबुलेंस में सवार

गुरमीत (23 वर्ष), एंबुलेंस चालक, निवासी हरिद्वार

हादसे में एक 12 वर्षीय बच्ची भी घायल हुई है…जो मृतक महिला के साथ सड़क किनारे खड़ी थी। उसे गंभीर हालत में हिंद अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसके अलावा दिव्यांशु पांडेय (42 वर्ष), जो मरीज विशाल पांडेय के भाई हैं, भी हादसे में घायल हुए हैं।

स्थानीय लोगों ने कहा कि एंबुलेंस तेज़ रफ्तार में थी। मोड़ पर आते ही चालक का नियंत्रण छूट गया और वाहन पलट गया। एंबुलेंस के पलटते ही सड़क किनारे खड़ी महिला और बच्ची उसकी चपेट में आ गए। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है और मृतकों की शिनाख्त के प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

उत्तराखंड: DM के दरबार में पहुंची शिक्षिका, फिर नामी स्कूल पर गिरी गाज़!

देहरादून: जनहित में त्वरित और प्रभावी निर्णयों के लिए पहचाने जाने वाले जिलाधिकारी सविन बंसल ने एक बार फिर संवेदनशील प्रशासन का परिचय दिया है। विगत *जनता दर्शन* के दौरान मोथरोवाला स्थित इडिफाई वर्ल्ड स्कूल में शिक्षिका के रूप में कार्यरत कनिका मदान ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई कि स्कूल प्रबंधन द्वारा न केवल मार्च व जुलाई माह का वेतन रोक लिया गया है…बल्कि सुरक्षा राशि और अनुभव प्रमाण पत्र भी नहीं दिया गया।

शिकायत सुनते ही जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य शिक्षा अधिकारी को तत्काल वस्तुस्थिति की जांच कर आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। डीएम के संज्ञान में आते ही स्कूल प्रबंधन हरकत में आया और शिक्षिका कनिका मदान को 78,966 की राशि का वेतन भुगतान चेक सौंपते हुए अनुभव प्रमाण पत्र भी जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी।

यह मामला न केवल एक पीड़ित शिक्षिका को न्याय मिलने का प्रतीक है…बल्कि यह भी दर्शाता है कि जिला प्रशासन शोषितों और असहायों की समस्याओं पर तुरंत और कठोर कार्रवाई कर रहा है।

जिलाधिकारी सविन बंसल को उनकी निर्भीक कार्यशैली और जन सरोकारों के प्रति संवेदनशीलता के लिए जाना जाता है। स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे विषयों पर वे निरंतर सक्रिय हैं। जिलेभर से आने वाले फरियादी डीएम कार्यालय में अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं…जिनका समाधान समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से किया जा रहा है। प्रतिदिन 40–50 लोग जनदर्शन के माध्यम से जिलाधिकारी से सीधे संवाद कर रहे हैं।

इस मामले से स्पष्ट है कि शोषण करने वाले संस्थानों पर प्रशासन की सख्त नजर है और जनता को न्याय दिलाने के लिए जिला प्रशासन पूरी तत्परता से कार्य कर रहा है। यह न केवल प्रशासन में जनता का विश्वास बढ़ा रहा है…बल्कि शोषकों में भी एक भय का वातावरण बना रहा है।

उत्तराखंड: अब पानी की हर समस्या का होगा तुरंत समाधान, जानिए कैसे ?

देहरादून: प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत चल रही ग्रामीण पाइप जलापूर्ति योजनाओं की निगरानी अब डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से की जाएगी। इस नए सिस्टम का नाम है आरपीडब्ल्यूएसएस आईडी मॉड्यूल। इससे न केवल पेयजल योजनाओं का रखरखाव बेहतर होगा, बल्कि ग्रामीण उपभोक्ताओं को अपनी शिकायत दर्ज कराने का भी मौका मिलेगा।

हाल ही में दिल्ली में राष्ट्रीय जल जीवन मिशन की बैठक में इस मॉड्यूल की जानकारी दी गई। बताया गया कि डिजिटल तकनीक से ग्रामीण जल प्रशासन को और मजबूत बनाया जा रहा है। आरपीडब्ल्यूएसएस आईडी मॉड्यूल जल जीवन मिशन की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा है…जो हर पेयजल योजना की डिजिटल मैपिंग और पहचान सुनिश्चित करेगा। इससे योजनाओं पर वास्तविक समय में नजर रखी जा सकेगी और रखरखाव पूर्वानुमानित तरीके से किया जाएगा।

उत्तराखंड में करीब 16 हजार गांवों में जल जीवन मिशन के तहत पेयजल आपूर्ति की योजनाएं बनाई जा चुकी हैं। कुछ ही योजनाओं का कार्य शेष है। इस मॉड्यूल के लागू होने से हर गांव की पेयजल योजना का डिजिटल नक्शा तैयार हो जाएगा। भविष्य में केंद्र सरकार इसी मॉड्यूल के माध्यम से बजट जारी करेगी…जिससे यह स्पष्ट होगा कि किस परियोजना को कितनी राशि की आवश्यकता है और उसी के अनुसार वित्तीय सहायता मिलेगी।

इस डिजिटल पहल से योजना निर्माण, मरम्मत और शिकायत निवारण की पूरी प्रक्रिया रिकॉर्ड में दर्ज होगी। स्थानीय ग्रामीण नागरिक संवाद प्लेटफॉर्म के जरिए अपनी जलापूर्ति की गुणवत्ता, पाइपलाइन की स्थिति और अन्य शिकायतें सीधे दर्ज करा सकेंगे। केंद्र सरकार जल्द ही इस योजना को लागू करने के लिए राज्यों को तकनीकी सहायता और विशेष बजट भी प्रदान करेगी।

जल जीवन मिशन के एमडी विशाल मिश्रा ने कहा कि केंद्रीय मंत्रालय से आरपीडब्ल्यूएसएस आईडी मॉड्यूल के संबंध में जरूरी जानकारियां मिल चुकी हैं। जैसे ही विस्तृत जानकारी प्राप्त होगी, हम इसका प्रशिक्षण और आईडी निर्माण कार्य शुरू करेंगे। इससे उत्तराखंड सरकार भविष्य में पेयजल योजनाओं की बेहतर निगरानी और रखरखाव कर सकेगी।

उत्तराखंड: गंगोत्री धाम पहुंचे भारतीय टीम के क्रिकेटर ऋषभ पंत और राहुल तेवतिया, की विशेष पूजा-अर्चना

उत्तरकाशी: उत्तराखंड की पावन धरती पर गुरुवार को क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक खास दृश्य देखने को मिला, जब भारतीय क्रिकेट टीम के विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत और आईपीएल में गुजरात टाइटंस की ओर से खेलने वाले ऑलराउंडर राहुल तेवतिया ने गंगोत्री धाम पहुंचकर मां गंगा के दर्शन किए। दोनों खिलाड़ियों ने गंगा घाट पर विशेष पूजा-अर्चना की और गंगोत्री मंदिर में मत्था टेककर आशीर्वाद लिया।

गंगोत्री पहुंचने की जानकारी मिलते ही वहां मौजूद स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल बन गया। पूर्व व्यापार मंडल अध्यक्ष सतेन्द्र सेमवाल ने बताया कि दोनों क्रिकेटर पूरी श्रद्धा और सादगी के साथ मंदिर पहुंचे और पूजा के बाद तीर्थ पुरोहितों से मुलाकात कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान ऋषभ पंत और राहुल तेवतिया ने अपने प्रशंसकों के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं और मंदिर परिसर में करीब एक घंटे तक समय बिताया। पूजा-अर्चना के पश्चात दोनों खिलाड़ी हर्षिल घाटी के लिए रवाना हो गए।

सूत्रों के अनुसार ऋषभ पंत शुक्रवार को हर्षिल में दिन बिता सकते हैं…जहां वह उत्तराखंड की शांत वादियों में कुछ समय प्रकृति के साथ बिताएंगे।

ध्यान देने वाली बात यह भी है कि ऋषभ पंत जो हाल ही में एक गंभीर दुर्घटना से उबरकर मैदान में लौटे हैं अपनी मानसिक और आध्यात्मिक ऊर्जा को पुनः संचित करने के लिए अक्सर उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों की यात्रा करते रहते हैं।

हल्द्वानी निवासी तनुजा बोरा का दूरदर्शन बी-ग्रेड आर्टिस्ट पैनल में चयन

Tanuja Bora: Doordarshan: हल्द्वानी की युवा कथक नर्तकी तनुजा बोरा ने अपनी मेहनत, प्रतिभा और नृत्य के प्रति गहरे समर्पण के बल पर दूरदर्शन बी-ग्रेड आर्टिस्ट पैनल में स्थान प्राप्त कर हल्द्वानी और उत्तराखंड का नाम रोशन किया है।

तनुजा ने अपने नृत्य-सफ़र की शुरुआत स्वर संगम संगीत संस्थान, हल्द्वानी से की, जहाँ उन्हें डॉ. मुकेश पंत और सुश्री रेनू तिवारी का मार्गदर्शन मिला। इसके बाद उन्होंने भातखंडे संगीत विश्वविद्यालय, लखनऊ से परफॉर्मिंग आर्ट्स (कथक) में एम.पी.ए. की उपाधि डिस्टिंक्शन के साथ प्राप्त की। अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें रजत और कांस्य पदक के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदी बेन पटेल द्वारा प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किया गया।

एम.पी.ए. के बाद तनुजा ने यूजीसी-नेट परीक्षा उत्तीर्ण की और वर्तमान में महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड विश्वविद्यालय, बरेली से परफॉर्मिंग आर्ट्स में पीएच.डी. कर रही हैं। इसके साथ ही वे दिल्ली स्थित गौरी दिवाकर संस्कृत फाउंडेशन (Sarvatra Nrityam) में प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना गौरी दिवाकर के निर्देशन में उन्नत प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।

तनुजा बोरा ने देशभर के अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया है। इनमें भारत मंडपम (WTSA-24, नई दिल्ली), कबीर उत्सव (श्रीराम सेंटर, मंडी हाउस), ग्रामीण भारत महोत्सव (NABARD) तथा 38वें राष्ट्रीय खेल, देहरादून जैसे मंच शामिल हैं, जहाँ उन्होंने प्रधानमंत्री और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के समक्ष भी अपनी प्रस्तुति दी।

दूरदर्शन बी-ग्रेड आर्टिस्ट पैनल में उनका चयन कथक नृत्य के प्रति अनुशासन, समर्पण और गहरे लगाव का परिणाम है। तनुजा की इस उपलब्धि से हल्द्वानी और समूचे उत्तराखंड के कला-जगत में हर्ष और गर्व का वातावरण है।

“कला मेरे लिए साधना है, और यह उपलब्धि मेरे गुरुओं और परिवार के आशीर्वाद का परिणाम है,” — तनुजा बोरा

खादी वस्त्रों पर 25 प्रतिशत की भारी छूट, अपने शहर के क्षेत्रीय श्री गाँधी आश्रम में तुरंत संपर्क करें

Haldwani News: Gandhi Ashram: क्षेत्रीय श्री गाँधी आश्रम, कलावती कॉलोनी हल्द्वानी द्वारा गाँधी जयंती के अवसर पर खादी प्रेमियों के लिए बड़ी सौगात दी गई है। आश्रम की ओर से 2 अक्टूबर 2025 से सभी प्रकार के खादी वस्त्रों पर 25 प्रतिशत की भारी छूट दी जा रही है।

इस विशेष छूट योजना के तहत सूती खादी, रेशमी खादी, ऊनी खादी, पौली खादी व कम्बल जैसे वस्त्र आकर्षक रियायती दरों पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। यह ऑफर आश्रम के विभिन्न बिक्री भण्डारों पर लागू रहेगा।

क्षेत्रीय मंत्री सचिव अभय कुमार वर्मा ने बताया कि खादी वस्त्र देश की स्वदेशी पहचान हैं और गाँधी जयंती पर खादी के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह विशेष छूट दी जा रही है। उन्होंने आमजन से अपील की कि वे नजदीकी गाँधी आश्रम खादी भण्डारों पर पहुँचकर इस अवसर का लाभ उठाएँ।

जहाँ मिलेगी छूट — प्रमुख भण्डारों की सूची:

नैनीताल – मो. 09410144039

सदर बाजार हल्द्वानी – मो. 07060172362

गाँधी पार्क रूद्रपुर – मो. 08006016122

तहसील रोड खटीमा – मो. 07533947672

छतरी चौराहा काशीपुर – मो. 09411537739

कलावती कॉलोनी हल्द्वानी – मो. 07409115616

द्रोणासागर रोड काशीपुर – मो. 08006780695

उद्योगशाला फतेहपुर – मो. 07579094692

खादी वस्त्र अन्य भण्डारों—भवाली, भीमताल, कुसुमखेड़ा, कालाढूंगी, लालकुआं, पंतनगर, किच्छा, गदरपुर, टनकपुर, बाजपुर, रामनगर, गुलरभोज और जसपुर—में भी उपलब्ध हैं।

भाजपा आलाकमान की पसंद हैं धामी, बिहार चुनावों के लिए भी स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल

Uttarakhand News: उत्तराखंड के सीमांत नगरों से लेकर ऊंचे पर्वतीय अंचलों तक बीते दो दिनों में मुख्यमंत्री धामी के नौ से अधिक कार्यक्रमों में उमड़ी जनता की भारी भीड़ ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे न केवल प्रदेश के सबसे लोकप्रिय नेता हैं, बल्कि जनता के दिलों की धड़कन बन चुके हैं।

बुधवार को रुद्रप्रयाग और चंपावत में पांच से अधिक कार्यक्रमों में शिरकत करने के बाद गुरुवार को धामी ऊधम सिंह नगर और चंपावत में चार से अधिक आयोजनों में शामिल हुए। हर जगह उनका स्वागत फूल-मालाओं से हुआ। कई स्थानों पर जनता ने उन्हें गदा भेंट की, जो सम्मान के साथ-साथ भ्रष्टाचार और प्रदेश की संस्कृति से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रतीक बन गई।

मुख्यमंत्री ने भी हवा में गदा लहराकर स्पष्ट संदेश दिया कि “जो भी उत्तराखंड की संस्कृति, सभ्यता और शांति से छेड़छाड़ करेगा, उसे मिट्टी में मिला दिया जाएगा।”

आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों में चार महीने तक लगातार जुटे रहने के बाद धामी का यह दौरा विकास, जनसंवाद और जनविश्वास का संदेश लेकर निकला है। आयोजनों में उमड़ी भीड़ ने विपक्ष के सभी दावों और नकारात्मक राजनीति को ध्वस्त कर दिया है।

जनता के अपार स्नेह ने यह साबित कर दिया है कि प्रदेश की जनता अब कोरी बयानबाजी नहीं, बल्कि परफॉरमेंस की राजनीति पर भरोसा करती है और इस कसौटी पर मुख्यमंत्री धामी पूरी तरह खरे उतरते हैं।

धामी सरकार ने सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे क्षेत्रों में ठोस काम किए हैं। साथ ही धर्मांतरण और लव जिहाद पर सख्त कानून बनाकर, नकल माफिया पर प्रहार कर युवाओं का विश्वास भी लौटाया है। यही कारण है कि आज धामी एक निर्भीक, निर्णायक और निष्पक्ष नेता के रूप में उभरे हैं।

विपक्ष जहां अभी भी पुरानी राजनीति के जाल में उलझा है, वहीं धामी जनता से सीधे संवाद और ठोस कार्यों की भाषा बोलते हैं। यही कारण है कि उनकी लोकप्रियता अब उत्तराखंड की सीमाओं को पार कर चुकी है।

कर्नाटक, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में चुनावी प्रचार के दौरान भाजपा आलाकमान की पहली पसंद पुष्कर सिंह धामी रहे हैं। अब यही विश्वास बिहार चुनाव में भी देखने को मिलेगा, जहां उन्हें स्टार प्रचारक के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई है।

जनता के बीच धामी की छवि अब केवल एक मुख्यमंत्री की नहीं, बल्कि मुख्य सेवक की बन चुकी है जो जनता के बीच जाकर उनकी बात सुनता है, समझता है और समाधान भी देता है। यही जुड़ाव, यही प्रतिबद्धता और यही ईमानदारी उन्हें उत्तराखंड के इतिहास में एक अलग पहचान देती है।