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Uttarakhand Vs Railways: Cricket: Ranji Trophy: Mayank Mishra: Ramnagar: उत्तराखंड और रेलवे के बीच रामनगर में खेला गया रणजी ट्रॉफी मुकाबला ड्रॉ पर समाप्त हुआ। पहली पारी में बढ़त हासिल करने के चलते उत्तराखंड को तीन अंक मिले, जबकि रेलवे को एक अंक से संतोष करना पड़ा।
मुकाबले में रेलवे ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 120 ओवर में 333 रन बनाए। टीम के लिए मोहम्मद सैफ ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 131 रनों की पारी खेली। जवाब में उत्तराखंड ने पहली पारी में 398 रन बनाते हुए 65 रनों की बढ़त हासिल की। उत्तराखंड के लिए युवराज सिंह सबसे सफल बल्लेबाज रहे, जिन्होंने 92 रन की पारी खेली।
गेंदबाजी में उत्तराखंड के मयंक मिश्रा चमके, जिन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए 6 विकेट अपने नाम किए। वहीं रेलवे की ओर से कुणाल यादव ने 5 विकेट झटके।
दूसरी पारी में रेलवे ने 23 ओवर में 85 रन बनाए और एक विकेट गंवाया। मैच के आखिरी दिन परिणाम निकलना संभव नहीं था, जिसके चलते दोनों टीमों ने आपसी सहमति से मुकाबला ड्रॉ घोषित किया।
पहली पारी में बेहतरीन गेंदबाजी करते हुए छह विकेट हासिल करने वाले मयंक मिश्रा को ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया। रुद्रपुर निवासी मयंक मिश्रा ने अपने फर्स्ट क्लास करियर में अब तक सात बार पांच विकेट एक पारी में लिए हैं और दो बार एक मैच में 10 विकेट चटकाए हैं। मयंक के नाम उत्तराखंड की ओर से घरेलू क्रिकेट में पहली हैट्रिक लेने का रिकॉर्ड भी दर्ज है।
इस नतीजे के साथ उत्तराखंड ने तीन अंक हासिल कर अपनी स्थिति मजबूत की, जबकि रेलवे को एक अंक से संतोष करना पड़ा।
Tenzin Yangki IPS Success Story: भारतीय महिलाएं आज हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं…फिर चाहे वह विज्ञान हो, सेना या सिविल सर्विसेज। इसी नए भारत की कहानी लिखी है अरुणाचल प्रदेश की तेंजिन यांग्की ने, जिन्होंने राज्य की पहली महिला आईपीएस अधिकारी बनकर इतिहास रच दिया। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2022 में 545वीं रैंक हासिल करने वाली तेंजिन की यह उपलब्धि सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि समाजिक बदलाव की मिसाल बन गई है।
अरुणाचल की बेटियों के लिए नई राह
तेंजिन यांग्की का यह सफर उस सोच को तोड़ता है जो कहती थी कि पूर्वोत्तर की लड़कियां बड़े सपने नहीं देख सकतीं। उन्होंने साबित किया कि इरादे मजबूत हों तो पहाड़ भी झुक जाते हैं। उनकी सफलता ने न केवल उनके राज्य, बल्कि पूरे देश की हजारों बेटियों को प्रेरणा दी है।
आनंद महिंद्रा ने दी खास सराहना
देशभर में तेंजिन की सफलता की गूंज सुनाई दी। मशहूर उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने सोशल मीडिया पर उनकी तारीफ करते हुए लिखा है कि पहला होना कभी आसान नहीं होता। इसका मतलब है कि आप अकेले आगे बढ़ते हैं ताकि बाकी लोग आपके पीछे चल सकें।
महिंद्रा ने तेंजिन को “मंडे मोटिवेशन” बताते हुए कहा कि वह आने वाली पीढ़ी के लिए एक रोल मॉडल हैं।
पब्लिक सर्विस की विरासत, खुद की राह
तेंजिन ऐसे परिवार से आती हैं जहां राष्ट्र सेवा एक परंपरा रही है। उनके पिता थुप्टेन टेंपा IAS अधिकारी और मंत्री रहे हैं…जबकि उनकी मां एक सेवानिवृत्त सरकारी सचिव हैं। प्रशासनिक माहौल में पली-बढ़ी तेंजिन ने वर्दी का रास्ता चुना…एक ऐसा रास्ता जो कठिन तो था लेकिन देश की सेवा की भावना से भरा हुआ था।
उन्होंने पहले APPSC परीक्षा (2017) पास की थी…जिससे यह साबित हुआ कि सार्वजनिक सेवा के प्रति उनका जुनून गहरा था। लेकिन IPS बनकर उन्होंने उस जुनून को एक नई ऊंचाई दी।
महिलाओं के लिए नई प्रेरणा
हैदराबाद की पुलिस एकेडमी में जब तेंजिन यांग्की ने 36% महिला अधिकारियों के साथ प्रशिक्षण शुरू किया, तो वह क्षण सिर्फ एक औपचारिकता नहीं बल्कि एक क्रांति का संकेत था…यह भारत की बेटियों के देश सेवा के नए युग की शुरुआत थी।
तेंजिन यांग्की की कहानी यह बताती है कि अगर दृढ़ निश्चय, अनुशासन और साहस हो…तो कोई भी दीवार बहुत ऊंची नहीं होती। उन्होंने न सिर्फ अपने राज्य…बल्कि पूरे पूर्वोत्तर भारत की महिलाओं के लिए एक नई उम्मीद जलाई है।
देहरादून: वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) ने देश में एक नई तकनीकी पहल शुरू की है। विश्वविद्यालय एआई आधारित “डीपशिवा चैटबोट” विकसित कर रहा है…जो कृषि, पर्यटन और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी वास्तविक जानकारी आमजन तक आसानी से पहुंचाएगा।
इस परियोजना की शुरुआत उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) के आह्वान पर की गई। राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित इस प्रतियोगिता में पहले चरण में देशभर के इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी संस्थानों की 152 टीमों ने भाग लिया, जिनमें स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी के छात्र-छात्राएं शामिल थे। दूसरे चरण में कुल 46 टीमें चयनित होकर आगे बढ़ी हैं। फाइनल राउंड दिसंबर में आयोजित किया जाएगा।
प्रतिभागियों को कृषि, पर्यटन या स्वास्थ्य सेवा में से किसी एक क्षेत्र का चयन कर एआई आधारित चैटबोट विकसित करना है। डीपशिवा चैटबोट का उद्देश्य आमजन से हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में सहज संवाद करना है, ताकि छात्र-शोधकर्ताओं को त्वरित जानकारी उपलब्ध हो और तकनीकी समस्याओं का समाधान आसानी से किया जा सके।
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने इस पहल का उद्देश्य स्पष्ट किया कि यह चैटबोट साधारण चैटबोट से अलग होगा। सामान्य चैटबोट केवल तय उत्तर देता है, जबकि एआई चैटबोट उपयोगकर्ता की भाषा, भावना और प्रश्न की परिस्थिति को समझकर तार्किक और सटीक उत्तर प्रदान करेगा।
प्रतियोगिता के अंतिम चरण में चयनित तीन सर्वश्रेष्ठ टीमों को कुल 10 लाख रुपये पुरस्कार के रूप में प्रदान किए जाएंगे। प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त टीमों को क्रमश: 5 लाख, 3 लाख और 2 लाख रुपये नकद पुरस्कार दिए जाएंगे।
यूटीयू के नोडल अधिकारी प्रो. अमित अग्रवाल ने बताया कि पहले चरण से चयनित 46 टीमों के प्रोजेक्ट का मूल्यांकन नवंबर में इंडस्ट्री और उच्च शिक्षा संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा किया जाएगा। दिसंबर में विजेताओं की घोषणा राज्यपाल के हाथों की जाएगी।
डीपशिवा चैटबोट से आमजन को कृषि, स्वास्थ्य और पर्यटन से जुड़ी सरल और उपयोगी जानकारी मिलने के साथ ही भारत की तकनीकी प्रगति को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर भी मिलेगा।
देहरादून: हिमालय की गोद में बसे माउंट थरंग II (6025 मीटर) पर चढ़ाई के दौरान चार पर्वतारोहियों की एक टीम को मौसम की मार के आगे झुकना पड़ा, लेकिन उनका हौसला और विवेक अनमोल सीख छोड़ गया।
टीम में सुभजीत बनर्जी (अभियान नेता), अरुण नंदा, ममता जोशी, और निशांत जनकी शामिल थे। यह दल हिमाचल प्रदेश की दूरस्थ मियार घाटी में एक चुनौतीपूर्ण चढ़ाई के मिशन पर निकला था। यह वही पर्वत है, जिस पर अब तक केवल एक बार — वर्ष 2016 में एक ब्रिटिश-स्वीडिश टीम ने — सफलतापूर्वक चढ़ाई की थी।
टीम ने चार कैंप स्थापित करने की योजना बनाई थी और 10 अक्टूबर तक अंतिम आरोहण का लक्ष्य रखा था। लेकिन 5 अक्टूबर को कैंप 1 पर पहुंचने के बाद अचानक पश्चिमी विक्षोभ से आए भारी बर्फ़ीले तूफ़ान ने सब कुछ बदल दिया। तापमान -13°C तक गिर गया, बर्फ़ इतनी घनी थी कि तंबू दबने लगे, खाना और ईंधन बर्फ़ में समा गए, और पानी की बोतलें जम गईं।
टीम तीन दिनों तक तूफ़ान में फँसी रही — ठंड, भूख और अनिश्चितता के बीच। कठिन परिस्थितियों के बावजूद, उन्होंने शांत रहकर स्थिति का आकलन किया। अंततः 6 अक्टूबर को दल ने पीछे लौटने का साहसिक निर्णय लिया। लगभग 7–8 घंटे तक वे बर्फ़ीली हवाओं और घोर ठंड से जूझते हुए सुरक्षित नीचे पहुँचे।
अभियान दल को सुरक्षा कारणों से ₹2.5 लाख से अधिक मूल्य के पर्वतारोहण उपकरण वहीं छोड़ने पड़े। यह निर्णय दर्दनाक था, लेकिन जीवन से बड़ा कुछ नहीं — इस बात को उन्होंने कर्म से सिद्ध किया।
टीम सदस्य ममता जोशी ने कहा,
“यह हार नहीं थी, यह सम्मान था — पहाड़ के लिए, जीवन के लिए, और उन लोगों के लिए जो हमारे लौटने का इंतज़ार कर रहे थे।”
उन्होंने आगे कहा,
“पहाड़ सिखाते हैं कि सफलता सिर्फ़ शिखर तक पहुँचना नहीं है। यह विनम्रता, धैर्य और संतुलन की परीक्षा है। हमने शिखर नहीं जीता, लेकिन खुद को ज़रूर पाया।”
अभियान को महिंद्रा कुमार ऑटोव्हील्स प्रा. लि., एनवॉय और बेसिफ़ाई जैसे प्रायोजकों का सहयोग मिला, जिन्होंने इस कठिन यात्रा को संभव बनाया।
यह अभियान भले ही शिखर तक न पहुँच सका, लेकिन इसने दिखा दिया कि सच्ची जीत कभी-कभी वापस लौटने के साहस में होती है — जब इंसान प्रकृति के आगे झुककर भी अपनी गरिमा और जज़्बे को ऊँचा रखता है।
Uttarakhand: Ranji Trophy Match: Railways: Ramnagar: उत्तराखंड और रेलवे के बीच रामनगर में रणजी ट्रॉफी का मुकाबला खेला जा रहा है। तीसरे दिन उत्तराखंड ने 178 रन बनाए और उसके तीन विकेट गिरे। दूसरी तरफ रेलवे ने उत्तराखंड के बल्लेबाजों को तेजी से रन बनाने का मौका नहीं दिया, यही वजह रही कि उत्तराखंड अभी भी 23 रनों से पीछे चल रहा है,हालांकि चौथे दिन मेजबानों के पास बढ़त बनाने का मौका है।
दूसरे दिन नाबाद रहे उत्तराखंड के युवराज चौधरी और भूपेन लालवानी ने तीसरे दिन चौथे विकेट के लिए 149 जोड़े। लालवानी ने 78 रनों की पारी खेली जिसमें उनके बल्ले से 8 चौके और एक छक्का निकला। दूसरी तरफ युवराज चौधरी ने एक छोर संभाले रखा था और शतक के करीब भी पहुंच गए थे लेकिन कुणाल यादव की गेंद में वो 92 रनों के स्कोर पर उपेंद्र यादव को कैच थमा बैठे। युवराज ने 272 गेंद का सामना किया जिसमें उन्होंने तीन चौके और पांच छक्के जड़े। प्रियांशु चोपड़ा की 38, शाश्वत के नाबाद 21 और सूचित के नाबाद 14 रनों की बदौलत उत्तराखंड ने तीसरे दिन का खेल खत्म होने तक 5 विकेट के नुकसान पर 310 रन बना लिए हैं।
उत्तराखंड की कोशिश होगी कि चौथे दिन तेजी से रन बनाकर कम से कम 40-50 ओवर रेलवे को बैटिंग करने के लिए बुलाए ताकि मुकाबला मेजबानों की तरफ झुक सके, हालांकि इसके आसर कम नजर आ रहे हैं। वहीं अगर उत्तराखंड को पहली पारी में बढ़त मिल जाती है तो टीम को तीन अंक मिल जाएंगे।
IPS: Manjunath TC: SSP Nainital:



देवप्रयाग (टिहरी): ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे पर सोमवार शाम एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसमें देहरादून के तीन युवकों की मौत हो गई। घटना तोताघाटी के पास हुई…जहाँ उनका पिकअप वाहन लगभग 250 मीटर गहरी खाई में गिर गया।
देवप्रयाग थानाध्यक्ष एल.एस. बुटोला ने बताया कि डोईवाला, देहरादून निवासी बबली कौर ने पुलिस को सूचना दी कि उनका बेटा मोहन सिंह (25) और उनके साथी प्रवीण राठौर (25) और ताराचंद्र (24) 25 अक्टूबर की रात गोपेश्वर के लिए निकले थे। वाहन में पेंट की बाल्टियां और पुट्टी के कट्टे रखे हुए थे। अगले दिन सुबह तक वे गोपेश्वर नहीं पहुंचे।
बबली कौर ने बताया कि सुबह से उनका बेटा फोन नहीं उठा रहा था। लालतप्पड़ चौकी से बेटे की अंतिम लोकेशन साकनीधार के पास मिली थी। पुलिस टीम ने तत्काल तलाश शुरू की और कोड़ियाला की ओर बढ़ी। रास्ते में तोताघाटी के पास दो पैराफिट टूटे हुए मिले और खाई में पिकअप वाहन व सामान बिखरा पाया गया।
एसडीआरएफ व्यासी को मौके पर बुलाकर रेस्क्यू अभियान चलाया गया। खाई से तीनों युवकों के शव बरामद किए गए और उनकी पहचान लापता युवकों के रूप में हुई। पुलिस ने शवों को खाई से निकालकर अग्रिम कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
दिल्ली: अब ओला, रैपिडो और ऊबर की मनमर्जी नहीं चलेगी। क्योंकि केंद्र सरकार ने “भारत टैक्सी” नाम की एक नई कोऑपरेटिव टैक्सी सर्विस शुरू कर दी है। ये देश की अपनी पहली सहकारी टैक्सी सेवा होगी। “भारत टैक्सी” देश के मोबिलिटी सेक्टर में एक बड़ा बदलाव ला सकती है। ड्राइवरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और यात्रियों को एक सरकारी, सुरक्षित व पारदर्शी टैक्सी सेवा उपलब्ध कराना।
आपको बता दें कि इस प्रोजेक्ट की शुरूआत नवंबर 2025 से दिल्ली में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू होगी। प्रारंभ में 650 टैक्सियाँ और उनके मालिक-ड्राइवर शामिल होंगे। दिसंबर 2025 से इसे राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार दिया जाएगा। ये सेवा मल्टी-स्टेट सहकारी टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड के तहत संचालित होगी। जबकि NCDC, IFFCO, Amul, KRIBHCO, NAFED, NABARD, NDDB, NCEL आदि इसकी सहायक संस्थाएं हैं।
भारत टैक्सी एक अभूतपूर्व, ड्राइवर-केंद्रित राइड-हेलिंग सेवा है, जो भारत के मोबिलिटी सेक्टर में क्रांति लाएगी। इसके साथ ही ओला और उबर जैसे निजी एग्रीगेटर्स के मौजूदा प्रभुत्व को सीधे चुनौती देगी। बता दें कि ये एक अनूठे सहकारी मॉडल पर आधारित है। जिसका उद्देश्य ड्राइवरों के लिए समान आय और यात्रियों के लिए अनुमानित किराया प्रदान करना है।
देहरादून: उत्तराखंड पुलिस ने 10वें ऑल इंडिया पुलिस जूडो क्लस्टर 2025 में शानदार प्रदर्शन कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी खेल भावना और अनुशासन का लोहा मनवाया। यह प्रतियोगिता 07 से 16 अक्टूबर, 2025 तक श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर में आयोजित हुई…जिसमें देशभर के लगभग 30 राज्य पुलिस और अर्धसैनिक बलों की टीमों ने हिस्सा लिया।
पुलिस मुख्यालय देहरादून में मंगलवार को पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने पदक विजेता खिलाड़ियों से मिलकर उन्हें बधाई दी। उन्होंने खिलाड़ियों को भविष्य की प्रतियोगिताओं में और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए निरंतर अभ्यास, मेहनत और समर्पण बनाए रखने के निर्देश दिए। इस अवसर पर पुलिस महानिरीक्षक नीलेश आनन्द भरणें और उप पुलिस महानिरीक्षक धीरेन्द्र गुंज्याल भी मौजूद रहे।
पदक विजेता:
पंचक स्लाट – अभिषेक वर्मा, गायत्री नेगी, ईशू भारती
कराटे – मोहित कापड़ी
ताईक्वान्डो – नितेश सिंह
वूशू – लविश कुमार, शुभम चौधरी, सागर
कुल मिलाकर उत्तराखंड पुलिस ने 3 स्वर्ण, 1 रजत और 4 कांस्य पदक जीतकर अपनी कड़ी मेहनत और उत्कृष्ट कौशल का परिचय दिया। खिलाड़ियों की इस उपलब्धि से प्रदेश पुलिस के खेल क्षेत्र में मान और गौरव बढ़ा है।
देहरादून: महंगाई भत्ते की बढ़ोतरी का इंतजार कर रहे उत्तराखंड के पेंशनर्स के लिए खुशखबरी है। राज्य सरकार ने पेंशनर्स के महंगाई भत्ते की दर में तीन प्रतिशत की वृद्धि को मंजूरी दे दी है। वित्त विभाग के आदेश के अनुसार 1 जुलाई 2025 से पेंशनर्स को अब 55% के बजाय 58% दर से महंगाई राहत मिलेगी।
यह राहत उन पेंशनरों पर लागू होगी जिनकी पेंशन सातवें वेतनमान आयोग के अनुसार पुनरीक्षित की गई है। इसमें स्थायी पेंशनभोगी, विद्यालयी एवं प्राविधिक शिक्षा विभाग के अधीन राज्य निधि से सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों के योग्य शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी शामिल हैं।
हालांकि आदेश में स्पष्ट किया गया है कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों, उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्य, स्थानीय निकायों तथा सार्वजनिक उपक्रमों के सिविल या पारिवारिक पेंशनर के लिए अलग आदेश जारी किया जाएगा।
सरकार का कहना है कि इस निर्णय से लगभग एक लाख से अधिक पेंशनभोगियों को लाभ मिलेगा। महंगाई राहत में यह बढ़ोतरी राज्य सरकार पर वार्षिक रूप से कई करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार डालेगी…लेकिन पेंशनरों की आमदनी में सुधार और उनकी आर्थिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।