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Haldwani: Cricket: Sreesanth: Opener: हल्द्वानी के गौलापार स्थित इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में इन दिनों लीजेंड्स क्रिकेट लीग के मुकाबले खेले जा रहे हैं। गुरुवार को मुंबई स्पार्टन और रॉयल राइडर पंजाब के बीच मुकाबला खेला गया, जिसे बारिश के चलते 15 ओवर का कर दिया गया। पहले बल्लेबाजी करते हुए मुंबई स्पार्टन ने 15 ओवर में 6 विकेट के नुकसान पर 163 रन बनाए।
मुंबई की पारी में एक चौंकाने वाला नजारा भी देखने को मिला, जब भारत के पूर्व तेज गेंदबाज एस. श्रीसंत सलामी बल्लेबाजी करने उतरे। हालांकि वह ज्यादा प्रभाव नहीं डाल सके और 10 गेंदों में केवल 4 रन बनाकर आउट हो गए। उन्हें श्रीलंका के पूर्व खिलाड़ी एंजेलो परेरा ने पवेलियन भेजा। श्रीसंत को ओपनिंग करते देख स्टेडियम में मौजूद दर्शक भी हैरान रह गए।
मुंबई की ओर से भारत चिपली ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 33 गेंदों में 80 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेली, जिसकी बदौलत टीम एक मजबूत स्कोर तक पहुंचने में सफल रही।
LPG : GasCylinder : BlackMarketing : HomeDelivery : Dehradun : Uttarakhand : JailForAgencyOwner : DistrictAdministration : QRT : उत्तराखंड में एलपीजी गैस कालाबाजारी के मामलों पर जिला प्रशासन ने कड़ा एक्शन लिया है। अब किसी भी गैस एजेंसी में गैरकानूनी सिलेंडर पाए जाने पर एजेंसी स्वामी को सीधे जेल भेजा जाएगा।
जिले की हर गैस एजेंसी पर अधिकारी तैनात किए गए हैं…जो एजेंसी की संपूर्ण गतिविधियों पर नजर रखेंगे। उपभोक्ताओं को होम डिलीवरी के जरिए ही गैस उपलब्ध कराई जाएगी और इसे ओटीपी आधारित सिस्टम से सुनिश्चित किया जाएगा।
जिले में गैस कालाबाजारी के खिलाफ अब तक 5 मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इनमें से 3 आरोपी जेल भेजे गए…जबकि 150 घरेलू, 139 व्यवसायिक और 7 छोटे सिलेंडर जब्त किए गए हैं।
जिलाधिकारी सविन बसंल ने कहा कि गैस एजेंसियों का हर स्टॉक, बैकलॉग और वितरण प्रतिदिन क्यूआरटी टीम को रिपोर्ट किया जाएगा। मैन्युअल और ऑनलाइन बुकिंग का बैकलॉग शाम तक अपडेट करना अनिवार्य होगा।
पुलिस अधीक्षक नगर ने निर्देश दिए कि छापेमारी में पकड़े गए अवैध सिलेंडर की स्रोत एजेंसी की पहचान कर एजेंसी स्वामी के खिलाफ सीधे मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जाए।
इस नई व्यवस्था से न केवल गैस कालाबाजारी पर अंकुश लगेगा…बल्कि एजेंसियों पर भी भीड़ और अव्यवस्था से निजात मिली है।
Dehradun : Government Medical College : Ragging : PG Hostel : Discipline : Dhan Singh Rawat : राज्य की राजधानी देहरादून में राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में रैगिंग की घटनाओं के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। कॉलेज प्रबंधन ने जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है और पीजी हॉस्टल की व्यवस्था में बड़े बदलाव शुरू कर दिए हैं।
अब हॉस्टल के 28 कमरों को नए सिरे से आवंटित किया जाएगा ताकि जूनियर और सीनियर छात्र अलग-अलग फ्लोर या ब्लॉकों में रहें और रैगिंग जैसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके। इसके साथ ही सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाई जाएगी और वार्डन की निगरानी मजबूत की जाएगी।
हॉस्टल में नई व्यवस्था से छात्रों को सुरक्षित और सकारात्मक माहौल मिलेगा। छात्रों के लिए एक शिकायत तंत्र भी विकसित किया जा रहा है…ताकि कोई भी छात्र बिना डर के अपनी समस्या बता सके।
हाल ही में कॉलेज में रैगिंग के आरोपों में एमबीबीएस के 9 छात्रों को तीन महीने के लिए निष्कासित किया गया…जिनमें से 2 छात्रों को हॉस्टल से स्थायी निष्कासन और आर्थिक दंड भी दिया गया।
उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि रैगिंग रोकने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे और दोषी छात्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। प्रशासन का कहना है कि शिक्षा और अनुशासन पर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
इन कदमों से उम्मीद है कि कॉलेज में सुरक्षित, अनुशासित और सकारात्मक शैक्षणिक माहौल बन सकेगा।
UttarakhandNews : GenderRatio : BetiBachao : Navratri2026 : DehradunNews : GirlChild : SocialIssue : उत्तराखंड में बेटियों की घटती संख्या ने चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य के ज्यादातर जिलों में लिंगानुपात लगातार कम हो रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि नवरात्र जैसे पावन पर्व के अवसर पर समाज को बेटियों के सम्मान और उनकी सुरक्षा का संकल्प लेने की जरूरत है।
हाल ही में हॉस्पिटल इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम (HIMS) द्वारा जारी आंकड़ों में राज्य के सभी जिलों के लिंगानुपात की स्थिति सामने आई है। इन आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड के 13 जिलों में से 11 जिलों में प्रति एक हजार लड़कों पर 950 से भी कम लड़कियां दर्ज की गई हैं।
तीन जिलों में स्थिति और गंभीर
आंकड़ों के मुताबिक राज्य के तीन जिलों में लिंगानुपात 900 से भी नीचे पहुंच गया है। यह स्थिति सामाजिक संतुलन के लिहाज से गंभीर मानी जा रही है। जब इन आंकड़ों की तुलना राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5) के वर्ष 2020-21 के आंकड़ों से की गई…तो पता चला कि कई जिलों में हालात पहले से ज्यादा खराब हो गए हैं। उस समय जिन जिलों में लिंगानुपात बेहतर था….वहां भी अब गिरावट दर्ज की जा रही है।
पलायन भी एक बड़ा कारण
अधिकारियों के अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों से हो रहा पलायन भी लिंगानुपात में गिरावट का एक प्रमुख कारण बन रहा है। रोजगार और बेहतर सुविधाओं की तलाश में बड़ी संख्या में लोग गांवों से शहरों की ओर जा रहे हैं। कुछ इलाकों में यह भी देखा गया कि बड़ी संख्या में युवा पुरुष सेना या रोजगार के लिए बाहर चले जाते हैं…जिससे स्थानीय स्तर पर लिंगानुपात प्रभावित होता है।
जागरूकता बढ़ाने की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि समाज में बेटियों को लेकर सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है। इसके लिए सरकार और सामाजिक संगठनों की ओर से जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। नवरात्र जैसे पर्व जहां देवी शक्ति की पूजा की जाती है ऐसे अवसर पर समाज को बेटियों के सम्मान और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आने की जरूरत बताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते इस मुद्दे पर गंभीरता से काम नहीं किया गया तो आने वाले समय में सामाजिक संतुलन पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।
RoorkeeNews : CaptainAshishSharma : MerchantNavy : HormuzStrait : IndianCrew : InternationalTension : UttarakhandNews : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच उत्तराखंड के रुड़की के रहने वाले मर्चेंट नेवी के कैप्टन आशीष शर्मा होर्मुज क्षेत्र में एक तेल टैंकर जहाज पर अपनी टीम के साथ डटे हुए हैं। वह जहाज पर मौजूद 24 सदस्यीय भारतीय दल का नेतृत्व कर रहे हैं और कठिन परिस्थितियों के बीच पूरी जिम्मेदारी के साथ अपने साथियों का हौसला बढ़ा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार रुड़की के दिल्ली रोड क्षेत्र के रहने वाले कैप्टन आशीष शर्मा इस समय होर्मुज क्षेत्र में एक तेल से भरे जहाज की कमान संभाले हुए हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वहां हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं और इसी बीच उनका जहाज भी उसी क्षेत्र में मौजूद है।
होर्मुज में खड़े हैं सैकड़ों तेल टैंकर
कैप्टन आशीष शर्मा की पत्नी सरुनिका शर्मा ने कहा कि इस समय होर्मुज क्षेत्र में 700 से अधिक मर्चेंट नेवी के तेल टैंकर जहाज मौजूद हैं। उनके पति जिस जहाज पर तैनात हैं उस पर 24 भारतीय सदस्य काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में उनके पति अपनी टीम के सभी सदस्यों का मनोबल बनाए हुए हैं। वह लगातार सभी को हिम्मत देते हैं और उनके परिवारों से भी संपर्क कर यह भरोसा दिलाते हैं कि सभी सुरक्षित हैं।
परिवार से लगातार संपर्क
सरुनिका शर्मा के अनुसार कैप्टन आशीष शर्मा जहाज पर रहते हुए अपनी कंपनी के साथ लगातार संपर्क में हैं। जहाज पर सभी जरूरी सामान और सुविधाएं उपलब्ध हैं…जिससे टीम को किसी तरह की परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि उनके पति हमेशा यही कहते हैं कि हिम्मत और धैर्य के साथ इस चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना किया जा सकता है और जल्द ही सब सुरक्षित भारत लौटेंगे।
परिवार कर रहा सुरक्षित वापसी की प्रार्थना
वहीं परिवार के लोग लगातार उनकी सुरक्षित वापसी के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। परिवार को उम्मीद है कि हालात जल्द सामान्य होंगे और सभी लोग सुरक्षित अपने घर लौट सकेंगे। रुड़की के कैप्टन आशीष शर्मा का इस कठिन समय में अपने दल का नेतृत्व करना साहस और जिम्मेदारी की एक मिसाल माना जा रहा है।
UttarakhandNews : SchoolClosure : PrimarySchools : MigrationIssue : EducationCrisis : DehradunNews : UttarakhandEducation : उत्तराखंड में सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर एक बड़ी जानकारी सामने आई है। विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सरकार ने बताया कि पिछले लगभग पांच वर्षों में राज्य के 826 प्राथमिक विद्यालय बंद हो चुके हैं। इन स्कूलों को मुख्य रूप से घटती छात्र संख्या और पहाड़ी इलाकों से हो रहे पलायन के कारण बंद करना पड़ा।
यह जानकारी विधानसभा में शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने एक सवाल के जवाब में दी। सरकार द्वारा दिए गए आंकड़े वर्ष 2020 से 2025 के बीच के हैं। इन आंकड़ों से साफ होता है कि पहाड़ी क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है।
क्यों बंद करने पड़े स्कूल
सरकार के अनुसार कई गांवों में बच्चों की संख्या बहुत कम रह गई थी। कुछ स्कूलों में तो केवल दो या तीन छात्र ही पढ़ रहे थे। ऐसे में पूरे स्कूल को चलाना शिक्षा विभाग के लिए मुश्किल हो गया। इसी वजह से कई विद्यालयों को बंद करना पड़ा या बच्चों को पास के बड़े स्कूलों में भेज दिया गया। सरकार का कहना है कि जिन स्कूलों में छात्र संख्या बहुत कम थी…वहां के बच्चों को आसपास के दूसरे स्कूलों में समायोजित किया गया है ताकि उन्हें बेहतर शिक्षण वातावरण मिल सके।
कहां सबसे ज्यादा बंद हुए स्कूल
जिलेवार आंकड़ों के अनुसार राज्य के पहाड़ी जिलों में यह समस्या ज्यादा गंभीर है। सबसे अधिक स्कूल टिहरी गढ़वाल जिले में बंद हुए हैं। यहां 262 प्राथमिक विद्यालयों पर ताले लग गए। इसके बाद पौड़ी गढ़वाल में 120 और पिथौरागढ़ जिले में 104 स्कूल बंद किए गए हैं।
अन्य जिलों की बात करें तो अल्मोड़ा में 83, नैनीताल में 49, चमोली में 43, देहरादून में 38, चंपावत में 34, उत्तरकाशी में 25, बागेश्वर में 25, उधमसिंह नगर में 21, रुद्रप्रयाग में 15 और हरिद्वार में 2 स्कूल बंद हुए हैं। फिलहाल राज्य में करीब 10,940 प्राथमिक विद्यालय संचालित हो रहे हैं।
पलायन का शिक्षा पर असर
विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ों से लगातार हो रहा पलायन इसका बड़ा कारण है। रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाओं और बेहतर जीवन की तलाश में कई परिवार गांवों से शहरों की ओर जा रहे हैं। जब परिवार गांव छोड़ देते हैं तो बच्चों की संख्या भी कम हो जाती है और स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या घटने लगती है।
सुविधाओं की कमी भी एक कारण
शिक्षा से जुड़े लोगों का कहना है कि कई सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी भी एक बड़ी समस्या है। कुछ स्कूलों के भवन जर्जर हालत में हैं और कई जगह शौचालय, पीने का पानी और खेल मैदान जैसी सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं हैं। इसी कारण कई अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेजना बेहतर समझते हैं।
सरकार का क्या कहना है
सरकार ने कहा कि स्कूलों की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 808 प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी चल रही है। इसके साथ ही कम छात्र संख्या वाले स्कूलों के बच्चों को दूसरे विद्यालयों में पढ़ाने की व्यवस्था की जा रही है।
उत्तराखंड में बड़ी संख्या में प्राथमिक स्कूलों का बंद होना राज्य की शिक्षा व्यवस्था के सामने खड़ी चुनौतियों की ओर इशारा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पलायन और शिक्षा से जुड़ी समस्याओं पर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में यह स्थिति और गंभीर हो सकती है।
Athira Sugathan UPSC : UPSC Result 2025 : Inspiring Story : Kerala Candidate : Wheelchair UPSC Success : कड़ी मेहनत और हिम्मत के दम पर केरल की अथिरा सुगाथन ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 483वीं रैंक हासिल कर एक मिसाल कायम की है। उनकी सफलता की कहानी संघर्ष, धैर्य और हौसले की प्रेरणादायक मिसाल मानी जा रही है।
दरअसल साल 2016 में एक सड़क दुर्घटना ने अथिरा की जिंदगी पूरी तरह बदल दी थी। उस समय वह बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी (BDS) की पढ़ाई कर रही थीं। हादसे के बाद वह व्हीलचेयर पर आ गईं और लगभग दो साल तक उन्हें याददाश्त खोने की समस्या रही। इतनी बड़ी मुश्किल के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने सपनों को पूरा करने के लिए लगातार प्रयास करती रहीं।
दुर्घटना के बाद लंबा चला इलाज
केरल के कोझिकोड की रहने वाली 30 वर्षीय अथिरा फरवरी 2016 में बेंगलुरु में पढ़ाई कर रही थीं तभी उनका सड़क हादसा हो गया। कई महीनों तक इलाज चलने के बाद वह अपने घर कोझिकोड लौट आईं।
अथिरा बताती हैं कि लगभग दो साल तक उन्हें अम्नेसिया की समस्या रही और उन्हें यह तक याद नहीं था कि उन्होंने BDS की पढ़ाई शुरू की थी। बाद में आयुर्वेदिक इलाज से धीरे-धीरे उनकी याददाश्त वापस आने लगी। इसके बाद उन्होंने फैसला किया कि वह अपनी पढ़ाई पूरी करेंगी।
अथिरा दोबारा बेंगलुरु के उसी कॉलेज में लौटीं….जहां उनके परिवार ने उनकी मदद के लिए एक केयरटेकर की व्यवस्था की। शुरुआती तीन साल की पढ़ाई उन्हें याद नहीं थी लेकिन उन्होंने फिर से मेहनत की और आखिरकार अपना कोर्स पूरा कर लिया।
समाजसेवा से मिली नई दिशा
साल 2020 में अथिरा कोझिकोड लौट आईं और एक गैर सरकारी संगठन (NGO) में स्वयंसेवक के रूप में काम करने लगीं। उस समय देश में कोविड-19 महामारी का दौर था। इस दौरान उन्होंने दिव्यांग लोगों के साथ काम किया और उनके जीवन की चुनौतियों को करीब से समझा। अथिरा कहती हैं कि इसी अनुभव ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। उन्होंने महसूस किया कि अगर वह बड़े स्तर पर समाज के लिए काम करना चाहती हैं…तो उन्हें सिविल सेवा में जाना चाहिए। यही सोच उन्हें UPSC की तैयारी के लिए प्रेरित करती रही।
ऑनलाइन पढ़ाई से की UPSC की तैयारी
UPSC की तैयारी के लिए अथिरा ने तिरुवनंतपुरम की Absolute IAS Academy में दाखिला लिया। इस संस्थान में शारीरिक रूप से दिव्यांग छात्रों के लिए “Butterfly” नाम का विशेष कार्यक्रम चलाया जाता है। उन्होंने वैकल्पिक विषय के रूप में मलयालम चुना और ज्यादातर पढ़ाई ऑनलाइन माध्यम से की। कभी-कभी वह अपने माता-पिता सुगाथन और मिनी के साथ तिरुवनंतपुरम भी जाती थीं। दोनों ही LIC एजेंट हैं और उन्होंने हमेशा अपनी बेटी का हौसला बढ़ाया।
बहन का बड़ा योगदान
अथिरा की इस सफलता में उनकी छोटी बहन अनघा का भी अहम योगदान रहा। उस समय अनघा बीएससी साइकोलॉजी की छात्रा थीं…लेकिन उन्होंने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और बीएससी नर्सिंग में दाखिला ले लिया…ताकि वह अपनी बड़ी बहन की बेहतर देखभाल कर सकें। हाल ही में उन्होंने अपना नर्सिंग कोर्स भी पूरा कर लिया है।
अथिरा अपनी बहन के इस त्याग के लिए खुद को बेहद आभारी मानती हैं। UPSC इंटरव्यू के दौरान जब उनसे पूछा गया कि उनका सबसे अच्छा दोस्त कौन है…तो उन्होंने अपनी बहन अनघा का ही नाम लिया। कड़ी चुनौतियों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद अथिरा की यह सफलता दिखाती है कि मजबूत इरादों के सामने कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होती।
Uttarakhand News: Weather: नवरात्र के पहले दिन उत्तराखंड में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। गुरुवार सुबह से ही पर्वतीय क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी है, जबकि मैदानी इलाकों में आसमान में घने बादल छाए हुए हैं। मसूरी, हल्द्वानी, नैनीताल, बागेश्वर और कोटद्वार समेत कई जिलों में बारिश दर्ज की गई, जिससे तापमान में गिरावट आई है और ठंड का एहसास बढ़ गया है। खासकर बागेश्वर जिले में सुबह से हो रही बूंदाबांदी के कारण लोगों ने फिर से गर्म कपड़े निकाल लिए हैं और ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा ले रहे हैं। तड़के तीन बजे से आसमान में बादल छाए रहे और सुबह करीब छह बजे से हल्की बारिश शुरू हो गई, जो रुक-रुक कर जारी है।
मौसम विभाग के अनुसार, आज प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में वर्षा, गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना है, जबकि 3000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी भी हो सकती है। विभाग ने हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल और चंपावत में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जहां तेज हवाएं, ओलावृष्टि और बिजली गिरने के आसार हैं। वहीं उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, अल्मोड़ा, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम में आए इस बदलाव से जनजीवन प्रभावित हुआ है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
Rudrapur : Casuarina : FarmersFair : NainiPaperLimited : SustainableFarming : WaterEfficientCrops : किसानों को नई तकनीक और बेहतर विकल्प उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आयोजित किसान मेले में उद्यान प्रदर्शनी के तहत कई कंपनियों ने अपने स्टॉल लगाए। इसी कड़ी में नैनी पेपर लिमिटेड ने भी एक विशेष स्टॉल लगाकर किसानों को कैसुरीना (Casuarina) के पौधों और उनके लाभों के बारे में जानकारी दी।
कंपनी के रीजनल मैनेजर विकास सिंह ने कहा कि कैसुरीना का पेड़ यूकेलिप्टस की तुलना में कम पानी में उग जाता है…जिससे यह किसानों के लिए अधिक लाभदायक हो सकता है। उन्होंने कहा कि कंपनी ने कैसुरीना के मदर स्टॉक से क्लोनल पौध तैयार किए हैं और करीब 10 एकड़ में प्लांटेशन किया गया है।
विकास सिंह के अनुसार, एक एकड़ भूमि में लगभग 1,800 से 2,000 कैसुरीना के पौधे लगाए जा सकते हैं…जिससे 1200 से 1500 क्विंटल लकड़ी प्राप्त की जा सकती है। इसके अलावा इसकी पल्प क्वालिटी यूकेलिप्टस से बेहतर होने के कारण कागज उत्पादन में रसायनों की खपत कम होती है…जिससे उत्पादन अधिक किफायती बनता है।
कैसुरीना के पेड़ की एक खासियत यह भी है कि यह 4 से 5 साल में तैयार हो जाता है…जबकि यूकेलिप्टस को 5-6 साल का समय लगता है। सिंचाई के मामले में भी यह लगभग आधे पानी में तैयार हो जाता है और तराई क्षेत्र में इसकी CH 05 वैरायटी साल के किसी भी समय रोपी जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती पानी की समस्या को देखते हुए किसानों के लिए ऐसे विकल्पों की जरूरत है जो कम पानी में अधिक उत्पादन दें। प्रशासन भी समय-समय पर जल संरक्षण और वैकल्पिक फसलों की ओर किसानों को प्रोत्साहित कर रहा है। इस पहल से भविष्य में किसानों और पर्यावरण दोनों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
Uttarakhand : CommercialLPG : CylinderDistribution : SOP : IOCL : HPCL : BPCL : उत्तराखंड में व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों के वितरण को व्यवस्थित करने के लिए जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) अब लागू हो गया है। तेल कंपनियां….इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOCL) हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) नई व्यवस्था के तहत जनपदवार सिलेंडर आवंटन शुरू कर चुकी हैं।
नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक गैस एजेंसी को उसके व्यावसायिक कनेक्शनों की संख्या के अनुसार सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी और आवश्यकता के अनुसार आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
राज्य में वर्तमान में 63,054 व्यावसायिक गैस कनेक्शन हैं…जिनकी आपूर्ति 311 गैस एजेंसियों के माध्यम से होती है। एसओपी लागू होने के बाद व्यावसायिक एलपीजी की उपलब्धता में सुधार आने की उम्मीद है।
अपर आयुक्त खाद्य पी.एस. पांगती ने कहा कि राज्य में घरेलू गैस की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि होटल, रेस्टोरेंट, होमस्टे, अस्पताल और फार्मास्यूटिकल इकाइयों को उनकी दैनिक जरूरत के अनुसार सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि मंगलवार शाम तक 19 किलो के 794 और 47.5 किलो के 85 व्यावसायिक सिलेंडर जनपदवार एजेंसियों को भेजे जा चुके हैं…जिससे व्यावसायिक क्षेत्र को राहत मिलने की संभावना है।