





Uttarakhand: Uttarakhand Chit Fund Scam: उत्तराखंड हाई कोर्ट ने प्रदेश के नागरिकों को भारी वित्तीय नुकसान पहुँचाने वाले चिटफंड घोटाले में सीबीआई जांच कराने का आदेश जारी किया है। यह मामला एलयूसीसी नामक कंपनी से जुड़ा है, जिसने स्थानीय एजेंटों के माध्यम से 800 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की और फरार हो गई।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने बुधवार को सुनवाई के दौरान निर्देश दिए कि जिन लोगों का पैसा इस कंपनी में फंसा है, वे अपनी शिकायत सीबीआई के पास जमा करें। कोर्ट में सीबीआई ने कहा कि जांच की अनुमति मिल चुकी है और जांच एजेंसी की ओर से स्वीकृति पत्र भी पेश किया गया। वहीं, उत्तराखंड पुलिस ने बताया कि कुछ मामलों में मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं और अन्य की जांच जारी है।
हालांकि, 27 पीड़ितों ने कोर्ट को बताया कि पुलिस ने अब तक मुकदमा दर्ज नहीं किया है, और बिना मुकदमा दर्ज किए उनका निवेश वापस नहीं मिलेगा। कोर्ट ने प्रभावित लोगों से कहा कि वे अपनी शिकायतों के साथ निवेश का प्रमाण पत्र भी संलग्न करें।
जारी शिकायतों में बताया गया कि एलयूसीसी ने 2021 में प्रदेश के विभिन्न जिलों में कार्यालय खोले और स्थानीय एजेंटों के माध्यम से लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया। एजेंटों ने अपने परिचितों को निवेश के लिए आकर्षित किया, जबकि कंपनी ने राज्य में सोसायटी रजिस्ट्रेशन अधिनियम के तहत कोई वैध पंजीकरण तक नहीं कराया। 2023-24 में कंपनी अपने कार्यालय बंद कर फरार हो गई।
प्रदेश और अन्य राज्यों में अब तक इस कंपनी के खिलाफ 56 मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। जांच में यह भी सामने आया कि मुख्य आरोपित दुबई भाग चुका है। निवेशक अब एजेंटों और पुलिस के दबाव में हैं।
कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि पीड़ितों की शिकायतों के आधार पर ही जांच आगे बढ़ेगी, और सभी प्रभावित लोग उचित दस्तावेजों के साथ शिकायत दर्ज कराएं।
Pakistan: Fake: Football: Team: पाकिस्तान एक बार फिर विवादों में घिर गया है। हाल ही में यूएई में भारत-पाकिस्तान हैंडशेक विवाद थमा भी नहीं था कि अब जापान में एक नया मामला सामने आ गया। दरअसल, जापान ने हवाई अड्डे पर पाकिस्तान की एक फर्जी फुटबॉल टीम पकड़ ली और सभी को देश से डिपोर्ट कर दिया। इसके साथ ही जापानी अधिकारियों ने इस मामले की जानकारी पाकिस्तान की फेडरल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) को भी दी है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इन नकली खिलाड़ियों को जाली दस्तावेज़ों के सहारे फुटबॉल प्लेयर बनाकर जापान ट्रेनिंग के लिए भेजा गया था। हर व्यक्ति से लगभग 40 लाख रुपये की वसूली की गई थी।
मानव तस्करी का खुलासा
मामले में मानव तस्करी से जुड़े एक बड़े आरोपी मलिक वकास को FIA ने 15 सितंबर को गिरफ्तार कर लिया। उसने “गोल्डन फुटबॉल ट्रायल” नाम से एक क्लब रजिस्टर कराया था और इसी बहाने लोगों को अवैध रूप से विदेश भेजने का काम करता था। आरोपी ने सियालकोट एयरपोर्ट से 22 सदस्यीय नकली फुटबॉल टीम जापान भेजी थी, लेकिन जांच के दौरान जापानी अधिकारियों ने दस्तावेजों को फर्जी पाया।
जांच में यह भी पता चला कि खिलाड़ियों को फुटबॉलर की तरह व्यवहार और ट्रेनिंग भी दी गई थी। वकास ने पाकिस्तान फुटबॉल महासंघ (PFF) का जाली रजिस्ट्रेशन लेटर और विदेश मंत्रालय से नकली NOC तक तैयार करवा लिया था। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि जनवरी 2024 में भी इसी तरह की योजना बनाकर उसने 17 लोगों को जापान भेजा था।
क्यों बढ़ रहा है पाकिस्तान से बाहर जाने का चलन?
पाकिस्तान की बिगड़ती आर्थिक स्थिति, भ्रष्टाचार और राजनीतिक अस्थिरता की वजह से वहां का युवा बेहतर जीवन की तलाश में देश छोड़ रहा है। कई लोग कानूनी रास्तों से विदेश जाने का खर्च नहीं उठा पाते, इसलिए दलालों के जरिए अवैध तरीके अपनाते हैं और इस तरह के धोखाधड़ी के जाल में फँस जाते हैं।
Uttarakhand: Dehradun: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में उत्तराखंड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में उन्होंने हस्तशिल्प आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया और 11 प्रतिभाशाली शिल्पियों को उत्तराखंड शिल्प रत्न पुरस्कार से नवाजा।
सम्मानित होने वालों में उत्तरकाशी की श्रीमती जानकी देवी और भागीरथी देवी, बागेश्वर के इन्द्र सिंह, अल्मोड़ा के लक्ष्मण सिंह व भूपेंद्र सिंह बिष्ट, नैनीताल के जीवन चंद्र जोशी, मोहन चंद्र जोशी और जानकी बिष्ट, हल्द्वानी के जगदीश पांडेय, चमोली के प्रदीप कुमार और गुड्डी देवी तथा उत्तरकाशी के महिमानंद तिवारी शामिल रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की बुनाई और हस्तशिल्प कला अपनी पारंपरिक डिज़ाइन और उच्च गुणवत्ता के लिए देश-विदेश में पहचान बना चुकी है। उन्होंने हर्षिल की ऊनी शाल, मुनस्यारी-धारचूला की थुलमा, अल्मोड़ा की ट्वीड, छिनका की पंखी और पिछौड़े की डिज़ाइन का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि ये उत्पाद अब वैश्विक स्तर पर भी सराहे जा रहे हैं।
उन्होंने भांग और बांस के रेशों से बने वस्त्रों की बढ़ती मांग को राज्य के लिए अवसर बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में “वोकल फॉर लोकल”, “लोकल टू ग्लोबल” और “मेक इन इंडिया” जैसी पहलें शिल्पियों को सशक्त बना रही हैं। साथ ही, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना, राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम और कौशल सम्मान जैसी योजनाएं उनके सामाजिक-आर्थिक विकास को गति दे रही हैं।
श्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार भी शिल्पी पेंशन योजना, शिल्प रत्न सम्मान, बुनकर क्लस्टर, प्रशिक्षण कार्यक्रम, मेलों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने का कार्य कर रही है। उन्होंने नागरिकों से स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को प्राथमिकता देने की अपील की और विश्वास जताया कि शिल्पी और बुनकर उत्तराखंड को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
इस अवसर पर परिषद के उपाध्यक्ष वीरेन्द्र दत्त सेमवाल, विधायक सरिता आर्य, सुरेश गड़िया, बाल आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना सहित वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में शिल्पी मौजूद रहे।
Uttarakhand: Dehradun: Buses: शिव मंदिर के पास पुल टूटने से देहरादून-मसूरी मार्ग पर वाहनों की आवाजाही मंगलवार को पूरी तरह से बंद रही। इसके चलते उत्तराखंड परिवहन निगम की मसूरी जाने वाली सभी बस सेवाएँ प्रभावित रहीं और यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग से यात्रा करनी पड़ी।
पुल टूटने के बाद पुलिस-प्रशासन ने कुठालगेट से आगे वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी। नतीजतन, देहरादून से मसूरी और मसूरी होकर अन्य पर्वतीय स्थलों तक जाने वाली कोई भी बस सेवा संचालित नहीं हो सकी। निगम की ओर से ऑनलाइन टिकट बुक करने वाले यात्रियों की धनराशि रिफंड कर दी गई।
परिवहन निगम की 30 नियमित बसों में से 25 बसें केवल दून-मसूरी मार्ग पर चलती हैं और शेष बसें मसूरी होकर अन्य गंतव्यों तक जाती हैं। सामान्य दिनों में ये बसें प्रतिदिन तीन ट्रिप करती हैं और करीब साढ़े तीन से चार हजार यात्री इस सेवा का लाभ उठाते हैं। पुल टूटने से इन सभी यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग से यात्रा करनी पड़ी।
मसूरी होकर चंबा व आगे जाने वाली बसों का संचालन भी पूरी तरह बंद रहा। हालांकि, बड़कोट (उत्तरकाशी) और नैनबाग (टिहरी) की ओर जाने वाली बसें विकासनगर-यमुना पुल होकर चलाई गईं। इसके अलावा मसूरी मार्ग पर चलने वाली निजी कंपनी विश्वनाथ सेवा की करीब 20 बसें भी स्थगित रहीं।
वैकल्पिक मार्ग से हो सकती है यात्रा
पुलिस-प्रशासन ने बताया कि देहरादून-लंबीधार-किमाड़ी मार्ग भी बंद है। वर्तमान में केवल देहरादून-विकासनगर-यमुना पुल-कैंपटी फॉल मार्ग खुला हुआ है। यह मार्ग पक्का है, लेकिन इससे देहरादून से मसूरी की दूरी दोगुने से भी अधिक हो जाती है। जहाँ सामान्यत: दूरी करीब 35 किलोमीटर है, वहीं विकासनगर होकर जाने पर यह दूरी लगभग 80 किलोमीटर तक पहुँच रही है।
Uttarakhand: Sanskrit Education: केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेडी ने उत्तराखंड को संस्कृत शिक्षा में अग्रणी बनाने का संकल्प व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में संस्कृत के विकास और प्रसार के लिए विश्वविद्यालय हरसंभव सहयोग प्रदान करेगा और राज्य को संस्कृत शिक्षा में एक मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा।
दिल्ली स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय के मुख्यालय में आयोजित बैठक में उत्तराखंड शासन के संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार गैरोला की अध्यक्षता में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, संस्कृत अकादमी और संस्कृत बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में कुलपति ने उत्तराखंड में संस्कृत शिक्षा के विस्तार और गुणवत्ता सुधार के लिए विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार गैरोला ने बताया कि उत्तराखंड की द्वितीय राजभाषा संस्कृत है और इसका उद्देश्य इसे आमजन तक पहुँचाना है। उन्होंने संस्कृत विद्यालयों और महाविद्यालयों के लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था, जैसे पुस्तकें, शिक्षकों की नियुक्ति, छात्रवृत्ति, छात्र आवास, तथा प्रशिक्षण कार्यशालाओं के लिए अनुदान के प्रस्ताव पेश किए। इसके अलावा, अष्टादशी योजना, संस्कृत ग्रामों का विस्तार, वोकेशनल प्रशिक्षण और शिक्षक कौशल विकास के कार्यक्रम भी राज्य में लागू किए जाएंगे।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि राज्य में संस्कृत शिक्षा को तकनीकी और शैक्षणिक दृष्टि से सशक्त किया जाएगा। कुलपति प्रो. वरखेडी ने अधिकारियों से कहा कि हर पहल को सुव्यवस्थित और प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए, ताकि उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा में देशभर में उदाहरण स्थापित कर सके।
Uttarakhand: Pithoragarh: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है जिसने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक राजकीय इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य का पद खाली होने पर जिम्मेदारी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को सौंप दी गई है।
जानकारी के अनुसार, मामला मुनस्यारी विकासखंड के जीआईसी खतेड़ा का है। इस इंटर कॉलेज में लंबे समय से स्थाई प्रधानाचार्य की नियुक्ति नहीं है। हिंदी प्रवक्ता छोटे सिंह को अस्थायी रूप से प्रभार दिया गया था, लेकिन राज्य शिक्षक संघ के आंदोलन में शामिल होते हुए उन्होंने भी पदभार छोड़ दिया। शिक्षकों के सामूहिक निर्णय के तहत वे केवल पढ़ाई तक सीमित रहेंगे और किसी भी प्रशासनिक जिम्मेदारी को नहीं निभाएंगे।
स्थिति ऐसी बन गई कि विद्यालय में केवल एकमात्र चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी राजू गिरी ही शेष बचे। नियमों की आड़ में उन्हें ही प्रिंसिपल का चार्ज सौंप दिया गया। अब विद्यालय के सभी सरकारी पत्राचार और प्रशासनिक जिम्मेदारियां उनके कंधों पर आ गई हैं।
विद्यालय में इस समय एक स्थाई शिक्षक और पांच अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं। स्थाई शिक्षक प्रभार लेने से इनकार कर चुके हैं, जबकि अतिथि शिक्षकों को सरकारी जिम्मेदारियां सौंपना संभव नहीं है। ऐसे में, व्यवस्थागत खामियों के कारण एक चपरासी को प्रिंसिपल की कुर्सी पर बैठा दिया गया। इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई और स्कूल के संचालन पर पड़ रहा है।
मुनस्यारी के खंड शिक्षा अधिकारी दिगंबर आर्य ने इस घटनाक्रम को अनुचित करार दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानाचार्य का प्रभार सौंपने से पहले विभाग से संपर्क किया जाना चाहिए था। आंदोलन के चलते शिक्षक संगठन ने छात्रों और विभागीय हितों को दरकिनार कर दिया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले में जल्द उचित निर्णय लिया जाएगा।
यह प्रकरण न केवल पिथौरागढ़ बल्कि पूरे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर पेश करता है। शिक्षक संगठनों का आंदोलन जहां अपनी मांगों को लेकर जारी है, वहीं स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पर प्रिंसिपल की जिम्मेदारी डालना नियमों की मजबूरी हो सकती है, लेकिन इससे शिक्षा व्यवस्था का मजाक बनता दिखाई दे रहा है।
Uttarakhand: Haldwani: कुमाऊं मंडल के पर्वतीय और मैदानी इलाकों में आपदा की स्थिति अक्सर प्रशासन के लिए चुनौती बन जाती है। भूस्खलन हो या बाढ़ जैसी आपदा, ऐसे हालात में अधिकारियों का तुरंत मौके पर पहुंचना जरूरी होता है। लेकिन फोर बाय फोर वाहनों की कमी के कारण कई बार अधिकारियों को जोखिम उठाकर यात्रा करनी पड़ती है या फिर निजी गाड़ियों का सहारा लेना पड़ता है।
इसी समस्या के समाधान के लिए कुमाऊं कमिश्नर और मुख्यमंत्री सचिव दीपक रावत ने पहल की है। उन्होंने राजस्व परिषद को पत्र लिखकर मंडल की 22 तहसीलों के लिए फोर बाय फोर वाहन उपलब्ध कराने हेतु बजट की मांग की है।
धारचूला, मुनस्यारी, कपकोट और लोहाघाट जैसे दूरस्थ इलाकों में यह समस्या सबसे गंभीर है। इन क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़क अवरोध सामान्य बात है। ऐसे में राहत और बचाव कार्यों में देरी होने से प्रशासन को जनाक्रोश का भी सामना करना पड़ता है।
कुछ साल पहले तक तहसीलों में जीप उपलब्ध होती थी, जिससे आपदाग्रस्त स्थानों तक पहुंचना सरल हो जाता था। लेकिन अब वाहन न होने से मुश्किलें बढ़ गई हैं। कमिश्नर दीपक रावत का कहना है कि नए वाहनों की उपलब्धता से आपदा प्रबंधन कार्य तेज और प्रभावी हो सकेंगे। इससे न केवल पहाड़ी क्षेत्रों तक बल्कि मैदानों के बाढ़ प्रभावित इलाकों तक भी अधिकारी तुरंत पहुंच पाएंगे।
Railway: Updates: Uttarakhand: रेलवे प्रशासन द्वारा परिचालनिक सुगमता हेतु पूर्व रेलवे के आसनसोल मंडल के दुर्गापुर स्टेशन के यार्ड रिमॉडलिंग एवं इलेक्ट्रानिक इंटरलाकिंग केबिन के कमीशनिंग के परिप्रेक्ष्य में प्री-नान इंटरलॉक/इंटरलॉक कार्य किये जाने के कारण गाड़ियों का संशोधित निरस्तीकरण एवं पुनर्निधारण निम्नवत रहेगा।
निरस्तीकरण –
हावड़ा से 19, 20, 21 एवं 22 नवम्बर, 2025 को चलने वाली 12333 हावड़ा-प्रयागराज रामबाग एक्सप्रेस निरस्त रहेगी।
प्रयागराज रामबाग से 20, 21, 22 एवं 23 नवम्बर, 2025 को चलने वाली 12334 प्रयागराज रामबाग-हावड़ा एक्सप्रेस निरस्त रहेगी।
हावड़ा से 31 अक्टूबर एवं 14 नवम्बर, 2025 को चलने वाली 12353 हावड़ा-लालकुआं एक्सप्रेस निरस्त रहेगी।
लालकुआं से 01 एवं 15 नवम्बर, 2025 को चलने वाली 12354 लालकुआं-हावड़ा एक्सप्रेस निरस्त रहेगी।
कोलकाता से 20 नवम्बर, 2025 को चलने वाली 13167 कोलकाता-आगरा कैंट एक्सप्रेस निरस्त रहेगी।
आगरा कैंट से 22 नवम्बर, 2025 को चलने वाली 13168 आगरा कैंट-कोलकाता एक्सप्रेस निरस्त रहेगी।
पुनर्निर्धारण-
सियालदह से 06, 07, 08, 09, 10, 11, 13, 17 एवं 18 अक्टूबर, 2025 को चलने वाली 13105 सियालदह-बलिया एक्सप्रेस सियालदह से 40 मिनट पुनर्निर्धारित कर चलाई जायेगी।
Uttarakhand: Haldwani: नैनीताल जिले के हल्द्वानी निवासी समाजसेवी एवं व्यापारी नेता डॉ. प्रमोद अग्रवाल ‘गोल्डी’ का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति विशेष लगाव किसी से छिपा नहीं है। अब इस समर्पण की झलक उनकी चार वर्षीय पोती सानविका अग्रवाल में भी देखने को मिल रही है।
सानविका रोजाना भगवान से प्रार्थना करती है कि उन्हें प्रधानमंत्री मोदी से मिलने का अवसर मिले। मासूम चाहत इतनी गहरी है कि वह अपने गुल्लक में जमा की गई बचत भी उन्हें भेंट करना चाहती है। परिवार के करीबियों के अनुसार, सानविका अक्सर कहती है “मोदी जी भगवान तो नहीं, लेकिन भगवान से कम भी नहीं हैं।”
प्रधानमंत्री के प्रति इस भावनात्मक लगाव को डॉ. प्रमोद गोल्डी ने एक विशेष रूप दिया है। उन्होंने जयपुर से लगभग 70 किलो वजनी और पौने दो फीट ऊंची आकर्षक मूर्ति बनवाई है, जो हाल ही में हल्द्वानी पहुंच चुकी है। डॉ. गोल्डी की इच्छा है कि वह यह मूर्ति स्वयं प्रधानमंत्री को भेंट करें।
इसके अलावा, उन्होंने चार विशाल एल्बम तैयार किए हैं जिनमें 500 से अधिक पन्नों पर मोदी जी से जुड़े समाचार, अंतरराष्ट्रीय सम्मान, विदेश यात्राओं, विदेशी नेताओं से मुलाकातों, उनके विचारों और उपलब्धियों को संकलित किया गया है। इन एल्बमों में मोदी जी की माताजी से जुड़ी खबरें भी शामिल हैं।
यही नहीं, डॉ. गोल्डी ने आगरा और रतलाम से प्रधानमंत्री की तस्वीर वाले शुद्ध चांदी के विशेष सिक्के भी तैयार करवाए हैं, जिन्हें वह उनके सामने पेश करना चाहते हैं।
Uttarakhand: Haldwani: Kathgodam Railway Station: Kumauni Culture काठगोदाम रेलवे स्टेशन पर सोमवार शाम केंद्रीय रक्षा एवं पर्यटन राज्य मंत्री रह चुके सांसद अजय भट्ट ने अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत चल रहे विकास कार्यों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
भट्ट ने बताया कि स्टेशन का निर्माण पारंपरिक कुमाऊंनी स्थापत्य शैली में किया जा रहा है, ताकि यह स्थानीय सांस्कृतिक पहचान को भी दर्शा सके।
रेलवे के इज्जतनगर मंडल से पहुंचे उपमुख्य अभियंता ए.के. सिंह ने जानकारी दी कि परियोजना पर लगभग 16.76 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसमें दो एस्केलेटर, दो लिफ्ट, यात्रियों के लिए दो नए प्रतीक्षालय, वीआईपी लाउंज, कार्यालय कक्षों का स्थानांतरण, और स्टेशन से नरीमन चौराहे तक सड़क लिंक का निर्माण शामिल है। उन्होंने बताया कि प्रतीक्षालय, लिफ्ट और एस्केलेटर जैसे कई कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि शेष कार्य तेजी से प्रगति पर हैं।
हालांकि योजना के अनुसार सभी काम दिसंबर 2025 तक पूरे होने थे, लेकिन मानसूनी बाधाओं के चलते अब परियोजना फरवरी 2026 तक पूरी होने की संभावना है। निरीक्षण के दौरान छत से पानी टपकने की समस्या भी सामने आई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मौजूदा योजना में छत की मरम्मत शामिल नहीं है। इसके लिए अलग प्रस्ताव तैयार कर विभाग को भेजा गया है। निरीक्षण के मौके पर मेयर गजराज सिंह बिष्ट, रेलवे के क्षेत्रीय मुख्य प्रबंधक मोहम्मद सलीम समेत कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।