





गंगोलीहाट (पिथौरागढ़): गंगोलीहाट तहसील के अंतर्गत आने वाले खेतीगांव तोक बोकटी से एक विवाहिता के अचानक ससुराल से लापता होने का मामला सामने आया है। विवाहिता के ससुर चंद्रशेखर सिंह ने कोतवाली गंगोलीहाट में तहरीर देकर बहू पर घर से सोना और नकदी लेकर भागने का आरोप लगाया है।
तहरीर के अनुसार 17 सितंबर 2025 की रात को चंद्रशेखर सिंह की बहू ज्योति देवी, पत्नी संजय सिंह घर से बिना किसी को बताए चली गई। परिजनों को उसके जाने का समय स्पष्ट नहीं है। अगली सुबह जब परिवार वालों ने उसका बिस्तर देखा तो वहां ज्योति द्वारा लिखा गया एक पत्र मिला…जिसमें लिखा था “मैं घर छोड़कर जा रही हूँ और अब वापस नहीं आऊंगी।”
चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि 4 जून 2025 को उनके पुत्र संजय सिंह का विवाह, ज्योति पुत्री विक्रम सिंह खड़ायत ग्राम बस्तोड़ी तोक रानीखेत तहसील डीडीहाट के साथ हिंदू रीति-रिवाजों के साथ हुआ था। ज्योति का पति हैदराबाद के एक होटल में कार्यरत है और घटना के समय वह वहीं था। इस कारण घर पर सिर्फ ससुराल पक्ष के अन्य सदस्य ही मौजूद थे।
चंद्रशेखर सिंह ने आरोप लगाया है कि ज्योति देवी घर से लगभग 6 तोला सोना और 15,000 नकद लेकर गई है। उन्होंने आशंका जताई है कि बहू का किसी अन्य युवक के साथ प्रेम संबंध हो सकता है…जिसके चलते वह ससुराल छोड़कर चली गई।
परिवार की ओर से गंगोलीहाट कोतवाली में FIR दर्ज कराई गई है। पुलिस ने शिकायत प्राप्त कर मामले की प्राथमिक जांच शुरू कर दी है। ससुराल पक्ष ने मांग की है कि बहू की जल्द लोकेशन का पता लगाया जाए और ले जाया गया सामान वापस दिलाया जाए।
कोतवाली पुलिस के अनुसार मामले की गंभीरता को देखते हुए मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग और आसपास के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है। प्राथमिक जांच में विवाहिता के जानबूझकर घर छोड़ने की बात सामने आ रही है…लेकिन फरवरी बयान और तथ्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
रुद्रपुर: हल्द्वानी तहसील में तैनात सर्वे कानूनगो अशरफ अली पर प्रशासन की कड़ी कार्रवाई हुई है। जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने ऊधमसिंह नगर वापस लौटते ही अशरफ अली को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन के दौरान वह सहायक अभिलेख अधिकारी मुख्यालय से जुड़े रहेंगे।
23 सितंबर को कुमाऊं मंडल के कमिश्नर दीपक रावत ने हल्द्वानी तहसील का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि अशरफ अली ने धारा 143 के तहत आने वाले विभिन्न आवेदन पत्रावलियों को लंबित रखा था। साथ ही कई महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने घर में रखे थे। कमिश्नर ने घर पहुंचकर अभिलेखों की जांच की तो 143 से संबंधित 21 मामलों की फाइलें मिलीं, जिन्हें पटवारी की रिपोर्ट लगने के बाद भी बिना किसी उचित कारण के दबा दिया गया था।
इस मामले में नैनीताल के जिलाधिकारी ने पत्र भेजकर अशरफ अली की तहसील से संबद्धता समाप्त करने और निलंबन की सिफारिश की थी। डीएम नितिन सिंह भदौरिया ने इस सिफारिश को स्वीकार करते हुए शनिवार को अशरफ अली को निलंबित कर दिया।
Uttarakhand News: UKSSSC: Exam: Cheating: राज्य सरकार ने स्नातक स्तर की प्रतियोगी परीक्षा-2025 में हुई कथित नकल प्रकरण की जांच के लिए एक न्यायिक आयोग गठित करने का निर्णय लिया है। इस आयोग की बागडोर नैनीताल उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति यू.सी. ध्यानी को सौंपी गई है। सरकार का कहना है कि यह कदम जनहित और परीक्षा की पारदर्शिता बनाए रखने की दृष्टि से उठाया गया है।
गौरतलब है कि 21 सितम्बर 2025 को हुई इस परीक्षा में अनियमितताओं और नकल की शिकायतें सामने आई थीं। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने जांच आयोग अधिनियम, 1952 की धारा 3 के तहत न्यायिक जांच के आदेश जारी किए। शुरुआत में यह जिम्मेदारी सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति बी.एस. वर्मा को देने की तैयारी थी, लेकिन उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से इसे स्वीकार नहीं किया। इसके बाद न्यायमूर्ति ध्यानी को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
आयोग को आवश्यकता पड़ने पर अधिकारियों और विशेषज्ञों की मदद लेने की स्वतंत्रता होगी और उसका कार्यक्षेत्र पूरे राज्य में रहेगा। उसे सभी शिकायतों, साक्ष्यों और उपलब्ध तथ्यों की पड़ताल करनी होगी। साथ ही, 24 सितम्बर 2025 को गठित विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट का अध्ययन कर, जरूरत पड़ने पर आयोग उसे विधिक दिशा-निर्देश भी देगा।
देहरादून: उत्तराखंड छात्रसंघ चुनावों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने एक बार फिर अपना परचम लहराया है। प्रदेशभर से आए नतीजों में अधिकांश कॉलेजों पर एबीवीपी ने कब्जा जमाते हुए अपनी मजबूत पकड़ और व्यापक लोकप्रियता का परिचय दिया।
नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही 27 कॉलेजों में अध्यक्ष पद पर एबीवीपी प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो गए थे, जिसने संगठन की जमीनी ताकत को पहले ही स्पष्ट कर दिया था। डीएवी पीजी कॉलेज देहरादून से ऋषभ मल्होत्रा और एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय से महिपाल बिष्ट की जीत ने प्रदेश की सबसे बड़ी शैक्षणिक संस्थाओं में एबीवीपी की बढ़त को पुख्ता किया।
शुद्धोवाला डोईवाला, ऋषिकेश, करणप्रयाग, श्रीनगर, खटीमा और कोटद्वार जैसे प्रमुख कॉलेजों में भी परिषद के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। छात्र समुदाय ने संगठन की कार्यशैली, पारदर्शिता और छात्र हितों से जुड़े मुद्दों पर भरोसा जताया।
विश्लेषकों का मानना है कि इस जीत में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार की नीतियों ने भी अहम भूमिका निभाई है। हाल ही में लागू किए गए नकल-विरोधी कानून और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की गारंटी ने छात्रों का विश्वास बढ़ाया है। इसके साथ ही, 25 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियों में अवसर दिलाने से भी सकारात्मक माहौल बना।
वहीं, विपक्ष द्वारा UKSSSC परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर सरकार पर हमले का कोई खास असर नहीं दिखा। चुनावी परिणामों ने संकेत दिया कि छात्र वर्ग सरकार और एबीवीपी के पक्ष में खड़ा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छात्र राजनीति में एबीवीपी की यह ऐतिहासिक जीत भविष्य की मुख्यधारा राजनीति पर भी असर डाल सकती है। इसे छात्र हितों के साथ-साथ राष्ट्रवादी विचारधारा और पारदर्शी शासन व्यवस्था के प्रति युवाओं के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।
Haldwani: MBPG: College: Election: Student: Union: President Post:
पहला राउंड पूरा हो गया है
अभिषेक गोस्वामी 110
कमल 136
अरशद 5
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दूसरा राउंड
Abhishek 107
Kamal 121
Arshad 5
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तीसरा राउंड
अभिषेक गोस्वामी 137
कमल 127
अरशद 9
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चौथा राउंड पूरा और कुल मत
अभिषेक गोस्वामी 501
कमल बोरा 473
अरशद 26
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पांचवा राउंड पूरा और कुल मत
अभिषेक गोस्वामी 613
कमल बोरा 558
अरशद 52
Haldwani: MBPG: College: हल्द्वानी के एमबीपीजी कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव के दौरान शनिवार को मतदान की शुरुआत में ही गड़बड़ी सामने आई। कॉलेज में कुल 13,978 छात्र-छात्राओं को वोट डालना है। मतदान शुरू होते ही एक युवक फर्जी पहचान पत्र के साथ पकड़ लिया गया। एनएसयूआई के अध्यक्ष पद प्रत्याशी कमल बोरा की शिकायत पर प्रशासन ने जांच की तो उसका आई-कार्ड नकली निकला।
फर्जीवाड़ा सामने आते ही कॉलेज प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी छात्र को पुलिस के सुपुर्द कर दिया। इसके बाद पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अब प्रत्येक मतदाता का आई-कार्ड स्कैन कर सत्यापन किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि निष्पक्ष चुनाव के लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है और सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत की गई है।
कमल बोरा ने चेतावनी दी है कि यदि चुनाव में गड़बड़ी हुई तो वह आमरण अनशन करेंगे। वहीं, सिटी मजिस्ट्रेट गोपाल चौहान ने स्पष्ट किया कि मतदान पूरी तरह सुरक्षा घेरे में कराया जा रहा है और गड़बड़ी या फर्जी मतदान करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।
हल्द्वानी: हल्द्वानी में छात्रसंघ चुनाव और मतगणना के दौरान ट्रैफिक व्यवस्था बदल दी गई है।
नैनीताल रोड पर सभी प्रकार के मालवाहक और बड़े वाहन प्रतिबंधित रहेंगे। ऐसे वाहन बाईपास मार्ग से गुजरेंगे।
तिकोनिया से काठगोदाम जाने वाले वाहन भोटियापड़ाव चौकी से डायवर्ट होकर दाहिनी ओर से जाएंगे, जबकि काठगोदाम से तिकोनिया आने वाले वाहन अपनी लाइन में चलते रहेंगे।
जरूरत पड़ने पर नैनीताल रोड से आने वाले वाहनों को कॉलटेक्स/हाइडिल तिराहा और पंचक्की की ओर डायवर्ट किया जाएगा।
पहाड़ से आने वाली रोडवेज और निजी बसें सीधे अपने रूट से रोडवेज बस स्टेशन तक जा सकेंगी।
हल्द्वानी से पहाड़ की ओर जाने वाली बसें भोटियापड़ाव से डायवर्ट होकर महारानी होटल तिराहे तक दाहिनी ओर चलेंगी और फिर नैनीताल रोड पकड़ेंगी।
महिला डिग्री कॉलेज चुनाव के दौरान अटल रोड से कुल्यालपुरा चौराहा की ओर जाने वाले वाहन नगर निगम रोड/नहर कवरिंग रोड से होकर पनचक्की की ओर जाएंगे।
दोनहरिया तिराहा, पानी की टंकी तिराहा और तिकोनिया से कुल्यालपुरा चौराहा तक वाहनों का प्रवेश पूरी तरह बंद रहेगा।
चुनाव ड्यूटी में लगे अधिकारियों, कर्मचारियों और पत्रकारों के वाहन एम.बी. इंटर कॉलेज मैदान में पार्क होंगे।
छात्रसंघ चुनाव में वोट डालने आए छात्र अपने वाहन ठंडी सड़क में खड़े करेंगे।
महिला डिग्री कॉलेज की ड्यूटी में लगे कर्मचारियों के वाहन कॉलेज के बाईं ओर रोड किनारे पार्क होंगे।
कलावती तिराहा से कुल्यालपुरा चौराहा तक दोपहिया और चौपहिया वाहनों की एंट्री बंद होगी। केवल चुनाव से जुड़े अधिकारी और कर्मचारियों के वाहन ही जा सकेंगे।
भोटियापड़ाव चौकी से लेकर महारानी होटल तिराहे तक का क्षेत्र जीरो जोन रहेगा।
डिग्री कॉलेज तिराहा से कुल्यालपुरा चौराहा और सरस्वती रेस्टोरेंट तक वाहनों का प्रवेश वर्जित रहेगा।
महाविद्यालय छात्रसंघ चुनाव 2025 हेतु शहर हल्द्वानी का यातायात/डायवर्जन प्लान एवं पार्किंग व्यवस्था
नोट- यह डायवर्जन प्लान दिनांक 27.09.2024 को समय प्रातः 09:00 बजे से मतगणना समाप्ति तक प्रभावी रहेगा
Uttarakhand: Government: Report Card: उत्तराखंड राज्य के 25 साल पूरे होने पर रोजगार के आंकड़े युवाओं के लिए ऐतिहासिक संदेश लेकर आए हैं। महज़ चार साल के भीतर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सरकारी नौकरी के क्षेत्र में वह उपलब्धि हासिल की है, जो पिछले दो दशकों में भी संभव नहीं हो पाई। धामी सरकार के कार्यकाल में 26,025 युवाओं को नियुक्ति पत्र मिले, जबकि राज्य गठन के बाद 20 साल तक 9 मुख्यमंत्रियों की सरकारें मिलकर भी केवल 11,528 नौकरियां ही उपलब्ध करा सकीं।
सरकारी भर्तियों के लिहाज़ से धामी का कार्यकाल सबसे अहम साबित हुआ है। न सिर्फ नियुक्तियों की संख्या में रिकॉर्ड बना, बल्कि भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और भरोसेमंद व्यवस्था ने युवाओं का विश्वास भी जीता। समूह ‘ग’ में ही लगभग 16,000 नियुक्तियां की गईं, जबकि अधिकारियों के 10,000 पदों पर योग्य उम्मीदवार चयनित हुए। खास बात यह रही कि कई अभ्यर्थियों ने एक से अधिक परीक्षाएं पास कर नौकरी पाई।
धामी सरकार ने भविष्य को ध्यान में रखते हुए एडवांस जॉब कैलेंडर भी जारी कर दिया है। इसमें 10,000 से ज्यादा पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और अधिकांश विज्ञप्तियां जल्द जारी होंगी। लक्ष्य है कि ये परीक्षाएं भी इसी साल पूरी की जाएं।
20 साल बनाम 4 साल – बड़ा अंतर
आयोगवार भर्ती – धामी सरकार का रिकॉर्ड
अन्य सरकारों का प्रदर्शन (20 साल)
मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में नौकरियां
युवाओं की राय
आकाश जोशी (UKPSC चयनित): “जॉब कैलेंडर से तैयारी करना आसान हो गया है। अब इंतजार नहीं करना पड़ता।”
विकास पंवार (चयनित अभ्यर्थी): “पहली बार लगा कि भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष है। चार परीक्षाएं पास करने के बाद सफलता मिली।”
संदीप कुमार (समूह ग चयनित): “समारोह में मंच पर नियुक्ति पत्र पाना जीवन का अविस्मरणीय पल था। भरोसे का नया दौर शुरू हुआ है।”
Dehradun: JNU: Protest: यूकेएसएससी भर्ती परीक्षा पेपर लीक प्रकरण को लेकर उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के बैनर तले चल रहा आंदोलन अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। आरोप है कि इस आंदोलन में वामपंथी टूलकिट्स की सक्रियता बढ़ गई है, जिनके समर्थन में कांग्रेस भी खड़ी दिखाई दे रही है। आंदोलन के दौरान देहरादून परेड ग्राउंड में ऐसे भड़काऊ नारे लगे, जो पहले जेएनयू और जामिया जैसे कैंपसों में सुने जाते रहे हैं।
बेरोजगार संघ के नेतृत्व में शुरू हुआ यह आंदोलन बॉबी पंवार के नेतृत्व में उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा का रूप ले चुका है। कहा जा रहा है कि अब इसमें बाहरी वामपंथी संगठनों और लेफ्ट से जुड़े युवाओं की भी एंट्री हो चुकी है। सोशल मीडिया के जरिए भीड़ जुटाना, सरकार विरोधी नारेबाजी कराना और माहौल गरमाना इन टूलकिट्स की रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है।
चर्चा यह भी है कि इस आंदोलन को फंडिंग कहां से हो रही है और क्या इसमें बाहरी एजेंसियों की भूमिका है। बताया जा रहा है कि इनका एजेंडा बीजेपी शासित राज्यों की सरकारों को कमजोर करना और चुनाव से पहले कांग्रेस के पक्ष में वातावरण तैयार करना है।
पेपर लीक मामले में खालिद मलिक और उसकी बहन साबिया के नाम सामने आने के बाद यह मुद्दा और गरमा गया। बीजेपी ने इसे “नकल जिहाद” करार दिया है। वहीं, आरोप है कि आंदोलनकारियों में बड़ी संख्या में मुस्लिम युवक-युवतियां भी शामिल हैं। इससे टूलकिट्स की सक्रियता पर और सवाल खड़े हो गए हैं।
देवभूमि उत्तराखंड में सरकार पहले से ही लव जिहाद, लैंड जिहाद और अन्य मुद्दों पर सख्त रुख अपनाए हुए है। वहीं, आरएसएस अपने स्थापना शताब्दी वर्ष मना रहा है, जिसके खिलाफ वामपंथी संगठन सक्रिय बताए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यहां एक विचारधारा का टकराव साफ दिखाई दे रहा है, जिसमें कांग्रेस, वामपंथी संगठनों और कुछ धार्मिक संगठनों की मिलीभगत के आरोप लग रहे हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या खालिद मलिक और साबिया के पीछे और भी शक्तियां काम कर रही हैं।
धामी सरकार का दावा है कि पिछले चार वर्षों में 25,000 से अधिक युवाओं को पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के तहत नौकरियां दी गई हैं। विपक्ष पर आरोप है कि वह इस साख को चोट पहुँचाने के लिए टूलकिट्स के जरिए माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है।
फिलहाल देहरादून परेड ग्राउंड में लगे नारों और आंदोलन में शामिल अजनबी चेहरों को लेकर पुलिस और प्रशासन के सामने सतर्क रहने की चुनौती बढ़ गई है।
देहरादून:लगातार मिल रही शिकायतों और अनियमितताओं के खुलासे के बाद हल्द्वानी तहसील में बड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के संज्ञान में मामला आने के बाद जिलाधिकारी नैनीताल वंदना सिंह ने कार्रवाई करते हुए तहसीलदार मनीषा बिष्ट का तबादला कर दिया गया है। उनके खिलाफ विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि (Special Adverse Entry) भी अंकित की गई है।
सीएम धामी ने प्रशासनिक अधिकारियों से सख्त लहजे में सवाल किया था कि “ये कानून गो घर से तहसील कैसे चला रहा है?” जिसके बाद जिला प्रशासन हरकत में आया।
कुमायूं आयुक्त के निरीक्षण में हल्द्वानी तहसील में गंभीर अनियमितताएँ सामने आईं। रिपोर्ट शासन और जिला प्रशासन को भेजी गई, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई है।
तहसीलदार हल्द्वानी मनीषा बिष्ट का तबादला, सेवा अभिलेख में प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज।
सर्वे कानूनगो अशरफ अली को हल्द्वानी तहसील से हटाकर ऊधम सिंह नगर भेजा गया, निलंबन की संस्तुति भी भेजी गई।
रजिस्ट्रार कानूनगो भगवत बिष्ट का तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण।
जिलाधिकारी नैनीताल ने कहा कि तहसील हल्द्वानी में सामने आई अनियमितताओं की जांच जारी है और जांच पूरी होने पर अन्य दोषी कार्मिकों पर भी कड़ी कार्रवाई होगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “जब पब्लिक शिकायतें हम तक पहुंचती हैं तो हमें जांच पड़ताल करके कार्रवाई करनी होती है। हल्द्वानी तहसील एक कानूनगो के घर से चलने की शिकायत मिली, जांच कराई गई और लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई की गई। यह चेतावनी है कि जिला मुख्यालय व तहसीलों में व्यवस्थाएं नियमानुसार और सुचारू रूप से चलें, अन्यथा आगे और भी बड़ा एक्शन होगा।”