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Uttarakhand: Haldwani: ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए प्राचीन श्री रामलीला संचालन समिति ने इस वर्ष की रामलीला के लिए तैयारियां तेज़ कर दी हैं। समिति के पदाधिकारी विवेक कश्यप ने जानकारी दी कि 18 सितंबर को गणेश पूजन के साथ दिन की लीला का शुभारंभ होगा, जबकि 22 सितंबर से रात्रि लीला का भव्य मंचन शुरू किया जाएगा।
मीडिया प्रभारी भवानी शंकर नीरज ने बताया कि दिन की लीला के लिए भव्य व्यास मंच तैयार कर लिया गया है। साथ ही दर्शकों के मनोरंजन और परंपरागत माहौल को जीवंत बनाने के लिए आकर्षक आतिशबाजी की भी व्यवस्था की जा रही है।
समिति के वरिष्ठ सदस्य तनुज गुप्ता ने बताया कि 22 सितंबर को नगर में श्री राम विवाह का आयोजन प्राचीन श्री शिव सेवा समिति द्वारा किया जाएगा। वहीं, रात्रि लीला का मंचन श्री राधा रानी आदर्श रामलीला मंडल बरसाना, मथुरा के कलाकारों द्वारा किया जाएगा, जो अपनी अनूठी प्रस्तुति के लिए विख्यात हैं।
दिन की लीला के निर्देशक अमित जोशी ने बताया कि सभी पात्रों के लिए नई पोशाकें, मुकुट और अन्य आभूषणों की खरीदारी की जा रही है। पात्रों के चयन की प्रक्रिया भी संचालन समिति के वरिष्ठ सदस्यों की देखरेख में जारी है।
इसके साथ ही, रामलीला के विशेष आकर्षण माने जाने वाले पुतलों का निर्माण शंभू बाबा के निर्देशन में किया जा रहा है। इनमें स्वर्ण लंका, स्वर्ण हिरण, जटायू, रावण, मेघनाथ, कुंभकर्ण, ताड़का और खरदूषण जैसे पुतले शामिल हैं।
Uttarakhand: Dehradun: देहरादून पुलिस ने ऑपरेशन कालनेमि के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए दो बांग्लादेशी महिलाओं को गिरफ्तार किया है। दोनों महिलाएं बिना वैध दस्तावेजों के सीमा पार कर भारत में दाखिल हुई थीं और बीते छह माह से राजधानी में रह रही थीं। पुलिस की जांच में सामने आया कि इससे पहले वे कुछ समय तक दिल्ली में भी रह चुकी थीं।
गिरफ्तार महिलाओं की पहचान यासमीन, निवासी सिलहट और राशिदा बेगम, निवासी चटग्राम (बांग्लादेश) के रूप में हुई है। पुलिस ने उनके पास से बांग्लादेशी पहचान पत्र और परिवार रजिस्टर भी बरामद किया है। पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि वे अवैध तरीके से पश्चिम बंगाल की सीमा पार कर भारत आई थीं।
पटेलनगर कोतवाली क्षेत्र में एलआईयू और एसओजी के साथ संयुक्त अभियान के दौरान यह गिरफ्तारी हुई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने बताया कि ऑपरेशन कालनेमि के तहत लगातार ऐसे लोगों की तलाश की जा रही है, जो फर्जी पहचान या बहकावे के जरिए लोगों को ठगने की कोशिश करते हैं।
उन्होंने जानकारी दी कि इससे पहले भी देहरादून में पांच बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा जा चुका है। अब तक कुल सात लोगों पर कार्रवाई हो चुकी है। पुलिस ने साफ किया कि गिरफ्तार दोनों महिलाओं के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी और उन्हें वापस भेजने (डिपोर्ट) की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
CM Dhami: Uttarakhand: Survey: आपदा प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के कामकाज पर हुए एक ऑनलाइन सर्वे में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सबसे अधिक समर्थन हासिल किया है। नवभारत टाइम्स द्वारा आयोजित इस सर्वे में जनता से सवाल पूछा गया था – “आपदा प्रभावित राज्यों में सबसे बेहतर काम करने वाले मुख्यमंत्री कौन हैं?”
सर्वे में चार नेताओं के नाम शामिल किए गए थे – उमर अब्दुल्ला, सुखविंदर सिंह सुक्खू, पुष्कर सिंह धामी और भगवंत मान। नतीजों में मुख्यमंत्री धामी को जबरदस्त बढ़त मिली। उन्हें 78.5% वोट मिले, जबकि जम्मू-कश्मीर के उमर अब्दुल्ला को 20.4%, हिमाचल प्रदेश के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू को 0.6% और पंजाब के सीएम भगवंत मान को 0.5% मत प्राप्त हुए।
जनता का यह रुझान साफ़ दर्शाता है कि आपदा के समय धामी ने त्वरित राहत और बचाव कार्यों को जिस कुशलता से अंजाम दिया, पुनर्वास योजनाओं को ज़मीन पर उतारा और प्रभावित क्षेत्रों का लगातार दौरा कर लोगों से संवाद बनाए रखा, उसने उन्हें अन्य मुख्यमंत्रियों से अलग पहचान दिलाई।
सिर्फ नवभारत टाइम्स का सर्वे ही नहीं, बल्कि टाइम्स ऑफ इंडिया की WhatsApp कम्युनिटी पर भी लोगों ने धामी को “पहली पसंद” बताया। यहाँ भी यूज़र्स ने उनकी नेतृत्व क्षमता, संवेदनशीलता और तेज़ निर्णय लेने की शैली की सराहना की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नतीजे इस बात का प्रमाण हैं कि आपदा जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में मज़बूत और संवेदनशील नेतृत्व ही जनता का विश्वास जीत पाता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की बढ़ती लोकप्रियता उनके त्वरित फैसलों, प्रशासनिक सक्रियता और ज़मीनी जुड़ाव को दर्शाती है।
Uttarakhand: Haridwar: अपर रोड स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय संख्या-34 में शनिवार को उस समय बड़ा हादसा टल गया जब पुराने और जर्जर हो चुके भवन का एक हिस्सा लगातार बारिश के चलते अचानक गिर पड़ा। राहत की बात यह रही कि घटना के दौरान स्कूल में बच्चे मौजूद नहीं थे।
प्रशासन ने एहतियात बरतते हुए पहले ही लगभग 120 छात्रों को पास की एक सुरक्षित इमारत में स्थानांतरित कर दिया था। अधिकारियों का कहना है कि यदि यह दुर्घटना कक्षा के समय घटित होती तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी।
ढही हुई इमारत का स्टोर रूम पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है, जहां शिक्षण सामग्री और अन्य आवश्यक सामान रखा था। फिलहाल नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक टीम और शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और मलबा हटाने के साथ भवन गिरने की जांच शुरू कर दी। जिलाधिकारी ने जिले के सभी सरकारी स्कूल भवनों की स्थिति का मूल्यांकन कराने के निर्देश दिए हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि इस इमारत की हालत लंबे समय से खराब थी, लेकिन समय पर मरम्मत नहीं होने के कारण यह हादसा हुआ। उन्होंने मांग की है कि जिले के सभी शैक्षणिक संस्थानों का सर्वे कराकर खराब स्थिति वाले भवनों की मरम्मत या पुनर्निर्माण जल्द से जल्द कराया जाए।
हालांकि इस घटना ने शिक्षा संस्थानों की आधारभूत संरचनाओं की अनदेखी को उजागर कर दिया है, लेकिन प्रशासन की तत्परता से बच्चों की जान बचने पर अभिभावकों ने राहत की सांस ली है।
Uttarakhand: Haldwani: हल्द्वानी में 12 साल पुराने एक मामले में आखिरकार पीड़िता को न्याय मिल गया है। वर्ष 2013 में दुर्गा सिटी सेंटर स्थित मचान रेस्टोरेंट में भोजन करने गई धीरज साहनी को पानी की जगह एसिटिक एसिड परोसा गया था। इस लापरवाही से उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। अब न्यायिक मजिस्ट्रेट आदर्श त्रिपाठी की अदालत ने रेस्टोरेंट संचालक अखिलेश सेमवाल को दोषी करार देते हुए दो साल की सजा सुनाई है। साथ ही पीड़िता को एक लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश भी दिया गया है।
मामला 19 दिसंबर 2013 की रात का है। धीरज साहनी अपने परिवार के साथ रेस्टोरेंट में खाना खाने गई थीं। खाने के दौरान जो पानी की बोतल सर्व की गई, उसे पीते ही उनकी तबीयत खराब हो गई। जांच में सामने आया कि बोतल में पानी की जगह एसिटिक एसिड भरा था, जिससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ा।
इस मामले की जांच उप निरीक्षक राजेश कुमार यादव ने की। वहीं, अदालत में पैरवी सहायक अभियोजन अधिकारी शेफाली शर्मा ने संभाली। ट्रायल के दौरान कुल 14 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। सभी तथ्यों और साक्ष्यों पर गौर करने के बाद अदालत ने संचालक को दोषी मानते हुए फैसला सुनाया।
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आया यह निर्णय न केवल पीड़िता के लिए राहत भरा है, बल्कि रेस्तरां संचालकों और उपभोक्ता सुरक्षा के लिए भी एक अहम संदेश देता है।
Uttarakhand: Maneka Gandhi: रुड़की के खंजरपुर गांव में अवैध रूप से चल रहे सर्प विष संग्रहण केंद्र का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस प्रकरण पर बीजेपी सांसद और पीपल फॉर एनिमल्स संस्था की संस्थापक मेनका गांधी ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और एडीजी विजिलेंस को पत्र भेजते हुए वन विभाग की भूमिका पर नाराज़गी जताई है।
मेनका गांधी ने पत्र में हरिद्वार वन प्रभाग के डीएफओ और एसडीओ को तत्काल निलंबित करने के साथ ही विभाग से हटाने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की अनुमति दिसंबर 2023 में समाप्त हो जाने के बाद भी इसे चलने दिया गया और शिकायतों के बावजूद अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की।
इससे पहले 10 सितंबर को वन विभाग की टीम ने छापा मारकर 70 कोबरा और 16 रसेल वाइपर बरामद किए थे। बताया गया कि केंद्र संचालक विष और अन्य अभिलेखों के साथ मौके से फरार हो गया। मेनका गांधी ने अपने पत्र में इसे साधारण लापरवाही नहीं बल्कि भ्रष्टाचार का गंभीर उदाहरण करार दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी गड़बड़ी संभव नहीं है। साथ ही डीएफओ की संपत्ति की जांच कराए जाने की भी मांग की है।
इस पूरे मामले पर शासन ने प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) से विस्तृत आख्या तलब की है। अब देखना होगा कि वन विभाग और शासन स्तर पर इस संवेदनशील प्रकरण में आगे क्या कार्रवाई की जाती है।
Uttarakhand: राज्य में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अब बिना प्रक्रिया पूरी किए सीधे नहीं हो सकेगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शहरी विकास विभाग ने मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी कर दी है। इसके अनुसार, किसी भी अतिक्रमण को ध्वस्त करने से पहले नोटिस देना, सुनवाई करना और पूरी जानकारी पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य होगा।
दरअसल, बीते वर्षों में अतिक्रमण हटाने को लेकर कई मामले सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे थे। इस पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने 13 नवंबर 2024 को दिशा-निर्देश जारी किए थे। नए नियमों के मुताबिक, अतिक्रमण हटाने से पहले संबंधित व्यक्ति को 15 दिन का नोटिस भेजना होगा। नोटिस रजिस्टर्ड डाक से भेजने के साथ ही संपत्ति पर चस्पा करना और जिलाधिकारी कार्यालय को सूचित करना जरूरी होगा। जिलाधिकारी स्तर पर एक नोडल अधिकारी भी नामित किया जाएगा।
तीन माह के भीतर एक पोर्टल तैयार किया जाएगा, जिसमें सभी कार्रवाई की जानकारी दर्ज होगी। अपील का अवसर मिलने पर प्रभावित व्यक्ति को सुनवाई का मौका दिया जाएगा। यदि ध्वस्तीकरण का आदेश पारित होता है, तो कब्जाधारक को 15 दिन का समय खुद अतिक्रमण हटाने के लिए मिलेगा। यह प्रावधान न्यायालय में लंबित मामलों या जिन पर स्टे ऑर्डर लागू है, उन पर लागू नहीं होगा।
अधिकारी होंगे जिम्मेदार
ध्वस्तीकरण से पहले विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिस पर दो पंचों के हस्ताक्षर आवश्यक होंगे। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जाएगी और मौके पर मौजूद अधिकारियों व कर्मचारियों का विवरण दर्ज होगा। महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी है कि यदि कार्रवाई गलत पाई जाती है या उस पर पहले से न्यायालय का स्टे ऑर्डर मौजूद होता है, तो जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होगी। ऐसे मामलों में अधिकारी को निजी स्तर पर मुआवजा और पुनर्निर्माण का खर्च उठाना पड़ेगा।
रुड़की रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार शाम यात्रियों को अचानक अफरातफरी का सामना करना पड़ा। दरअसल, ट्रेन संख्या 15211 जननायक एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय पर स्टेशन से बिना रुके आगे निकल गई, जबकि मोबाइल एप “Where is my Train” पर इसका ठहराव रुड़की में दिख रहा था।
यात्रियों को उम्मीद थी कि ट्रेन प्लेटफार्म नंबर 2 पर रुकेगी, लेकिन जब वह बीच की पटरी से सीधे निकल गई तो सभी हैरान रह गए। इसी दौरान, स्टेशन से कुछ दूरी पर किसी ने चेन पुलिंग कर दी, जिसके बाद गाड़ी अचानक रुक गई। यह देखते ही प्लेटफार्म पर मौजूद लोग ट्रेन की ओर दौड़ पड़े। महिलाएं और बच्चे भी भीड़ में शामिल हो गए, जिससे भगदड़ जैसा माहौल बन गया।
इस अफरातफरी में कई यात्री गिर पड़े, जिनमें एक महिला और एक बच्चा मामूली रूप से घायल हुए। सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF) मौके पर पहुंचा और भीड़ को नियंत्रित किया। प्राथमिक उपचार के बाद घायलों को घर भेज दिया गया।
सहारनपुर से रुड़की रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि रेलवे प्रशासन को पहले से पता था कि जननायक एक्सप्रेस का यहां ठहराव नहीं है। इसके बावजूद स्टेशन पर कोई सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया। इससे लोग गलतफहमी में ट्रेन के रुकने का इंतजार करते रहे। यात्रियों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। पहले भी ऐसे हालात बन चुके हैं, लेकिन स्टेशन प्रबंधन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
यात्रियों ने मांग की है कि रेलवे ऐप पर दी जा रही जानकारी को अपडेट किया जाए और यात्रियों की सुविधा के लिए स्टेशन पर स्पष्ट सूचना बोर्ड लगाए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी अव्यवस्था और अफरातफरी की स्थिति न बन पाए।
Uttarakhand: Uttarakhand TET Exam: उत्तराखंड में शिक्षक बनने का सपना देख रहे अभ्यर्थियों के लिए एक अहम अपडेट सामने आया है। राज्य में आगामी 27 सितंबर को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) आयोजित की जाएगी। इसके लिए प्रवेश पत्र ऑनलाइन जारी कर दिए गए हैं। अभ्यर्थी 13 सितंबर से विभागीय वेबसाइट www.ubse.uk.gov.in पर जाकर अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं।
उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर की ओर से आयोजित की जाने वाली इस परीक्षा में अभ्यर्थियों को दो स्तरों पर शामिल होना होगा। टीईटी प्रथम परीक्षा प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5) में शिक्षक बनने के लिए अनिवार्य है, जबकि टीईटी द्वितीय परीक्षा जूनियर हाईस्कूल (कक्षा 6 से 8) के लिए आवश्यक है।
इस परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया 10 जुलाई से 5 अगस्त तक ऑनलाइन पूरी की गई थी। आवेदन पूर्ण होने के बाद परिषद ने सभी अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र तैयार कर पोर्टल पर उपलब्ध करा दिए हैं। परीक्षार्थी अपने पंजीकरण नंबर और पासवर्ड या फिर नाम और जन्मतिथि का उपयोग करके एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे।
शोध अधिकारी कृपा शंकर पांडेय के अनुसार, परीक्षा का आयोजन 29 शहरों के 94 परीक्षा केंद्रों पर किया जाएगा। इस बार टीईटी प्रथम में 14,596 और टीईटी द्वितीय में 24,517 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया है। परिषद ने सभी अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे समय से एडमिट कार्ड डाउनलोड करें और परीक्षा केंद्र पर समय से पहुंचें।
Uttarakhand: Police Recruitment Update: उत्तराखंड सरकार ने पुलिस भर्ती प्रक्रिया को लेकर बड़ा कदम उठाया है। अब तक अलग-अलग विभागों में दरोगा और कांस्टेबल के पदों के लिए अलग-अलग परीक्षाएं आयोजित होती थीं, लेकिन नई व्यवस्था के तहत इन्हें एकीकृत कर दिया गया है। राज्य सरकार की ओर से गुरुवार को अधिसूचना जारी करते हुए इस नियमावली को लागू कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर तैयार किए गए इस मॉडल के अनुसार, अब उपनिरीक्षक स्तर की सभी भर्तियां एक ही परीक्षा के माध्यम से होंगी। इसमें पुलिस उपनिरीक्षक, अभिसूचना विभाग, प्लाटून कमांडर, पीएसी और आईआरबी में गुल्मनायक, अग्निशमन द्वितीय अधिकारी, उप कारापाल, होमगार्ड विभाग में प्लाटून कमांडर, वन दरोगा, आबकारी उपनिरीक्षक और युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल अधिकारी जैसे पद शामिल होंगे।
इसी तरह, कांस्टेबल स्तर की भर्तियों में भी एकरूपता लाई गई है। अब पुलिस कांस्टेबल, पीएसी व आईआरबी कांस्टेबल, अग्निशमन सिपाही, बंदीरक्षक, वन आरक्षी, आबकारी सिपाही, प्रवर्तन सिपाही और सचिवालय-विधानसभा रक्षक के पदों पर नियुक्ति के लिए एक ही परीक्षा आयोजित होगी।
सरकार ने न सिर्फ भर्ती प्रक्रिया को सरल बनाया है बल्कि आयु सीमा में भी बदलाव किए हैं। दरोगा भर्ती की उम्र सीमा, जो पहले 18 से 28 वर्ष थी, अब बढ़ाकर 21 से 35 वर्ष कर दी गई है। वहीं, कांस्टेबल पदों के लिए पूर्व आयु सीमा 18 से 22 वर्ष थी, जिसे संशोधित कर 18 से 25 वर्ष कर दिया गया है।
इस नई भर्ती नियमावली को युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर माना जा रहा है, क्योंकि अब कम परीक्षाओं के जरिए अधिक पदों पर आवेदन संभव होगा। साथ ही, आयु सीमा में वृद्धि से अधिक उम्मीदवारों को प्रतियोगिता में शामिल होने का मौका मिलेगा।