देवभूमि के लिए गर्व की बात, गरुड़ निवासी जगदीश दुबे को सेना मेडल

ArmyMedal : HavaldarJagdishDubey : ParaSpecialForces : Courage : Garhwal : MilitaryHonour : UttarakhandPride : गरुड़ विकासखंड के सिल्ली गांव निवासी हवलदार जगदीश दुबे पुत्र नरोत्तम दुबे ने अपने अदम्य साहस और पराक्रम से न केवल क्षेत्र बल्कि पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है। पहली बटालियन पैराशूट रेजिमेंट (स्पेशल फोर्स) में तैनात हवलदार दुबे को उनके उत्कृष्ट शौर्य के लिए सेना मेडल से सम्मानित किया गया।

जानकारी के अनुसार, 24 जून 2024 को जम्मू-कश्मीर में चलाए जा रहे एक सर्च ऑपरेशन के दौरान हवलदार दुबे ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए एक आतंकवादी को ढेर किया। उनकी इस बहादुरी ने न केवल ऑपरेशन को सफल बनाया….बल्कि सेना में उनके कार्यों की भी सराहना हुई।

सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने हवलदार दुबे को मेडल पहनाकर सम्मानित किया। इस मौके पर उनके साथ परिजन और गांववासी भी मौजूद रहे। हवलदार दुबे के इस सम्मान से गरुड़ और नैनीताल जिले का मान बढ़ा है और स्थानीय लोगों में गर्व का माहौल है।

जरूरी सूचना, अब केवल उत्तराखंड के स्थाई निवासियों को मिलेगा होम स्टे योजना का लाभ

HomestayScheme : UttarakhandTourism : PermanentResidents : BedAndBreakfast : UTDB : CabinetApproval : TourismPolicy : उत्तराखंड कैबिनेट ने पर्यटन व्यवसाय को व्यवस्थित करने और राज्यवासियों के हित में होम स्टे योजना में बड़ा बदलाव किया है। अब इस योजना का लाभ केवल राज्य के स्थायी निवासियों को ही मिलेगा। अन्य राज्यों के लोग जो 250 वर्ग मीटर भूमि खरीदकर ग्रामीण या अन्य क्षेत्रों में होम स्टे संचालित कर रहे हैं, वे अब इस योजना का लाभ नहीं ले सकेंगे। उन्हें बेड एंड ब्रेकफास्ट योजना में शामिल किया जाएगा।

कैबिनेट ने इसके लिए उत्तराखंड पर्यटन, यात्रा व्यवसाय, होम स्टे और बेड एंड ब्रेकफास्ट पंजीकरण नियमावली-2026 को लागू करने का निर्णय लिया। नई नियमावली में स्पष्ट किया गया है कि होम स्टे संचालक का राज्य का मूल या स्थायी निवासी होना आवश्यक होगा और संचालक अनिवार्य रूप से होम स्टे में ही रहेगा।

स्थायी निवासियों को जीएसटी, बिजली और पानी की दरों में विशेष छूट मिलेगी। वहीं अन्य राज्यों के लोग अब केवल बेड एंड ब्रेकफास्ट योजना में पंजीकृत होंगे और उन्हें किसी प्रकार की रियायत नहीं दी जाएगी। शहरी क्षेत्रों में बेड एंड ब्रेकफास्ट संचालित करने के लिए संबंधित सोसायटी से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

पर्यटन गतिविधियों के पंजीकरण के लिए उत्तराखंड में पहले अलग-अलग नियमावलियां लागू थीं। वर्ष 2014 में पर्यटन और यात्रा व्यवसाय के लिए पंजीकरण नियमावली लाई गई, 2016 में इसमें संशोधन हुआ और होम स्टे के लिए 2015 में अलग नियमावली लागू की गई थी। अब इन सभी नियमावलियों को एक छतरी के नीचे लाया गया है और नए प्रविधान भी इसमें जोड़े गए हैं।

नई नियमावली का उद्देश्य स्थानीय निवासियों को योजना का पूरा लाभ देना और पर्यटन व्यवसाय को पारदर्शी व व्यवस्थित बनाना बताया गया है।

कोहरे ने बढ़ाई रेल यात्रियों की परेशानी, रानीखेत एक्सप्रेस ट्रेन तीन घंटे हुई लेट

RanikhetExpress : Kathgodam : TrainDelay : Fog : UttarakhandRailways : PassengerUpdate : WeatherImpact : Haldwani : TrainService : गुरुवार को मैदानी क्षेत्रों में कोहरे के कारण रानीखेत एक्सप्रेस की गति धीमी हो गई और ट्रेन काठगोदाम स्टेशन निर्धारित समय से तीन घंटे लेट पहुंची। काठगोदाम पहुंचने का तय समय सुबह 5:05 था…लेकिन गुरुवार को ट्रेन सुबह करीब 8:00 बजे ही स्टेशन पर पहुंची।

इस देरी से यात्रियों को घर पहुँचने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्टेशन अधीक्षक डीएस बोरा ने बताया कि रात के समय घना कोहरा होने के कारण ट्रेन की रफ्तार धीमी हो जाती है, जिससे लेट होना सामान्य स्थिति बन जाती है।

उन्होंने यह भी कहा कि काठगोदाम से ट्रेन तय समय पर ही अगले गंतव्य के लिए रवाना की जाएगी और यात्रियों को जल्द ही अपनी मंजिल पर पहुंचाया जाएगा।

हल्द्वानी: रोडवेज की कमाई पर असर, कंडक्टरों की कमी के चलते कई बसें हुई निरस्त

Haldwani : Roadways : BusOperators : TransportShortage : UTRoadways : PassengerServices : BusDepot : Kathgodam : Recruitment : PublicTranspor : हल्द्वानी और काठगोदाम रोडवेज डिपो में परिचालकों की कमी के कारण रोजाना संचालन में कई बार परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लंबे समय से खाली पड़े पदों के कारण मौजूदा परिचालकों को डबल ड्यूटी करनी पड़ती है…और यात्री सीजन में भीड़ बढ़ने पर कई बसें निरस्त भी हो जाती हैं। नए परिचालकों की भर्ती होने तक यही स्थिति बनी रहेगी। केवल कोर्ट से नियुक्त या आउटसोर्स परिचालकों के माध्यम से ही परिचालकों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।

काठगोदाम और हल्द्वानी डिपो से दिल्ली, जयपुर, लुधियाना, जालंधर, चंडीगढ़, गुरुग्राम, फरीदाबाद, कानपुर, आगरा, मेरठ जैसे बड़े शहरों के साथ-साथ टनकपुर, मुरादाबाद और बरेली जैसे लोकल मार्गों पर भी रोजाना बसें संचालित होती हैं। इसके अलावा पर्वतीय क्षेत्र में भी रोडवेज बस सेवाएं उपलब्ध हैं।

काठगोदाम डिपो के एआरएम गणेश पंत ने कहा कि उनके डिपो में रोडवेज और अनुबंधित बसों को मिलाकर कुल 101 बसें हैं, लेकिन परिचालकों की संख्या में 37 की कमी है। वहीं हल्द्वानी डिपो के एआरएम संजय पांडे ने बताया कि 93 बसों के बेड़े के बावजूद लंबे समय से 29 परिचालकों की भर्ती नहीं हो सकी है। लंबी दूरी वाले रूटों पर परिचालकों को एक ड्यूटी के बाद रेस्ट दिया जाता है, लेकिन कमी के चलते परिचालकों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

परिवहन निगम अधिकारियों का कहना है कि नए परिचालकों की भर्ती और कोर्ट से नियुक्तियों के बाद ही डिपो में संचालन सुचारू रूप से चल पाएगा और यात्रियों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।

हल्द्वानी में खुले में मांस और खाद्य सामग्री बेचना पर महंगा, कोर्ट ने लगाया 2.35 लाख रुपये का जुर्माना

Nainital : FoodSafety : FSSAI #ADM : Penalty : Haldwani : UnlicensedFoodSale : PublicHealth : MeatSale : Hygiene : नैनीताल जिले में खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम (FSSAI) के उल्लंघन पर न्यायनिर्णयन अधिकारी एडीएम विवेक राय ने सख्त कार्रवाई करते हुए 11 कारोबारियों पर कुल 2 लाख 35 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई मुख्य रूप से बिना लाइसेंस और खुले में मांस तथा अन्य खाद्य सामग्री बेचने के मामलों में की गई। सहायक अभियोजन अधिकारी अंजनी कुमार तिवारी और बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं की बहस के बाद यह निर्णय पारित किया गया।

खैरना चौराहा, मेन बाजार खैरना में दीप जोशी पर खुले में खाद्य सामग्री बेचने के कारण 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। गांधी नगर, वार्ड नंबर 1 हल्द्वानी के प्रसादी लाल पर बिना लाइसेंस मुर्गे का मांस बेचने के लिए 20 हजार रुपये का जुर्माना किया गया। वहीं सातताल, मेहरागांव में नोएल फिलिप्स और मैनेजर सागर पांज पर भोजन में गंदगी पाए जाने के कारण 20-20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। कमल नाथ हाई कोर्ट एशडेल सुखाताल में खुले में खाद्य सामग्री बेचने पर 20 हजार रुपये का दंड झेलेंगे।

महेश कुमार रस्तोगी, रस्तोगी जलपाल गृह टी स्टाल, भवानीगंज, रामनगर पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। बिना लाइसेंस मुर्गे का मांस बेचने पर दयाकिशन, वार्ड नंबर 17, कंजापड़ाव, रामनगर को 20 हजार रुपये का जुर्माना भुगतना होगा। मछली का मांस बिना लाइसेंस बेचने पर मोहम्मद शमी और मोहम्मद जफर को 20-20 हजार रुपये का जुर्माना किया गया।

इसके अलावा सकलैनी चिकन एंड मटन शॉप, मेन बाजार, ज्योलीकोट के मुनीर कुरैशी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। अर्चित सती, तल्ला गोरखपुर के मैं सती मिष्ठान भंडार, कालाढूंगी रोड, हल्द्वानी को 25 हजार रुपये का जुर्माना भुगतना होगा। बासी या खराब पैटीज़ बेचने पर तेज प्रकाश, मै. न्यू हजारा एंड कंपनी, मंगलपड़ाव, बरेली रोड, हल्द्वानी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। गौरव गैड़, मैनेजर, मै. आइलव चाप, निकट कृष्णा हास्पिटल, सुभाष नगर, गोविंदपुरा पर प्रतिष्ठान में बासी सामग्री के प्रयोग के लिए दंडित किया गया।

एडीएम विवेक राय ने कहा कि खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन न करना सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है और भविष्य में ऐसे उल्लंघन करने वालों पर और भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

हल्द्वानी नगर निगम में पुराने प्रमाणपत्र ऑनलाइन कराना हुआ आसान, लेकिन लिमिट का रखना होगा ध्यान !

Haldwani : BirthCertificate : DeathCertificate : DigitalRecords : OnlineRegistration : MunicipalCorporation : CRSPortal : PublicService : Transparency : RegistrarApproval : हल्द्वानी नगर निगम ने 2019 तक जारी जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों को डिजिटल यानी ऑनलाइन करने की प्रक्रिया के लिए अब सीमा तय कर दी है। अब निगम महीने में अधिकतम 100 प्रमाणपत्र ही ऑनलाइन दर्ज कर सकेगा। हालांकि नागरिक चाहें तो यह प्रक्रिया स्वयं भी पूरा कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन रजिस्टार के पास पहुंचने के बाद जांच और अप्रूवल प्राप्त किया जा सकता है।

नगर निगम के अनुसार 2019 तक जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र मैनुअल तरीके से बनाए जाते थे। रिकार्ड को सुरक्षित रखने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अब सारा काम ऑनलाइन किया जा रहा है। इसी कारण रोजाना लगभग 60 से 70 लोग पुराने प्रमाणपत्र को डिजिटल कराने निगम कार्यालय आते हैं।

नगर आयुक्त पारितोष वर्मा ने कहा कि सीआरएस पोर्टल (Civil Registration System Portal) ने निगम की सीमा तय की है। इसलिए अब महीने में 100 से अधिक प्रमाणपत्र ऑनलाइन नहीं किए जा सकेंगे।

आवेदन प्रक्रिया इस प्रकार है:

गूगल पर CRS पोर्टल खोलें।

पोर्टल पर दिए Login विकल्प में जाएं और General Public पर क्लिक करें।

मोबाइल नंबर दर्ज करें और आवश्यक हस्ताक्षर अपलोड करें।

आवेदन रजिस्टार के पास पहुंच जाएगा।

रजिस्टार ऑनलाइन फाइल की जांच कर अनुमोदन (Approval) देंगे।

नगर आयुक्त ने यह भी कहा कि इस व्यवस्था से लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा…और इच्छुक नागरिक स्वयं भी ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को कहा: गैर कानूनी पार्किंग पर अंकुश के लिए SOP पेश करें

Nainital News : E-Rickshaw : High Court : SOP : Transport Secretary : Commissioner : हाई कोर्ट ने दून ई-रिक्शा एसोसिएशन की याचिका पर राज्य सरकार को गैर कानूनी पार्किंग को रोकने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने परिवहन सचिव और आयुक्त से कहा है कि वे पूर्व के आदेश का सही पालन हो रहा है या नहीं इसके बारे में शपथपत्र पेश करें। यदि ऐसा नहीं किया गया….तो कोर्ट अवमानना की कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं छोड़ेगी। अगली सुनवाई अब 16 फरवरी को होगी।

याचिका में बताया गया कि 2019 में पुलिस ने देहरादून की मुख्य सड़कों पर सुबह आठ बजे से शाम आठ बजे तक ई-रिक्शा संचालन पर रोक लगा दी थी। इससे ई-रिक्शा चालकों और आटो रिक्शा चालकों के बीच विवाद हुआ। याचिकाकर्ता का कहना था कि समाधान के बजाय पुलिस केवल ई-रिक्शा चालकों का उत्पीड़न कर रही है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकारी एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित पार्किंग के अलावा किसी सड़क या सार्वजनिक स्थान पर वाहन पार्क करने की अनुमति न दी जाए। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि 25 मार्च को राज्य सरकार से पूछा गया था कि स्थानीय प्रशासन की ओर से तय पार्किंग के अलावा सड़क किनारे या सार्वजनिक स्थान पर वाहन पार्क नहीं करने के आदेश का पालन किया जा रहा है या नहीं।

इसके बाद 2 अप्रैल 2025 को परिवहन आयुक्त को व्यक्तिगत शपथपत्र देने के निर्देश भी दिए गए थे…लेकिन अब तक कोई शपथपत्र पेश नहीं किया गया। हाई कोर्ट ने अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली को इस मामले में न्याय मित्र के रूप में नियुक्त करने का भी निर्देश दिया है।

हल्द्वानी में चोरी का खुलासा, अम्मा के बक्शे के साथ पुलिस ने चोर को पकड़ा!

Haldwani News: Theft: Case: हल्द्वानी में गुरुवार को बद्रीपुरा क्षेत्र में हुई चोरी का खुलासा पुलिस ने कर दिया है। चोरी की घटना का सीसीटीवी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। घटना IG आवास के निकट हुई जिस वजह से मामला काफी सुर्खियों में रहा। हालांकि पुलिस ने 24 घंटे के भीतर चोर को पकड़ लिया। 

इस मामले में पुलिस को वार्ड नंबर 11 निवासी दया नेगी ने तहरीर दी और बताया कि गुरुवार दोपहर को एक व्यक्ति उनके आवास में किराए में कैमरा लेने हेतु पहुंचा। दोनों के बीच ₹8000 प्रति माह में किराया तय किया गया। बुजुर्ग महिला को व्यक्ति ने अपना नाम दीपक सिंह बिष्ट निवासी दन्या बताया था।

आरोपी ने महिला से पीछे का गेट खोल देने की बात कही ताकि वह सामान कमरे में शिफ्ट कर सके। महिला अपने काम में व्यस्त हुई तो आरोपी ने घर के दो मंजिले के कमरे से एक लोहे का बक्सा लेकर भाग गया,जिसमें सोने, चांदी, घर की रजिस्ट्री और नगदी रखी थी। 

पुलिस ने मामले की जांच तुरंत शुरू कि और मुखबिर की सूचना पर बरेली रोड मेडिकल कॉलेज के पास आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े जाने के बाद अभियुक्त की पहचान वीरेंद्र सिंह बिष्ट निवासी सोमेश्वर के रूप में हुआ है । 

देहरादून में 827 शस्त्र लाइसेंस निरस्त, डीएम बंसल ने लिया बड़ा एक्शन

DehradunDM : SafetyFirst : GunRules : UttarakhandNews : LicenseRevoked : PublicSafety : WeaponCompliance : ReapplyProcess : देहरादून जिला प्रशासन ने सुरक्षा और नियमों के उल्लंघन को रोकने के लिए बड़ी कार्रवाई की है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने 827 शस्त्र लाइसेंसधारकों के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए। यह कदम राज्य सरकार के सुरक्षा दिशा-निर्देशों और हथियारों के रख-रखाव नियमों की अनदेखी के कारण उठाया गया है।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि 54 लाइसेंस ऐसे रद्द किए गए जिनके पास दो से अधिक शस्त्र थे। वहीं 773 लाइसेंस ऐसे रद्द किए गए जिन्होंने एनडीएएल-एएलआईएस पोर्टल पर यूनीक आइडेंटिफ़ायर नंबर (UIN) जनरेट नहीं किया था।

जिला प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई उन लोगों के खिलाफ की गई है जिन्होंने निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया। इनमें ऐसे मामले भी शामिल हैं जहां लाइसेंस समय पर नवीनीकरण नहीं हुए थे या दस्तावेज़ अधूरे पाए गए। DM सविन बंसल ने कहा सुरक्षा किसी भी व्यक्ति और समाज के लिए प्राथमिकता होनी चाहिए। हथियारों के अनुचित उपयोग और नियमों की अनदेखी गंभीर परिणाम ला सकती है।

जिन लोगों के लाइसेंस रद्द किए गए हैं उन्हें दोबारा आवेदन करने का अवसर दिया जाएगा। नए आवेदन में सभी दस्तावेजों की जांच, यूनीक आइडेंटिफ़ायर नंबर (UIN) का निर्माण और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि भविष्य में किसी भी लाइसेंसधारी द्वारा नियमों का उल्लंघन नहीं होने दिया जाएगा।

उत्तराखंड के युवाओं की नौकरी, नैनीताल हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

UttarakhandHighCourt : GovernmentJobs : YouthEmployment : RecruitmentDelay : VacantPosts : CourtOrder : RegularJobs : EmploymentOpportunity : StateGovernment : JobAlert : उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सभी विभागों में स्वीकृत रिक्त पदों का पूरा डेटा हलफनामे के जरिए पेश करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने नियमित भर्ती प्रक्रिया में देरी और संविदा/अस्थायी नियुक्तियों पर गंभीर चिंता जताई। इस आदेश के बाद माना जा रहा है कि आने वाले समय में वर्षों से सरकारी नौकरी का इंतजार कर रहे युवाओं के लिए रास्ता खुलेगा।

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि पूरे प्रदेश में युवा सरकारी नौकरी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन कई लोग इस इंतजार में ओवर एज हो रहे हैं। इसके बावजूद सरकार नियमित भर्ती के बजाय आउटसोर्स और अस्थायी माध्यमों से काम चला रही है। जस्टिस राकेश थपलियाल ने इस प्रथा को शोषणकारी और तर्कहीन करार दिया और सवाल उठाया कि खाली पदों पर भर्ती क्यों नहीं हो रही है।

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रत्येक विभाग में स्वीकृत और स्थायी रिक्तियां मौजूद हैं…लेकिन संबंधित अधिकारी नियमित भर्ती प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ा रहे हैं। इसके बजाय इन पदों को अनुबंध दैनिक वेतनभोगी और तदर्थ कर्मचारियों के माध्यम से भरा जा रहा है…जिसे गंभीर चिंता का विषय बताया गया।

कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि वे सभी विभागों से स्वीकृत रिक्तियों का पूरा विवरण एकत्र कर हलफनामा दाखिल करें। इसके साथ यह भी स्पष्ट करें कि स्थायी और नियमित पदों के उपलब्ध होने के बावजूद भर्ती क्यों नहीं की जा रही है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि श्रेणी-चार के पदों को डेड कैडर क्यों घोषित किया गया।

अगली सुनवाई 16 फरवरी को होगी। यदि सरकार डेटा पेश करती है और कोर्ट संतुष्ट नहीं होता…तो बड़े पैमाने पर भर्ती अभियान शुरू करने का आदेश दिया जा सकता है। इससे युवा वर्ग को सरकारी नौकरी पाने का अच्छा मौका मिल सकता है।