उत्तराखंड में विवाह पंजीकरण में देना होगा शुल्क, लेट होने पर जुर्माना भी लगेगा

Uttarakhand Marriage Registration : UCC Rules : Late Fee Fine : Marriage Certificate Charges : Government Order : उत्तराखंड में विवाह पंजीकरण को लेकर बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। सरकार ने पहले दी गई शुल्क छूट और समय सीमा बढ़ाने की राहत को अब समाप्त कर दिया है। यानी अब विवाह पंजीकरण तय समय के भीतर कराना अनिवार्य होगा और देरी होने पर विलंब शुल्क भी देना पड़ेगा।

क्या बदला है अब?

प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण, तलाक पंजीकरण और वसीयत पंजीकरण के लिए फीस तय की गई थी। शुरुआत में लोगों को जागरूक करने के लिए सरकार ने दो बार छह-छह महीने की छूट दी थी।

26 जनवरी 2026 तक विवाह पंजीकरण मुफ्त रखा गया था

विलंब शुल्क भी एक साल तक स्थगित किया गया था

लेकिन अब इस राहत को आगे बढ़ाने का कोई नया आदेश जारी नहीं हुआ है। इसका मतलब साफ है अब पंजीकरण शुल्क भी देना होगा और देरी पर जुर्माना भी लगेगा।

समय पर पंजीकरण क्यों जरूरी?

नियमों के अनुसार 26 मार्च 2010 के बाद हुए सभी विवाहों का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। साथ ही नई व्यवस्था में विवाह होने के बाद तय समय सीमा के भीतर रजिस्ट्रेशन जरूरी है।

अब कितनी देनी होगी फीस?

सरकार द्वारा तय किया शुल्क 

विवाह पंजीकरण शुल्क: 250

तत्काल पंजीकरण शुल्क: 2500

विलंब पंजीकरण शुल्क: 200

90 दिनों से अधिक देरी पर: 300 (हर तीन माह की अवधि को एक इकाई मानकर गणना)

अधिकतम विलंब शुल्क: 10,000 तक

आम जनता के लिए संदेश

अब मुफ्त पंजीकरण की सुविधा खत्म हो चुकी है….इसलिए जिन दंपतियों ने अब तक विवाह पंजीकरण नहीं कराया है वे जल्द से जल्द यह प्रक्रिया पूरी कर लें। देरी करने पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। सरकार का उद्देश्य सभी विवाहों का कानूनी रिकॉर्ड सुनिश्चित करना है…ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के दस्तावेजी विवाद से बचा जा सके।

उत्तराखंड में एक साथ मिलेगा दो महीने का राशन, पूरी जानकारी पढ़ें

Uttarakhand Ration Update : Food Department Notice : Pending Ration Distribution : Fortified Rice Delay : Biometric Ration System : उत्तराखंड के राशन उपभोक्ताओं के लिए खाद्य विभाग की ओर से एक जरूरी और राहत भरी खबर सामने आई है। जिन उपभोक्ताओं को दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 का राशन किसी कारणवश नहीं मिल पाया था वे अब वह राशन ले सकते हैं।

अपर खाद्य आयुक्त पीएस जंगपांगी ने इस संबंध में सभी जिला पूर्ति अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में इस बार राशन वितरण में देरी का मुख्य कारण फोर्टिफाइड चावल की उपलब्धता न होना रहा। इसी वजह से कई लाभार्थियों को तय समय पर उनका हक नहीं मिल पाया।

अब कैसे मिलेगा बकाया राशन?

खाद्य विभाग ने व्यवस्था की है कि जिन उपभोक्ताओं ने दिसंबर और जनवरी का राशन नहीं लिया…वे अब फरवरी महीने के राशन के साथ दोनों महीनों का लंबित राशन भी प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए बायोमेट्रिक ऑनलाइन वितरण प्रणाली में जरूरी तकनीकी व्यवस्था कर दी गई है…ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की दिक्कत न हो।

कितने लोग प्रभावित हुए?

राज्य में 23 लाख से अधिक राशन कार्ड धारक हैं। विभाग के अनुसार लगभग 75% उपभोक्ता अपना राशन ले चुके हैं, जबकि बाकी उपभोक्ता अब बकाया राशन प्राप्त कर सकते हैं।

उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सलाह

यदि आपके परिवार को दिसंबर या जनवरी का राशन नहीं मिला था तो अब अपने नजदीकी राशन विक्रेता से संपर्क कर बायोमेट्रिक सत्यापन के जरिए राशन प्राप्त करें। यह अवसर सीमित अवधि के लिए हो सकता है…इसलिए देर न करें।

उत्तराखंड में जनसुनवाई के बाद तय होंगी बिजली की नई दरें !

Uttarakhand Electricity Tariff : UPCL Tariff Hike : UERC Public Hearing : Power Rate Revision 2026 : Uttarakhand Energy Corporations : उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग प्रदेश में प्रस्तावित नई बिजली दरों को लेकर 18 फरवरी से जनसुनवाई शुरू करने जा रहा है। आयोग ने जनसुनवाई का विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया है। इस वर्ष भी गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के दो-दो शहरों में सुनवाई आयोजित की जाएगी।

प्रदेश के तीनों ऊर्जा निगमों ने मिलकर इस बार औसतन 18.50 प्रतिशत बिजली दर वृद्धि का प्रस्ताव दिया है। इसमें उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) ने 16.23 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है….जबकि पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (PITCUL) ने लगभग 3 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव दिया है। वहीं पहली बार उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (UJVNL) का टैरिफ प्रस्ताव माइनस 1.2 प्रतिशत दर्ज किया गया है।

इस बार गढ़वाल मंडल में देहरादून और कर्णप्रयाग……जबकि कुमाऊं मंडल में रुद्रपुर और मुनस्यारी में जनसुनवाई होगी। किसी भी वर्ग का उपभोक्ता आयोग के समक्ष अपनी आपत्ति या सुझाव दर्ज करा सकता है।

नियामक आयोग के सचिव ने कहा कि जनसुनवाई के दौरान प्राप्त सुझावों और आपत्तियों पर विचार करने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। नई बिजली दरें 1 अप्रैल से लागू होंगी।

आयोग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे प्रस्तावित दरों पर अपनी राय अवश्य रखें….ताकि निर्णय प्रक्रिया में आम जनता की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

सड़क, स्टेडियम, हेलीपैड…चम्पावत में क्या-क्या बनने वाला है? पढ़ें पूरी ख़बर

Champawat Development Projects : Sharda Riverfront Tanakpur : Pushkar Singh Dhami ; Uttarakhand Infrastructure : Border District Development : पुष्कर सिंह धामी ने जनपद चम्पावत के व्यापक विकास के लिए 300 करोड़ से अधिक लागत की कई महत्वपूर्ण योजनाओं का शिलान्यास और भूमि पूजन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि शारदा रिवर फ्रंट (शारदा कॉरिडोर) परियोजना क्षेत्र के विकास की नई धुरी बनेगी और चम्पावत को पर्यटन, आस्था और आधुनिक शहरी सुविधाओं के मानचित्र पर विशेष पहचान दिलाएगी।

मुख्यमंत्री द्वारा जिन प्रमुख कार्यों की आधारशिला रखी गई, उनमें शारदा घाट पुनर्विकास, सिटी ड्रेनेज प्लान, डिजास्टर रेजिलिएन्स के लिए इकोलॉजिकल कॉरिडोर, कई मोटर मार्गों का निर्माण व सुधार, बाढ़ सुरक्षा कार्य, हेलीपैड निर्माण, शिक्षा संस्थानों में आधारभूत ढांचे का विस्तार और खेल सुविधाओं का विकास शामिल है। इन योजनाओं का उद्देश्य सीमांत क्षेत्र में आधारभूत संरचना को मजबूत करना और स्थानीय जीवन स्तर में सुधार लाना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं से शिक्षा, सड़क, पर्यटन, आपदा प्रबंधन और शहरी विकास को गति मिलेगी। स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। किसानों, विद्यार्थियों और पर्यटकों को भी इन योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

उन्होंने चम्पावत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भूमि आस्था, संस्कृति और इतिहास से समृद्ध है। माँ शारदा ज्ञान और संस्कार की प्रतीक हैं….और उनके पावन धाम से जुड़े घाटों का विकास करना सौभाग्य की बात है। मुख्यमंत्री ने कहा कि टनकपुर की धरती पर उन्हें विशेष ऊर्जा का अनुभव होता है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि विकास और सांस्कृतिक विरासत के संतुलन से ही उत्तराखंड की पहचान मजबूत होगी और चम्पावत आने वाले समय में एक सशक्त व आत्मनिर्भर जनपद के रूप में उभरेगा। उन्होंने नागरिकों से जनभागीदारी बढ़ाने और सांस्कृतिक संरक्षण के साथ विकास के संकल्प को मजबूत करने की अपील की।

युवाओं के लिए बड़ी अपडेट, हाई कोर्ट में शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया

Delhi High Court Recruitment : Junior Judicial Assistant Vacancy : Restorer Post Delhi HC : Court Jobs India : Typing Speed Requirement : दिल्ली हाई कोर्ट ने जूनियर ज्यूडिशियल असिस्टेंट (JJA) और रेस्टोरर पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस भर्ती अभियान के तहत कुल 152 पद भरे जाएंगे। अलग-अलग वर्गों के लिए पद आरक्षित किए गए हैं…जिनमें सामान्य वर्ग के 62, ईडब्ल्यूएस के 12, ओबीसी के 44, एससी के 20 और एसटी के 14 पद शामिल हैं।

शैक्षणिक योग्यता और कौशल

इन पदों पर आवेदन करने वाले उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक (Graduate) होना अनिवार्य है। साथ ही उम्मीदवार को अंग्रेजी टाइपिंग का अच्छा ज्ञान होना चाहिए। न्यूनतम 35 शब्द प्रति मिनट की टाइपिंग स्पीड आवश्यक रखी गई है…जो चयन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी।

आयु सीमा

उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 32 वर्ष निर्धारित की गई है। हालांकि सरकारी नियमों के अनुसार आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी।

वेतनमान

चयनित अभ्यर्थियों को 29,200 से 93,200 प्रति माह वेतन मिलेगा। इसके अलावा अन्य सरकारी भत्ते और सुविधाएं भी दी जाएंगी।

आवेदन शुल्क

सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग: 1500

एससी, एसटी और दिव्यांग उम्मीदवार: 1300

चयन प्रक्रिया

भर्ती प्रक्रिया कई चरणों में होगी:

प्रारंभिक परीक्षा

मुख्य परीक्षा

टाइपिंग टेस्ट / कौशल परीक्षण

दस्तावेज सत्यापन

सभी चरणों में सफल उम्मीदवारों को अंतिम रूप से नियुक्ति दी जाएगी।

आवेदन कैसे करें

उम्मीदवारों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसके लिए दिल्ली हाई कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन करना होगा। आवेदन फॉर्म भरने के बाद जरूरी दस्तावेज अपलोड कर शुल्क जमा करना होगा।

आवेदन प्रक्रिया 4 फरवरी 2026 से शुरू हो चुकी है और अंतिम तिथि 23 फरवरी 2026 है।

रेलवे में बंपर नौकरियां आने वाली हैं, 1.5 लाख पदों पर होगी भर्ती….पढ़ें पूरी डिटेल्स

Indian Railways Growth : Railway Jobs India : Ashwini Vaishnaw Statement : Railway Recruitment 2026 : Operating Ratio Indian Railways : देश की जीवन रेखा कही जाने वाली भारतीय रेलवे पिछले एक दशक में बड़े आर्थिक बदलाव के दौर से गुज़री है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए कहा कि रेलवे अब न केवल अपने खर्च पूरे कर रही है…बल्कि वित्तीय वर्ष के अंत में राजस्व अधिशेष भी दर्ज कर रही है।

मंत्री के अनुसार वित्त वर्ष 2024–25 में रेलवे का ऑपरेटिंग रेशियो 98.22% रहा, जो बेहतर वित्तीय प्रबंधन का संकेत है। इस अवधि में रेलवे की सकल ट्रैफिक आमदनी 2.65 लाख करोड़ रुपये से अधिक रही और लगभग 2,660 करोड़ रुपये का अधिशेष दर्ज किया गया। एक दशक पहले रेलवे को दैनिक खर्चों को संतुलित रखने में भी कठिनाइयाँ आती थीं…लेकिन अब स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

दस वर्षों में 5 लाख से अधिक नौकरियाँ

रेल मंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 से 2024 के बीच रेलवे में लगभग 5.04 लाख युवाओं को रोजगार मिला। इनमें ट्रैक मेंटेनर, लोको पायलट, तकनीशियन, क्लर्क, इंजीनियर और ग्रुप-डी जैसे कई पद शामिल हैं। इससे रेलवे देश के सबसे बड़े सरकारी रोजगार प्रदाताओं में बना हुआ है।

तीसरे कार्यकाल में 1.5 लाख नई भर्तियाँ

सरकार के वर्तमान कार्यकाल में रेलवे में 1.5 लाख नई भर्तियों की प्रक्रिया चल रही है। कई परीक्षाएं पूरी हो चुकी हैं और कुछ पदों पर जल्द ही नई अधिसूचनाएँ जारी होने की संभावना है।

खर्च नियंत्रण से खुला विकास का रास्ता

रेलवे ने ऊर्जा लागत में लगभग 5,500 करोड़ रुपये की बचत की है। डीजल और बिजली खर्च में कमी, बेहतर रखरखाव और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से संचालन लागत घटी है। इससे नई परियोजनाओं और रोजगार सृजन के लिए संसाधन उपलब्ध हुए हैं।

भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुविधा

रेलवे ने 18,000 असिस्टेंट लोको पायलट पदों की भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली है और नियुक्तियाँ शुरू हो चुकी हैं। परीक्षाओं के दौरान अभ्यर्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए विशेष ‘वार रूम’ भी बनाया गया…जिससे परीक्षा केंद्रों और चयन प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों का त्वरित समाधान हो सके।

क्षेत्रीय परियोजनाओं से बढ़ेंगे अवसर

पूर्वोत्तर राज्यों के लिए रेलवे बजट बढ़ाकर 11,486 करोड़ रुपये किया गया है। नई रेल लाइनों, स्टेशनों और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। इसके अलावा पंजाब, केरल, तेलंगाना और जम्मू-कश्मीर में भी आगामी परियोजनाएं रोजगार सृजन को गति देंगी।

रेल मंत्रालय का कहना है कि रेलवे का यह वित्तीय और संरचनात्मक सुधार भविष्य में देश की अर्थव्यवस्था और युवाओं के रोजगार के लिए मजबूत आधार साबित होगा।

राजस्थान: सरकारी जमीन विवाद ने पकड़ा तूल, किरोड़ी लाल मीणा का कांग्रेस विधायक पर तीखा हमला

Rajasthan Politics : Dausa News : Kirori Lal Meena Statement : Land Encroachment Issue : BJP vs Congress : राजस्थान के दौसा जिले में एक प्रशासनिक कार्रवाई के बाद सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। कैबिनेट मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने कांग्रेस विधायक दीनदयाल बेरवा पर सार्वजनिक रूप से तीखे आरोप लगाए…जिससे जिले का राजनीतिक माहौल गरमा गया है।

अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर विवाद

मंत्री मीणा ने कहा कि सरकारी जमीन से अवैध अतिक्रमण हटाने पहुंची प्रशासनिक टीम के दौरान क्षेत्रीय विधायक की मौजूदगी सवाल खड़े करती है। उनका आरोप है कि कार्रवाई के समय एक महिला पटवारी को कथित रूप से धमकाया गया। मंत्री ने इसे प्रशासनिक कार्यवाही में राजनीतिक हस्तक्षेप बताते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों को कानून व्यवस्था मजबूत करने में सहयोग करना चाहिए न कि दबाव बनाना चाहिए।

राजनीति सेवा है, धंधा नहीं

अपने बयान में मंत्री ने कहा कि राजनीति सेवा का माध्यम है व्यक्तिगत लाभ का जरिया नहीं। उन्होंने विपक्षी नेताओं पर जमीन से जुड़े मामलों में दबाव की राजनीति करने के आरोप लगाए। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि कुछ नेताओं को विशेषाधिकार की चिंता कम और जमीन से जुड़े “हितों” की चिंता ज्यादा है।

दबाव और जातिगत तनाव पर टिप्पणी

मंत्री ने प्रशासन पर दबाव बनाने और जातिगत भावनाओं को भड़काने की प्रवृत्ति को लोकतंत्र के लिए हानिकारक बताया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जमीन से जुड़े मामलों में कुछ लोग कथित रूप से आपराधिक तत्वों से जुड़े हो सकते हैं। हालांकि इन आरोपों पर विधायक या कांग्रेस की ओर से अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

राष्ट्रीय राजनीति पर भी बोले मंत्री

अपने संबोधन में किरोड़ी लाल मीणा ने राष्ट्रीय राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना सभी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने हालिया संसदीय घटनाओं का हवाला देते हुए राजनीतिक टकराव की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताई।

जिले में बढ़ी सियासी हलचल

इस घटनाक्रम के बाद दौसा में भाजपा और कांग्रेस समर्थकों के बीच बयानबाज़ी तेज हो गई है। फिलहाल मामला राजनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित है…लेकिन आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रियाएं आने की संभावना है। प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ने जिले की सियासत में हलचल बढ़ा दी है।

हल्द्वानी: लैंड फ्रॉड मामले में बिल्डर धनंजय गिरी पर शिकंजा, SI को किया निलंबित

Uttarakhand: Police: Dhananjay Giri:  भूमि धोखाधड़ी के मामलों पर कुमाऊँ पुलिस ने सख़्त और निर्णायक रुख अपनाया है। शासन स्तर पर गठित लैंड फ्रॉड समिति के साथ समन्वय में कुमाऊँ परिक्षेत्र में भूमि धोखाधड़ी से जुड़े मामलों की प्रभावी और पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जा रही है। यह समिति गढ़वाल और कुमाऊँ मंडल के आयुक्तों के अधीन कार्य कर रही है।

कुमाऊँ परिक्षेत्र में भूमि धोखाधड़ी की जांच के लिए पुलिस महानिरीक्षक कुमाऊँ के निर्देशन में एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है। पूर्व में कुछ जनपदों द्वारा अपने स्तर पर गठित की गई जिला स्तरीय SIT को अनुचित पाए जाने और उनमें पुलिस कर्मियों की संभावित संलिप्तता की शिकायतों के चलते भंग कर दिया गया है। अब ऐसे किसी भी मामले में प्रारंभिक जांच संबंधित क्षेत्राधिकारी द्वारा की जाएगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

धनंजय गिरी प्रकरण: पिछले दो महीनों में अभियुक्त धनंजय गिरी से जुड़े कई पीड़ितों ने पुलिस महानिरीक्षक कुमाऊँ कार्यालय में लिखित और मौखिक शिकायतें दर्ज कराई थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अभियुक्त के विरुद्ध प्राप्त सभी शिकायतों, पंजीकृत एफआईआर और पीड़ितों की सूची तैयार की गई। साथ ही, अभियुक्त द्वारा धोखाधड़ी से अर्जित संपत्तियों का विस्तृत विवरण भी संकलित किया गया।

जांच के दौरान विवेचक की मिलीभगत और कर्तव्य में लापरवाही सामने आने पर उ0नि0 अनिल कुमार, चौकी भोटियापड़ाव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। आरोप है कि लापरवाही के चलते अभियुक्त को बचने का अवसर मिला।

पीड़ितों को धन वापसी SIT का मुख्य लक्ष्य: पुलिस महानिरीक्षक कुमाऊँ द्वारा गठित परिक्षेत्रीय SIT को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि नए कानून BNSS की धारा 107 के अंतर्गत न्यायालय के माध्यम से अभियुक्त से धोखाधड़ी द्वारा अर्जित धन को पीड़ितों को उनके निर्धारित प्रतिशत के अनुसार वापस दिलाया जाए।

पीड़ितों से अपील: कुमाऊँ पुलिस ने अपील की है कि जिन पीड़ितों की शिकायतें अभी तक प्राप्त नहीं हो सकी हैं, या जिनके साथ अभियुक्त धनंजय गिरी अथवा उसके सहयोगियों द्वारा धोखाधड़ी की गई है, वे अपनी शिकायत परिक्षेत्रीय मोबाइल नंबर 9411110057 पर अथवा SIT प्रभारी – मनोज कत्याल, पुलिस अधीक्षक (नगर), हल्द्वानी को उपलब्ध कराएं।

जनहित में पुलिस की अपील: पुलिस महानिरीक्षक कुमाऊँ की ओर से आमजन से अपील की गई है कि किसी भी व्यक्ति या योजना में निवेश करने से पहले उसकी सरकारी वैधता की जांच अवश्य करें। साथ ही सभी जनपद प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अपने-अपने क्षेत्रों में संदिग्ध व्यक्तियों और ऐसे मामलों की सूची तैयार कर परिक्षेत्रीय SIT को तत्काल उपलब्ध कराएं।

कुमाऊँ पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अभियुक्त धनंजय गिरी के विरुद्ध SIT द्वारा कठोर और प्रभावी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, ताकि पीड़ितों को न्याय और उनका धन वापस दिलाया जा सके।

नैनीताल में सत्यापन अभियान, कई पकड़े गए और कइयों का कटा चालान

Nainital: Police: Verification: डॉ. मंजुनाथ टी.सी., एसएसपी नैनीताल के निर्देशन में भवाली क्षेत्र में वृहद सत्यापन अभियान चलाया गया। हाल ही में क्षेत्र में घटित घटनाओं को देखते हुए बाहरी एवं अराजक तत्वों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।

यह अभियान डॉ. जगदीश चंद्रा के पर्यवेक्षण तथा प्रकाश मेहरा, प्रभारी निरीक्षक भवाली के नेतृत्व में चलाया गया। अभियान के दौरान भवाली पुलिस द्वारा वार्ड नंबर 01, 02, रेहड़, गांधी कॉलोनी, टमट्यूड़ा, रामगढ़ रोड और बाजार क्षेत्र में पुलिस एवं पीएसी टीमों के साथ संयुक्त कार्रवाई की गई।

इस दौरान 125 मकानों में रह रहे कुल 280 बाहरी व्यक्तियों का सत्यापन किया गया। बिना सत्यापन निवासरत पाए गए 30 लोगों के विरुद्ध धारा 81 पुलिस एक्ट के अंतर्गत चालानी कार्रवाई की गई। वहीं, बिना सत्यापन किरायेदार रखने पर 7 मकान मालिकों के विरुद्ध धारा 83 पुलिस एक्ट के तहत न्यायालय के माध्यम से 10–10 हजार रुपये के चालान किए गए।

पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनपद के सभी थानों में सत्यापन अभियान लगातार जारी रहेगा। बिना सत्यापन निवास करने वालों और ऐसे किरायेदार रखने वाले मकान मालिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

एसएसपी नैनीताल की आमजन से अपील: शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए नागरिक अपनी जिम्मेदारी निभाएं और किरायेदारों का अनिवार्य रूप से सत्यापन कराएं। कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले तत्वों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

पौड़ी में बोले योगी, धामी ने धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षित किया

Uttarakhand News: Yogiaditiya Nath: Pushkar Singh Dhami: पौड़ी जनपद स्थित यमकेश्वर महादेव की पावन एवं ऐतिहासिक भूमि पर नवनिर्मित इंटर कॉलेज भवन के लोकार्पण कार्यक्रम के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड में हो रहे विकास कार्यों की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड आज धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण करते हुए विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है, जो देश के अन्य राज्यों के लिए प्रेरणास्रोत है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तराखंड अपनी स्थापना की रजत जयंती के बाद विकास के एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ सनातन संस्कृति एवं धार्मिक स्थलों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि विकास का वास्तविक अर्थ केवल भौतिक प्रगति नहीं, बल्कि संस्कारों, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों के साथ संतुलित आगे बढ़ना ही सच्चा विकास है।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि यमकेश्वर महादेव जैसे पावन क्षेत्र में शिक्षा के आधुनिक केंद्रों का निर्माण यह दर्शाता है कि उत्तराखंड सरकार ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। नवनिर्मित इंटर कॉलेज भवन को उन्होंने क्षेत्र के बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव बताते हुए कहा कि बेहतर शैक्षणिक अधोसंरचना से गांवों में रहकर ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा संभव हो सकेगी।

उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था आज एक बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। यह नीति विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में सक्षम बनाने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि गुरुकुल परंपरा से प्रेरित भारतीय शिक्षा प्रणाली सदैव संस्कार, आत्मनिर्भरता और परिश्रम पर आधारित रही है और आज उसी परंपरा को आधुनिक स्वरूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।


कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोना महामारी के समय का एक प्रसंग साझा किया। उन्होंने बताया कि महामारी के दौरान राजस्थान के कोटा सहित अन्य स्थानों पर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कई छात्र फंस गए थे। उस समय उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बसों की व्यवस्था की गई। इसी दौरान तत्कालीन उत्तराखंड मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने संपर्क कर उत्तराखंड के छात्रों की सहायता का अनुरोध किया, जिसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तराखंड के छात्रों को भी सुरक्षित रूप से देहरादून और हल्द्वानी तक पहुंचाया।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि संकट के समय राज्यों के बीच सहयोग और संवेदनशीलता ही सुशासन की सबसे बड़ी पहचान होती है। उन्होंने उत्तराखंड सरकार की कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए कहा कि राज्य ने आपदा प्रबंधन, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण में सदैव जनहित को सर्वोपरि रखा है।

उन्होंने गांवों की भूमिका पर विशेष बल देते हुए कहा कि गांव हमारी जड़ हैं और जब जड़ें मजबूत होती हैं, तभी विकास का वृक्ष फलता-फूलता है। गांवों को शिक्षा, तकनीक और नवाचार के केंद्र के रूप में विकसित करना समय की आवश्यकता है। उत्तराखंड सरकार का यह प्रयास ‘ग्राम स्वराज’ की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तराखंड सरकार द्वारा गांवों में बिजली, सड़क, शिक्षा और डिजिटल सुविधाओं का विस्तार आत्मनिर्भर भारत की दिशा में सकारात्मक पहल है। कार्यक्रम में उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत सहित राज्य सरकार के जनप्रतिनिधियों के प्रयासों की भी सराहना की।

उन्होंने विश्वास जताया कि देवभूमि उत्तराखंड सनातन संस्कृति के संरक्षण के साथ विकास का एक आदर्श मॉडल प्रस्तुत करते हुए आने वाले समय में और अधिक सशक्त रूप में आगे बढ़ेगा।