Himalaya Day 2026 | CM Dhami | Uttarakhand News : हिमालय दिवस के अवसर पर वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में ‘हिमालयो नाम नगाधिराजः’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने हिमालय परिषद की मूलभूत सुविधाओं और संसाधनों को बढ़ाने के लिए 1 करोड़ रुपये की धनराशि देने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने हिमालय के संरक्षण और सतत विकास के लिए काम करने वाले लोगों को सम्मानित करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और हिमालयी क्षेत्रों के लिए उल्लेखनीय कार्य करने वाले विशिष्ट लोगों को हर साल हिमालय दिवस पर ‘हिमालय विभूति सम्मान’ दिया जाएगा।
विज्ञान से जुड़े पोस्टर और पत्रिका का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी से संबंधित पांच पोस्टरों का विमोचन किया। इनमें 7वें देहरादून इंटरनेशनल साइंस एंड टेक्नोलॉजी फेस्टिवल, साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रीमियर लीग, सीमांत बाल विज्ञान कांग्रेस, ज्ञानोत्कर्ष और 21वीं उत्तराखंड राज्य साइंस कॉन्फ्रेंस के पोस्टर शामिल रहे।
इसके साथ ही विज्ञान को आम लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से प्रकाशित पत्रिका ‘विज्ञान संप्रेषण’ के पांचवें वार्षिक अंक का भी विमोचन किया गया।
हिमालय उत्तराखंड की पहचान और जीवन का आधार
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय केवल पर्वतों की श्रृंखला नहीं है….बल्कि उत्तराखंड की पहचान, संस्कृति और जीवन का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि गंगा और यमुना समेत कई प्रमुख नदियों का उद्गम हिमालय से होता है।
उन्होंने जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग को बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि इसका असर हिमालयी क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है। ग्लेशियर और जल स्रोत प्रभावित होने से नदियों, खेती, पेयजल और बड़ी आबादी के जीवन पर असर पड़ता है।
विकास के साथ पर्यावरण का संतुलन जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी सुविधाओं की जरूरत है…लेकिन विकास की योजना उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि राज्य के विकास में पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन जरूरी है। ऐसा विकास होना चाहिए जिसमें सड़क और रोजगार के साथ जंगल, नदियां और पहाड़ों की क्षमता भी सुरक्षित रहे।
हिमालय संरक्षण में जनभागीदारी पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय को बचाने के लिए आम लोगों की भागीदारी सबसे जरूरी है। इसी उद्देश्य से 2 सितंबर के बुग्याल दिवस से 9 सितंबर के हिमालय दिवस तक पूरे सप्ताह को ‘हिमालय दिवस सप्ताह’ के रूप में मनाने की शुरुआत की गई है।
उन्होंने कहा कि हिमालय संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रमों या बैठकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए…बल्कि इसे जनभागीदारी वाला अभियान बनाना होगा। मुख्यमंत्री ने बुग्यालों को जैव विविधता और जल स्रोतों के लिए महत्वपूर्ण बताया, जबकि जंगलों और नदियों को जीवन के लिए जरूरी आधार बताया।
केंद्र की योजनाओं का भी किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘नमामि गंगे’, ‘नेशनल मिशन फॉर सस्टेनिंग द हिमालयन इकोसिस्टम’ और ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ जैसे प्रयासों के जरिए हिमालयी क्षेत्रों के संरक्षण और विकास को आगे बढ़ाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को हिमालय संरक्षण की दिशा में मॉडल राज्य बनाने के संकल्प के साथ काम कर रही है।











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