Cancer Medicines | NPPA | Healthcare News : कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कई दवाएं अब पहले के मुकाबले काफी कम कीमत पर मिलेंगी। केंद्र सरकार की दवा मूल्य नियामक संस्था नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने एंटी-कैंसर दवाओं के 543 ब्रांड की संशोधित अधिकतम खुदरा कीमतें जारी की हैं। नई कीमतें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी। कुछ दवाओं के दाम में 93 फीसदी से भी अधिक कमी दर्ज की गई है।
इस फैसले से उन मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें कैंसर के इलाज के दौरान नियमित रूप से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ती हैं। सरकार ने दवाओं की बिक्री के दौरान रखे जाने वाले ट्रेड मार्जिन को नियंत्रित करने के लिए यह कदम उठाया है। इसका उद्देश्य दवाओं की कीमतों को कम करना और मरीजों के लिए इलाज का खर्च घटाना है।
NPPA की नई सूची में अलग-अलग प्रकार के कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं। इनमें ब्रेस्ट कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, कोलन कैंसर, ओवेरियन कैंसर और सर्वाइकल कैंसर के उपचार में काम आने वाली दवाएं भी हैं। इसके साथ ही कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और टारगेटेड ट्रीटमेंट में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाओं की कीमतें भी संशोधित की गई हैं।
दवा कंपनियों की ओर से 27 अक्टूबर तक उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर नई कीमतों की सूची तैयार की गई है। आगे अन्य कंपनियों से जानकारी मिलने पर इस सूची को भी अपडेट किया जा सकता है।
कीमतों में कटौती के कुछ उदाहरणों से बदलाव का अंदाजा लगाया जा सकता है। एनास्ट्रोजोल 1 एमजी टैबलेट के एनार्ज़ोल ब्रांड के 10 टैबलेट वाले पैक की कीमत 695.76 रुपये से घटाकर 73 रुपये कर दी गई है।
इसी तरह, एजासिटिडाइन इंजेक्शन की कीमत 6,337 रुपये से घटकर 1,495.04 रुपये हो जाएगी। बेवासिजैब इंजेक्शन की 4 एमएल शीशी की कीमत 21,767.70 रुपये से कम होकर 5,930.13 रुपये रह जाएगी।
इसके अलावा दसनत 20 एमजी टैबलेट की कीमत 2,812.50 रुपये से घटाकर 1,085.93 रुपये की गई है। वहीं फुलब्रेका इंजेक्शन की कीमत 26,072.16 रुपये से कम होकर 5,491 रुपये हो जाएगी।
इन बदलावों से संबंधित ब्रांड इस्तेमाल करने वाले मरीजों का दवा पर होने वाला खर्च कम हो सकता है। हालांकि कीमत में वास्तविक बचत दवा के ब्रांड, पैक और संशोधित एमआरपी पर निर्भर करेगी।
सरकार ने 17 अक्टूबर को घोषित नीति के तहत 137 चिन्हित नॉन-शेड्यूल्ड एंटी-कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30 प्रतिशत तक सीमित किया है। इस व्यवस्था का मकसद दवा के निर्माण से लेकर बिक्री तक की प्रक्रिया में अतिरिक्त मार्जिन को नियंत्रित करना है।
नॉन-शेड्यूल्ड दवाओं की कीमतों में कमी लाने के लिए यह कदम उठाया गया है। इसके तहत दवा कंपनियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर संबंधित ब्रांड की अधिकतम खुदरा कीमतों में बदलाव किया गया है।
सरकार का अनुमान है कि इस फैसले से कैंसर के मरीजों को हर साल लगभग 2,500 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है। कैंसर के इलाज में लंबे समय तक दवाओं की जरूरत पड़ने के कारण मरीजों और उनके परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ जाता है। ऐसे में दवाओं की कीमतों में कमी इलाज का खर्च कम करने में मददगार हो सकती है।
यह कदम वर्ष 2019 में कैंसर की 42 दवाओं पर ट्रेड मार्जिन नियंत्रित करने के लिए की गई कार्रवाई के बाद उठाया गया है। उस समय भी कई ब्रांड की कीमतों में कमी की गई थी।
संशोधित कीमतें 9 नवंबर 2026 से प्रभावी होंगी। इसके बाद खुदरा दवा विक्रेताओं और अस्पतालों को संबंधित दवाओं की बिक्री नई दरों के आधार पर करनी होगी। दवा कंपनियों को सप्लाई चेन से जुड़े बदलावों की जानकारी देनी होगी….जबकि राज्य के औषधि नियंत्रकों से नियमों के पालन पर नजर रखने की अपेक्षा की गई है।















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